29/03/2026
्वाल_यौमे_विसाल_हज़रते_सैयदुना_सैयदुत्ताबेईन_इमामुल_आशेकीन_ #उवेश_बिन_आमिर_मुरादी_सुम्मा_करनी_यमनी #रहमतुल्लाह_अलैय। 💐
👉आपके विलादत में इख़्तिलाफ़ है लेकिन आपका (एक रिवायत में 3 रजब यौमे विसाल लिखा गया हैं) विसाल 657 ई.स बनती है आपको 2026 में दुनिया से परदा फरमाए 1369 साल हो चुके है। हज़रते बाबा फरीद गंजेशकर रहमतुल्लाह अलैय फरमाते है के 3 मौके ऐसे है जहां रहमत उतरती है 1-महफिले शमा के वक़्त (बा शरह और बा वुजू होकर बा शरह और बा वुज़ू इन्सान से शमा सुनने वाले मौके पर ) िया_अल्लाह_का_ज़िक्र_लिखा_जा_रहा_हो और 3- औलिया अल्लाह का जिक्र सुनाया जा रहा हो उस वक़्त रहमत उतरती है।
👉आपको हुज़ूर ﷺ ने एक लक़ब अता फ़रमाया "खैरुत्ताबेइन" उवेश नामका माना तोहफा (Gift) होता है आपका कबीला पहले मुरादी कहलाता था बादमे करनी कहलवाया इसलिए आपको मुरादी और करनी भी कहा जाता है और इत्तेफाक से आप जो मोहल्ला में रहते थे वो भी कर्न कहलाता था आप हज़रत उवैश करनी रहमतुल्लाह अलैय के चाचा वेपार करते थे आप का यहूदियो के साथ वेपार होता था और आप यसरब (मदीना शरीफ) में वेपार करने जाते उस वक़्त हुज़ूर ﷺ की विलादत के 50 या 55 दिन हुवे थे वहां एक यहूदिने आपको बताया के एक ऐसा सितारा तुलु हुवा है जिसकी अलामत ये है के आखरी नबी जीनका नाम मुहंमद होग,उनके कंधो के दरमियान मोहरे नबुव्वत होगी,और उनकी आँखों मे लाल डोरे होंगे उनकी विलादत का वक़्त करीब आ गया है और वो खजूरों वाली ज़मीन में भी आएंगे ऐसा हमारी किताबो में लिखा है और जब हुज़ूर ﷺ ने ऐलाने नबुव्वत किया तब आप हज़रत उवैश करनी रहमतुल्लाह अलैय के अब्बा ने कलिमा पढ़ा और इस तरह आपभी मुसलमान हुवे।
👉रूहानियत का ये मकामथा के हज़रते बिलाल जब अज़ान देते आपको सुनाई देती थी जब भी अज़ान का वक़्त होता आप फ़ौरन छत पे चढ़ जाते कहा मदीना शरीफ कहा यमन ये सब एक आपका और हुज़ूर ﷺ का रूहानी ताल्लुक रहा है वरना शरीयत के अहकाम,इल्म, फ़र्ज़ों सुन्नत और कौनसी नमाज़ कब पढ़नी है और कौनसी नमाज़मे कितनी रकाते है आपको कैसे मालूम पडता ये सब हुज़ूर ﷺ के साथ रूहानी ताल्लुक हुवा करता था के आपको अज़ान होने और नमाज़के वक़्त का पता चलता था।
👉आपके वालिदैन बचपन मे पर्दा फ़रमा गए आपकी परवरिश यतिमी में गुज़री आप ऊंटो को चराते और गुठलियां चुनते और डरी बुनना (उनका धागा बनाना) काम करते थे आपने ऊंट चराने का काम इस लिए पसंद फ़रमाया के आप ऊंटोको चरते छोड़कर इबादते इलाही में मशरूफ रहते आप इबादत कर पाते हज़रत दाता गंजबख़्स अली हिजवेरी रहमतुल्लाह अलैय फरमाते है के आप 2 वजह से हुज़ूर ﷺ से ना मिल जाये 1 हालते गलबा (इस्तग्रात, मजज़ुब जिसको कहते है) और 2- अपनी माँ की खिदमत की वजह से।
