Aviral Foundation

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08/08/2018

एलोविरा (घृतकुमारी) उगाकर ये 40 लाभ लें
एलोवेरा के लाभ तो अनगिनत हैं. कुछ लाभों के बारे में तो आप पक्का जानते होंगे. पर आज हम आपको इस पौधे के गुण और लाभ की एक लम्बी सूची से अवगत कराएँगे – ताकि आप मन ही जाएं की गज़ब का पौधा है यह एलोवेरा!
इसे संजीवनी के नाम से संबोधित करना किसी भी प्रकार की अतिशयोक्ति नहीं कहलाई जा सकती है। इसकी पूरे विश्व भर में ४०० से ज़्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं हैं, परंतु इनमें से केवल ५ प्रजातियां हीं हमारे स्वास्थ्य के लिए गुणकारी हैं। आइए, इस लेख में हम आपको एलोवेरा के चालीस गज़ब फ़ायदों के विषय में बताएँगे।
1. इसका प्रयोग एक पौष्टिक आहार के रूप में भी होता है। विभिन्न मिनरल्स, विटामिन्स से युक्त आलोवेरा थोड़ी गर्मी के साथ अपना प्रभाव देता है।
2. रोज सुबह इसके लगभग एक छोटे प्याले के सेवन से दिन-भर शरीर में ताकत और स्फूर्ति बनी रहती है।
3. यह बवासीर जैसे कष्टदायी रोग में आराम पहुँचाती है।
4. मधुमेह के रोगियों के लिए फ़ायदेमंद है।
5. गर्भाशय के विभिन्न रोगों में यह चमत्कारी है।
6. पेट से संबन्धित समस्याओं में रामबाण उपाय है।
7. जोड़ों के दर्द में काफी आराम पहुँचा देता है।
8. त्वचा की तमाम समस्याएँ जैसे मुंहासे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी हुई त्वचा, झुर्रियों, चेहरे के दाग-धब्बों, आंखों के काले घेरों, फटी एड़ियों के लिए यह काफी लाभप्रद है।
9. यह खून की कमी को दूर करता है तथा शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
10. जलने, कटने पर, अंदरूनी चोटों पर एलोवेरा अपने एंटी बैक्टेरिया और एंटी फंगल गुण के कारण घाव को जल्दी भरता है।
11. यह रक्त में शुगर लेवेल को नियंत्रित रखता है।
12. यह मच्छर से भी त्वचा को सुरक्षित रखता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से मॉस्किटो रिपेलेंट जैसे गुण मौजूद होते हैं।
13. एलोवेरा का इस्तेमाल जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम, ब्यूटी क्रीम, हेयर स्पा इत्यादि के निर्माण में भी किया जाता है।
14. एलोवेरा जेल या रस में मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ होंगे।
15. एलोवेरा के रस में नारियल के तेल की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर कोहनी, घुटने व एड़ियों पर कुछ देर लगाकर धोने से इन जगहों पर पड़ने वाला कालापन दूर होता है।
16. इसकी पत्तियों का सेवन करने से पेट में कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।
17. गुलाबजल में एलोवेरा का रस मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा की खोई नमी लौटती है।
18. एलोवेरा के गूदे में मुलतानी मिट्टी या चंदन पावडर मिलाकर लगाने से त्वचा के कील-मुंहासे आदि लंबे समय के लिए मिट जाते हैं।
अभी तक आप एलोवेरा के फायदे तो कई जान चुके हैं. अब यह एक और गज़ब का फायदा देखिये:
19. चूंकि यह पौधा कम पानी और कम उर्वरक मिट्टी में भी आसानी से पनप सकता है, इसलिए आप इसे बड़ी आसानी से ही अपने घर में छोटे छोटे गमलों में लगा सकते हैं।
20. यह जलने कटने के घावों पर मरहम की तरह काम करने के साथ साथ उनके निशानों पर भी अच्छी तरह काम करता है।
21. इसके अलावा एलोवेरा को रक्त शोधन, पाचन क्रिया के लिए काफी गुणकारी और सहायक भी माना जाता है।
22. यह इसलिए भी फायदेमंद है, क्योंकि यह केवल एक पक्ष की अवधि के दौरान ही अपना असर दिखाने में सक्षम है।
23. नियमित रूप से एलोवेरा जूस को पीने से शरीर में नयी ऊर्जा का संचार होता है।
24. एलोवेरा जूस के सेवन से त्वचा में निखार आने लगता है। इसके नियमित सेवन से आपकी त्वचा लंबे समय तक जवां और चमकदार लगती है।
25. इसको सिर्फ रोजाना पीने से या बालों में लगाने से चमक आती है, रूसी दूर हो जाती है और टेक्सचर भी अच्छा हो जाता है।
26. एलोवेरा में बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने की अद्भुत क्षमता होती है। ये डैंड्रफ दूर करने में काफी उपयोगी है।
27. इसके एंटी फंगल गुणों के कारण यह त्वचा पर फंगल इन्फेक्शन में काफी आराम देकर इन्हे जल्दी ठीक भी कर देता है।
28. एलोवेरा का कोई भी अतिरिक्त प्रभाव नहीं होता। शरीर में रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाकर खून की कमी को पूरा करता है।
29. इसका नियमित उपयोग करके लंबी उम्र तक स्वस्थ रहा जा सकता है। आप बड़ी ही सुविधा के साथ आरोग्य पा सकते हैं।
30. वज़न घटाना बहुत लोगों के लिए आजकल एक सामान्य और आसान सा काम नहीं रहा। परंतु एलोवेरा जूस के नियमित इस्तेमाल से वजन बड़ी आसानी से घट जाता है।
31. इसका आप घरेलू फेसवास बना कर भी इसका उपयोग कर सकते हैं।
32. एलोवेरा के रस में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर सिर में लगाने से सिर दर्द में आराम पहुँचता है।
33. बहुत ही कम लोग जानते हैं कि एलोवेरा का जूस पीने से पीलिया में भी फायदा पहुँचता है।
34. गर्भावस्था के दौरान पेट पर आने वाले स्ट्रेच मार्क्स दूर करने में एलोवेरा बेहद लाभकारी है।
35. एलोवेरा के गूदे से मसाज करने पर त्वचा खींची हुई होती है। इसमें मौजूद एंजाइम ढीली पड़ चुकी त्वचा को हटाकर नयी त्वचा को नमी से युक्त रखते है।
36. आजकल बहुत ही कम उम्र के बच्चों को भी चश्मा चढ़ गया है। ऐसे में आंवला और जामुन के साथ एलोवेरा का उपयोग करने से ये आंखों का भी बचाव करता है और साथ ही साथ बालों को मजबूती मिलती है।
37. शेव करने के बाद यदि चेहरा कट जाता है या फिर जलन होने लगती है, तो ऐसे में एलोवेरा का जेल एक ऑफ्टर शेव की तरह भी काम करता है।
38. एलोवेरा में सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचाने की क्षमता होती है। ऐसे में इसका एक सनस्क्रीन की तरह इस्तेमाल हो सकता है।
39. इसके एंटी ऑक्सीडेंट नमी को बनाए रखने में मदद करते हैं।
40. इसका इस्तेमाल मोइश्चराइजर के निर्माण में किया जाता है, क्योंकि यह किसी भी किस्म की त्वचा पर उत्तम है।

