20/06/2026
📢 बिहार में लोकतंत्र का मज़ाक: पहले वोट, फिर 'गुमनाम' नेतृत्व और अब कानून के नाम पर एनकाउंटर? 😡
बिहार की जनता ने जिस भरोसे के साथ वोट दिया था, क्या उसका यही सिला मिलना था? चुनाव के समय चेहरा छिपाकर वोट मांगना और बाद में राज्य की कमान ऐसे हाथों में सौंप देना, जिनके खुद के दावों पर सवाल उठ रहे हों—क्या यह बिहार के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं है?
🚨 सवाल : कानून का राज या 'सरेंडर' के बाद एनकाउंटर?
भोजपुर के शाहपुर (बिलौटी) में भरत तिवारी की मौत ने बिहार पुलिस और सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
• ग्रामीण और परिजनों का साफ आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया था।
• सोशल मीडिया लाइव में भी कथित तौर पर हथियार फेंकने की बात सामने आई।
• अगर किसी ने सरेंडर कर दिया था, तो कानून को हाथ में लेकर उसकी जान क्यों ली गई? क्या अब रक्षक ही भक्षक बनेंगे?
🔥 जनता पूछती है हिसाब!
एक तरफ शिक्षा और योग्यता के नाम पर मज़ाक और दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था के नाम पर कथित फर्जी एनकाउंटर। बिहार की जनता ने विकास और न्याय के लिए वोट दिया था, बंद कमरों की राजनीतिक साज़िशों और अराजकता के लिए नहीं।
अब समय आ गया है कि जनता जागृत हो और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाए!