Gadhimai Temple

Gadhimai Temple The temple of goddess Gadhi Mai is located at Bariyarpur of Bara District in the Terai region of Nepal. It is one of the biggest fair in south Asia.

बारा जिल्लाको बरियारपुर गा.वि.स.मा पर्ने गढ़ीमाई भगवतीको मन्दिर नेपालको ऐतिहमासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक र पुरातात्विक दृष्टिकोणले धेरै महत्वपूर्ण मानिन्छ । जहाँ प्रत्येक पाँच-पाँच वर्षमा विश्वको दोर्सो सबभन्दा ठूलो मेला लाग्ने गर्दछ । विश्वमा सबैभन्दा बढी वली यसै मेलामा दिने गरिन्छ । सदरमुकाम कलैयादेखि ८ किलोमिटर पूर्वको दूरीमा गढ़ीमाईको मन्दिर अवस्थित छ ।

The Gadhimai festival has its origins in

the 18th century with a feudal landlord Bhagwan Chaudhary and a village healer adept in the Hindu occult, Dukha Kachadiya. Bhagwan Chaudhary was imprisoned at Makwanpur fort prison 260 years ago. While imprisoned he dreamed a dream that his problems would be solved if he made a blood sacrifice to Gadhimai, in other words if he sacrificed an animal. After leaving prison Chaudhary took advice from Kachadiya. According to tradition at the time of Chaudhary’s sacrifice a light appeared in an earthenware jar and from than onwards the sacrifice has continued every five years for the last 260 years.

एशिया महादेशकै सबै भन्दा ठुलो ५ वर्षमा एक पटक लाग्ने मेला महोत्सव बारा जिल्लाको बरियारपुर स्थिति रहेको महागढिमाई मेला यस...
17/05/2024

एशिया महादेशकै सबै भन्दा ठुलो ५ वर्षमा एक पटक लाग्ने मेला महोत्सव बारा जिल्लाको बरियारपुर स्थिति रहेको महागढिमाई मेला यस वर्ष लाग्ने भएको छ । अत यस वर्ष मेला लाग्ने मिति निर्धारित भएको छ ।
कार्यक्रमहरू :
मिति: २०८१/०८ /१७ (2024/12/2) देखि
मिति २०८१/०८/२६ (2024/12/11) सम्म
बोका बलि मिति २०८१/०८/२४ गते 2024/12/09) राङ्गा बलि २०८१/०८ /२३ (2024/12/08) दिइने छ ।
पोस्ट शेयर गरी सबैलाई जानकारी गरीदिनु हुन हार्दिक अनुरोध छ.
🙏जय गढीमाई🙏

19/11/2020

अपने सभी लोग के ई महान पर्व छठ के बहुत-बहुत शुभकामना।

जय गढिमाई                 जय गढिमाई              जय गढिमाई**********                ***********             ************...
27/09/2019

जय गढिमाई जय गढिमाई जय गढिमाई
********** *********** **********
********** *********** **********
अब दुई दिन बाकी
यहि मिति २०७६/०६/१२ गते आईतवार ता- 29- सेप्टेम्बर-2019 को दिन बिश्व प्रसिद्ध श्री गढिमाईको सोभा यात्रा हुन गईरहेको हुना ले सम्पूर्ण भक्तजन हरु लाई सोभा यात्रामा सहभागी हुनका लागि हार्दिक अनुरोध गर्दछु ।
धन्यवाद
जय गढिमाई
#कृपया_पेज_लाईक_र_सेयर_गर्नु_होला
https://m.facebook.com/gadhimai1

निमन्त्रणा                     निमन्त्रणा                       निमन्त्रणा          यहि मिति २०७६/०६/१२ गते आईतवार ता- 2...
24/09/2019

निमन्त्रणा निमन्त्रणा निमन्त्रणा
यहि मिति २०७६/०६/१२ गते आईतवार ता- 29- सेप्टेम्बर-2019 को दिन बिश्व प्रसिद्ध श्री गढिमाईको सोभा यात्रा हुन गईरहेको हुना ले सम्पूर्ण भक्तजन हरु लाई सोभा यात्रामा सहभागी हुनका लागि हार्दिक अनुरोध गर्दछु ।
धन्यवाद
जय गढिमाई
#कृपया_पेज_लाईक_र_सेयर_गर्नु_होला
https://m.facebook.com/gadhimai1