07/08/2018

अंजीर का पेड़ लगायें और 40 लाभ सब तक पहुंचायें...हमारे देश में बंगलूर, सूरत, कश्मीर, उत्तर-प्रदेश, नासिक तथा मैसूर में यह ज्यादा पैदा होता है। अंजीर का पेड़ लगभग 4.5 से 5.5 मीटर ऊंचा होता है। इसके पत्ते और शाखाओं पर रोएं होते हैं तथा कच्चे फल हरे और पकने पर लाल-आसमानी रंग के हो जाते हैं। सूखे अंजीर हमेशा उपलब्ध होते हैं। कच्चे फल की सब्जी बनती है। इसके बीजों से तेल निकाला जाता है।
स्वाद : यह खाने में मीठा होता है।
स्वरूप : अंजीर एक बिलायती (विदेशी) पेड़ का फल है जो गूलर के समान होता है। यह जंगलों में अक्सर पाया जाता है। आमतौर पर लोग इसे बनगूलर के नाम से भी पुकारते हैं।
स्वभाव : यह गर्म प्रकृति का होता है।
दोषों को दूर करने वाला : अंजीर (Anjeer / fig)के हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने के लिए बादाम का उपयोग किया जाता है।
मात्रा (खुराक) : Anjeer kaise khana chahiye
अंजीर के पांच दाने तक ले सकते हैं। अधिक सेवन यकृत (जिगर) और आमाशय के लिए हानिकारक हो सकता है।
गुण :
अंजीर के सेवन से मन प्रसन्न रहता है। यह स्वभाव को कोमल बनाता है। यकृत और प्लीहा (तिल्ली) के लिए लाभकारी होता है, कमजोरी को दूर करता है तथा खांसी को नाश करता है।
विभिन्न रोगों में उपयोगी : Anjeer se rogon ka upchar
1. कब्ज
• 3 से 4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात्रि में सोने से पूर्व खाएं और ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे कब्ज और बवासीर में लाभ होता है।
• माजून अंजीर 10 ग्राम को सोने से पहले लेने से कब्ज़ में लाभ होता है।
• अंजीर 5 से 6 पीस को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें, पानी को छानकर पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) में राहत मिलती है।
• 2 अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर खाकर ऊपर से पानी पीने पेट साफ हो जाता है।
• अंजीर के 4 दाने रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें। सुबह उन दानों को थोड़ा सा मसलकर जल पीने से अस्थमा में बहुत लाभ मिलता है तथा इससे कब्ज भी नष्ट हो जाती है।
• स्थायी रूप से रहने वाली कब्ज अंजीर खाते रहने से दूर हो जाती है।
• अंजीर के 2 से 4 फल खाने से दस्त आते हैं। खाते समय ध्यान रहे कि इसमें से निकलने वाला दूध त्वचा पर न लगने पाये क्योंकि यह दूध जलन और चेचक पैदा कर सकता है।
• खाना खाते समय अंजीर के साथ शहद का प्रयोग करने से कब्ज की शिकायत नहीं रहती है।
2. दमा :
• दमा जिसमें कफ (बलगम) निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है। इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को शीघ्र ही आराम भी मिलता है।
• प्रतिदिन थोड़े-थोड़े अंजीर खाने से पुरानी कब्जियत में मल साफ और नियमित आता है। 2 से 4 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में गर्म करके खाने से कफ की मात्रा घटती है, शरीर में नई शक्ति आती है और दमा (अस्थमा) रोग मिटता है।
3. प्यास की अधिकता : बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करें।
4. मुंह के छाले : अंजीर का रस मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
5. प्रदर रोग : अंजीर का रस 2 चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं।
6. दांतों का दर्द :
• अंजीर का दूध रुई में भिगोकर दुखते दांत पर रखकर दबाएं।
• अंजीर के पौधे से दूध निकालकर उस दूध में रुई भिगोकर सड़ने वाले दांतों के नीचे रखने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं तथा दांतों का दर्द मिट जाता है।
7 . पेशाब का अधिक आना : 3-4 अंजीर खाकर, 10 ग्राम काले तिल चबाने से यह कष्ट दूर होता है।
8. मुंहासे : कच्चे अंजीर का दूध मुंहासों पर 3 बार लगाएं।
9. त्वचा के विभिन्न रोग :
• कच्चे अंजीर का दूध समस्त त्वचा सम्बंधी रोगों में लगाना लाभदायक होता है।
• अंजीर का दूध लगाने से दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और दाद मिट जाते हैं।
• बादाम और छुहारे के साथ अंजीर को खाने से दाद, दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते है।
10. दुर्बलता (कमजोरी) :
• पके अंजीर को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा-चबाकर सेवन करें। इसका सेवन 40 दिनों तक नियमित करने से शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।
• अंजीर को दूध में उबालकर-उबाला हुआ अंजीर खाकर वही दूध पीने से शक्ति में वृद्धि होती है तथा खून भी बढ़ता है।
11. रक्तवृद्धि और शुद्धि हेतु : 10 मुनक्के और 5 अंजीर 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर खा लें। फिर ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे रक्तविकार दूर हो जाता है।
12. पेचिश और दस्त : अंजीर का काढ़ा 3 बार पिलाएं।
13. ताकत को बढ़ाने वाला : सूखे अंजीर के टुकड़े और छिली हुई बादाम गर्म पानी में उबालें। इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर 8 दिन तक गाय के घी में पड़ा रहने दें। बाद में रोजाना सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें। छोटे बालकों की शक्तिक्षीण के लिए यह औषधि बड़ी हितकारी है।
14. जीभ की सूजन : सूखे अंजीर का काढ़ा बनाकर उसका लेप करने से गले और जीभ की सूजन पर लाभ होता है।
15. पुल्टिश : ताजे अंजीर कूटकर, फोड़े आदि पर बांधने से शीघ्र आराम होता है।
16. दस्त साफ लाने के लिए : दो सूखे अंजीर सोने से पहले खाकर ऊपर से पानी पीना चाहिए। इससे सुबह साफ दस्त होता है।
