28/04/2026
अहमद अब्दुल्लाह नाम का एक नौजवान था, जो एक दवा की दुकान में फार्मासिस्ट था ! हर महीने एक गरीब बुज़ुर्ग औरत अपनी दवा लेने उसके पास आती थी ! फिर वह कैश काउंटर पर जाती थी ! जब भी वह उसे देखती, उसके चेहरे पर खुशी आ जाती थी ! कई सालों से वह यही दवा ले रही थी, और यह नौजवान उससे सिर्फ 200 मिस्री पाउंड लेता था ! वह पैसे देकर चली जाती थी !
फिर वह नौजवान इंतकाल कर गया ! बुज़ुर्ग औरत दोबारा उसी दुकान पर आई, दवा मांगी और 200 पाउंड देने लगी ! लेकिन वह वहां नहीं था !
उसके पूछने से पहले नए कैशियर ने कहा, “माता जी, यह क्या है ?”
उसने जवाब दिया, “दवा के 200 पाउंड हैं!”
उसने कहा, “लेकिन इस दवा की कीमत तो 2000 पाउंड है!”
हैरान होकर औरत बोली, “लेकिन मैं तीन साल से ज़्यादा समय से यह दवा 200 पाउंड में उसी नौजवान से ले रही थी... वह कहां है ?”
नए कैशियर ने जवाब दिया, “उनका इंतकाल हो गया है ! अल्लाह उन पर रहमत करे!”
जब रिकॉर्ड देखा गया, तो पता चला कि वह नौजवान हर महीने 1800 पाउंड अपनी तनख्वाह से देकर उस औरत की मदद करता था !
जब दुकान के मालिक को यह पता चला, तो उसने फैसला किया कि वह उसी कीमत पर दवा देता रहेगा, ताकि यह उस नौजवान की तरफ से सदक़ा-ए-जारिया बन जाए !
इंसानियत अपने निशान और असर छोड़ जाती है, ताकि लोग उन्हें जानें और अगर कर सकें तो अपनाएं ! नेक कामों की एक कड़ी ऐसी अच्छी मिसाल बन सकती है, जो आज पूरी दुनिया को अच्छे उसूल सिखा दे ! अगर यह न हो, तो फिर हम सिर्फ अजीब और गैर-इंसानी घटनाएं ही बाँटते रहेंगे, जिनसे सीखने के लिए कोई अच्छी बात नहीं होती