👉 आजके दौर में कुछ लोगोको अपनी माँ के पास बैठने तक का वक़्त नही मिलता यहां वहां वक़्त निकलते है लेकिन कभी अपनी माँ के पास नही बैठेंगे और खास ऐसी माँ जिनके शौहर पर्दा कर गए हो आइये ऑफियाए किराम क्या करते थे आप उवैश करनी रहमतुल्लाह अलैय अपनी माँ को बाजार ले जाते थे उनकी तन्हाई खत्म करने के लिए हम अपने बच्चो बीवी को पूछते के कौनसा कपड़ा चाहिए बाजार से क्या लाऊं लेकिन माँ बाप को भी यही चीज़े चाहिये होती है लेकिन हम पूछते नही हज़रते उवैश करनी क्या करते अपनी माँ को बाजार ले जाते वहां बिठाते और खजूरे खिलाते और अपनी माँ की बहुत खिदमत करते।
👉हज़रते उवैश करनी रदियल्लाहो अन्हो उनका लिबास पहनते हज़रते ख्वाजा फरीदुद्दीन अत्तार रहमतुल्लाह अलैय फरमाते है के आपके कपड़ो पर पैवन्द लगे होते आप उनकी 2 चद्दर इस्तेमाल में लते थे आप अलग अलव चीथड़ों को चुनते और उसको धो कर लिबास सी लेते और ज़ेबतन फरमाते (कुछ फुखरा लोग और कुछ पिराने उज़्ज़ाम ऐसे अलग अलग कलर के चीथड़ों के कपड़े आज भी बनवाक़े पहनते है)
👉आपकी आंखोमें अल्लाह तआला ने वो असर अता फरमाया था के आप जिसे देखते बस वो वही खड़ा रह जाता एक मर्तबा एक आप इबादत में मशगूल थे और एक क़ासिद के उसके बादशाह का खत हुज़ूर ﷺ के नाम लेके जा रहा था उसने आपको देखा किसी को पूछा ये क्या कर रहे है जवाब मिला ये मुहंमद ﷺ के पैरोकार है उसका ये सुनना था के म्यान से तलवार निकाली और अनक़रीब था आपकी गरदन उड़ा देता लेकिन आप हज़रत उवैश करनी रहमतुल्लाह अलैय ने सलाम फेरी और उसके सामने देखा जैसे देखना था के वो वही खड़ा रह गया और तलवार वापस म्यान में रख दी। एक मर्तबा एक औरत के पीछे कुत्ता दौड़ा वो औरत आपके पास पनाह लेने आई आपने वो कुत्ते को देखा जैसे देखना था वो कुत्ता वही खड़ा रह गया। एक मर्तबा एक शहेर का कोतवाल आपको छेड़ा करता था एक बार उस कोतवाल ने खजूर चबाकर आपके मुंह पे थूक दिया आप ने कुछ न कहा जब वो कोतवाल गोड़े पर चढ़ा तो आपने गोड़े को घूर के देखा गोड़े की मजाल है के एक भी कदम आगे बढ़े इतने में आपकी वालिदा ने आवाज़ लगाई अवैश आपकी नज़र हटी बादमे वो गोंडा चला। ये सब आपकी नजर का असर था।
👉एक मर्तबा आपने अपनी माँ से हुज़ूर ﷺ से मिलने की इजाज़त चाही आपकी वालिदा ने इजाज़त दी के आप सुबह पोहचोगे तो ज़ोहर तक रुक सकते हो ज़ोहर बाद वापस आजाना आपने 3 डरी (उन की चद्दर) के बदले 1 गधा लिया गधा बूढासा था आपने सफर किया शेहरा से निकले गधा रास्ते मे मर गया आप मदीने से थोड़ी ही दूर थे के आपभी बेहोश हो गए आप खुद फरमाते है जब में बेहोश होकर गिरा जूझे लगा में भी मर जाऊंगा लेकिन आपने देखा एक सुफेद कपड़े वाला पानी का प्याला लेकर आपके करीब आया आपके लबो को लगाया आपने पानी पिया आपको ऐसा लगा के हयात मेरी रगो में दौड़ गई। मैं वापस खड़ा हुवा इधर उधर देखा कोई नही था आपने वहां एक आदमी को देखा उस आदमी ने आपको मस्जिद ए नबवी ﷺ के सामने उतार दिया। हज़रत मौलाना रूम रहमतुल्लाह अलैय फरमाते है के जब आपकी नजर के सामने मस्जिद ए नबवी आई तो यु हाथ उठाकर सलाम करते है अस्सलामु अलयका या रसूलल्लाह ﷺ वहां से