17. क्षय यानी टी.बी के रोग : इस रोग में अंजीर खाना चाहिए। अंजीर से शरीर में खून बढ़ता है। अंजीर की जड़ और डालियों की छाल का उपयोग औषधि के रूप में होता है। खाने के लिए 2 से 4 अंजीर का प्रयोग कर सकते हैं।
18. फोड़े-फुंसी : अंजीर की पुल्टिस बनाकर फोड़ों पर बांधने से यह फोड़ों को पकाती है।
19. गिल्टी : अंजीर को चटनी की तरह पीसकर गर्म करके पुल्टिस बनाएं। 2-2 घंटे के अन्तराल से इस प्रकार नई पुल्टिश बनाकर बांधने से `बद´ की वेदना भी शांत होती है एवं गिल्टी जल्दी पक जाती है।
20. सफेद कुष्ठ (सफेद दाग) :
• अंजीर के पेड़ की छाल को पानी के साथ पीस लें, फिर उसमें 4 गुना घी डालकर गर्म करें। इसे हरताल की भस्म के साथ सेवन करने से श्वेत कुष्ठ मिटता है।
• अंजीर के कच्चे फलों से दूध निकालकर सफेद दागों पर लगातार 4 महीने तक लगाने से यह दाग मिट जाते हैं।
• अंजीर के पत्तों का रस श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) पर सुबह और शाम को लगाने से लाभ होता है।
• अंजीर को घिसकर नींबू के रस में मिलाकर सफेद दाग पर लगाने से लाभ होता है।
21. गले के भीतर की सूजन : सूखे अंजीर को पानी में उबालकर लेप करने से गले के भीतर की सूजन मिटती है।
22. श्वासरोग : अंजीर और गोरख इमली (जंगल जलेबी) 5-5 ग्राम एकत्रकर प्रतिदिन सुबह को सेवन करने से हृदयावरोध (दिल की धड़कन का अवरोध) तथा श्वासरोग का कष्ट दूर होता है।
23. खून और वीर्यवद्धक :
• सूखे अंजीर के टुकड़ों एवं बादाम के गर्भ को गर्म पानी में भिगोकर रख दें फिर ऊपर से छिलके निकालकर सुखा दें। उसमें मिश्री, इलायची के दानों की बुकनी, केसर, चिरौंजी, पिस्ते और बलदाने कूटकर डालें और गाय के घी में 8 दिन तक भिगोकर रखें। यह मिश्रण प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम की मात्रा में खाने से कमजोर शक्ति वालों के खून और वीर्य में वृद्धि होती है।
• एक सूखा अंजीर और 5-10 बादाम को दूध में डालकर उबालें। इसमें थोड़ी चीनी डालकर प्रतिदिन सुबह पीने से खून साफ होता है, गर्मी शांत होती है, पेट साफ होता है, कब्ज मिटती है और शरीर बलवान बनता है।
• अंजीर को अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर शक्तिशाली होता है, ।
24. शरीर की गर्मी : पका हुआ अंजीर लेकर, छीलकर उसके आमने-सामने दो चीरे लगाएं। इन चीरों में शक्कर भरकर रात को ओस में रख दें। इस प्रकार के अंजीर को 15 दिनों तक रोज सुबह खाने से शरीर की गर्मी निकल जाती है और रक्तवृद्धि होती है।
25. जुकाम : पानी में 5 अंजीर को डालकर उबाल लें और इसे छानकर इस पानी को गर्म-गर्म सुबह और शाम को पीने से जुकाम में लाभ होता है।
26. फेफड़ों के रोग : फेफड़ों के रोगों में पांच अंजीर एक गिलास पानी में उबालकर छानकर सुबह-शाम पीना चाहिए।
27. मसूढ़ों से खून का आना : अंजीर को पानी में उबालकर इस पानी से रोजाना दो बार कुल्ला करें। इससे मसूढ़ों से आने वाला खून बंद हो जाता है तथा मुंह से दुर्गन्ध आना बंद हो जाती है।
28. तिल्ली (प्लीहा) के रोग में : अंजीर 20 ग्राम को सिरके में डुबोकर सुबह और शाम रोजाना खाने से तिल्ली ठीक हो जाती है।
29. खांसी :
• अंजीर का सेवन करने से सूखी खांसी दूर हो जाती है। अंजीर पुरानी खांसी वाले रोगी को लाभ पहुंचाता है क्योंकि यह बलगम को पतला करके बाहर निकालता रहता है।
• 2 अंजीर के फलों को पुदीने के साथ खाने से सीने पर जमा हुआ कफ धीरे-धीरे निकल जाएगा।
• पके अंजीर का काढ़ा पीने से खांसी दूर हो जाती है।
30. गुदा चिरना : सूखा अंजीर 350 ग्राम, पीपल का फल 170 ग्राम, निशोथ 87.5 ग्राम, सौंफ 87.5 ग्राम, कुटकी 87.5 ग्राम और पुनर्नवा 87.5 ग्राम। इन सब को मिलाकर कूट लें और कूटे हुए मिश्रण के कुल वजन का 3 गुने पानी के साथ उबालें। एक चौथाई पानी बच जाने पर इसमें 720 ग्राम चीनी डालकर शर्बत बना लें। यह शर्बत 1 से 2 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम पीयें।
31. बवासीर (अर्श) :
• सूखे अंजीर के 3-4 दाने को शाम के समय जल में डालकर रख दें। सुबह उन अंजीरों को मसलकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट खाने से अर्श (बवासीर) रोग दूर होता है।
• अंजीर को गुलकन्द के साथ रोज सुबह खाली पेट खाने से शौच के समय पैखाना (मल) आसानी से होता है।
32. कमर दर्द : अंजीर की छाल, सोंठ, धनियां सब बराबर लें और कूटकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसके बचे रस को छानकर पिला दें। इससे कमर दर्द में लाभ होता है।
33. आंवयुक्त पेचिश : पेचिश तथा आवंयुक्त दस्तों में अंजीर का काढ़ा बनाकर पीने से रोगी को लाभ होता है।
34. अग्निमान्द्य (अपच) होने पर : अंजीर को सिरके में भिगोकर खाने से भूख न लगना और अफारा दूर हो जाता है।
35. प्रसव के समय की पीड़ा : प्रसव के समय में 15-20 दिन तक रोज दो अंजीर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
36. बच्चों का यकृत (जिगर) बढ़ना : 4-5 अंजीर, गन्ने के रस के सिरके में गलने के लिए डाल दें। 4-5 दिन बाद उनको निकालकर 1 अंजीर सुबह-शाम बच्चे को देने से यकृत रोग की बीमारी से आराम मिलता है।
37. फोड़ा (सिर का फोड़ा) : फोड़ों और उसकी गांठों पर सूखे अंजीर या हरे अंजीर को पीसकर पानी में औटाकर गुनगुना करके लगाने से फोड़ों की सूजन और फोड़े ठीक हो जाते हैं।
38. दाद : अंजीर का दूध लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
39. सिर का दर्द : सिरके या पानी में अंजीर के पेड़ की छाल की भस्म मिलाकर सिर पर लेप करने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।
40. सर्दी (जाड़ा) अधिक लगना : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में अंजीर को खिलाने से सर्दी या शीत के कारण होने वाले हृदय और दिमाग के रोगों में बहुत ज्यादा फायदा मिलता है।

