Vrindavan Wala Bhagirath

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://youtu.be/SWdkWRSmt5Qमैंने इस वीडियो में श्री भगवान परशुराम जी के जन्म स्थान को दिखाया है सभी लोगों से अनुरोध है कि वी...
26/02/2023

://youtu.be/SWdkWRSmt5Q
मैंने इस वीडियो में श्री भगवान परशुराम जी के जन्म स्थान को दिखाया है सभी लोगों से अनुरोध है कि वीडियो को देखकर बताएं कैसा बना है तथा चैनल को सब्सक्राइब भी करने की कृपा करें

Janapav also known as Janapav Kuti is a mountain at altitude of 881m from sea level & highest peak of vindhayanchal range. a famous tourist place located on ...

07/11/2022
https://youtu.be/lCkgAzB6zK4
19/10/2022

https://youtu.be/lCkgAzB6zK4

Ujjain is situated in Madhya Pradesh and Ujjain is only 55 Km away from Indore. Everyday thousands of pilgrims come to ujjain for mahakaleshwar temple which ...

Radhakund darshan
19/10/2022

Radhakund darshan

यह भट्टी श्री राधारमण मंदिर(वृन्दावन) की है जो पिछले 478 सालों से लगातार जल रही है।कई वर्षों से जल रही इस भट्टी का उपयोग...
19/10/2022

यह भट्टी श्री राधारमण मंदिर(वृन्दावन) की है जो पिछले 478 सालों से लगातार जल रही है।

कई वर्षों से जल रही इस भट्टी का उपयोग ठाकुर जी की रसोई तैयार करने के लिए किया जाता है। श्री राधारमण मंदिर में दीपक जलाने से लेकर प्रसाद तैयार करने में भी इस भट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। मंदिर की प्रथम आरती के लिए अग्नि वैदिक मंत्रों के माध्यम से आज से 478 वर्ष पहले प्रकट की गई थी। इसके लिए अरण्य मंथन का सहारा लिया गया था।

उसके बाद ही ठाकुर ने श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी के मन में यह भाव पैदा किया कि इसी अग्नि से भविष्य में ठाकुर की आरती की जाय। यहीं कारण है कि इस मंदिर में करीब पौने पांच सौ वर्ष से माचिस का प्रयोग नहीं किया गया। आज भी ठाकुर की आरती पौने पांच सौ वर्ष पूर्व प्रकट अग्नि से की जाती है।..

राधे राधे 🙏🙏🌹🌹
साभार.....

 #जावत राधारानी के तथाकथित पति अभिमन्यु और सास जतिला और भाभी कुटिला का स्थान है।  सबसे पहले, हमने जावत में राधा राधाकांत...
19/10/2022

#जावत राधारानी के तथाकथित पति अभिमन्यु और सास जतिला और भाभी कुटिला का स्थान है। सबसे पहले, हमने जावत में राधा राधाकांत के आकर्षक देवताओं के मुख्य मंदिर का दौरा किया। वहाँ से हरिनम भिक्षा रोटियाँ करते हुए गाँव से होते हुए हम राधा बृजकिशोरजी के चरण कमलों में किशोरी कुंड पहुँचे। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर द्वारा लिखित चमत्कार चंद्रिका से जावत की लीलाओं को सुनकर भक्त प्रसन्न हो गए। इसके बाद, हमने तेर कदंबा का दौरा किया जो कृष्ण और चरवाहे लड़कों का पसंदीदा गाय-पालन स्थल है और श्रील रूप गोस्वामी का भजन स्थान है जहाँ उन्होंने कई साहित्य की रचना की।

https://youtu.be/Q-xWNxb_biY
18/10/2022

https://youtu.be/Q-xWNxb_biY

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नंदगांव एवं यशोदा कुंड.. यहां यशोदा मैया नित्य प्रतिदिन स्नान के लिए आती थी! 💙
18/10/2022

नंदगांव एवं यशोदा कुंड.. यहां यशोदा मैया नित्य प्रतिदिन स्नान के लिए आती थी! 💙

🙏🏻कार्तिक महातम 🙏🏻2️⃣भगवान श्रीकृष्ण आगे बोले: हे प्रिये! जब गुणवती को राक्षस द्वारा अपने पति एवं पिता के मारे जाने का स...
12/10/2022

🙏🏻कार्तिक महातम 🙏🏻

2️⃣भगवान श्रीकृष्ण आगे बोले: हे प्रिये! जब गुणवती को राक्षस द्वारा अपने पति एवं पिता के मारे जाने का समाचार मिला तो वह विलाप करने लगी, हा नाथ! हा पिता! मुझको त्यागकर तुम कहां चले गये? मैं अकेली स्त्री, तुम्हारे बिना अब क्या करूँ?अब मेरे भोजन, वस्त्र आदि की व्यवस्था कौन करेगा। घर में प्रेमपूर्वक मेरा पालन-पोषण कौन करेगा? मैं कुछ भी नहीं कर सकती, मुझ विधवा की कौन रक्षा करेगा, मैं कहां जाऊँ? मेरे पास तो अब कोई ठिकाना भी नहीं रहा। इस प्रकार विलाप करते हुए गुणवती चक्कर खाकर धरती पर गिर पड़ी और बेहोश हो गई।

🌸बहुत देर बाद जब उसे होश आया तो वह पहले की ही भाँति करुण विलाप करते हुए शोक सागर में डूब गई। कुछ समय के पश्चात जब वह संभली तो उसे ध्यान आया कि पिता और पति की मृत्यु के बाद मुझे उनकी क्रिया करनी चाहिए। जिससे उनकी गति हो सके इसलिए उसने अपने घर का सारा सामान बेच दिया और उससे प्राप्त धन से उसने अपने पिता एवं पति का श्राद्ध आदि कर्म किया। तत्पश्चात वह उसी नगर में रहते हुए आठों पहर भगवान विष्णु की भक्ति करने लगी। उसने मृत्युपर्यन्त तक नियमपूर्वक सभी एकादशियों का व्रत और कार्तिक महीने में उपवास एवं व्रत किये।

