16/08/2025
आज बड़े माता जी के मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम, हर्षोल्लास और भक्ति-भाव के साथ मनाया गया। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों, झालरों और दीपों से सुंदर ढंग से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं की झलक प्रस्तुत कर रहा था। मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा, जो नन्हे कन्हैया के दर्शन और पूजन के लिए उत्साहित थे।
मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें पंडित जी ने वैदिक मंत्रों के साथ भगवान कृष्ण का अभिषेक किया। भक्तों ने भगवान को माखन, मिश्री और पंजीरी का भोग लगाया, जो उनकी बाल लीलाओं का प्रतीक है। इसके बाद भक्ति भजनों और कीर्तन की मधुर धुनों ने वातावरण को और भी रसमय बना दिया। भक्तगण "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" जैसे भजनों पर झूमते हुए भगवान के प्रेम में डूबे नजर आए।
मंदिर परिसर में एक विशेष झांकी सजाई गई, जिसमें भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं, जैसे माखन चोरी, गोपियों के साथ रासलीला और कंस वध के दृश्यों को जीवंत रूप से दर्शाया गया। बच्चे और बड़े, सभी इस झांकी को देखकर अभिभूत हो उठे। शाम के समय मंदिर में भगवान कृष्ण की आरती की गई, जिसमें सैकड़ों दीपों की रोशनी से पूरा मंदिर जगमगा उठा।
रात को जन्माष्टमी के सबसे महत्वपूर्ण क्षण, भगवान कृष्ण के जन्म के समय, मंदिर में घंटियों और शंखनाद की ध्वनि गूंज उठी। भक्तों ने "जय श्रीकृष्ण" के जयघोष के साथ नंदलाल का स्वागत किया। प्रसाद के रूप में मिठाइयों और पंजीरी का वितरण किया गया, जिसे भक्तों ने बड़े प्रेम से ग्रहण किया।
यह उत्सव न केवल भक्ति का प्रतीक था, बल्कि समुदाय के बीच एकता और प्रेम का संदेश भी लेकर आया। हर कोई भगवान कृष्ण की लीलाओं और उनके उपदेशों को याद करते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहा था। इस प्रकार, बड़े माता जी के मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह पर्व सभी के लिए एक अविस्मरणीय और आध्यात्मिक अनुभव बन गया।
।। जय माता दी ।। जय श्री कृष्ण।। जय भोलेनाथ ।। जय श्री राम ।। जय श्री हनुमान ।।