Shri Baba Kashi Vishwanath Seva Samiti Varanasi

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तोड़ने सा भी ना टूटेये ऐसा मन बंधन हैइस बंधन को सारी दुनियाकहती रक्षा बंधन है
31/08/2023

तोड़ने सा भी ना टूटे
ये ऐसा मन बंधन है
इस बंधन को सारी दुनिया
कहती रक्षा बंधन है

13/04/2020

*जानिए आरोग्य सेतु एप क्या है*
इसे install करना क्यों आवश्यक है

आपमें से बहुतों ने इनस्टॉल किया
पर आपको लगा कि बकवास है
इसे आपने uninstall भी कर दिया होगा

अब जानिए..

यह एप्प आपसे कुछ पूछता है जैसे कि क्या आपको खांसी है
बुखार है
सांस लेने में परेशानी है

निश्चित है आप लिखेंगे
नहीं है

उसके बाद आप ग्रीन जोन में दिखते होंगे
आपको लगता होगा
इस एप्प में कुछ है ही नहीं

यह एप्प ब्लू टूथ और लोकेशन को ऑन रखने को कहता है
आप always on रखिये

जब भी आप किसी भीड़ भाड़ वाली जगह पर जाते हैं
यह एप्प ब्लू टूथ से आस पास के मोबाइल से संदेश लेता देता रहता है

जब आप किसी के पास खड़े हैं तो आप भी ग्रीन जोन के हैं
पास खड़ा व्यक्ति भी ग्रीन जोन वाला नार्मल व्यक्ति ही है
पर अगर वह व्यक्ति आज से 10 दिनों बाद किसी कारण से कोरोना पॉजिटिव हो जाएगा
तो यह एप्प आपको तुरंत alert कर देगा
और आपका ग्रीन कलर बदल कर ऑरेंज या पीला हो जाएगा

यह कहेगा
आप दूध लेने आज से 10 दिन पहले डेयरी पर गए थे
वह व्यक्ति जो नीले शर्ट वाला था
वह अब कोरोना पॉजिटिव है
यानी 10 दिन पहले उसे छिपा हुआ संक्रमण था जो अब साफ साफ दिखने लगा है

अब आप तुरंत अपनी जांच कराइए
साथ ही यह एप्प उन सभी व्यक्तियों को सूचना दे देगा
*आप सभी लोग उस आदमी के चलते danger zone में आ गए हैं*
तुरंत जांच कराइये

*सबकी लोकेशन ऑन रहने से उन सभी की मूवमेंट भी पता चलेगी*
और कोरोना से लड़ना आसान होगा

आप इस पोस्ट को व्हाट्सएप्प पर भेजिए
लोगों को समझाइए
जिस दिन करोड़ों लोग इसे install कर लेंगे
*यह आपके किसी भी ऑरेंज जोन के व्यक्ति के पास जाते ही रिंग करने लगेगा*
यह आपको हॉट स्पॉट की सूचना अलार्म से दे देगा, ताकि आप रास्ता बदल लें |

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी चंदनवाड़ी में भंडारा लगाया गया है भंडारे के मंदिर की एक झलक जय बाबा बर्फानीहर हर महादेव
02/07/2019

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी चंदनवाड़ी में भंडारा लगाया गया है
भंडारे के मंदिर की एक झलक

जय बाबा बर्फानी
हर हर महादेव

भीम को यह अभिमान हो गया था कि संसार में मुझसे अधिक बलवान कोई और नहीं है| सौ हाथियों का बल है उसमें, उसे कोई परास्त नहीं ...
21/09/2018

भीम को यह अभिमान हो गया था कि संसार में मुझसे अधिक बलवान कोई और नहीं है| सौ हाथियों का बल है उसमें, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता... और भगवान अपने सेवक में किसी भी प्रकार का अभिमान रहने नहीं देते| इसलिए श्रीकृष्ण ने भीम के कल्याण के लिए एक लीला रच दी|
द्रौपदी ने भीम से कहा, "आप श्रेष्ठ गदाधारी हैं, बलवान हैं, आप गंधमादन पर्वत से दिव्य वृक्ष के दिव्य पुष्प लाकर दें... मैंने अपनी वेणी में सजाने हैं, आप समर्थ हैं, ला सकते हैं| लाकर देंगे न दिव्य कमल पुष्प|"

भीम द्रौपदी के आग्रह को टाल नहीं सके| गदा उठाई और गंधमादन पर्वत की ओर चल पड़े मदमस्त हाथी की तरह| किसी तनाव से मुक्त, निडर... भीम कभी गदा को एक कंधे पर रखते, कभी दूसरे पर रखते| बेफिक्री से गंधमादन पर्वत की ओर जा रहे थे... सोच रहे थे, अब पहुंचा कि तब पहुंचा, दिव्य पुष्प लाकर द्रौपदी को दूंगा, वह प्रसन्न हो जाएगी|

