बाल व्यास श्री रोहितानंद जी महाराज

  • Home
  • India
  • Vrindavan
  • बाल व्यास श्री रोहितानंद जी महाराज
Directions

बाल व्यास श्री रोहितानंद जी महाराज बाल व्यास श्री रोहितानन्द जी महाराज "?

11/11/2021
23/10/2021

🙏🏻भक्ति कितने प्रकार की होती है...?🙏🏻

श्रीमद्भागवतम् 7.5.23 में भक्ति के ९ प्रकार बताए गए हैं जिसे नवधा भक्ति कहते हैं।

श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्।
अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम् ॥

श्रवण (परीक्षित),
कीर्तन (शुकदेव),
स्मरण (प्रह्लाद),
पादसेवन (लक्ष्मी),
अर्चन (पृथुराजा),
वंदन (अक्रूर),
दास्य (हनुमान),
सख्य (अर्जुन) और
आत्मनिवेदन (बलि राजा)
इन्हें नवधा भक्ति कहते हैं....

श्रवण: 🙏🏻
श्री कृष्ण की लीला, कथा, महत्व, शक्ति, स्त्रोत इत्यादि को परम श्रद्धा सहित अतृप्त मन से निरंतर सुनना।

कीर्तन: 🙏🏻
श्री​ कृष्ण के गुण, चरित्र, नाम, पराक्रम अर्थात हरे कृष्ण महामंत्र का आनंद एवं उत्साह के साथ कीर्तन करना।

स्मरण: 🙏🏻
निरंतर अनन्य भाव से श्री कृष्ण का स्मरण करना, उनके महात्म्य और शक्ति का स्मरण कर उस पर मुग्ध होना।

पाद सेवन: 🙏🏻
श्री कृष्ण के चरणों का आश्रय लेना और उन्हीं को अपना सर्वस्य समझना।

अर्चन: 🙏🏻
मन, वचन और कर्म द्वारा पवित्र सामग्री से श्री कृष्ण के चरणों का पूजन करना।

वंदन: 🙏
भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को पवित्र भाव से नमस्कार करना या उनकी सेवा करना।

दास्य: 🙏
श्री कृष्ण को स्वामी और अपने को दास समझकर परम श्रद्धा के साथ सेवा करना।

सख्य: 🙏
श्री कृष्ण को ही अपना परम मित्र समझकर अपना सर्वस्व उसे समर्पण कर देना तथा सच्चे भाव से अपने पाप पुण्य का निवेदन करना।

आत्म निवेदन: 🙏🏻
अपने आपको भगवान श्री कृष्ण के चरणों में सदा के लिए समर्पण कर देना और कुछ भी अपनी स्वतंत्र सत्ता न रखना। यह भक्ति की सबसे उत्तम अवस्था मानी गई हैं।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।।

🙏🙏🙏जय श्री कृष्ण 🙏🙏🙏

23/10/2021

स्वयं को मार्ग में पड़े हुए तृण से भी अधिक नीच मानकर, वृक्ष से भी अधिक सहनशील होकर, मिथ्या मान की भावना से सर्वथा शून्य रहकर दूसरों को सदा ही मान देने वाला होना चाहिए।
ऐसी मनः स्थिति में ही व्यक्ति हरि नाम कीर्तन कर सकता है।

26/09/2021
19/09/2021

जय श्री कृष्ण

जीवन में हर किसी के सामने चुनौतियां होती हैं।
जीवन किसी पर भी उचित और आसान नहीं है!
लेकिन सही क्या है तुम्हारे अन्तर्मन को ये पता होता है। चाहे हमारे साथ कितना भी अन्याय हुआ हो, कितनी भी बार हम असफल हुए हों, महत्वपूर्ण यह है कि हमने उस समय कैसी प्रतिक्रिया दी।

जीवन का अन्याय हमें गलत रास्ते पर चलने की अनुमति नहीं देता...

जीवन कुछ बिंदुओं पर कठिन हो सकता है, लेकिन भाग्य हमारे द्वारा पहने जाने वाले जूतों से नहीं बल्कि हमारे द्वारा उठाए गए कदमों से बनता है!
*जय जय श्री राधे*

13/09/2021

वह शख्स गाड़ी से उतरा.. और बड़ी तेज़ी से एयरपोर्ट मे घुसा , जहाज़ उड़ने के लिए तैयार था , उसे किसी कांफ्रेंस मे पहुंचना था जो खास उसी के लिए आयोजित की जा रही थी.....
वह अपनी सीट पर बैठा और जहाज़ उड़ गया...अभी कुछ दूर ही जहाज़ उड़ा था कि....कैप्टन ने ऐलान किया , तूफानी बारिश और बिजली की वजह से जहाज़ का रेडियो सिस्टम ठीक से काम नही कर रहा....इसलिए हम क़रीबी एयरपोर्ट पर उतरने के लिए मजबूर हैं.।
जहाज़ उतरा वह बाहर निकल कर कैप्टन से शिकायत करने लगा कि.....उसका एक-एक मिनट क़ीमती है और होने वाली कांफ्रेस मे उसका पहुचना बहुत ज़रूरी है....पास खड़े दूसरे मुसाफिर ने उसे पहचान लिया....और बोला डॉक्टर पटनायक आप जहां पहुंचना चाहते हैं.....टैक्सी द्वारा यहां से केवल तीन घंटे मे पहुंच सकते हैं.....उसने शुक्रिया अदा किया और टैक्सी लेकर निकल पड़ा...