22/07/2018

तुलसी जी को तोडने से पहले वंदन करो।

1. तुलसी जी को नाखूनों से कभी नहीं तोडना चाहिए,नाखूनों के तोडने से पाप लगता है।

2.सांयकाल के बाद तुलसी जी को स्पर्श भी नहीं करना चाहिए ।

3. रविवार को तुलसी पत्र नहीं
तोड़ने चाहिए ।

4. जो स्त्री तुलसी जी की पूजा करती है। उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है । उनके घर
सत्पुत्र का जन्म होता है ।

5. द्वादशी के दिन तुलसी को नहीं तोडना चाहिए ।

6. सांयकाल के बाद तुलसी जी लीला करने जाती है।

7. तुलसी जी वृक्ष नहीं है! साक्षात् राधा जी का अवतार है ।

8. तुलसी के पत्तो को चबाना नहीं चाहिए।

"तुलसी वृक्ष ना जानिये।
गाय ना जानिये ढोर।।
गुरू मनुज ना जानिये।
ये तीनों नन्दकिशोर।।

अर्थात-

तुलसी को कभी पेड़ ना समझें
गाय को पशु समझने की गलती ना करें और गुरू को कोई साधारण मनुष्य समझने की भूल ना करें, क्योंकि ये तीनों ही साक्षात भगवान रूप हैं

21/07/2018

🌳 *वर्षा ऋतुचर्या* 🌳

🌱 ग्रीष्म ऋतु के अंत में उत्तरायण समाप्त हो जाता है और सूर्य दक्षिण दिशा की ओर गमन करने लगता है। उत्तरायण में रूक्ष वायु तथा सूर्य की प्रखर किरणों से दुर्बल बन शरीर को दक्षिणायन में धीरे-धीरे बल प्राप्त होने लगता है।

🌱 वर्षा ऋतु में भूमि से वाष्प निकलने तथा आकाश से जल बरसने के कारण हवा में आर्द्रता (नमी) रहती है। यह आर्द्रता श्वासोच्छवास के द्वारा शरीर में प्रवेश कर जठराग्नि को मंद कर देती है।

🌱 ग्रीष्म ऋतु में संचित हुई वायु वर्षा ऋतु की शीत जलवायु के कारण प्रकुपित हो जाती है व जल में अम्लरस की वृद्धि होने से पित्त का संचय होने लगता है।

🌱 *आहारः*
वायु और वर्षा से युक्त विशेष शीतवाले दिनों में भोजन में खट्टे, नमकीन व स्निग्ध पदार्थों की प्रधानता होनी चाहिए। बाहर की नमीयुक्त हवा का प्रतिकार करने के लिए शरीर तीखे-नमकीन पदार्थों की माँग करता है। इसकी पूर्ति पकौड़े-भुजिया आदि का अल्प मात्रा में सेवन कर की जा सकती है। इन दिनों में लहसुन, अदरक, सोंठ, काली मिर्च, हरी मिर्च, अजवायन, हींग आदि तीखे पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर की नमी कम करने में तथा जठराग्नि प्रज्वलित रखने में मदद मिलती है।

🌱 अनाज में पुराने जौ, गेहूँ और चावल, सब्जियों में सहिजन (सरगवा),कोमल मूली, पेठा, कोमल बैंगन, शलगम, सूरन, परवल, लौकी, हफ्ते में एक दिन करेला, पुनर्नवा (गदहपूर्ना), दालों में कुल्थी, मूँग, तेलों में तिल का तेल सेवनीय है। सब्जियों में आलू, गोभी, ग्वारफली, भिंडी, दालों में अरहर (तुअर), उड़द, राजमा, चना तथा पचने में भारी पदार्थ, सूखा मेवा, मिठाई त्याज्य हैं।

🌱 *श्रावण मास में दूध व हरी सब्जियाँ तथा भाद्रपद में छाछ व लौकी का सेवन नहीं करना चाहिए।*

🌱 *विहारः*
इन दिनों में मच्छरों के काटने पर उत्पन्न मलेरिया आदि रोगों से बचने के लिए शरीर की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें।

🌱 *दिन में सोना, नदियों में स्नान करना व बारिश में भीगना व ओस में सोना हानिकारक है।*

इस ऋतु में गोमूत्र के पान, मुलतानी मिट्टी से स्नान, घर तथा आस-पास के परिसर में धूप करने, गोबर अथवा गोमूत्र से भूमि को स्वच्छ व पवित्र रखने तथा परंपरागत व्रत उपवास रखने से व यज्ञ-याग, जप आदि करने से स्वास्थ्य-लाभ के साथ-साथ महान धर्म लाभ भी होता है।

🌱 *विशेषः*
*मंद जठराग्नि, प्रकुपित वायु तथा शारीरिक बल की अल्पता इस ऋतु में अनेक व्याधियों को आमंत्रित करती है। संधिवात, दमा, खाँसी जैसे वातजन्य रोग जोर पकड़ने लगते हैं। दूषित जल तथा हवा से हैजा, मलेरिया जैसी संक्रामक व्याधियाँ फैलने लगती हैं।*

इनसे रक्षा करने तथा जठराग्नि को प्रज्वलित रखने हेतु कुछ उपाय यहाँ दिये जा रहे हैं।

🌱 *सुरक्षा-उपायः*
*जठराग्नि की रक्षा के लिए सबसे प्रथम उपचार है उपवास। अपनी संस्कृति में श्रावण तथा भाद्रपद महीनों में अधिकाधिक व्रत तथा उपवासों का जो विधान है उसके पीछे धार्मिक लाभ के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षण प्रधान हेतु है। मंद गति से कार्य करने वाले पाचन-संस्थान पर अन्न का अधिक बार डालकर रोगों को आमंत्रित करने की अपेक्षा हलका, सुपाच्य भोजन लेना व उपवास रखना बुद्धिमानी है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार सप्ताह में कम से कम एक दो दिन उपवास अवश्य रखना चाहिए। श्रावण महीने में किसी एक अनाज (जैसे केवल मूँग) पर रहना भी उपवास माना जाता है। इन दिनों में अनाज को पहले सेंककर बाद में उपयोग करना भी लाभदायी है। इससे वह पचने में हलका हो जाता है।*

🌱 *वर्षा ऋतु में शहद का सेवन अत्यन्त हितकर है। अदरक, लहसुन व नींबू का सेवन वर्षा ऋतु में विशेष लाभदायी है। खासकर नींबू वर्षाजन्य बीमारियों को दूर करता है।*

🌱 *इन दिनों में पानी उबालकर पीयें। पानी में सोंठ, नागरमोथ, जीरा अथवा धनिया डालकर उबालने से वह विशेष हितकर होता है।*

🌱 *वर्षाकाल में रसायन के रूप में बड़ी हरड़ का चूर्ण में सेन्धा नमक मिलाकर ताजे जल के साथ सेवन करना चाहिए।*

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सावन के महीने में बेल लगायें व लाभ पायें देखें व पढ़ें इस पोस्ट में... बेल के लाभ – फल जड़ छाल पत्तों के औषधीय गुणबेल के फ...
21/07/2018