लेकिन अचानक उनके बढ़ते कदम रुक गए... देखा, एक वृद्ध लाचार और कमजोर वानर मार्ग के एक बड़े पत्थर पर बैठा है| उसने अपनी पूंछ आगे के उस पत्थर तक बिछा रखी है जिससे रास्ता रुक गया है| पूंछ हटाए बिना, आगे नहीं बढ़ा जा सकता... अर्थात उस वानर से अपनी पूंछ से मार्ग रोक रखा था और कोई भी बलवान व्यक्ति किसी को उलांघकर मार्ग नहीं बनाता, बल्कि मार्ग की बाधा को हटाकर आगे बढ़ता है| बलवान व्यक्ति बाधा सहन नहीं कर सकता... या तो व बाधा स्वयं हटाता है, या उस बाधा को ही मिटा देता है| इसलिए भीम भी रुक गए|

जब मद, अहंकार और शक्ति बढ़ जाती है तो आदमी अपने आपको आकाश को छूता हुआ समझता है| वह किसी को खातिर में नहीं लाता... और अत्यधिक निरंकुश शक्ति ही व्यक्ति के विनाश का कारण बनती है... लेकिन श्रीकृष्ण तो भीम का कल्याण करना चाहते थे... भीम का विनाश नहीं सुधार चाहते थे|

भीम ने कहा, "ऐ वानर ! अपने पूंछ को हटाओ, मैंने आगे बढ़ना है|"

वानर ने देखा एक बलिष्ठ व्यक्ति गदा उठाए, राजसी वस्त्र पहने, मुकुट धारण किए बड़े रोब के साथ उसे पूंछ हटाने को कह रहा है| हैरान हुआ, पहचान भी गया.. लेकिन चूंकि वह श्रीकृष्ण की लीला थी, इसलिए चुप हो गया| भीम के सवाल का जवाब नहीं दिया|

भीम ने फिर कहा, "वानर, मैंने कहा न कि पूंछ हटाओ, मैंने आगे जाना है, तुम वृद्ध हो, इसलिए कुछ नहीं कह रहा|"

वानर गंभीर हो गया| मन ही मन हंस दिया| कहा, "तुम देख रहे हो, मैं वृद्ध हूं, कमजोर हूं... उठ नहीं सकता| मुझमें इतनी ताकत नहीं कि मैं स्वयं ही अपनी पूंछ हटा लूं... तुम ही कष्ट करो, मेरी पूंछ थोड़ी इधर सरका दो, और आगे निकल जाओ|"

भीम के तेवर कसे... गदा कंधे से हटाई... नीचे रखी| इस वानर ने मेरे बल को ललकारा है, आखिर है तो एक पूंछ ही, वह भी वृद्ध वानर की| कहा, "यह मामूली सी पूंछ हटाना भी कोई मुश्किल है, यह तुमने क्या कह दिया? मैंने बहुत बलवानों को परास्त किया है, धूल चटाई है, सौ हाथियों का बल है मुझमें...|"

इतना कह कर भीम ने अपने बाएं हाथ से पूंछ को यों पकड़ा, जैसे एक तिनके को पकड़ रहा है कि उठाया, हवा में उड़ा दिया... लेकिन भीम से वह पूंछ हिल भी नहीं सकी| हैरान हुआ... फिर उसने दाएं हाथ से पूंछ को हटाना चाहा... लेकिन दाएं हाथ से भी पूंछ तिलमात्र नहीं हिली... भीम ने वानर की तरफ देखा... वानर मुस्करा रहा था|

भीम को गुस्सा आ गया| भीम ने दोनों हाथों से भरपूर जोर लगाया... एक पांव को पत्थर पर रखकर, आसरा लेकर फिर जोर लगाया... दो-तीन बार... लेकिन हर बार भीम हताश हुआ... जिस पूंछ को भीम ने मामूली और कमजोर वानर की पूंछ समझा था... उसने उसके पसीने छुड़वा दिए थे...

और भीम थककर, निढाल होकर एक तरफ खड़ा हो गया| सोचने लगा... यह कोई मामूली वृद्ध वानर नहीं है... यह दिव्य व्यक्ति है और इसकी असीम शक्ति का मैं सामना नहीं कर पाऊंगा... विनम्र और झुका हुआ व्यक्ति ही कुछ पाता है, अकड़ उसे ले डूबती है, ताकत काफूर हो जाती है और भीम वाकई वृद्ध वानर के सामने कमजोर लगने लगा... मद और अहंकार काफूर हो गया... और जब मद और अहंकार मिटता है... तभी भगवान की कृपा होती है|

भीम ने कहा, "मैं आपको पहचान नहीं सका... जिसकी पूंछ को मैं उठा नहीं सका वह कोई मामूली वानर नहीं हो सकता... मुझे क्षमा करें, कृपया अपना परिचय दें|"