❤️हे प्रिये! एकादशी और कार्तिक व्रत मुझे बहुत ही प्रिय हैं। इनसे मुक्ति, भुक्ति, पुत्र तथा सम्पत्ति प्राप्त होती है। कार्तिक मास में जब तुला राशि पर सूर्य आता है तब ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करने व व्रत व उपवास करने वाले मनुष्य मुझे बहुत प्रिय हैं क्योंकि यदि उन्होंने पाप भी किये हों तो भी स्नान व व्रत के प्रभाव से उन्हें मोक्ष प्राप्त हो जाता है।

🌸कार्तिक में स्नान, जागरण, दीपदान तथा तुलसी के पौधे की रक्षा करने वाले मनुष्य साक्षात भगवान विष्णु के समान है। कार्तिक मास में मन्दिर में झाड़ू लगाने वाले, स्वस्तिक बनाने वाले तथा भगवान विष्णु की पूजा करने वाले मनुष्य जन्म-मरण के चक्कर से छुटकारा पा जाते हैं।

❤️यह सुनकर गुणवती भी प्रतिवर्ष श्रद्धापूर्वक कार्तिक का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने लगी। हे प्रिये! एक बार उसे ज्वर हो गया और वह बहुत कमजोर भी हो गई फिर भी वह किसी प्रकार गंगा स्नान के लिए चली गई। गंगा तक तो वह पहुंच गई परन्तु शीत के कारण वह बुरी तरह से कांप रही थी, इस कारण वह शिथिल हो गई तब मेरे(भगवान विष्णु) दूत उसे मेरे धाम में ले

कलयुग की शबरी चित्र में जो बुजुर्ग महिला बैठी हुई हैं इनके दर्शन करना भी बड़े सौभाग्य की बात है क्योंकि यह पिछले 46 वर्ष...
28/09/2022

कलयुग की शबरी

चित्र में जो बुजुर्ग महिला बैठी हुई हैं इनके दर्शन करना भी बड़े सौभाग्य की बात है क्योंकि यह पिछले 46 वर्षों से राधारमन जी के प्रांगण में ही बैठी रहती हैं और कभी राधारमन जी की गलियाँ और राधारमन जी का मंदिर छोड़कर इधर-उधर वृंदावन में कहीं नहीं गई। इन बुजुर्ग महिला की आयु 81 वर्ष हो चुकी है। जब यह 35 वर्ष की थीं तब यह जगन्नाथ पुरी से चलकर अकेली वृंदावन के लिए आई थीं।

आज से 46 वर्ष पहले कल्पना कीजिए वृंदावन कैसा होगा। यह अकेली स्त्री सब कुछ छोड़कर केवल भगवान के भरोसे वृंदावन आ गईं और किसी बृजवासी ने जब इनको राधारमन जी का मंदिर दिखाकर यह कह दिया यही वृंदावन है, तब से लेकर आज तक इनको 46 वर्ष हो गए यह राधारमन जी का मंदिर छोड़कर कहीं नहीं गईं।

यह मंदिर के प्रांगण में बैठकर 46 वर्ष से भजन गाती हैं, मंगला आरती के दर्शन करती हैं, कभी-कभी गोपी गीत गाती हैं।

जब इनको कोई भक्त यह कहता है कि, माताजी! वृंदावन घूम आओ।

तो यह कहती हैं - मैं कैसे जाऊं?

लोग बोलते हैं - बस से या ऑटो से चली जाओ।

यह कहती हैं - जब मुझे किसी बृजवासी ने यह बोल दिया यही वृंदावन है तो मेरे बिहारी जी तो मुझे यही मिलेंगे। मेरे लिए तो सारा वृंदावन इसी राधारमन मंदिर में ही है।

देखिए प्रेम और समर्पण की कैसी पराकाष्ठा है! आज के समय में संत हो या आम जन सब धन-दौलत, रिश्ते-नातों के पीछे भाग रहे हैं तो आज भी संसार में ऐसे दुर्लभ भक्त हैं जो केवल और केवल भगवान के पीछे भागते हैं। यह देखने में बहुत निर्धन दिखते हैं परंतु इनका परम धन इनके भगवान "राधारमन" जी हैं।

हम लोग थोड़ी सी भक्ति करते हैं और अपने आप को भक्त समझ बैठते हैं। थोड़ी सी भी परेशानी आई नहीं कि भगवान को कोसने लगते हैं या उस भगवान को छोड़कर किसी अन्य देवी-देवता की पूजा करने लग जाते हैं। हमारे भीतर समर्पण तो है ही नहीं।

आज संसार के अधिकतर लोग परेशानियों से परेशान होकर कभी एक बाबा से दूसरे बाबा पर दूसरे बाबा से तीसरे बाबा पर भाग रहे हैं और तो ओर हम ना किसी एक देवता को अपना इष्ट मानते हैं। अधिकतर लोग भगवान को अगर प्रेम भी करते हैं तो किसी ना किसी भौतिक आवश्यकता के लिए करते हैं परंतु इन दुर्लभ संत योगिनी को देखिये जो सब कुछ त्याग कर केवल भगवान के भरोसे 46 वर्ष से राधारमन जी के प्रांगण में बैठी हैं। ऐसे संतो के चरणों में कोटि-कोटि प्रणा

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