Laddu Gopal Group - मेरे साँवरिया

Laddu Gopal Group - मेरे साँवरिया I Lost My Heart In Vrindavan...Radhe Radhe Shyam Mila De. According to the Scriptures, "Shri Krishn never sets His foot outside Vrindavan."

Radhe Radhe...

Vrindavan holds a place of special importance in the history of Indian culture and is particularly of great importance in the evolution of Hindu philosophy and mythological legend. Associated with Lord Krishna, the place holds a place of pride in shaping the socio-cultural and political doctrine that India followed. In the Garga Samhita it is mentioned that, "My heart will not be a

t pleasure where there is no Vrindavan, no Yamuna, no Govardhan.” According to the Holy Scriptures, Vrindavan is the forest of Tulasi (Vrinda). It is stated in the Padma Purana "wherever there is a Tulasi Garden, there also exists the association of Krishn. In that place, all the Gods, including Brahma and Laxmi, come to offer worship to Krishn, the Supreme Lord, in His abode" Bhakti Devi was captivated by contacts with Vrindavan, hence the greatest of glories to Shri Vrindavan Dham where Bhakti is dancing everywhere."

22/01/2024
22/01/2024

आप सभी भक्तगणों को आज अयोध्या मंदिर में श्री सियाराम के आगमन हार्दिक बधाई।
बजाओ ढोल स्वागत में अवध में राम आए हैं 🚩
🙏

13/01/2024
13/01/2024
🙏🏼🌹 *_|| श्रीकृष्ण ||_*🌹🙏🏼|| श्री श्रीचैतन्य चरितावली ||(185)🌱 _*भक्तवृन्द और गौरहरि*_ 🌱_क्रमशः से आगे............._   *...
28/12/2023

🙏🏼🌹 *_|| श्रीकृष्ण ||_*🌹🙏🏼
|| श्री श्रीचैतन्य चरितावली ||
(185)
🌱 _*भक्तवृन्द और गौरहरि*_ 🌱
_क्रमशः से आगे............._

*आँखों में आँसू भरे हुए प्रभु ने कहा- ‘मुकुन्‍द! अब हम इस नवद्वीप को त्‍याग देंगे, सिर मुड़ा लेंगे। काषाय वस्‍त्र धारण करेंगे। द्वार-द्वार से टुकड़े माँगकर अपनी भूख को शां‍त करेंगे और नगर के बाहर सूने मकानों में टूटी कुटियाओं में तथा देवताओं के स्‍‍थानों में निवास करेंगे। अब हम गृह त्‍यागी वैरागी बनेंगे।’ मानो मुकुन्‍द के ऊपर वज्राघात हुआ हो। उस हृदय को बैधने वाली बात सुनते ही मुकुन्‍द मूर्च्छित-से हो गये। उनका शरीर पसीने से तर हो गया। बड़े ही दु:ख से कातर स्‍वर में वे विलख-विलखकर कहने लगे-‘प्रभु! हृदय को फाड़ देने वाली आप यह कैसी बात कह रहे हैं? हाय! इसीलिये आपने इतना स्‍नेह बढ़ाया था क्‍या? नाथ! यदि ऐसा ही करना था, तो हम लोगों को इस प्रकार आलिंगन करके, पास में बैठा के, प्रेम से भोजन कराके, एकांत में रहस्‍य की बातें कर-करके, इस तरह से अपने प्रेमपाश में बांध ही क्‍यों लिया था? हे हमारे जीवन के एकमात्र आधार! आपने बिना हम नवद्वीप में किसके बनकर रह सकेंगे? हमें कौन प्रेम की बातें सुनावेगा? हमें कौन संकीर्तन की पद्धति सिखावेगा? हम सबको कौन भगवन्‍नाम का पाठ पढ़ावेगा? प्रभों! आपके कमलमुख के बिना देखे हम जीवित न रह सकेंगे। यह अपने क्‍या निश्‍चय किया है? हे हमारे जीवनदाता! हमारे ऊपर दया करो।’*

