09/06/2026
अनित्य का बोध : Joy guru🙏
जो आज तुम्हारे पास है, वह कल बदल सकता है।
शरीर, धन, संबंध और परिस्थितियाँ सभी परिवर्तनशील हैं।
इस सत्य को समझने वाला व्यक्ति हानि होने पर टूटता नहीं और लाभ होने पर अहंकारी नहीं बनता।
अनित्य का ज्ञान मन को संतुलित और स्थिर बनाता है।
जिस प्रकर एक हाथ दुस्रे हाथको और एक पैर दुस्रे पैर को साफ करता है उशी तरह सत्कर्म और ज्ञान एक दुस्रे के पूरक होते है। सत्य मार्ग पर चलके मनुष्य नींद से जाग उठते है और मानबका कल्याण करता है। और यही जीबन का मूल मंत्र है गुड़ मंत्र है ।
सत्य कर्म और ज्ञान दो नहीं है :
1) सत कर्म आपके बिबेक को प्रकाश मान बनाता है ।
2) बिबेक (ज्ञान) से किया कर्म आपको धार्मिक बनाता है । केबल कर्म ही अपने है। कर्म हि प्रधान है ।कर्मही साध्ने यौग्य है एक को सधे सब सधे ।
ध्यानम परम सुखम :
तुम सुन्दर होजावो और तुम्हारे सुन्दर होने का अर्थ कोई प्रसाधन के साधनो से नहीं ध्यान सुन्दर करता है।
ध्यान ही सत्यम , शिवम् , सुंदरम का द्वार बनता है, जैसे जैसे ध्यान गहरा होगा, वैसे वैसे तुम पावोगे तुम्हारे भीतर एक अपूर्ब शांति लहर ले रहा है। इतना शांति की सारा जगत सुन्दर दिकने लगेगा।
- अंधबिश्वाश वह अँधेरा है , जहा प्रश्न पूछने की हिम्मत मर जाती है ,और जहा प्रश्न नहीं होते , वह सत्य कभी जन्म नहीं लेता।
ध्यान : हमें २४ घंटे ही करने है। उठते, बइठते, सोते, जागते ,घूमते ,फिरते ,काम करते। ध्यान का मतलब मात्र आँख बंद करके बैठना ही नहीं ,बल्कि २४ घंटा जागरूक, सजग, धैर्य ,शांत रहना है।
मुख्य रूप से सत्य, करुणा , शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाना है।
१. अहिंसा का पालन (Non-violence): सभी जीवों के प्रति दया और प्रेम रखना है। किसी भी प्राणी को शारीरिक या मानसिक रूप से चोट पहुँचाना सबसे बड़ा पाप है।
२. क्रोध पर विजय (Conquering Anger): क्रोध और नफरत से कभी नफरत या बुराई खत्म नहीं होती। केवल प्रेम, शांति और क्षमा के द्वारा ही गुस्से और बुराई को जीता जा सकता है।
३. वर्तमान में जीना (Living in the Present): मनुष्य को अतीत की यादों और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर अपने वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यही सच्ची खुशी का रहस्य है।
चार आर्य सत्य (Four Noble Truths):
१. जीवन में दुःख है।
२. दुःखों का कारण तृष्णा (इच्छा और लालसा) है। जो की मन करता है। मनका बिचलित होना ही दुःख का कारन है। अपना ख़ुशी का चाभी दूसरे के हाथ में नहीं डालना चाहिए। यानि किसकी बात से प्रभाबित नहीं बिचलित नहीं बल्कि धैर्य और शांति का मार्ग जागरूकता (ध्यान )का चैन २४ घंटा करना चाहिए।
३. दुःखों का निवारण संभव है।
४. दुःखों से मुक्ति का मार्ग 'अष्टांगिक मार्ग' है।
अष्टांगिक मार्ग (The Eightfold Path): जीवन को सही दिशा देने के लिए आठ मार्ग हैं:
१. सम्यक् दृष्टि,
२. सम्यक् संकल्प,
३. सम्यक् वाणी,
४.सम्यक् कर्म,
५.सम्यक् आजीविका,
६. सम्यक् प्रयास,
७. सम्यक् स्मृति और
८. सम्यक् समाधि आर्य अष्टांगिक मार्ग।
समयक यानि हर दृस्टि कोण से सत्य, करुणा और शांति पर आधारित जीबन में बेबहारका चैन २४ औ घंटा करना चाहिए।
मध्यम मार्ग (The Middle Path): अत्यधिक सुख-विलास और अत्यधिक कठोर तपस्या दोनों से दूर रहना चाहिए। जीवन में संतुलन बनाना ही शांति का सही रास्ता है ।
आत्म-निर्भरता (Self-reliance): "अप्प दीपो भव" (अपने दीपक स्वयं बनो)। हर व्यक्ति को अपने कर्म और मुक्ति के लिए खुद प्रयत्न करना चाहिए।