आप उम्मुल मोअमेनीन सैयदा आइशा सिद्दीका रदियल्लाहो अन्हा के घर पोहचे दरवाज़ा खटखटाया अंदर से आवाज़ आई के कौन..? मैं उवैश हु यमन से आया हु हुज़ूर ﷺ का दीदार करना चाहता हु। पर्दे के पीछे सैयदा आइशा सिद्दीका रदियल्लाहो अन्हा फरमाने लगी हुज़ूर ﷺ तो चले गए है पनाह गजीनो (हुबेदीया में वहां रहने लगे मुसलमानोंका माल लुटा गया था उनका) का हाल मालूम करने के लिए वो गए है। ये सुनकर हज़रते अवैश करनी रदियल्लाहो अन्हो बहूत रोने लगे इतना रोये के आपकी हिचकी बढ़ गई बीबी सैयदा आइसा सिद्दीका रदियल्लाहो अन्हा फरमाती है के मैंने उनको बहूत रोते हुवे देखा।आप वहां से मस्जिद ए नबवी में गये आप बैठते कभी हुज़ूर ﷺ के मिम्बर शरीफ को हाथ लगाते,कभी मुसल्ला को छूते,कभी दीवारों को छूते,हुज़ूर का यहां हाथ लगा वहां चूमते,हुज़ूर जहाँ बैठते वहां चूमते,ज़ोहर की नमाज़ का वक़्त हुवा आपने नमाज़ अदा की नमाज़के बाद लोगोंने पूछा तुम अजनबी हो आपने बताया में कहा से आया हु मैं कौन हूं मैं वापिस जाना चाहता हु हर एक ने कहा रुक जाओ हुज़ूर शाम या रातको आजायेंगे लेकिन आपने फ़रमाया मुझे इजाज़त नही है मेरी वालिदा नाबीना है मुझे ज़ोहर तक रुकने को कहा गया है अब मैं वापिस चलता हूं और जब आप चलने लगे तो आप मस्जिद के नबवी की तरफ मुह किया और पीछे पाव चलने लगे चलते चलते दूर खड़े हो गए और आंखों से आंसू जारी हो गए रोते जाते आपको पीछे से आवाज आया सुनो में अबु सवरे हु कबीला जोफीका सरदार हु यमन से आया हु आप रसूलल्लाह ﷺ जानते हो मेरे हाथमें फोड़ा हो गया है कई हकीमो से इलाज किया लेकिन में मदीने आया तो पता चला के अब ये इलाज हुज़ूर ﷺ ही कर सकते है आपने पीछे मुड़ कर देखा लेकिन कोई जवाब न दिया और आप हज़रते अवैश करनी रदियल्लाहो अन्हो वापस चले गए इस तरफ हुज़ूर ﷺ मस्जिद में तशरीफ़ लाये अबु सबरे कहते है के हुज़ूर ﷺ वापिस तशरीफ़ लाये तो आपको कुछ खुशबू महसूस हुई फ़रमाया कौन आयाथा नूर का अहसास हो रहा है लगता है मेरा दोस्त आया था हज़रते मौलाना रूम मसनवी में लिखते है के हुज़ूर ﷺ घर गए और बीबी आइशा सिद्दीका रदियल्लाहो अन्हो ने बताया तो हुज़ूर ﷺ इस तरह रोये के लगता था के चश्माने मुबारक से दरया जारी हो गया हो हुज़ूर ﷺ ने यमन तरफ रुख कर के हज़रते उवैश करनी रदियल्लाहो अन्हो की तारीफ की फ़रमाया यमन से मुझे मुहब्बत की खुशबू आती है ये मेरा दोस्त है फिर आप ﷺ ने अबु सबरे को बुलाया दिखाओ अपना हाथ आपने एक लकड़ी पे दम किया उसके हाथ पर फेरा और फ़रमाया जब आप यमन पोहचोगे ये अच्छा हो जाएगा अबु सबरे ने यमन जाकर कबीले वालो को जमा किया अपना हाथ बताया देखो ये हाथ से कुछ पकड़ नही पाता था लेकिन रसूले खुदा ﷺ ने इशे अच्छा कर दिया फिर फ़रमाया आप सबको एक बात बताऊं आप ﷺ ने उवैश ए करनी का ज़िक्र किया व भी यही रहते है में उनको ढूढ लूंगा हज़ूर ﷺ ने फरमाया वो मेरा दोस्त है। अबू सबरे सबको बता ही रहे थे के हज़रते अवैश