सावन के महीने में बेल लगायें व लाभ पायें देखें व पढ़ें इस पोस्ट में... बेल के लाभ – फल जड़ छाल पत्तों के औषधीय गुण
बेल के फायदे जानने से पहले हम यह जान लेते हैं की बेल फल को अन्य नामों जैसे Aegle Marmelos, Correa, Rutaceae, Bael Fruit, Bael इत्यादि के नाम से भी जाना जाता है | बेल का पेड़ बहुत प्राचीन है । इस पेड़ में पुराने पीले लगे हुए फल दुबारा हरे हो जाते हैं तथा इनको तोड़कर लगभग 6 महीने तक पत्तों की सहायता से ज्यों का त्यों रखा जा सकता है | कहने का आशय यह है की बेल फल को छह महीनों तक पत्तों की सहायता से इस तरह सुरक्षित रखा जा सकता है ताकि इनके औषिधिय गुण समाप्त न होयें | बेल के फायदे की बात करें तो बेल के फल, पत्ते, जड़, छाल ही नहीं अपितु इस पेड़ की छाया भी आरोग्य कारक होती है यही कारण है की बेल को पेड़ को पवित्र पेड़ माना जाता है | बेल के पेड़ के स्वरूप की बात करें तो बेल का पेड़ 25-30 फुट ऊंचा, 3-4 फुट मोटा, पत्ते जुड़े हुए, त्रिफाक और गन्धयुक्त होते हैं |
पूरा आर्टिकल (लेख) एक नज़र में. [show ]
बेल की प्रकृति (Nature of Bael in Hindi):
बेल फल की यदि हम बात करेंगे तो हम पाएंगे की इसका स्वरूप 2-4 इंच व्यास का गोलाकार धूसर और पीले रंग का होता है । इसके बीज छोटे कड़े होते हैं । बेल की तासीर गर्म होती हैं । बेल के अंदर टैनिक एसिड़, एक उड़नशील तेल, एक कड़वा एक चिकना लुआबदार पदार्थ पाया जाता हैं । बेल के फायदे यह हैं की बेल की जड़, तत्वों और छाल में चीनी को कम करने वाले तत्व एवं टैनिन पाये जाते हैं । बेल के फल के गूदे में मांरशेलीनिस तथा बीजों में पीले रंग का तेल पाया जाता है जोकि बहुत ही बढ़िया तरीके से पेट साफ़ करने का कार्य करता है | बेल का फल-लघु (छोटा), तीखा, कषैला होता है |
बेल के औषधीय गुण या बेल के फायदे:
जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की बेल फल में ही नहीं अपितु इसकी जड़, छाल, पत्तों और यहाँ आधे पके हुए फल में भी औषधीय गुण विद्यमान होते हैं | इसलिए बेल के फायदे के इस क्रम में हम बेल के फल, जड़ छाल एवं पत्तों के फायदे के बारे में भी जानने की कोशिश करेंगे |
बेल के फायदे में पहला फायदा यह है की बेल कफ वात को शांत करने वाला, रुचिकारक, उत्तेजक, फल होता है |
यह पाचन को ठीक करने का, दिल को स्वस्थ रखने का, एवं खून को गाढ़ा करने का भी काम करता है |
यह बलगम को समाप्त करने वाला भी होता है |
इसका उपयोग मूत्र (पेशाब) और शर्करा को कम करने के लिए भी किया जा सकता है |
बेल के फायदे में अगला फायदा यह है की यह अनेक बीमारियों जैसे दस्त, खुनी दस्त, डायबिटीज, श्वेतप्रदर इत्यादि में लाभकारी होता है |
इसके अलावा मासिक धर्म में अधिक खून आना एवं खूनी बवासीर जैसी समस्या को भी यह ठीक करने में सहायक होता है |
बेल का फल उत्तेजक, पाचन, चिकना, गर्म तथा दर्द, गाठिया, पेचिश, कफातिसार, वात, एवं कफनाशक होता है तथा यह आंतों को ताकत भी देता है |
बेल का आधा पका हुआ फल भी छोटा, कड़वा, कषैला, होता है जिसकी तासीर गर्म ही होती है यह चिकना, संकोचक, पाचन, हृदय और कफवात को नष्ट करने में सहायक होता है ।
बेल की मज्जा और बीज के तेल अधिक गर्म और तेज वात को समाप्त करते हैं ।
बेल के पके फल भारी, कड़वा, तीखा रस युक्त मधुर (मीठा) होता है। यह गर्म जलन पैदा करने वाला, पेट साफ करने वाला, वातनुलोमक, वायु को उत्पन्न करने वाला और हृदय को ताकत देने वाला फल है |
बेल के पत्तों के फायदे:
बेल के फायदे में अगला क्रम इसके पत्तों का है बेल के पत्तों के औषधिय गुण कुछ इस प्रकार से हैं |
बेल के पत्ते संकोचक, पाचक, त्रिदोष (वात, पित और कफ) विकार को नष्ट करने वाले होते हैं |
बेल के पत्तों का दूसरा फायदा यह है की ये घाव की सूजन को दूर करने में सहायक होते हैं |
इसके अलावा शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन को कम करते हैं |
विष तथा मधुमेह में भी लाभदायक होते हैं |
पेट में पानी भरना एवं पीलिया जैसी बीमारी में भी बेल के पत्तों के फायदे देखे गए हैं |
इसके अलावा बुकह्र एवं आँखों से तिरछे दिखाई देने वाले रोग के उपचार में भी सायक होते हैं |
बेल के जड़ व छाल के फायदे:
जहाँ तक बेल के जड़ व छाल के फायदों की बात है इनकी गिनती बेल के फायदे में ही होती है जिनका विवरण निम्नलिखित है |
बेल की जड़ और छाल उल्टी, दर्द, त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को दूर करने में सहायक होते हैं |
नाड़ी तंतुओं के लिये शामक, कुछ नशा पैदा करने वाली, के तौर पर भी इसको प्रयोग में लाया जाता है |
बेल की जड़ और छाल बुखार को दूर करने वाले, भूख को बढ़ाने वाले पदार्थ के तौर पर भी प्रयोग में लाये जा सकते हैं |
यह दस्त,पेशाब करने में कष्ट होना, हृदय की कमजोरी जैसी बीमारियों में भी प्रयोग में लाये जाते हैं |
विभिन्न बीमारियों में बेल के फायदे:
बेल के फायदे के अगले कर्म में हम कुछ बीमारियों का वर्णन करेंगे जिनमे बेल के फल, पत्ते या जड़, छाल के प्रयोग से राहत मिलती है |
1. बालों या सिर में जूँ होने पर :
बेल के फायदे में अगला फायदा यह है की यदि बालों या सिर में जूँ पैदा हो जाएँ तो इनको नष्ट करने के लिए बेल के पके हुए फल के आधे कटोरी जैसे छिलके को साफकर उसमें तिल का तेल और कपूर मिलाकर दूसरे भाग से ढककर रखने से तेल को सिर में लगाने से सिर में जूँ नहीं रहती हैं ।
2. दिल का दर्द होने पर :
इस बेल के फायदे में बेल के पत्तों का उपयोग किया जाता है एक ग्राम बेल के पत्तों के रस में 5 ग्राम गाय का घी मिलाकर शहद के साथ सेवन करने से दिल के दर्द में जल्दी आराम मिलता है ।
3. बाल रोग की स्थिति में :
5 से 10 मिलीलीटर कच्चे फलों की मज्जा तथा आंवले की गुठली के काढ़े को दिन में 3 बार सेवन करने से बाल रोगों में लाभ मिलता है ।
4. हैजा व उल्टी बीमारियों में:
बेल के फायदे में अगला फायदा लेने के लिए 10–10 ग्राम आम की मोंगी और बेल की गिरी को लेकर पीसकर 500 ग्राम पानी में पकायें । पकने पर 100 ग्राम शेष रहने पर इसमें शहद और मिश्री को मिलाकर 5 से 20 ग्राम तक इच्छानुसार रोगी को पिलाने से हैजा और उल्टी में आराम मिलता है । इसके अलावा दूसरी विधि यह है की 1 से 4 ग्राम तक बेल की गिरी और गिलोय को पीसकर आधा किलो पानी में पकायें । पकने पर 250 ग्राम शेष रहने पर इसे छानकर थोड़ा-थोड़ा रोगी को पिलायें । यदि हैजा तेज हो तो इस काढ़े में जायफल, कपूर और छुहारा मिलाकर काढ़ा तैयार करें तथा बार-बार थोड़ा-थोड़ा सा रोगी को पिलाते रहें इससे हैजे और उल्टी में जल्द ही आराम मिलता है ।
5. पेट में पानी का भर जाने की समस्या होने पर:
यदि किसी के पेट में पानी भरने की समस्या हो गई हो तो उसे बेल के फायदे लेने के लिए 25 से 50 ग्राम ताजे बेल के पत्तों का रस लेना होगा और उसमें 1 से डेढ़ ग्राम छोटी पिप्पली का चूर्ण मिलाकर रोगी को पिलाना होगा इससे पेट में पानी भरने की समस्या में बेहद आराम मिलता है |
6. मलेरिया का बुखार होने पर
मलेरिया के बुखार में बेल के फायदे लेने के लिए 7 मिलीलीटर बेल के पते का रस सुबह और शाम लेने से मलेरिया के बुखार में लाभ प्राप्त होता है |
7. गर्भवती स्त्री को उल्टी होने पर:
गर्भवती स्त्री को उल्टी होने पर चावलों के पानी के साथ बेलगिरी के चूर्ण को मिलकर पीने से उल्टियाँ बंद हो जाती हैं |
8. शरीर की बदबू को दूर करना:
शरीर की बदबू में बेल के फायदे लेने के लिए समबन्धित व्यक्ति को बेल के पाटों का रस निकालना होगा, और इस रस में शंख का चूर्ण मिलाकर शरीर पर लेप लगाना होगा इससे शरीर से आने वाली बदबू कम हो जाएगी | इसके अलावा शरीर से बदबू दूर करने की दूसरी विधि यह है की बेल के पत्तों के साथ काली अगर, खस, चन्दन इत्यादि को पीसकर लेप तैयार कर लें और फिर इस लेप को शरीर पर लगा लें |
https://youtu.be/9TDtA7DQ_xo

