03/03/2026
🌹 _*गौर पूर्णिमा*_
(3 मार्च 2026)
*गौर पूर्णिमा श्री चैतन्य महाप्रभु - स्वर्ण अवतार के सबसे शुभ और मनमोहक आगमन का उत्सव है।*
*सर्वोच्च भगवान श्री कृष्ण, श्रीमती राधारानी की सेवा भावना के साथ, संकीर्तन आंदोलन की स्थापना के लिए श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट हुए,* जोकि कलि के इस युग के लिए युग धर्म है। वह 1486 ईस्वी में फाल्गुन के महीने में पूर्णिमा के दिन बंगाल के नवद्वीप (नादिया) नामक गांव में जिसे अब श्रीधाम मायापुरा कहा जाता है, श्री जगन्नाथ मिश्र और श्रीमती सचिदेवी के पुत्र के रूप में प्रकट हुए।
प्रकट शास्त्रों में, भगवान कृष्ण को श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप में स्वर्ण अवतार (अवतार) के रूप में प्रकट होने की भविष्यवाणी की गई थी और भगवान के पवित्र नाम
*हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।*
*हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।।*
के सामूहिक जाप का प्रसार और प्रचार करने के लिए झगड़े और पाखंड के इस घृणित युग के दूषित प्रभाव का प्रतिकार करने और आध्यात्मिक पूर्णता प्राप्त करने के लिए किया।
चैतन्य महाप्रभु वैष्णव धर्म के भक्ति योग के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। *इन्होंने वैष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखी*, भजन गायकी की एक नयी शैली को जन्म दिया तथा राजनैतिक अस्थिरता के दिनों में हिंदू-मुस्लिम एकता की सद्भावना को बल दिया, जाति-पांत, ऊंच-नीच की भावना को दूर करने की शिक्षा दी।
उनके द्वारा प्रारंभ किए गए महामंत्र नाम संकीर्तन का अत्यंत व्यापक व सकारात्मक प्रभाव आज पश्चिमी जगत में भी है। _*श्रील प्रभुपाद ने इस्कॉन संस्था स्थापित करके सम्पूर्ण विश्व में हरे कृष्ण आंदोलन आरंभ किया।*_
*श्री चैतन्य महाप्रभु ने प्रायः लुप्त होते जा रहे श्री वृन्दावन धाम को पुनर्जीवित किया। कहा जाता है, कि यदि गौरांग ना होते तो वृंदावन आज तक एक मिथक ही होता। उन्होंने वृंदावन को फिर से बसाया।*
_*आज के दिन समस्त गौडिया भक्त उपवास करते हैं तथा श्री चैतन्य महाप्रभु से श्री श्री राधा कृष्ण के श्री चरणों का प्रेम प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।*_
हरे कृष्ण! सुप्रभातं!!🙏🙏