14/10/2017

दिवाली क्यों मनायी जाती है

दिवाली हर साल हिन्दूओं और अन्य धर्म के लोगो द्वारा मुख्य त्यौहार के रुप में मनायी जाती है। हिन्दू मान्यता के अनुसार, दिवाली का त्यौहार मनाने के बहुत सारे कारण है और नये वर्ष को ताजगी के साथ शुरु करने में मनुष्यों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लोगों की यह मान्यता है कि जो वे इस त्यौहार पर करेगें वहीं पूरे साल करेगें। इसलिये लोग अच्छे काम करते है, धनतेरस पर खरीदारी करना, घर के प्रत्येक कोने को प्रकाशित करना, मिठाई बॉटना, दोस्ती करना, भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी जी की शान्ति और समृद्धि पाने के लिये पूजा करना, अच्छा और स्वादिष्ट भोजन करना, अपने घरों को सजाना और अन्य गतिविधियॉ जिससे वे पूरे साल ऐसा कर सकें। शिक्षक नियमित क्लास लेते है, विधार्थी अधिक घण्टें अध्ययन करते है, व्यवसायी अपने खातों को अच्छे से तैयीर करते है ताकि वे पूरे साल ऐसे ही रहें। हिन्दू मान्यता के अनुसार, दिवाली मनाने के निम्नलिखित बहुत सारे पौराणिक और ऐतिहासिक कारण है।

भगवान राम की विजय और आगमन: हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार, भगवान राम राक्षस राजा रावण को मारकर और उसके राज्य लंका को अच्छी तरह से जीतकर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपने राज्य, अयोध्या, बहुत लम्बे समय(14 वर्ष) के बाद वापस आये थे। अयोध्या के लोग अपने सबसे प्रिय और दयालु राजा राम, उनकी पत्नी और भाई लक्ष्मण के आने से बहुत खुश थे। इसलिये उन्होनें भगवान राम का लौटने का दिन अपने घर और पूरे राज्य को सजाकर, मिट्टी से बने दिये और पटाखे जलाकर मनाया।

देवी लक्ष्मी का जन्मदिन: देवी लक्ष्मी धन और समृद्धि की स्वामिनी है। यह माना जाता है कि राक्षस और देवताओं द्वारा समुन्द्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी दूध के समुन्द्र (क्षीर सागर) से कार्तिक महीने की अमावश्या को ब्रह्माण्ड में आयी थी। यही कारण है कि यह दिन माता लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दिवाली के त्यौहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया।

भगवान विष्णु ने लक्ष्मी को बचाया: हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक महान दानव राजा बाली था, जो सभी तीनों लोक (पृथ्वी, आकाश और पाताल) का मालिक बनना चाहता था, उसे भगवान विष्णु से असीमित शक्तियों का वरदान प्राप्त था। पूरे विश्व में केवल गरीबी थी क्योंकि पृथ्वी का सम्पूर्ण धन राजा बाली द्वारा रोका हुआ था। भगवान के बनाये ब्रह्मांण्ड के नियम जारी रखने के लिए भगवान विष्णु ने सभी तीनों लोकों को बचाया था (अपने वामन अवतार, 5 वें अवतार में) और देवी लक्ष्मी को उसकी जेल से छुडाया था। तब से, यह दिन बुराई की सत्ता पर भगवान की जीत और धन की देवी को बचाने के रूप में मनाया जाना शुरू किया गया।

भगवान कृष्ण ने नरकासुर को मार डाला: मुख्य दिवाली से एक दिन पहले का दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। बहुत समय पहले, नरकासुर नाम का राक्षस राजा(प्रदोषपुरम में राज्य करता था)था, जो लोगों पर अत्याचार करता था और उसने अपनी जेल में 16000 औरतों को बंधी बना रखा था। भगवान कृष्ण (भगवान विष्णु के 8 वें अवतार) उसकी हत्या करके नरकासुर की हिरासत से उन सभी महिलाओं की जान बचाई थी। उस दिन से यह बुराई सत्ता पर सत्य की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