https://m.youtube.com/watch?v=lhubogwU_Vs

आयुर्वेद में बेल को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद फल माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ बेल मधुर, रुचिकर, पाचक ...

नरेंद्र मोदी साहेब,आप लाख कोशिश करके अब्दुल को 'स्किल इंडिया' के तहत 'स्वरोजगार' मुहैय्या कराओ, इकबाल के घर 'शौचालय' बनव...
03/06/2018

नरेंद्र मोदी साहेब,

आप लाख कोशिश करके अब्दुल को 'स्किल इंडिया' के तहत 'स्वरोजगार' मुहैय्या कराओ,

इकबाल के घर 'शौचालय' बनवाओ,

आयशा को 'तीन तलाक' से आजादी दिलाओ,

रजिया को धुएँ से मुक्ति दिलाकर 'उज्जवला योजना' से मुफ्त गैस बाटों,

रहीम चाचा को कारखाना चलाने के लिये 'ब्याज मुक्त लोन' दो,

शफीक, खुर्शीद का 'जनधन योजना' में खाता खुलवाओ,

परवेज को उच्च शिक्षा के लिये 'छात्रवृति' दो और इस्माइल पुरा में 'बिजली' के खंभे लगवाओ...!

लेकिन एक बात गाँठ बाँधकर रख लो ये किसी कीमत पर अपना वोट तुम्हें नहीं देगे..!

और जीत के बाद बोलेंगे कि 'अल्लाह' की जीत हुई और 'राम' की हार...!

समय अभी भी है,

'सबका साथ सबका विकास' का काम पूरा हो गया हो तो कुछ दिन 'विकास' को आराम दो...!

'मजबूत हौसले से कुछ कड़़े फैसले' ले लो, क्यूंकि आज भी तुम्हारे मतदाता 'रूठे' हैं, 'टूटे' नहीं हैं...!
#नमो_नमो 🇮🇳

