Krishnam Bhakti Path

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सत्य, सनातन, सदाचार और सकारात्मकता की शाश्वत विजय के पावन प्रतीक महापर्व दीपावली की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए...
20/10/2025

सत्य, सनातन, सदाचार और सकारात्मकता की शाश्वत विजय के पावन प्रतीक महापर्व दीपावली की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!

दीपोत्सव केवल दीप जलाने का अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा में आशा का आलोक, समाज में समरसता का स्पंदन और राष्ट्र में नवजागरण का संकल्प है।

प्रभु श्री राम और माता जानकी की कृपा से घरों के साथ हृदय भी आलोकित हों, सभी के जीवन में विश्वास, उत्साह और उमंग का दीप प्रज्वलित हो, यही प्रार्थना है।

जय जय सियाराम!

   #दीपावली तिथि महूर्त एवं महत्व 🪷* #इस वर्ष दीपावली की तारीख को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि आखिर...
16/10/2025



#दीपावली तिथि महूर्त एवं महत्व 🪷*

#इस वर्ष दीपावली की तारीख को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि आखिरकार दिवाली कब मनाई जाए। लगातार लोगों के मन में संशय बना हुआ कि इस बार दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाए या फिर 21 अक्टूबर को। दिवाली की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि इस वर्ष कार्तिक अमावस्या की तिथि एक दिन के बजाय दो दिन पड़ रही है। दिवाली की डेट को लेकर आपके मन में चल रही दुविधा को दूर करने के लिए धर्म में वैदिक पंचांग के आधार पर तिथियों और व्रत-त्योहारों की गणनाएं की जाती हैं। पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि पर रौशनी का पर्व दीपावली मनाई जाती है, किन्तु इस बार अमावस्या तिथि दो दिन है जिसकी वजह से दिपावली की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई। यानी कार्तिक अमावस्या तिथि 20 अक्तूबर को भी और 21 अक्टूबर को भी है।

#हिंदू धर्म में तिथियों का विशेष महत्व होता है और इनमें उदया तिथि का तो और भी महत्व होता है। हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार उदया तिथि के आधार पर ही मनाया जाता है। उदया तिथि से मतलब दिन में सूर्योदय के समय जो तिथि होती है उसको ही महत्व दिया जाता है। इस तरह से कुछ लोग उदया तिथि को महत्व देते हुए दिवाली 21 अक्टूबर को मनाना ज्यादा अच्छा समझ रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का तर्क है कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन सदैव प्रदोष काल से लेकर मध्य रात्रि के बीच में पड़ने वाली कार्तिक अमावस्या के दौरान मनाया जाता है, इसलिए दिवाली 20 अक्टूबर को ही मनाया जाना चाहिए। आइए इन दोनों तर्कों को ज्योतिष और मुहूर्त शास्त्र के नियमों की कसौटी में रख कर देखते हैं।

#क्या हैं वैदिक शास्त्र के नियम*

#शास्त्रों में दिवाली पर लक्ष्मी पूजन सदैव अमावस्या तिथि के रहने पर और प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद से लेकर देर रात तक करने का विधान होता है अर्थात अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और निशिताकाल के मुहूर्त में दीपावली मनाना शुभ माना गया है। इस कारण से ज्योतिष शास्त्र के ज्यादातर पंडितों और विद्वानों का मनाना है कि जिस दिन कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि रहें तो प्रदोष काल से लेकर आधी रात को लक्ष्मी पूजन करना और दीपावली मनाना ज्यादा शुभ व शास्त्र सम्मत रहता है।

#ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी का प्रादुर्भाव प्रदोष काल में ही हुआ था, जिसके चलते निशीथ काल में मां लक्ष्मी की पूजा और उनसे जुड़ी सभी प्रकार की साधनाएं आदि करना विशेष महत्व का होता है।

#वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर प्रारम्भ हो जाएगी, जो 21अक्टूबर की शाम तक रहेगी। इस तरह से दिवाली पर सभी प्रकार की वैदिक स्थितियां 20 अक्तूबर के दिन लागू रहेगी जबकि 21 अक्टूबर 2025 को अमावस्या तिथि सूर्योदय के दौरान रहेगी लेकिन समाप्ति शाम को 05 बजकर 54 मिनट पर हो जाएगी।

#व्रत-त्योहारों की तारीखों को लेकर ज्यादातर मामलों में उदया तिथि का विशेष महत्व दिया जाता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में अन्य चीजों और मुहूर्तों को ध्यान में रखते हुए मिलने वाली तिथि का अधिक महत्व दिया जाता है।

#इस वजह से जिस रात्रि को प्रदोष काल से लेकर मध्य रात्रि के बीच व्याप्त रहने वाली अमावस्या तिथि को ध्यान में रखते हुए दिपावली का पर्व 20 अक्टूबर को अधिकतर विद्वान और पंडित मनाने की सलाह दे रहे हैं। इस प्रकार लक्ष्मी पूजन के साथ दिपावली 20 अक्टूबर को मनाएं।

#लक्ष्मी पूजन मुहूर्त*

#पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की प्रदोषव्यापिनी अमावस्या तिथि पर दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। 20 अक्टूबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए पहला शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में ही प्राप्त हो रहा है।

20 अक्टूबर को प्रदोष काल शाम 05 बजकर 40 मिनट लेकर 08 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। वहीं वृषभ लग्न (दिल्ली के समयानुसार) शाम 08 बजकर 11 मिनट से लेकर रात को 10 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। ऐसे में गृहस्थ लोग इस समय के दौरान लक्ष्मी पूजन करें।

#स्थिर लग्न और प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का महत्व*

#मां लक्ष्मी का प्रादुर्भाव प्रदोष काल में हुआ था और स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजन करने से महालक्ष्मी स्थिर रहती हैं। ऐसे में दिवाली पर प्रदोष काल में पड़ने वाले वृषभ लग्न में ही महालक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करना अति उत्तम रहेगा। पंचांग के अनुसार 20 अक्टूबर को वृषभ लग्न शाम को 8:11 से लेकर रात्रि 10:07 तक रहेगा। साथ ही इस समय प्रदोष काल भी मिल जाएगा। प्रदोषकाल, वृषभ लग्न और चौघड़ियां का ध्यान रखते हुए लक्ष्मी पूजन के लिए 20 अक्टूबर की शाम को 7:12 से लेकर 9:08 के बीच का समय सर्वोत्तम रहेगा। कुल मिलाकर 1 घण्टा 56 मिनट का यह मुहूर्त लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ

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