08/17/2026
मन में विचारों की कमी नहीं होती। एक के बाद एक संकल्प आते रहते हैं, लेकिन हर संकल्प हमारी ऊर्जा और ध्यान के योग्य नहीं होता।
कभी हम बहुत कुछ करने की सोच लेते हैं और फिर किसी एक पर भी पूरी तरह टिक नहीं पाते। मन की शक्ति बिखर जाती है और भीतर थकान बढ़ने लगती है।
इसलिए जरूरी नहीं कि हम कम सोचें, बल्कि यह जरूरी है कि क्या सोचना है, यह चुनना सीखें।
व्यर्थ को छोड़कर श्रेष्ठ संकल्प को शक्ति दें, उसे कर्म में उतारें और पूरी निष्ठा से निभाएँ।
क्योंकि एक समर्थ संकल्प, बिखरे हुए अनेक विचारों से कहीं अधिक शक्ति रखता है।