माॅ मणिकर्णिका

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लोगों ने बलात्कारी, गंजेड़ी, भंगेड़ी, चोर, देश द्रोहियों को तांत्रिक बना दिया...  तुम जानते हो तांत्रिक किसे कहते है मूर्ख...
18/05/2026

लोगों ने बलात्कारी, गंजेड़ी, भंगेड़ी, चोर, देश द्रोहियों को तांत्रिक बना दिया...
तुम जानते हो तांत्रिक किसे कहते है

मूर्खों ने तंत्र की धज्जियाँ उड़ा दी !
छोटे - छोटे बच्चे और नगर वधु स्त्रियां ज्योतिष के नाम पर, तांत्रिक बन कर घूम रही है !
कांच की रंग विरंगी मालाएँ पहन कर या काले पीले कपड़े पहन कर, राख अपने शरीर पर लगा कर कोई भी स्त्री-पुरुष तांत्रिक सिद्धि पुरुष नही बन जाता !
मूर्खों वस्त्र हमारे प्रतीक चिंन्ह है, इनका मज़ाक 'हास्य' मत उड़ने दो,
आज के जिनको आप संत अखाड़े कहते हो ये लोग राजनैतिक नेता है, इन सब पर सैकड़ों पुलिस केश चल रहे है !
ये लोग गुरुओं के नाम पर घंटाल दास है !

जिनकी उम्र 15 से लेकर 40 वर्ष के बीच है ! तुम लोग येसे लोगों से प्रभावित हो जाते हो,
लेकिन तुम लोग तांत्रिक का मतलब ही नही जानते हो !
तांत्रिक का मलतब वर्षों तपश्या कर सिद्धि प्राप्त करना !
जैसे वशिष्ठ ऋषि, विस्मामित्र ऋषि, श्रृंगी ऋषि, भ्रंगु ऋषि, विशुद्धानंद, बामा खेपा, देवरहा बाबा, निखलेश्वरा नंद, नारायण दत्त श्रीमाली, पंडित गोपीनाथ कविराज जी और भी अनंत है !
तांत्रिक वही जिसने वर्षों तपश्या की हो , त्याग किया हो !
त्याग और तपश्या से ही सिद्धि प्राप्त होती है !
सोना जब तपता है तभी कुंदन बनता है !
लोहा पारस के संपर्क मैं आकर ही सोना बनता है !

तुम लोग तंत्र को बदनाम मत करो.. तंत्र तपश्या का मार्ग है, पण्डित्य या नेता नगरी, वेश्या वृति का मार्ग नही ..!!"

आप के पूर्वजों की धरोहर तंत्र, साधना तप मार्ग का सम्मान करो 💐💐💐

17/05/2026

जय माँ मणिकर्णिका
नमः पार्वती पतये हर हर महादेव

16/05/2026

जय माँ मणिकर्णिका

22/04/2026

अक्षय तृतीया पर मां मणिकर्णिका के पूजन के उपरांत गांडीव न्यूज को संबोधित करते हुए पीठाधीश्वर मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी पीठ श्री जयेंद्र नाथ दुबे बब्बू महाराज

जय माँ मणिकर्णिका
हर हर महादेव

21/04/2026
17/04/2026

अनादि तीर्थ चक्रपुष्करीणी की अधिष्ठात्री देवी माॅ मणिकर्णिका के चरण कमलों मे अपनी श्रद्धा के पुष्प निवेदित कर अक्षय लाभ प्राप्त करने तथा जीवन के समस्त कष्टो से मुक्ति पाने की अक्षय तिथी अक्षय तृतीया ( 20/04/2025 ) सोमवार को रात्रि मे मणिकर्णिका कुण्ड पर माॅ मणिकर्णिका के दर्शन कर अक्षय पुण्य के भागी बने ।

