Jagadguru Shree Kripalu Ji Maharaj JKNP

Jagadguru Shree Kripalu Ji Maharaj JKNP जगद्गुरुत्तम १००८ स्वामी श्री कृपालु जी महाराज।

“ भक्ति न करोगे तो अन्तःकरण शुद्ध नही होगा और जब शुद्ध नही होगा तो भगवद कृपा से वो दिव्य नही होगा।और जब दिव्य नही होगा त...
28/10/2024

“ भक्ति न करोगे तो अन्तःकरण शुद्ध नही होगा और जब शुद्ध नही होगा तो भगवद कृपा से वो दिव्य नही होगा।और जब दिव्य नही होगा तो न माया जाएगी और न भगवान का दर्शन होगा, न परमानंद मिलेगा इसीलिए दोनों आवश्यक है।”
.जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

“ हमारा अनन्त जन्मों का अभ्यास है।माया के क्षेत्र वालों को ही मन में बसाया हुआ है अत: अनादिकाल से गन्दकी ही गन्दकी डाली ...
26/10/2024

“ हमारा अनन्त जन्मों का अभ्यास है।माया के क्षेत्र वालों को ही मन में बसाया हुआ है अत: अनादिकाल से गन्दकी ही गन्दकी डाली है मन में।अनन्त जन्मों के पाप पुण्य सब भरे हैं।अन्त:करण में घोर गन्दकी है और इस जन्म में भी जब से पैदा हुए,छल,कपट,प्रपंच,शो,बनावट,चार सौ बीस,दिखावा यही सीखा है हमने,अपना काम चलाने के लिए।बाप को वेवकूफ बनाओ,माँ को बेवकूफ बनाओ,बीबी को बनाओ ऐसी एक्टिंग करो स्वार्थ सिद्ध हो।सब एक दूसरे को धोखा दे रहे हैं-‘ हम तुमसे प्यार करते हैं मम्मी।’प्यार शब्द का अर्थ ही नहीं जानता, धोखा दे रहा है माँ को और माँ भी कहती है- ‘ बेटा मैं तुझे प्राणों से अधिक प्यार करती हूँ।’यह भी गलत कह रही है।न माँ के पास प्यार है,न बाप के,न बीबी के,न पति के,न बेटे के।प्यार तो केवल महापुरुष और भगवान् के पास है।”

- जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

“ कहीं भी ग़लत जगह अटैचमेन्ट हुआ कि शरणागति समाप्त हुई,अतः गुरु रुपी भगवान् को ही सब कुछ मानो।”                         ...
11/07/2023

“ कहीं भी ग़लत जगह अटैचमेन्ट हुआ कि शरणागति समाप्त हुई,अतः गुरु रुपी भगवान् को ही सब कुछ मानो।”
.. जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

“ साधक को भगवान् से विमुख करने वाला सबसे महान् शत्रु कुसंग ही हैं।अन्यथा,अनन्त बार महापुरुष एवं भगवान् के अवतार लेने पर ...
14/05/2023

“ साधक को भगवान् से विमुख करने वाला सबसे महान् शत्रु कुसंग ही हैं।अन्यथा,अनन्त बार महापुरुष एवं भगवान् के अवतार लेने पर भी जीव इस प्रकार माया में पड़ा सड़ता रहे,यह कदापि संभव नहीं।अतएव साधकों को साधना से भी अधिक दृष्टिकोण कुसंग से बचने पर रखना चाहिये।”
- जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

“ जैसे,किसी शराबी को शराब के लिये मदिरालय जाना पड़ता है किन्तु मदिरालय के पूर्व कई दूकानें अन्य सामानों की पड़ती हैं।वह ...
03/05/2023

“ जैसे,किसी शराबी को शराब के लिये मदिरालय जाना पड़ता है किन्तु मदिरालय के पूर्व कई दूकानें अन्य सामानों की पड़ती हैं।वह उन दूकानों के सामने से तो जाता है,देखता भी जाता है,किन्तु विरक्त है।अर्थात् न तो किसी दुकान पर खड़ा होता है कि चलो मदिरा न सही,इस दुकान पर रसगुल्ला ही खा लें और न तो झगड़ा ही करता है कि मुझे मदिरा चाहिये,तू रसगुल्ला की दुकान क्यों बीच में लगाये बैठा है',इत्यादि।वह सबसे विरक्त होकर अपने मदिरालय के लक्ष्य पर जा रहा है।बस,यही वैराग्य है।इस संसार में सब दुकानों से गुजरता हुआ अपने परमानन्द के केन्द्र भगवान् की दुकान पर ही सीधा जाय,अन्यत्र कहीं भी न राग हो न द्वेष हो।”
.. जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

यह मनुष्य का शरीर बार–बार नहीं मिलता । दयामय भगवान् चौरासी लाख योनियों में भटकने के पश्चात् दया करके कभी मानव देह प्रदान...
26/04/2023