माँ
16/05/2018

माँ

24/05/2017

माननीय इंद्रेश जी का राम पर शोद्ध

संघ के एक प्रचारक हैं इन्द्रेश कुमार. अंतर-पांथिक और अंतर्धार्मिक संवाद के लिये संघ इनको नियुक्त करता है. पूज्य बाबासाहेब की १२५ वीं जयंती के अवसर पर इनको दिल्ली के हंसराज महाविद्यालय में आमंत्रित किया गया था. संघ के प्रचारक का नाम सुनते ही वहां का माहौल और भी विषाक्त हो गया था. संघ, ब्राहमणवाद और मनुवाद के खिलाफ नारे लगने लगे थे. हरेक वक्ता आता और सिर्फ जहर उगलता. एक ने कह दिया कि "वी डोंट एक्सेप्ट रामा एस ए सिम्बल ऑफ़ सोशल हार्मोनी" यानि हम राम को सामजिक समरसता का प्रतीक नहीं मानते क्योंकि उस आर्य राम ने अनार्य बालि का छिपकर वध किया था. अपनी बारी आई तो इन्द्रेश कुमार ने माइक संभाला और इसी विषय से बोलना शुरू किया. इन्द्रेश कुमार ने कहा कि मान लीजिये कि बालि अनार्य था तो फिर सुग्रीव क्या था? वो भी अनार्य था. दो अनार्य भाइयों के बीच किसी गलतफहमी के चलते झगड़ा था, झगड़े में बड़े भाई ने छोटे भाई को न सिर्फ मृत्यदंड की सजा दी थी बल्कि उसकी पत्नी को बलात अपने कब्जे में कर रखा था और उसके डर से सुग्रीव मारा-मारा फिर रहा था. त्रिलोक के अंदर बालि के भय से किसी के अंदर ये साहस नहीं था कि वो सुग्रीव को न्याय दिला सके. राम ने सुग्रीव को न्याय दिलाने का संकल्प किया. बालि का वध किया. अब बालि के वध के बाद आर्य राम ने क्या किया? राम ने राज्य पर स्वयं कब्ज़ा नहीं किया बल्कि उस पर उसी अनार्य सुग्रीव को प्रतिष्ठित किया. सुग्रीव की पत्नी रुमा को मुक्त कराकर राम ने उसे अपने अधीन नहीं किया बल्कि उसे ससम्मान सुग्रीव को सौंप दिया. बालि के परिजनों के साथ भी अन्याय न हो इसलिये राम ने उसकी पत्नी तारा को राज्य की मुख्य पटरानी के पद पर सुशोभित किया और प्रधान सेनापति के पद पर उसके बेटे अंगद को बिठाया. उस राम को आप सवर्ण कहिये, क्षत्रिय कहिये, मनुवादी कहिये या जो भी कहिये पर सत्य यही है कि राम ने राज्य पर कब्ज़ा नहीं किया, राज्य की किसी संपत्ति को अपने उपयोग में नहीं लिया, रूमा या तारा को प्रताड़ित नहीं किया और न ही बालि के बेटे के साथ अन्याय होने दिया. राम आपके लिये सवर्ण, क्षत्रिय या मनुवादी होंगें पर दुनिया के लिये राम न्याय की मूर्ति थे.

इसके बाद इन्द्रेश कुमार ने श्रोताओं से मुखातिब होकर कहा कि अगर बालि अनार्य थे तो फिर हनुमान क्या थे? वो भी अनार्य थे, अब आप सब मुझे बतायें कि आपके अनुसार भारतवर्ष का कौन सा ऐसा आर्य है जिसके यहाँ देवता रूप में हनुमान पूजित नहीं हैं? हाँ, खुद को अनार्य कहने वाले इन साहब के यहाँ ही हनुमान पूजित नहीं होंगे.

इन्द्रेश कुमार ने बोलना ख़त्म किया तो पूरी सभा-मंडली उनके पीछे थी, अब वहां उन दलित नेताओं के नाम के नारे नहीं बल्कि इन्द्रेश कुमार के नाम के जयकारे लग रहे थे. आयोजक उनसे कह रहे थे कि ये भीड़ आपके बोलने से पहले हमारी थी अब आपकी है.

सन्देश यही है, वंचित समाज से जुड़िये, उनके पास जाइये, उनसे दर्द सांझा करिए, उन्हें सत्य का ज्ञान कराइए. उनके अंदर सदियों से सिर्फ जहर और अलगाव ही भरा गया है. उनके अंदर की किसी शंका का समाधान करने उनके पास हमसे पहले ईसा वाले और इस्लाम वाले पहुँच जाते हैं. १९३९ में विकार-उल-मुल्क ने दलितों को लेकर जो कुटिल मांग उठाई थी वो अब परवान चढ़ चुकी है ये बिष-बेल और न बढ़े इसकी जिम्मेदारी हमारी है. उनको भीमटा कहकर पूज्य बाबा साहेब के नाम का अपमान मत करिये. उनको बताइए कि हमारे हिन्दू समाज में जातियों का भेद नहीं था, लैंगिक असमानताएं नहीं थी. समाज के निचली पायदान पर बैठी शबरी माता के जूठे बेर खाने वाले श्रीराम के सखाओं में वानर वीर सुग्रीव थे तो निषाद राज केवट भी थे, हमारे महान हिन्दू समाज और भारत देश पर दुर्भाग्य की काली छाया उस दिन से पड़नी आरंभ हुई जब विस्तारवाद की आकांक्षा वाले मजहबों का यहाँ पर पदार्पण हुआ और इस दुर्भाग्य का अंत भी तभी होगा जब हम इन विस्तारवादियों की चाल में नहीं आयेंगे.

