Satsang Kendra Rajgadh

Directions

Satsang Kendra Rajgadh Yajan Yaajan Istrivrity

01/12/2024

सांसारिक जीवन में नाम ध्यान करने से कई प्रकार की उन्नति और प्रभाव पड़ सकते हैं। यहाँ कुछ उदाहरण हैं:

1. *मानसिक शांति और स्थिरता*: नाम ध्यान करने से मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।
2. *आध्यात्मिक उन्नति*: नाम ध्यान करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह परमात्मा के साथ जुड़ने में मदद करता है और आत्मा को शुद्धि और पवित्रता मिलती है।
3. *स्वास्थ्य लाभ*: नाम ध्यान करने से स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। यह रक्तचाप को कम करने, हृदय रोग को रोकने, और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है।
4. *संबंधों में सुधार*: नाम ध्यान करने से संबंधों में सुधार होता है। यह हमें अधिक सहानुभूतिपूर्ण, दयालु, और समझदार बनाता है।
5. *आत्म-विश्वास और आत्म-सम्मान में वृद्धि*: नाम ध्यान करने से आत्म-विश्वास और आत्म-सम्मान में वृद्धि होती है। यह हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है और हमें अपने जीवन में अधिक सफल बनाता है।
6. *मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता में वृद्धि*: नाम ध्यान करने से मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता में वृद्धि होती है। यह हमें अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है और हमें अपने जीवन में अधिक सफल बनाता है।
7. *आध्यात्मिक ज्ञान और समझ में वृद्धि*: नाम ध्यान करने से आध्यात्मिक ज्ञान और समझ में वृद्धि होती है। यह हमें परमात्मा के बारे में अधिक जानने में मदद करता है और हमें अपने जीवन में अधिक अर्थ और उद्देश्य प्रदान करता है।

इन सभी प्रभावों के अलावा, नाम ध्यान करने से हमें अपने जीवन में अधिक शांति, संतुष्टि, और खुशी मिलती है। यह हमें अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण और सफल बनाने में मदद करता है।
.. जय गुरू

21/11/2024

Shree Shree Boroda's 114th Birthday celebration
Satsang Kendra Rajgadh

Shree Shree Borda's 114th Birthday Celebration                       Satsang Kendra Rajgadh
21/11/2024

Shree Shree Borda's 114th Birthday Celebration
Satsang Kendra Rajgadh

22/06/2024


2080/03/08

Onlion Registration
09/06/2024

Onlion Registration

 #श्रीश्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र जी की वाणी ~ भगवान हमलोगोँ को दुख नहीँ देते है । वे हम लोगोँ को सुख देना चाहते है । हम लोगो...
06/06/2024

#श्रीश्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र जी की वाणी ~ भगवान हमलोगोँ को दुख नहीँ देते है । वे हम लोगोँ को सुख देना चाहते है । हम लोगो का कर्मफल दुख देता है । हमलोग ऐसा कार्य करते है जिससे दुख होता है । अभी जो दुख पा रहे हो वह अभी के कार्य के कारण है ऐसी बात नहीँ है । पूर्व मेँ कीये गये कार्य का कर्मफल संचित होकर है एवं वही पाते भी है । भगवान दुख देते हैँ कहना अपराध है । भगवान स्वस्ति पुरुष हैँ, वे प्रेममय हैँ । ......दीपरक्षी, द्वितीय खण्ड, पृष्ठ सं॰ 231, दिनांक 16-1-1957
#जयगुरू



06/06/2024
29/05/2024


27/05/2024

सान्ध्यकालीन विनति
बार बार करूँ विनती। राधास्वामी आगे॥
दया करो दाता मेरे। चित चरणन लागे ॥१॥
जन्म जन्म रही भूल में। नहिं पाया भेदा ॥
काल करम के जाल में। रहि भोगत खेदा ॥ २ ॥
जगत जीव भरमत फिरें। नित चारों खानी॥
ज्ञानी जोगी पिल रहे। सब मन की घानी ॥ ३ ॥
भाग जगा मेरा आदिका। मिले सतगुरु आई।
राधास्वामी धाम का। मोहि भेद जनाई ॥ ४ ॥
ऊँच से ऊँचा देश है। वह अधर ठिकानी ।।
बिना संत पावे नहीं। श्रुत शब्द निशानी ॥ ५ ॥
राधास्वामी नाम की। मोहिं महिमा सुनाई ॥
विरह अनुराग जगाय के। घर पहुँचूँ भाई ॥ ६ ॥
साध संग कर सार रस। मैंने पिया अघाई ॥
प्रेम लगा गुरु चरण में। मन शांति न आई ॥ ७ ॥
तड़प उठे बेकल रहूँ। कस पिया घर जाई ॥
दर्शन रस नित नित लंहूँ। गहे मन थिरताई ॥ ८ ॥
सुरत चढ़े आकाश में। करे शब्द बिलासा ॥
धाम धाम निरखत चले। पावे निज घर वासा ॥९॥
यह आशा मेरे मन बसे । रहे चित्त उदासा ॥
विनय सुनो किरपा करो। दीजे चरण निवासा ॥१०॥
तुम बिन कोई समरथ नहीं । जासे माँगू दाना ॥
प्रेमधार बरखा करो। खोलो अमृत खाना ॥ ११ दीन दयाल दया करो। मेरे समरथ स्वामी॥
शुकर करूँ गावत रहुँ। नित राधास्वामी ॥ १२ ॥
----------पुनः-------------
तुम बिन कोई समरथ नहीं । जासे माँगू दाना ॥
प्रेमधार बरखा करो। खोलो अमृत खाना ॥ ११ ॥
दीन दयाल दया करो। मेरे समरथ स्वामी॥
शुकर करूँ गावत रहुँ। नित राधास्वामी ॥ १२ ॥
शुकर करूँ गावत रहुँ। नित राधास्वामी ॥ १२ ॥

Address

Jhapa District

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Satsang Kendra Rajgadh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share