करनी के घर में रहने वाला एक बच्चा सलीम वहां मौजूद थे उन्होंने कहा के मैं अवैश करनी को जनता हु सरदार और पूरा काफला सलीम के साथ आपसे मिलने चला आपके घर के बाहर खड़े हुवे दरवाज़ा खटखटाया अवैश ए करनी बाहर आये सरदारने देखते ही कहा आजसे मैं एलान करता हु ये हमारे कबीले के सरदार है और जितना खाना दौलत कपड़े आपको तौफे में आये सब आपने बाट दिए और आपने कहा मैं यहां एक बड़ी मस्जिद बनाना चाहता हु फिर वहां मस्जिद बनी सुब्हानल्लाह।
👉आपको शोहरत अच्छी नही लगती थी आप लोगोंकी नज़र से बचकर शहराओ में चले जाते इबादत करते आपपर गलबा ए हाल रहता अपनी वालिदा की खिदमत करते फ़तह मक्का हुवा तब आपकी औरसे अबू सबरे मक्का शरीफ गए और वापस आकर पूरा वाक्या बयान किया। जिस साल हुज़ूर ﷺ का विसाले पाक हुवा उशी साल आपकी वालिदा का विसाल हुवा अल्लाह उनपे रहमते नाज़िल फरमाए आमीन आपकी वालिदा के विसलके बाद आप लोगोसे कम मिलते शहराओ में चले जाते और आपकी एक और शोहरत ये हुई के हज़रते उमर रदियल्लाहो अन्हो हर हज में ऐलान करते तुममे से कोई अवैश है इशी तरह 10 साल गुज़रे हर साल आप पूछते।
👉मुस्लिम शरीफ में है के हज़रते ऊसेल बिन जाबिर रदियल्लाहो अन्हो से रिवायत है के हुज़ूर ﷺ ने हज़रते उमर से फ़रमाया एक आदमी तुम्हे यमन से मिलने आएगा उसका नाम उवैश है और यमन में उसकी माँके अलावा कोई नही और सफ़ेदी होगी और जैसे मिले उसे कहो के वो तुम्हारे लिए बख्शिश की दुआ करे। इब्ने असाकिर में है के हुज़ूर ﷺ ने फरमाया अए उमर जब आप उनसे मिलो तो मेरा सलाम कह देना। एक मर्तबा हज़रते उमर रदियल्लाहो अन्हो मीना शरीफ के मैदान में पूछा कोई आया है यमन से जो कबीला ए कर्ण से हो एक रिवायत में है के आपके चाचा और एक मे आपके भतीजा खड़े हुवे के हम है फ़रमाया तुम अवैश करनी को जानते हो..? कहा या अमीरुल मोअमेनीन आप इतने बड़े आप उसके बारे में पूछ रहे हज़रते उमर रदियल्लाहो अन्हो ने फरमाया के हमारे नबी ﷺ ने फरमाया जब वो आपसे मील तो अपने किये बख्शीश की दुआए करवाना आप उनको आम आदमी कहते हो ! उनकी दुआ से कबीला ए मुदिर और रबीया के भेड़ो और बकरियों के बराबर अल्लाह तआला मुसलमानों को दोज़ख से आज़ाद कर देगा इतना कहना था के एक फ़टे हुवे कपड़े में ऊंट पर बैठे नकेल पकड़े एक ज़ख़्स हाज़िर हुवा और आप हज़रते उमरने फरमाया तुम उवैश हो और आगे फ़रमाया के मेरे लिए दुआ करो भरे मजमे में हज़रते उमर रदियल्लाहो अन्हो दुआ करवा रहे है इसके बाद आपने यमन जानेका इरादा बदल दिया क्योंके सारे यमनी जांगये के अमीरुल मोअमेनीन आपसे दुआ करवा रहे है आपको शोहरत पसन्द नही थी आप फिर मक्का से कूफ़ा चले गए हज़रते उमर ने आपको कहा के में कूफ़ा के गवर्नर को खत लिखू के आपको कोई तकलीफ न हो आपने मना किया और आप कूफ़ा चले गए।