यह मनुष्य का शरीर बार–बार नहीं मिलता । दयामय भगवान् चौरासी लाख योनियों में भटकने के पश्चात् दया करके कभी मानव देह प्रदान करते हैं । मानव देह देने के पूर्व ही संसार के वास्तविक स्वरूप का परिचय कराने के लिए गर्भ में उल्टा टाँग कर मुख तक बाँध देते हैं । जब गर्भ में बालक के लिए कष्ट असह्य हो जाता है तब उसे ज्ञान देते हैं और वह प्रतिज्ञा करता है कि मुझे गर्भ से बाहर निकाल दीजिये, मैं केवल आपका ही भजन करूँगा । जन्म के पश्चात् जो श्यामसुन्दर को भूल जाता है, उसकी वर्तमान जीवन में भी गर्भस्थ अवस्था के समान ही दयनीय दशा हो जाती है ।
‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि यह मानव देह देवताओं के लिये भी दुर्लभ है, इसीलिये सावधान हो कर श्यामसुन्दर का स्मरण करो।

#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज।
सर्वाधिकार सुरक्षित:-राधा गोविन्द समिति।

पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे शयनम् ।पैदा हुए, मरे, फिर मां के पेट में उल्टे टंगे, फिर पैदा हुए, फिर मरे, क्...
12/03/2023

पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे शयनम् ।

पैदा हुए, मरे, फिर मां के पेट में उल्टे टंगे, फिर पैदा हुए, फिर मरे, क्यों?
इसलिए कि अपने को शरीर मान लिया। बस एक मिस्टेक! अपने को शरीर मान लिया और हम हैं आत्मा।
..जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

चाहे भगवान से प्यार करो,चाहे उसके नाम से प्यार करो,चाहे उसके गुण से प्यार करो,चाहे उसकी लीला से प्यार करो,चाहे उसके धाम ...
02/02/2023

चाहे भगवान से प्यार करो,चाहे उसके नाम से प्यार करो,चाहे उसके गुण से प्यार करो,चाहे उसकी लीला से प्यार करो,चाहे उसके धाम से प्यार करो,चाहे उसके संत से प्यार करो सबका एक फल। ये सब एक हैं।

जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

यो वै भूमा तत्सुखम्।                            ( छान्दो.७-२३-१)“ वो अनन्त आनन्द स्वरुप तुम्हारा अंशी तुम्हारा पिता,जो स...
25/01/2023

यो वै भूमा तत्सुखम्।
( छान्दो.७-२३-१)
“ वो अनन्त आनन्द स्वरुप तुम्हारा अंशी तुम्हारा पिता,जो सदा तुम्हारे साथ रहता है।वो आनन्द है या वहाँ आनन्द है या उसमें आनन्द है,ये मान लो।मान लो,जान लो नहीं,मान लो,बस और कुछ करना है ही नहीं।”
.. जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

“ केवल एकमात्र निष्काम भक्ति करें,गुरु की शरणागति में रहकर।हो गया बस इतना ही तो ज्ञान है।इसी को विस्तार से वेदों शास्त्र...
05/01/2023

“ केवल एकमात्र निष्काम भक्ति करें,गुरु की शरणागति में रहकर।हो गया बस इतना ही तो ज्ञान है।इसी को विस्तार से वेदों शास्त्रों ने बताया।क्योंकि हम लोग महामूर्ख हैं,संक्षेप में नहीं समझते।”
..जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

सब चीजें नियमित रखो, संयमित सब साधन होना चाहिये । अगर ये नहीं होगा तो फिर आप संसार में भी सफल नहीं होंगे । भगवान् के यहा...
31/12/2022

सब चीजें नियमित रखो, संयमित सब साधन होना चाहिये । अगर ये नहीं होगा तो फिर आप संसार में भी सफल नहीं होंगे । भगवान् के यहाँ भी सफल नहीं होंगे । दोनों जगह नियम है, संयम है ।

#भक्तियोगरसावतार_जगद्गुरुत्तम_श्री_कृपालु_जी_महाराज

कोई आपकी बुराई करेगा,तो क्या करेगा? वह बुराई तो आप में अनंत मात्रा की भरी हुई है। कौन सी नयी बात कोई कह रहा है जो आप में...
27/12/2022

कोई आपकी बुराई करेगा,तो क्या करेगा? वह बुराई तो आप में अनंत मात्रा की भरी हुई है। कौन सी नयी बात कोई कह रहा है जो आप में नहीं है। जब आप माया के अंडर में हैं ,तो कौन सी बुराई ऐसी है जो आप में भण्डार रूप में नहीं भरी है। और वह अनादि काल की बद्धमूल बीमारी है,नयी नहीं है। ऐसा नहीं है कि झटक दो,निकल जायेगी वह। भगवान के अनंत अवतार आये,चले गये। अनंत संत आये, चले गए हमारे सामने से। हमारी बिमारी नहीं गयी। ये गड़बड़ियां तब तक रहेंगी,जब तक भगवत प्राप्ति नहीं हो जायेगी। विश्व में कोई चैलेंज नहीं कर सकता। अगर कोई जीव माया के अंडर में है तो सारे विकार उसमें सदा रहेंगें। जाग्रत,स्वपन,सुषुप्ति तीनों अवस्थाओं में। ये दोष ऋषी ,मुनियों का पीछा नहीं छोड़ते,जिनमें अणिमा,गरिमा,लघिमा बड़ी-बड़ी सिद्धियों का भण्डार है। फिर जनसाधारण की क्या बात!
#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज।

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