*प्रभु ने रोते हुए मुकुन्द को अपने गले से लगाया। अपने कोमल करों से उनके गरम-गरम आंसुओं को पोछते हुए कहने लगे- ‘मुकुन्द! तुम इतने अधीर मत हो। तुम्हारे रुदन को देखकर हमारा हृदय फटा जाता है। हम तुमसे कभी पृथक न होंगे। तुम सदा हमारे हृदय में ही रहोगे।’*

*मुकुन्‍द को इस प्रकार समझाकर प्रभु गदाधर के समीप आये। महाभागवत गदाधर ने प्रभु को इस प्रकार असमय में आते देखकर कुछ आश्‍चर्य-सा प्रकट किया और जल्‍दी से प्रभु की चरण-वंदना करके उन्‍हें बैठने को आसन दिया। आज ये प्रभु की ऐसी दशा देखकर कुछ भयभीत-से हो गये। उन्‍होंने आज‍तक प्रभु की ऐसी आकृति कभी नहीं देखी थी। उस समय की प्रभु की चेष्‍टा में दृढ़ता थी, ममता थी, वेदना थी और त्‍याग, वैराग्‍य, उपरति और न जाने क्‍या-क्‍या भव्‍य भावनाएँ भरी हुई थीं। गदाधर कुछ भी न बोल सके। तब प्रभु आप-से-आप ही कहने लगे- गदाधर! तुम्‍हें मैं एक बहुत ही दु:खपूर्ण बात सुनाने आया हूँ। बुरा मत मानना! क्‍यों, बुरा तो न मानोगे?’ मानो गदाधर के ऊपर यह दूसरा प्रहार हुआ। वे उसी भाँति चुप बैठे रहे। प्रभु की इस बात का भी उन्‍होंने कुछ उत्‍तर नहीं दिया। तब प्रभु कहने लगे- ‘मैं अब तुम लोगों से पृथक हो जाऊँगा। अब मैं इन संसारी भोगों का परित्‍याग कर दूँगा और यतिधर्म का पालन करूँगा।’*

*गदाधर तो मानो काठ की मूर्ति बन गये। प्रभु की इस बात को सुनकर भी वे उसी तरह मौन बैठे रहे इतना अवश्‍य हुआ कि उनका चेतनाशून्‍य शरीर पीछे की दीवाल की ओर स्‍वयं लुढ़क पड़ा। प्रभु समीप ही बैठे थे, थोड़ी ही देर में गदाधर का सिर प्रभु के चरणों में लोटने लगा। उनके दोनों नेत्रों से दो जल की धाराएँ निकलकर प्रभु के पाद-पद्मों को प्रक्षालित कर रही थीं। उन गरम-गरम अश्रुओं के जल से प्रभु के शीतल-कोमल चरणों में एक प्रकार की ओर अधिक ठंढक-सी पड़ने लगी। उन्‍होंने गदाधर के सिर को बलपूर्वक उठाकर अपनी गोदी में रख लिया और उनके आंसू पोंछते हुए कहने लगे- ‘गदाधर! तुम इतने अधीर होगे तो भला मैं अपने धर्म को कैसे निभा सकूँगा? मैं सब कुछ देख सकता हूँ, कितु तुम्‍हें इस प्रकार विलखता हुआ नहीं देख सकता।*

*मैंने केवल महान प्रेम की उपलब्धि करने के ही निमित्त ऐसा निश्‍चय किया है। यदि तुम मेरे इस शुभ संकल्‍प में इस प्रकार विघ्‍न उपस्थित करोगे तो मैं भी कभी उस काम को न करूँगा। तुम्‍हें दु:खी छोड़कर मैं शाश्‍वत सुख को भी नहीं चाहता। क्‍या कहते हो? बोलते क्‍यों नहीं। रुँधे हुए कण्‍ठ बड़े कष्‍ट के साथ लड़खड़ाती हुई वाणी में गदाधर ने कहा- ‘प्रभों! मैं कह ही क्‍या सकता हूँ? आपकी इच्‍छा के विरुद्ध कहने की किस की सामर्थ्‍य है? आप स्‍वतंत्र ईश्‍वर हैं।’*