👉हर वली ने आपकी शान में लिखा हज़रते दाता गंजबख़्स अली हिज्वेरी रहमतुल्लाह अलैय ने कशफूल मेहज़ूब में आपके हालात लिखे हज़रत ख्वाजा नाशीरुद्दीन चिश्ती चराग देहली रहमतुल्लाह अलैय ने नज़राना के अकीदत पेश किया। यहां एक बात समाअत करते चलिए के हज़रते अवैस करनी रदियल्लाहो अन्हो के मुतल्लिक एक वाकिया मशहूर है के आपने हुज़ूर ﷺ के दांत मुबारक टूटने पर अपने सारे दांत तोड़े ये वाकिया गलत है हज़रते सैयद सईद अहमद काज़मी रहमतुल्लाह अलैय फरमाते है के हुज़ूर ﷺ के दांत मुबारक टूटे ही न थे आपके दांत नीचे से थोड़े टूटे जिको कहते है के खुरचा गए ऐसे थोड़े टूटे थे और इससे इंसान की खुबसुरती में और इजाफा हो जाता है और अगर इंसान के बीच के दांत टूट जाए तो इंसान बद सूरत नज़र आता है ओर नबी अपने दौरमे अबसे खूबसूरत इंसान हुवा करते है। और भी बुज़ुर्गो ने ये वाकिये को गलत कहा है।
👉सिलसिला ए उवेसीया के बारेमे लोगोका कहना है के जो आपका मुरीद हुवा वो सिलसिला के उवेसीया में है लेकिन शैखुल इस्लाम,शैखुल हदीस, 1000 किताबो के हकीकी मुसन्निफ़ हज़रते अबु सालेह मुहमद फ़ैज़ अहमद उवैसी फरमाते है के सिलसिला ए उवेसीया का दारोमदार गैबी इमदाद पर होता है ये सिलसिला रूहानियत पर मुतल्लग है इसमे जाहिरी जिस्मानी मुलाकात का होना ज़रूरी नही फ़ैज़ तुम हासिल कर सकते हो जो साहिबे कब्र है सिलसिला ए उवेसीया कहते उसे है के साहिबे कब्र से फ़ैज़ हासिल करना और बिना मुलाकात किये फ़ैज़ हासिल करना जो कुबुर में जाकर फ़ैज़ पोहचाते है उशे ओवैसी कहते है ये ज़रूरी नही के हज़रते उवैस करनी से फ़ैज़याफ्ता हो पीर से मिले बिना फ़ैज़ हासिल करना ये सिलसिला ए उवेसीया है।
👉हज़रत दाता गंजबख़्स अली हिज्वेरी रहमतुल्लाह अलैय कशफूल मेहज़ूब में फरमाते है, शाह अब्दुलहक मुहद्दिस देहलवी ने नकल किया, अब नुएम असफहानि ने नकल किया,हज़रत फरीदुद्दीन अत्तार ने नकल किया,किताबे खज़िनतुल अस्फिया में है,के हज़रते उवैस करनी रदियल्लाहो अन्हो की शहादत जंगे सिफ़्फ़ीन में हुई आप हज़रते मौला अली अलैहिस्सलाम की तरफ से लड़ने के लिए गए सामने के लश्करने तीर मौला अली को मारने के लिए तैयार रखा था आप हज़रत उवेश करनी मौला अली से मिलने गए मौला अली ने आपको गले मिलने के किये बाहे फैलाई और सामने से तीर चला और बीचमे हज़रते उवेश करनी आगये जो तीर मौला अली अलैहिस्सलाम पे चलाया वो तीर आपको लगा और आपने जामे शहादत नोश फ़रमाया आपने मौला अली अलैहिस्सलाम के बाहे मुबारक में जान देदी और ररक्का नामकी जगह पर आपको मदफ़्न किया 657 ई.स जुलाई के महीने में आप दुनिया से तशरीफ़ ले गए इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलयही राजेऊन। आपके अलग अलग मज़ार है जो मोतबर रिवायत है वो यहां लिखा गया है आपके मज़ार मुबारक पर 2 बार हमला हुवा मज़ार शहीद हुवे एक बार 11 मार्च 2013 में दूसरी दफा 31 मय 2014 में मस्जिद और मज़ार दोबो शहीद किये गए जो लिखी गई पोस्ट पढ़ने वाले सभी हज़रात आपकी बारगाह में खिराजे अकीदत पेश करे 3 मर्तबा दूरीद शरीफ ज़रूर पढ़े और सब के लिए दुआ फरमाए आमीन।