20/05/2017

साभार #कहानी
कहानी का शीर्षक है "दूसरी औरत"
"मैं अपनी बीवी से बहुत प्यार करता हूं |" उदास सी आवाज में कह कर माइकल ने सिर झुका लिया |
"इसमें परेशानी वाली क्या बात है ? मैं समझ सकता हूं कि तुम सच बोल रहे हो...|"
"पर उसे मेरी बात पर यकीन नहीं आता...|"
"यकीन नहीं आता... क्या मतलब ? मेरे ख्याल में तुम एक अच्छे, सभ्य और शालीन युवक हो तुम्हारी बीवी को तुम पर विश्वास करना चाहिए | मैंने अक्सर तुम्हें उसके लिए उपहार लाते देखा है, बाजार में शॉपिंग करते देखा है और पिछली बार तो तुमने उसके जन्मदिन पर एक बड़े होटल में शानदार पार्टी भी दी थी | तुम हमेशा उसके प्रति उदार रहे हो, मेरे दोस्त |"
"हां, मैं रोज़ी के प्रति हमेशा बहुत उदार रहा हूं | जो वह कहती है, मानता हूं | फिर भी वह सीधे मुंह मुझसे बात नहीं करती | उसे समझना बहुत मुश्किल है |"
"तुम ठीक कहते हो | इन औरतों को समझना वाकई बहुत मुश्किल होता है। कभी बिल्कुल अपनी सी लगती हैं और कभी एकदम अजनबी बन जाती हैं | अब मेरी पत्नी को ही देखो... दो साल कितना बहकाया उसने मुझे | बार-बार रुठ कर अपने फादर के घर चली जाती थी |"
कहकर सैम ने हाथ में पकड़ा गिलास मेज पर रख दिया और कुर्सी पर कुछ ज्यादा ही पसर गया |
"मन छोटा मत करो, दोस्त ! लो, पहले ये भुने हुए काजू खाओ | मेरे ख्याल में तुम्हारी वाइफ वाकई अच्छी है | कितना ख्याल रखती है तुम्हारा | जान देती है तुम पर... पर मेरी ने तो जीना हराम कर रखा है |"
"माइकल, मैं तुम्हें बहुत करीब से तो नहीं जानता | बस, पिछले दो साल की दोस्ती है हमारी | पहली बार हम क्रिसमस पर चर्च में मिले थे | और आज शायद छठी या सातवीं बार इस बीयर बार में मिल रहे हैं | पर मैं दावे से कह सकता हूं कि तुम मुझसे कुछ छुपा रहे हो |" सैम ने प्लेट से कुछ चीज़ फिंगर उठाए और गिलास से वाइन का एक सिप लेते हुए माइकल के चेहरे पर नजरें गड़ा दीं |
"दरअसल... !"
"दरअसल क्या ? बताओ... दोस्त से कैसा पर्दा ?"
"दरअसल वह उस दूसरी औरत को बर्दाश्त नहीं कर पा रही |"
सैम के हाथ से गिलास फिसलते-फिसलते बचा | उसने माइकल का कंधा थाम लिया- "क्या कह रहे हो तुम... ? दूसरी औरत ?... और वह भी तुम्हारी जिंदगी में ? मजाक तो नहीं कर रहे, यार ? कहीं दिमाग तो नहीं फिर गया तुम्हारा ? तुम ऐसा कैसे कर सकते हो ? तुमने तो अपनी वाइफ से लव मैरिज की थी |"
"की थी... जरुर की थी मैंने रोज़ी से लव मैरिज |... पर मैं उसे भी बहुत प्यार करता हूं |"
"मुझे बहुत हैरानी हो रही है | मैंने तुम्हें इस तरह का आदमी नहीं समझा था | मैं तो हमेशा यही समझता था कि तुम अपनी फैमिली से बेहद प्यार करते हो | एक सीधे-सादे और घरेलू आदमी हो तुम | मुझे अब भी यकीन नहीं आ रहा | लगता है तुम्हें कुछ ज्यादा ही चढ़ गई है | अब अगला पैग बिल्कुल मत लेना | लाओ, अपना गिलास मुझे दो |"
"ठीक है, जैसा तुम सोचना चाहो सोच सकते हो | किसी को समझने के लिए कुछ पल का साथ भी बहुत होता है | मैंने कहा था ना मेरी बीवी मेरी बात पर अब विश्वास नहीं करती | तुम भी नहीं करोगे तो कोई तूफान नहीं आ जाएगा | लाओ, यह बोतल मुझे दे दो | बस, एक आखिरी पैग और लेना चाहता हूं | बुरा मत मानना | दोस्त, पूरी तरह रिलेक्स होना चाहता हूं |"
"ठीक है ! पर आज तुमने कुछ ज्यादा ही चढ़ा ली |"
"आगे सुनो, दोस्त | तुम सुन रहे हो ना... ?"
"हां, मैं सुन रहा हूं... होश तो तुम खो रहे हो |"
"दरअसल उस दिन क्रिसमस पर मैं उससे मिलने चला गया था तो मेरी वाइफ रोज़ी ने घर के बर्तन पटक दिए | दस दिन बाद उसका फोन आया कि वह बीमार है | मैं डॉक्टर को लेकर उसके घर गया | मेरे गले से लग कर वह देर तक रोती रही | इस पर भी रोजी ने बवाल खड़ा कर दिया |"
"तुम्हारी वाइफ को यह सब बताता कौन है ? क्या वह तुम्हारी चौकीदारी करती है ?"
"हां, कई बार करती भी है | लेकिन मैं भी सारी बातें उसे सच-सच बता देता हूं | कुछ नहीं छिपाता उससे |"
"बड़ी हिम्मत की बात है ! एक बात सच- सच बताना | पहले अपना चेहरा ठीक करो | हां, ऐसे | अब मेरी आंखों में देखो | यूं व्यंग्य से मत हंसो दोस्त, सच सच बताओ | तुम्हें जीसस की कसम है | क्या वह बहुत सुंदर है ?"
" हां, बहुत सुंदर |"
"तुम्हारी वाइफ से भी ज्यादा ?"
"हां, रोज़ी से भी ज्यादा |"
"तुम्हें वह आखिरी पैग नहीं लेना चाहिए था | मुझे लगता है नशे के कारण तुम बहक रहे हो | याद करो, पिछली बार तुमने मुझे बताया था कि तुम्हारी वाइफ दुनिया की सबसे सुंदर औरत है |"
"हां, कहा था |... पर वह उससे ज्यादा सुंदर नहीं है |"
"लगता है तुम उस औरत से कुछ ज्यादा ही प्रभावित हो | तुम किसी दबाव में तो नहीं हो ना दोस्त ? क्या वह बहुत पैसे वाली है ?"
"नहीं, वह गरीब है और मुझे ही अपनी दौलत समझती है |"
"क्या वह तुम्हारी जिंदगी में तुम्हारी शादी के बाद आई है ?"
"नहीं |"
"फिर तुम्हारा दिमाग वाकई फिर गया है। यदि तुम्हें उससे इतना ही प्रेम था तो तुम्हें रोज़ी से शादी नहीं करनी चाहिए थी |"
"हां, कल की घटना से मुझे ऐसा ही महसूस हो रहा है |"
"कल क्या गुल खिला आए तुम ? लगता है तुम साइकी हो गए हो | अपनी बीवी को तंग करने में तुम्हें मजा आने लगा है |"
"मुझे कोई मजा नहीं आता | मैंने कहा ना, मैं अपनी बीवी से बहुत प्यार करता हूं |"
"बहुत प्यार करता हूं | झूठ बोलते हो तुम... |"
"नहीं, मैं सच कह रहा हूं | बाई गॉड... |"
"फिर कल क्या हुआ था... ?"
"कल मेरा जन्मदिन था... |"
"ओह ! हैप्पी बर्थडे टू यू... |"
"थैंक यू... | हां, तो कल मेरा जन्मदिन था | और मैंने अपना बर्थडे उसी के घर पर, उसी के साथ मनाया |"
"व्हाट नॉनसेंस... ? रब्बिश ! बट व्हाय... ?"
"क्योंकि रोज़ी नहीं चाहती थी कि मैं उसे पार्टी का निमंत्रण पत्र भेजूं | उसे इनवाइट करूं | रात को घर भी नहीं आया | वहीं रुका | इसीलिए तूफान मचा रखा है उसने |"
"बड़े अजीब आदमी हो तुम | दूसरी औरत का ख्याल रखते हो और अपनी बीवी का नहीं | रात को दूसरी औरत के घर पर रुकते हो और कहते हो कि मेरी बीवी ने तूफान मचा रखा है | तुम दो नावों में सवार हो, दोस्त | साफ शब्दों में कहूं तो ढोंगी, मक्कार और धोखेबाज़ इंसान हो तुम | मुझे दु:ख है कि मैंने तुम्हारे जैसे चालबाज इंसान के साथ दोस्ती रखी... |" कहते हुए सैम उठ खड़ा हुआ और अपना कोट पहनने लगा |
"बैठो सैम, कम से कम इस वक्त मुझे छोड़ कर ना जाओ | मुझे तुम्हारी बेहद जरूरत है | तुम तो मुझे समझने की कोशिश करो |"
"खाक समझूं... अगर मेरी दोस्ती चाहते हो तो खुद को बदलो, माइकल | सुधारो खुद को | गलत तुम हो, तुम्हारी वाइफ नहीं |"
माइकल की आंखें भर आई | रूंधे गले से बोला- "वह भी यही कहती है कि मैं गलत हूं लेकिन इससे मैं उस औरत को छोड़ तो नहीं सकता | आखिर उसने मुझे पाल-पोसकर इतना बड़ा किया है | मां है वो मेरी...|"
-- #मनजीत_शर्मा_'मीरा'

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