लेकिन ये क्या आंधी , तूफान , बिजली , बारिश ने गाड़ी का चलना मुश्किल कर दिया , फिर भी ड्राइवर चलता रहा...
अचानक ड्राइवर को एह़सास हुआ कि वह रास्ता भटक चुका है...
ना उम्मीदी के उतार चढ़ाव के बीच उसे एक छोटा सा घर दिखा....इस तूफान मे वही ग़नीमत समझ कर गाड़ी से नीचे उतरा और दरवाज़ा खटखटाया....
आवाज़ आई....जो कोई भी है अंदर आ जाए..दरवाज़ा खुला है...

अंदर एक बुढ़िया आसन बिछाए भगवद् गीता पढ़ रही थी...उसने कहा ! मांजी अगर इजाज़त हो तो आपका फोन इस्तेमाल कर लूं...

बुढ़िया मुस्कुराई और बोली.....बेटा कौन सा फोन ?? यहां ना बिजली है ना फोन..
लेकिन तुम बैठो..सामने जल है , पी लो....थकान दूर हो जायेगी..और खाने के लिए भी कुछ ना कुछ फल मिल जायेगा.....खा लो ! ताकि आगे सफर के लिए कुछ शक्ति आ जाये...

डाक्टर ने शुक्रिया अदा किया और जल पीने लगा....बुढ़िया अपने पाठ मे खोई थी कि उसकेे पास उसकी नज़र पड़ी....एक बच्चा कंबल मे लपेटा पड़ा था जिसे बुढ़िया थोड़ी थोड़ी देर मे हिला देती थी...
बुढ़िया फारिग़ हुई तो उसने कहा....मांजी ! आपके स्वभाव और एह़सान ने मुझ पर जादू कर दिया है....आप मेरे लिए भी दुआ
कर दीजिए....यह मौसम साफ हो जाये मुझे उम्मीद है आपकी दुआऐं ज़रूर क़बूल होती होंगी...

बुढ़िया बोली....नही बेटा ऐसी कोई बात नही...तुम मेरे अतिथी हो और अतिथी की सेवा ईश्वर का आदेश है....मैने तुम्हारे लिए भी दुआ की है.... परमात्मा का शुक्र है....उसने मेरी हर दुआ सुनी है..
बस एक दुआ और मै उससे माँग रही हूँ शायद जब वह चाहेगा उसे भी क़बूल कर लेगा...

कौन सी दुआ..?? डाक्टर बोला...

बुढ़िया बोली...ये जो 2 साल का बच्चा तुम्हारे सामने अधमरा
पड़ा है , मेरा पोता है , ना इसकी मां ज़िंदा है ना ही बाप , इस बुढ़ापे मे इसकी ज़िम्मेदारी मुझ पर है , डाक्टर कहते हैं...इसे कोई खतरनाक रोग है जिसका वो इलाज नही कर सकते , कहते हैं एक ही नामवर डाक्टर है , क्या नाम बताया था उसका !
हां "डॉ पटनायक " ....वह इसका ऑप्रेशन कर सकता है , लेकिन मैं बुढ़िया कहां उस डॉ तक पहुंच सकती हूं ? लेकर जाऊं भी तो पता नही वह देखने पर राज़ी भी हो या नही ? बस अब बंसीवाले से ये ही माँग रही थी कि वह मेरी मुश्किल आसान कर दे..!!

डाक्टर की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह रहा है....वह भर्राई हुई आवाज़ मे बोला !
माई...आपकी दुआ ने हवाई जहाज़ को नीचे उतार लिया , आसमान पर बिजलियां कौदवां दीं , मुझे रस्ता भुलवा दिया , ताकि मैं यहां तक खींचा चला आऊं ,हे भगवान! मुझे यकीन ही नही हो रहा....कि भगवान एक दुआ क़बूल करके अपने भक्तौं के लिए इस तरह भी मदद कर सकता है.....!!!!

दोस्तों वह सर्वशक्तीमान है....परमात्मा के बंदो उससे लौ लगाकर तो देखो...जहां जाकर इंसान बेबस हो जाता है , वहा ं से उसकी परमकृपा शुरू होती है...।यह आप सबसे अधिक लोगो को भेजे ताकि मुझ जैसे लाखो लोगो की आँखे खुले।

03/09/2021

Aja Ekadashi 03/09/21
जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति के लिए करें अजा एकादशी व्रत

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी कहते हैं.
अजा एकादशी का व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा.
मान्यता है कि इस व्रत से जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है.

हिंदी पंचांग के अनुसार, इस साल में कुल 25 एकादशी पड़ रही हैं. वैसे तो हर माह दो एकादशी होती हैं. एक कृष्ण पक्ष की एकादशी और दूसरी शुक्ल पक्ष की एकादशी. भाद्रपद में कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी (Aja Ekadashi) और शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं.

अजा का शाब्दिक अर्थ होता है जिसका जन्म न हो. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रता रखकर भगवान विष्णु के श्रीहरि रूप की पूजा करने से अतीत में किए गए सभी पापों के प्रभाव से मुक्ति मिलती है. इसी संदर्भ में भगवान श्री कृष्ण ने ब्रह्मवैवर्त पुराण में अजा एकादशी की महिमा का वर्णन युधिष्ठिर से किया था. जिसका तात्पर्य यह बताना था कि इस व्रत के प्रभाव से कर्मों के प्रभाव और जन्म-मरण के दुष्चक्र से मुक्ति मिल जाती है.

Address

Vrindavan
281121

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when बाल व्यास श्री रोहितानंद जी महाराज posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share