Shri Devraha Baba Ashram

Shri Devraha Baba Ashram देवरहाय दिगम्बराय मंचासीनाय नमो नमः

श्री विश्वंभर नाथ जी इंजीनीयर थे | वे बाबा के बड़े भक्त थे | सन् १९७० में अपने कुछ मित्रों के साथ बाबा के दर्शनों में पहु...
10/08/2025

श्री विश्वंभर नाथ जी इंजीनीयर थे | वे बाबा के बड़े भक्त थे | सन् १९७० में अपने कुछ मित्रों के साथ बाबा के दर्शनों में पहुँचे |

श्री बाबा बराबर कहते हैं- “यह जीव अनादि काल से अपने स्वरूप को भूला है. इसको भगवान के सन्मुख कर देना, यही महान उपकार है |”

मंच के निकट बुलाहट होने पर विश्वंभर नाथ ने अपने मित्रों को भी बुला लिया | उनके मन में इस बात का अभिमान हुआ कि आज उन्होंने अपने कई मित्रों को श्री बाबा के चरणों में समर्पित कर उन मित्रों का बड़ा उपकार किया है |

श्री बाबा तो लीलाधारी और अंतर्यामी ठहरे | उन्होंने उनके सभी मित्रों को चरण-स्पर्श का पुण्य दिया; किन्तु बेचारे विश्वंभर नाथ को इस पुण्य से वंचित कर दिया | कह नहीं सकते थे | मन बड़ा क्षुब्ध हुआ | उपकार करने के अभिमान ने आहत होकर मन को क्षुब्ध कर दिया |

इतने में बाबा ने उनसे सस्नेह कहा- “बच्चा ! सब में एक ही आत्मा है |”

- ‘जी बाबा !’
अब पूज्य बाबा मौन हो गए | श्री बाबा ब्रह्मस्वरूप हैं | उनका स्वभाव भी ब्रह्म के समान हैं | अपने भक्तों के मन का अभिमान ही तो ईश्वर-पथ का रोड़ा है | अतः नानाविध बाबा भी अपने भक्तों का अभिमान मिटाते रहते हैं |

अभिमान के कारण ही व्यक्ति प्रभु के सन्मुख नहीं हो पाता है | जब तक समर्पण नहीं होगा तब तक जीव कृपा का अनुभव नहीं कर सकता है | संतों के पास तो ममता और अहंता को छोड़कर ही जाना चाहिए | हर एक पग जो संतों की तरफ उठे, हर उस पग के साथ अहंता और ममता को त्यागते हुए चलना चाहिए | तभी हम वास्तव में संत तक पहुँच सकते हैं और उनके दर्शन का लाभ उठा सकते हैं | यदि हम ममता और अहंता को पकड़े हुए हैं तब तो संतों की तरफ हमारी गति हुई ही नहीं है भले ऊपर से कुछ भी लगे | संतों के निकट तो हम तभी पहुँचेंगे जब ममता और अहंता छूटेगी |

दूसरी बात यह है कि संतों का दर्शन तो तब ही हो पाता है जब वो कृपा करते हैं | जीव में इतनी सामर्थ्य ही नहीं है कि वो अपने किसी प्रयास से उन तक पहुँच सके | इसलिए जब संतों का दर्शन मिल जाए तब उस कृपा का अनुभव करना चाहिए, अपने अभिमान का नहीं | कृपा का अनुभव हम कृतग्य होकर ही प्राप्त कर सकते हैं | जितना ज्यादा हम कृतग्य होते हैं उतना ही ज्यादा कृपा का अनुभव कर पाते हैं |

पूज्य सदगुरुदेव भगवान
02/08/2025

पूज्य सदगुरुदेव भगवान

🙏 बाबा सरकार 🙏
21/08/2024

🙏 बाबा सरकार 🙏

'ब्रह्मर्षि देवराहा दर्शन' में डाॅ. अर्जुन तिवारी जी लिखते हैं कि एक प्रसंग में महाराज जी ने बतलाया कि उन्होंने दक्षिण भ...
16/07/2024

'ब्रह्मर्षि देवराहा दर्शन' में डाॅ. अर्जुन तिवारी जी लिखते हैं कि एक प्रसंग में महाराज जी ने बतलाया कि उन्होंने दक्षिण भारत के विभिन्न स्थानों पर निवास किया। वहाँ के लोग उन्हें 'कल्पान्तक योगी' के रूप में जानते हैं। कई बार उन्होंने संकेत दिया कि दीर्घकाल तक वे हिमालय की कंदराओं में तपस्यारत थे। बंगाल के मुख्य न्यायाधीश सर जाॅन उडरफ ने १९वीं सदी में लिखा था कि उन्होंने बाबा के दर्शन किए थे। वृन्दावन के श्री महेन्द्र वेद ने लिखा है कि जब सम्राट जार्ज पंचम भारत में आये तो उन्होंने बाबा का दर्शन किया। स्वामी राम ने 'लिविंग विद द हिमालयन मास्टर्स' में लिखा है- 'मुझे पता चला है कि बाबा नियमित रूप से कुछ यौगिक क्रियाएँ करते हैं और वे केवल फल और शाक ही लेते हैं।'

'देवज्योति' में बाबा के अनन्य शिष्य डाॅ. हरवंशलाल शर्मा जी ने लिखा है- 'श्री महाराज जी के वर्तमान पंचतात्विक देह की लीला का केवल एक चरण ही प्रकट है। इस चरण का प्रारम्भ सन् १९१८-१९ से होता है। इससे पूर्ववर्ती जीवन लीला के सम्बन्ध में कुछ निश्चय के साथ नहीं कहा जा सकता।...... पूर्ण योगी की आयु का अनुमान लगाना यों ही कठिन है फिर यदि कायाकल्प के सन्दर्भ में उस पर विचार किया जाय तो अनुमान सम्भव ही नहीं है। स्वयं महाराज जी इस विषय को रहस्यमय बना देते हैं।..... कोई-कोई भक्त श्री महाराज जी की आयु एक हजार वर्ष से भी अधिक मानते हैं। कुछ दिन तक मैंने श्री महाराज जी की आयु के सम्बन्ध में प्रमाण एकत्र किये थे, परन्तु अंत में उसे निरर्थक व्यायाम समझकर छोड़ दिया।'

डाॅ. अर्जुन तिवारी जी लिखते हैं कि एक प्रसंग में महाराज जी ने बतलाया कि सन् १९१९-२० में वे चित्रकूट में तपस्यारत थे। वहीं माँ शक्ति ने इन्हें दर्शन दिया तथा उन्होंने प्रेरित किया कि देवरिया में सरयू तट पर साधना स्थल बनाओ तथा सारे देश में राम नाम का प्रचार करो। श्री माँ की आज्ञा को शिरोधार्य कर ही वे देवरिया के मइल-नरियाँव के निकट मचान बनाकर साधनारत थे।

जय श्री राम 🙏
21/04/2024

जय श्री राम 🙏

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