*प्रभु ने कहा-‘मैं तुमसे आज्ञा चाहता हूँ।’ गदाधर अब अपने वेग को और अधिक न रोक सके। वे ढाह मार-मारकर जारों से रुदन करने लगे। प्रभु भी अधीर हो उठे। उस समय का दृश्‍य बड़ा ही करुणापूर्ण था। प्रभु की प्रेममय गोद में पड़े हुए गदाधर अबोध बालक की भाँति फूट-फूटकर रुदन कर रहे थे। प्रभु उनके सिर पर हाथ फेरते हुए उन्‍हें ढाढ़स बंधा रहे थे। प्रभु अपने अश्रुओं को वस्‍त्र के छोर से पोंछते हुए कह रहे थे- ‘गदाधर! तुम मुझसे पृथक न रह सकोगे। मैं जहाँ भी रहूँगा तुम्‍हें साथ ही रखूँगा। तुम इतने अधीर क्यों होते हो? तुम्हारे बिना तो मुझे वैकुण्ठ का सिंहासन भी रुचिकर नहीं होगा। तुम इस प्रकार की अधीरता को छोड़ों।’ ‘मंगलमय भगवान सब भला ही करेंगे।’ यह कहते-कहते गदाधर का हाथ पकड़े हुए प्रभु श्रीवास के घर पहुँचे। गदाधर की दोनों आँखे लाल पड़ी हुई थी। नाक में से पानी बह रहा था। शरीर लड़खड़ाया हुआ था; कहीं पैर रखते थे, कहीं जाकर पड़ते थे। सम्‍पूर्ण देह डगमगा रही थी। प्रभु के हाथ के सहारे से वे यंत्र की तरह जले जा रहे थे।*

_क्रमशः .................._
_(संत श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी)_

🙏🏼🌹 *राधे राधे*🌹🙏🏼

🌹 *जय श्री राधे*🌹
🌸 *भवसागर से पार कराने वाला प्रसाद*
🌸भगवान् श्रीकृष्ण का प्रसाद ​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​

*सखियों के श्याम, गीता माधुर्य, ध्यानावस्था में प्रभु से वार्तालाप, दया सागर की दया, पंचामृत, अमृत वचन, प्रश्नोत्तर मणिमाला, भगवन्नाम माहात्म्य, शिखा धारण की आवश्यकता, सार संग्रह, नल दमयंती।*

Shri Radha Raman Ji
26/12/2023

Shri Radha Raman Ji

25/12/2023
01/05/2023

मोहिनी एकादशी पर राधा रानी का मोहिनी शृंगार

*🕉️🌿‼️श्रीकृष्ण ‼️☘️🕉️*
*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,*
*हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!*
*꧁!! Զเधॆ Զเधॆ !!꧂*
*‼️जय श्री कृष्ण‼️*

मोहिनी एकादशी पर राधा रानी का मोहिनी शृंगार  *🕉️🌿‼️श्रीकृष्ण ‼️☘️🕉️*      *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,*    *हे नाथ नार...
01/05/2023

मोहिनी एकादशी पर राधा रानी का मोहिनी शृंगार *🕉️🌿‼️श्रीकृष्ण ‼️☘️🕉️*
*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,*
*हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!*
*꧁!! Զเधॆ Զเधॆ !!꧂*
*‼️जय श्री कृष्ण‼️*

चंदन लगाय अंग, लिए प्राण प्यारी संग,गति है निराली मुख बांसुरी धरण की।लीजै ललि झांकी बांकी, बांके की बांकी अदा की,बलि बलि...
01/05/2023

चंदन लगाय अंग, लिए प्राण प्यारी संग,
गति है निराली मुख बांसुरी धरण की।

लीजै ललि झांकी बांकी, बांके की बांकी अदा की,
बलि बलि जाऊं प्यारी बिहारी चरण की।। 🧿💛

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110092

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