26/10/2024
“ हमारा अनन्त जन्मों का अभ्यास है।माया के क्षेत्र वालों को ही मन में बसाया हुआ है अत: अनादिकाल से गन्दकी ही गन्दकी डाली है मन में।अनन्त जन्मों के पाप पुण्य सब भरे हैं।अन्त:करण में घोर गन्दकी है और इस जन्म में भी जब से पैदा हुए,छल,कपट,प्रपंच,शो,बनावट,चार सौ बीस,दिखावा यही सीखा है हमने,अपना काम चलाने के लिए।बाप को वेवकूफ बनाओ,माँ को बेवकूफ बनाओ,बीबी को बनाओ ऐसी एक्टिंग करो स्वार्थ सिद्ध हो।सब एक दूसरे को धोखा दे रहे हैं-‘ हम तुमसे प्यार करते हैं मम्मी।’प्यार शब्द का अर्थ ही नहीं जानता, धोखा दे रहा है माँ को और माँ भी कहती है- ‘ बेटा मैं तुझे प्राणों से अधिक प्यार करती हूँ।’यह भी गलत कह रही है।न माँ के पास प्यार है,न बाप के,न बीबी के,न पति के,न बेटे के।प्यार तो केवल महापुरुष और भगवान् के पास है।”
- जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज