Satsang nepal

Satsang nepal Never have to prove yourself or
explain yourself to anyone.Never Ever. (People who shine from within don't need a spotlight. Beware!

अर्थ, मान, यश इत्यादि पाने की आशा में मुझे ठाकुर बनाकर भक्त मत बनो, सावधान हो जाओ- ठगे जाओगे; तुम्हारा ठाकुरत्व न जागने पर कोई तुम्हारा केन्द्र भी नहीं, ठाकुर भी नहीं- धोखा देने पर धोखे में पड़ोगे।
-श्री श्रीठाकुर
Oh,you who would devotees be
with hope for name and riches,
don't make me your Lord and Master. If mastery within
awakens not,-
Master,Centre-none you have,
and deceiving, you shall be deceived.
- Sree Sree Thakur

01/02/2026
🙏joy guruमोह समाप्त होते ही खोने का डर भी निकल जाता हैं, चाहे धन हो, वस्तु हो या प्रेम हो फिर चाहे संबंध हो या जीवन, डर ...
29/12/2025

🙏joy guru
मोह समाप्त होते ही खोने का डर भी निकल जाता हैं, चाहे धन हो, वस्तु हो या प्रेम हो फिर चाहे संबंध हो या जीवन, डर केवल वहां है, जहां मेरा होने का भ्रम है, मजबूत जंजीरें लोहे की नहीं, मोह की होती हैं. शून्य से शुरू, शून्य पर खत्म, फिर बीच में खोना-पाना कैसा,, जिसने जरूरतें कम कर लीं,
समझो उसने अपनी जंजीरें काट दीं,,

09/11/2025

कुछ लडाइयाँ मुस्करा कर छोड़नी पड़ती है।

मुर्गे ने चील को चैलेंज दिया कि मुझसे फाइट मे जीत कर दिखा। चील के पास वक्त नही था। इसलिए उसने मना कर दिया। मगर मुर्गा बार बार चैलेंज देने लगा। आखिर मे चील को उसका चैलेंज स्वीकार करना पडा। दोनों मे लम्बी लडाई चली। चूंकि चील एक शिकारी पक्षी थी। उसने अंत मे मुर्गे को हरा दिया। मुर्गा पूँछ दबाकर भाग गया। जब चील अपने घोसले मे पहुंची तो देखा उसके सारे अंडे गायब थे। अंडों को एक सांप खाकर चला गया था। चील को अब बहुत पछतावा हो रहा था। वो दुखी होकर रो रही थी।

कहानी का मोरल :- कई बार हम लोगों से फिजूल मे उलझ कर अपना बहुत नुकसान कर लेते हैं। दुनिया मे ऐसे फालतू लोग बहुत मिलेंगे जो आपसे बेवजह लड़ना चाहेंगे। आपको लक्ष्य से भटकाना चाहेंगे। उनका मकसद ही आपको नुकसान पहुँचाना होगा आपको ये गैर जरूरी लड़ाइयां नहीं लड़नी है हर लडाई नही लड़ी जाती कुछ लड़ाइयां मुस्कुरा कर छोड़नी पड़ती है।

रिश्तों को बनाए रखने की कला सीखए :🙏कोई भी व्यक्ति आपके पास तीन कारणों से आता है ! भाव से, अभाव से और प्रभाव से 1.  यदि भ...
04/11/2025

रिश्तों को बनाए रखने की कला सीखए :🙏
कोई भी व्यक्ति आपके पास तीन कारणों से आता है !
भाव से, अभाव से और प्रभाव से
1. यदि भाव से आया है, तो उसे प्रेम दो !
2. अभाव में आया है तो मदद करो और.
3. यदि प्रभाव में आया है तो.. प्रसन्न हो जाओ कि परमात्मा ने आपको इतनी क्षमता दी है!

“दुःख वो भावना हैजो हमें रुलाती है, लेकिन हमें समझदार भी बनाती है। जब जीवन में परेशानी आए, तो उसे सजा नहीं, सिखने का मौक...
01/11/2025

“दुःख वो भावना है

जो हमें रुलाती है, लेकिन हमें समझदार भी बनाती है। जब जीवन में परेशानी आए, तो उसे सजा नहीं, सिखने का मौका समझो। हर दुःख हमें ताकत देता है और खुशी की कीमत समझाता है।"

अज्ञान  : "अपने आप को शरीर समझना और आत्मा को भूल जाना ही अज्ञान है" यह एक गहरा दार्शनिक विचार है, जिसका अर्थ है कि हम अक...
29/10/2025

अज्ञान : "अपने आप को शरीर समझना और आत्मा को भूल जाना ही अज्ञान है"
यह एक गहरा दार्शनिक विचार है, जिसका अर्थ है कि हम अक्सर अपने नश्वर शरीर को ही अपना वास्तविक स्वरूप मान लेते हैं और अपनी अमर, वास्तविक पहचान (आत्मा) को अनदेखा कर देते हैं। यह गलत पहचान ही अज्ञानता का मूल है, क्योंकि यह हमें असली सत्य से दूर रखती है।
अज्ञान के मुख्य कारण
शरीर को "मैं" समझना:
जब हम शरीर को ही सब कुछ मानने लगते हैं, तो यह भूल जाते हैं कि शरीर तो एक साधन मात्र है, आत्मा नहीं। शास्त्रों के अनुसार, आत्मा एक अलग, अमर तत्व है, जबकि शरीर का अंत निश्चित है।
आत्मा को भूल जाना:
हम अक्सर आत्मा के अस्तित्व और उसके सनातन स्वरूप को भूल जाते हैं। हम शरीर की नश्वरता और आत्मा की अमरता को नहीं समझते हैं।
अज्ञानता से अंधविश्वास:
शरीर को ही सब कुछ मान लेने की सोच के कारण कई तरह के अंधविश्वास और गलत धारणाएं जन्म लेती हैं। उदाहरण के लिए, आत्मा की शांति के लिए कर्मकांड करना या आत्मा के भटकने की कहानियाँ, ये सभी इसी अज्ञानता का परिणाम हैं।

सही ज्ञान क्या है?
शरीर से भिन्न "मैं" को पहचानना:
यह समझना कि "मैं" शरीर से अलग हूँ, एक ऐसा बोध है जो हमें आत्म-ज्ञान की ओर ले जाता है।
आत्मा को जानना: आत्मा अमर है, उसका जन्म या मृत्यु नहीं होती, यह ज्ञान अज्ञानता को दूर करता है।
आत्म-ज्ञान: स्वयं के भीतर झांककर और मन व कर्मों पर विचार करके हम आत्म-ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यह हमें अपने वास्तविक स्वरूप से जोड़ता है, जो कि आत्मा है।

अज्ञान ही सारी बिषमताओ की जड़ है :1) अज्ञान ही दुःख, भ्रम, चिंता को जन्म देता है ।2) सकाम कर्म, कुकर्म, पाप, कुरुरता बेक्...
29/10/2025

अज्ञान ही सारी बिषमताओ की जड़ है :
1) अज्ञान ही दुःख, भ्रम, चिंता को जन्म देता है ।
2) सकाम कर्म, कुकर्म, पाप, कुरुरता बेक्ति अज्ञान के कारन ही करता है ।घृणा, द्वेष, ईर्ष्या, मोह, माया, लोभ, क्रोध अभिमान, दुबिधा, भय ये सब अज्ञान की ही संतान है ।अज्ञान न पूजा, न ब्रत, न चढाबो से समाप्त होता है ये केबल ध्यान करने से दूर होता है । आत्मज्ञान परमेश्वर को तत्वा से जानने से अनुभूति होता है।

निष्काम कर्म :अर्थात कर्म यज्ञ भाती करना। या कर्तब्य समझकर करना।  या लोक कल्याण के लिए करने का प्रयास करना चाहिए । ऐसा क...
25/10/2025

निष्काम कर्म :
अर्थात कर्म यज्ञ भाती करना।
या कर्तब्य समझकर करना।
या लोक कल्याण के लिए करने का प्रयास करना चाहिए ।
ऐसा कर्म कर्म बन धन से नही बाधते है।
इस कर्म में फलका इच्छा नही रहता है।

।।  यजन याजन इष्टभृति करले काटे महाभित्ती ।।      ____________________________-_____सुशीलदा ने कहा कि ठाकुर ! इष्टभृति क...
24/10/2025

।। यजन याजन इष्टभृति करले काटे महाभित्ती ।।
____________________________-_____
सुशीलदा ने कहा कि ठाकुर ! इष्टभृति के गुण को कितना भी वर्णन किया जाय , वह शेष नहीं किया जा सकता है । वारिशाल में दंगा के समय सत्संगी भाईयों ने कितने तरह से रक्षा पाया है । कितने सत्संगी भाईयों ने देखा कि आपने वहाँ देहधारी के रूप में प्रकट होकर लोगों को मृत्यु के मुख से बचाया है । देखा गया कि कोई खंजर चलाने वाला है उस समय आप उपस्थित होकर अपना विराट रूप प्रकट कर उसे भय दिखाते हैं तब वह भाग जाता है ।
श्री श्री ठाकुरजी ने कहा कि कुछ दिन पहले एक माँ ने स्वप्न देखा था कि मैं उससे चिउड़ा एवं खीर खाने के लिए कहा । तब वह खीर बनाने घर में गई तो मैंने उससे कहा कि शीघ्र बनाओ चूंकि अभी मुझे वारिशाल जाना है । मैं तो कुछ भी नहीं हूँ जो भी करते हैं वह परमपिता ही करते हैं । परमपिता ने ही वारिशाल में रक्षा किया है । जिनलोगों ने रक्षा पाया है उनमें रक्षा पाने का समावेश था । निष्ठा सहित यजन , याजन एवं इष्टभृति करने का अर्थ है मस्तिष्ककोश एवं स्नायुविधान में सत्ता - संरक्षणी लवाजीमात मजबूत होना। आपद-विपद् के समय इसे विशेष रूप से उपलब्धि माना जाता है । यह संचित सम्पत्ति रहने से समय आने पर अपना कार्य करता है । बाइबिल में है Do not tempt Lord , Thy God . तुमलोग प्रभु की परीक्षा मत करना । भगवान् की परीक्षा करने जाओगे तो तुम भी परीक्षा में पड़ सकते हो ।
- आ0 प्र0, 19 वाँ खण्ड , पृष्ठ सं0-53-54, दि0-25-03-1950
सभी को मेरा हार्दिक रा नन्दित जय गुरु
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

Happy Bhae tika 🙏
23/10/2025

Happy Bhae tika 🙏

Address

BIRGUNJ CHHAPKEEYA
Birgunj

Telephone

+9779860478887

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Satsang nepal posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Satsang nepal:

Share