राज्य में पांडवों की वापसी: महान हिंदू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, निष्कासन के लम्बे समय(12 वर्ष) के बाद कार्तिक महीने की अमावश्या को पांडव अपने ऱाज्य लौटे थे। कोरवों से जुऐं में हारने के बाद उन्हें 12 वर्ष के लिये निष्कासित कर दिया गया था। पांडवों के राज्य के लोग पांडवों के राज्य में आने के लिए बहुत खुश थे और मिट्टी के दीपक जलाकर और पटाखे जलाकर पांडवों के लौटने दिन मनाना शुरू कर दिया।

विक्रमादित्य का राज्याभिषेक: राजा विक्रमादित्य एक महान हिन्दू राजा का विशेष दिन पर राज्यभिषेक हुआ तब लोगों ने दिवाली को ऐतिहासिक रुप से मनाना शुरु कर दिया।

आर्य समाज के लिए विशेष दिन: महर्षि दयानंद महान हिन्दू सुधारक के साथ साथ आर्य समाज के संस्थापक थे और उन्होंने कार्तिक के महीने में नया चाँद(अमावश्या) के दिन निर्वाण प्राप्त किया। उस दिन से इस खास दिन के उपलक्ष्य में दीवाली के रूप में मनाया जा रहा है।

जैनियों के लिए विशेष दिन: तीर्थंकर महावीर, जिन्होंने आधुनिक जैन धर्म की स्थापना की, उन्हें इस विशेष दिन दिवाली पर निर्वाण की प्राप्ति हुई जिसके उपलक्ष्य में जैनियों में यह दिन दीवाली के रूप में मनाया जाता है।

मारवाड़ी नया साल: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मारवाड़ी अश्विन की कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन पर महान हिंदू त्यौहार दीवाली पर अपने नए साल का जश्न मनाते है।

गुजरातियों के लिए नया साल: चंद्र कैलेंडर के अनुसार, गुजराती भी कार्तिक के महीने में शुक्ल पक्ष के पहले दिन दीवाली के एक दिन बाद अपने नए साल का जश्न मनाते है।

सिखों के लिए विशेष दिन: अमर दास (तीसरे सिख गुरु) ने दिवाली को लाल-पत्र दिन के पारंम्परिक रुप में बदल दिया जिस पर सभी सिख अपने गुरुजनों का आशार्वाद पाने के लिये एक साथ मिलते है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की स्थापना भी वर्ष 1577 में दीवाली के मौके पर की गयी थी। हरगोबिंद जी (6 सिख गुरु) को वर्ष 1619 में मुगल सम्राट जहांगीर की हिरासत से ग्वालियर किले से रिहा किया गया था।

Happy Dashain
30/09/2017

Happy Dashain


मकर संक्रान्ति को हार्दिक मंगलमय शुभकामना माता रानी सबैको मनोकामना पुरा गरूणजय गढ़ी माई
14/01/2017

मकर संक्रान्ति को हार्दिक मंगलमय शुभकामना
माता रानी सबैको मनोकामना पुरा गरूण
जय गढ़ी माई

हाम्रो आस हाम्रो बिशवास जय गढ़ी माई __/\__
20/07/2016

हाम्रो आस हाम्रो बिशवास
जय गढ़ी माई __/\__

प्रेम से बोलिए दिल से बोलिए गढ़ी मईया कि ज
27/03/2016

प्रेम से बोलिए दिल से बोलिए गढ़ी मईया कि ज

होली की हार्दिक शुभ कामनाएं ।।
23/03/2016

होली की हार्दिक शुभ कामनाएं ।।

होली बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है। होली में जितना महत्व रंगों का है उतना ही महत्व होलिका दहन का भी है। क्योंकि य...
22/03/2016

होली बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है। होली में जितना महत्व रंगों का है उतना ही महत्व होलिका दहन का भी है। क्योंकि ये वही दिन होता है जब आप अपनी कोई भी कामना पूरी कर सकते हैं किसी भी बुराई को भस्म कर सकते है।
आप सभी को होलिका दहन कि मंगल कामनाएं।।

Address

Bariyarpur
Kalaiya
44405

Website

https://www.twitter.com/GadhiMai1

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Gadhimai Temple posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Gadhimai Temple:

Share

Category