19/01/2026

धर्म पर सरकारी कब्जा : आस्था या सत्ता का व्यापार?
आज देश का हर सनातनी मन एक गंभीर प्रश्न पूछ रहा है – क्या अब हर धार्मिक स्थल पर सरकारी अधिग्रहण अनिवार्य हो गया है? क्या आस्था के केंद्र भी केवल प्रशासनिक प्रयोगशालाएँ बनकर रह जाएँगे?
जहाँ-जहाँ सरकार “डेवलपमेंट” के नाम पर धार्मिक स्थलों में घुस रही है, वहाँ की तस्वीर साफ दिख रही है। शासन–प्रशासन ऐसा व्यवहार कर रहा है मानो उस स्थान के मूल निवासी, पुजारी, महंत, संत–समाज, भक्त–परंपराएँ – सब कुछ अर्थहीन हों। सदियों से चली आ रही सनातनी व्यवस्थाएँ, पूजा पद्धतियाँ, धार्मिक रीति–रिवाज – सबको दरकिनार कर केवल एक ही आदेश चलता है – सरकार का आदेश!
आज स्थिति यह बन गई है कि मंदिर, तीर्थ, मठ और आश्रम श्रद्धा के केंद्र कम और सरकारी प्रोजेक्ट ज्यादा बनते जा रहे हैं। प्राचीन धरोहरों का मौलिक स्वरूप मिटाया जा रहा है। जिन स्थानों का महत्व उनकी आध्यात्मिक गरिमा से था, उन्हें चमकदार पत्थरों, कॉरिडोरों और व्यावसायिक दुकानों में बदला जा रहा है। आस्था को पर्यटन उद्योग में बदला जा रहा है।
सबसे दुखद बात यह है कि आम हिंदू को यह भ्रम दिया जा रहा है कि “हिंदुत्व बढ़ रहा है।” लेकिन सच यह है कि हिंदुत्व नहीं – हिंदुत्व के नाम पर नियंत्रण बढ़ रहा है। धर्म की स्वायत्तता खत्म हो रही है।
कुंभ, माघ मेला, बड़े-बड़े तीर्थ – ये सब कभी संतों, महात्माओं और धर्माचार्यों के नेतृत्व में चलते थे। वहाँ निर्णय धर्म परंपराओं के अनुसार होते थे। आज वहाँ वीआईपी संस्कृति हावी है। संतों की जगह अफसरशाही, राजनेताओं और उनके इशारों पर चलने वाले चाटुकारों का बोलबाला है।
मंदिरों की संपत्तियाँ सरकार के लिए कमाई का साधन बन गई हैं। चढ़ावा, दान, धर्मार्थ भूमि – सब पर नियंत्रण प्रशासन का। परंतु मस्जिद, चर्च, वक्फ बोर्ड जैसी संस्थाएँ आज भी स्वतंत्र हैं। आखिर निशाना केवल हिंदू मंदिर ही क्यों?
राजनीतिक संरक्षण में धर्म को भुनाया जा रहा है। आस्था के नाम पर आयोजन, उद्घाटन, शिलान्यास – सब कुछ राजनीतिक मंच बन गया है। असली भक्त, असली साधु–संत और मूल परंपराएँ हाशिये पर धकेली जा रही हैं।
यह लड़ाई किसी सरकार या पार्टी के खिलाफ नहीं – धर्म की स्वतंत्रता की लड़ाई है।
मंदिरों का संचालन भक्तों, संतों और धर्माचार्यों के हाथों में होना चाहिए – नौकरशाहों के नहीं।
अगर आज हिंदू समाज नहीं जागा, तो आने वाले समय में हमारे मंदिर केवल सरकारी दफ्तर बनकर रह जाएँगे – जहाँ पूजा कम और काउंटर ज्यादा होंगे।
अब समय आ गया है कि हर सनातनी आवाज उठाए और कहे –
“मंदिर सरकार के नहीं – धर्म और समाज के हैं!”

जय माँ मणिकर्णिका
जय श्री काशी विश्वनाथ
हर हर महादेव

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Manikarnika Ghat
Varanasi
221001

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