25/08/2024
ये दोस्ती :: रामपुनियानी जी को जन्मदिन मुबारक
आइये मिलते हैं IIT मुम्बई के पूर्व प्रो. राम पुनियानी जी से, जिन्होंने आज अपनी उतार-चढ़ाव भरी जिंदगी के 79 साल (जन्म 25 अगस्त 1945) पूरे किए।
90 के दशक में जब हिंदुस्तान की सियासत में संवैधानिक मूल्यों को लेकर बाधा उत्पन्न करने वाली ताकतें सत्ता में काबिज होने लगी और समाज को एकरंगी बनाने की कोशिश में जुटी थी तो इन सब पर प्रो. पुनियानी बहुत ही करीब से नजर रखे हुए थे. वो इस बात को लेकर परेशान या यूं कहूँ कि बेचैन थे कि हिन्दुस्तानी समाज की विविधता और बहुलतावाद को कैसे बचाया जाए. ये वो दौर था जब उनका गहरा सम्पर्क मरहूम असगर अली इंजीनियर से हुआ. वे उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। नतीजतन उन्हें अपने इस पुनीत काम में प्रोफेसरशिप बाधा बनती नज़र आने लगी. इसे पूरा करने के लिए उन्होंने ऐच्छिक अवकाश ले लिया और फिर अपना पूरा जीवन समतामूलक समाज,भाईचारा,बहुलतावाद, प्रजातांत्रिक मूल्यों की रक्षा और वंचित समुदायों के लिए संघर्ष में होम कर दिया.
अपनी चिर परिचित शैली में समाज के विभिन्न वर्गों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने पूरी दुनियां में इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र शासन करने की सबसे सर्वग्राह पद्धति है. यह हमारे मानव अधिकारों,धार्मिक-सामाजिक सद्भाव, बहुलतावाद और वंचित समुदायों के अधिकार की रक्षा करता है. विशेषकर भारत में इसे बचाये रखने के लिए हमें उन ताकतों के खिलाफ एकजुटता रखनी होगी जो संवैधानिक मूल्यों की विरोधी हैं.इसके अतिरिक्त फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ वे लगातार लेख,ऑडियो-वीडियो,किताबें और रिपोर्ट के माध्यम से समाज को सचेत करते रहते है।
फासिस्ट ताकतें उन्हें गाहे- ब- गाहे निशाना बनाती रहती पर बिना डरे शांति का यह दूत अबाध गति से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है. उनके सामाजिक योगदान को देखते हुए देश- विदेश की अनेक सामाजिक संस्थाओं सहित भारत सरकार की तरफ से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है.आज वह अपने जीवन के 79 साल का सफर पूरा कर रहे हैं. हम उनके सेहत और लम्बी आयु की कामना करते है जिससे उन्होंने सामाजिक-ताने को बनाए और बचाए रखने का जो मिशन शुरू किया वह चलता रहे और देश-दुनिया सहित हम जैसे लोगों का मार्गदर्शन होता रहे.
डॉ मोहम्मद आरिफ