वानर उठ खड़ा हुआ... आगे बढ़ा और भीम को गले लगा लिया, कहा, "भीम, मैं तुम्हें पहचान गया था| तुम वायु पुत्र हो... मैं पवन पुत्र हनुमान हूं, श्रीराम का सेवक... श्रीराम का सेवक होने के सिवा मेरी कोई पहचान नहीं और उन्हीं के आदेश पर मैं इस मार्ग पर लेटा हूं... ताकि तुम्हें, तुम्हारी असलियत बता दूं... रिश्ते से मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूं और इसीलिए बड़े भाई का कर्तव्य निभाते हुए प्रभु के आशीर्वाद से तुम्हें याद दिला रहा हूं... शक्ति का, ताकत का अभिमान न करो... क्योंकि यह ताकत और बल तुम्हारा नहीं| भगवान ने ही इसे दिया है... यह शरीर भी तो परमात्मा ने दिया है... और जो चीज परमात्मा की है, वह किसी और की कैसे हो सकती है| इसलिए जो जिसने दिया है, उसके लिए उसी का धन्यवाद करना चाहिए| परमात्मा की शक्ति के अलावा किसी की क्या शक्ति हो सकती ई|"

भीम की आंखें खुलीं... त्रेता युग की श्रीराम और हनुमान जी की वीर गाथाएं याद आ गईं... प्रेम से, श्रद्धा से भीम की आंखें भी खुल गईं और भावों के इसी प्रवाह में, भीम ने हनुमान जी को समुद्र लांघने के समय पर धारण किए गए विशाल रूप का दर्शन कराने का अनुरोध कर दिया|

और हुनमान जी ने श्रीराम की कृपा से अपना आकार, वैसा ही बढ़ाया जैसा उन्होंने सौ योजन समुद्र लांघने के समय धारण किया था| यह देख भीम हैरान रह गया| वह कभी हनुमान जी के चरणों में देखता और कभी उनके आकाश छूते मस्तक को... जिसे वह देख ही नहीं पा रहा था|

हनुमान जी ने कहा, "भीम, मेरे इस रूप को तुम देख नहीं पा रहे... लेकिन मैं श्रीराम की कृपा से, इससे भी बड़ा रूप धारण कर सकता हूं|"

भीम ने हाथ जोड़कर सिर झटक दिया और हनुमान जी के चरणों में गिर पड़ा|

भौतिक पद, प्रतिष्ठा और धन का अभिमान कैसा? ये तो कभी भी नष्ट हो सकते हैं| भौतिक पदार्थ, भौतिक सुख ही देते हैं... लेकिन परमात्मा की कृपा तो शाश्वत होती है... जिसे कोई छीन नहीं सकता| चोर चुरा नहीं सकता| आदमी को उसी दायरे में रहना चाहिए, जिसमें परमात्मा रखे... परमात्मा की इच्छा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिल सकता| इंसान की जिंदगी का क्या भरोसा... किसी भी मोड़ पर, चार कदम की दूरी पर, खत्म हो सकती है|

~ हनुमान जी और भीम - पौराणिक कथाएं

29/05/2018

बरसाने में एक सेठजी रहते थे। उनके कई कारोबार थे, तीन बेटे तीन बहुएँ थी,

सब के सब आज्ञाकारी थे, लेकिन सेठजी के बेटी नहीं थी, यही अभाव उन्हें खलता था। यह चिंता संतों के दर्शन से कम हुई।

संत बोले मन में जो अभाव हो उस पर भगवान का भाव स्थापित कर लो।

सुनो सेठ तुमकू मिल्यो बरसाने का वास,
यदि मानो राधे सुता काहे रहो उदास।

सेठ जी ने राधा रानी का एक चित्र मँगवाया और अपने घर में लगा कर पुत्री भाव से रखते।

रोज सुबह उठ कर राधेराधे कहते भोग लगाते और दुकान से लौटकर राधेराधे कहकर सोते

तीन बहू बेटे हैं घर में, सुख सुविधा है पूरी,
संपति भरी भवन में रहती, नहीं कोई मजबूरी,
कृष्ण कृपा से जीवन पथ पे आती न कोई बाधा,
मैं हूँ पिता बहुत बड़भागी, बेटी है मेरी राधा।

एक दिन एक मनिहारी चूड़ी पहनाने सेठ के अहाते में आई और चूड़ी पहनने की गुहार लगाई। तीनों बहुएँ बारी बारी से चूड़ी पहन कर चली गयीं।

फिर एक हाथ और बढ़ा तो मनिहारिन ने सोचा कि कोई रिश्तेदार आया होगा उसने चूड़ी पहनाई और चली गयी।

सेठजी की दुकान पर पहुँच कर पैसे माँगे और कहा कि इस बार पैसे पहले से ज्यादा चाहिए। सेठजी बोले कि क्या चूड़ी मँहगी हो गयी है?

मनिहारिन बोली, नहीं सेठजी आज मैं चार लोगो को चूड़ी पहना कर आ रही हूँ।
सेठ जी ने कहा कि तीन बहुओं के अलावा चौथा कौन है? झूठ मत बोल, यह ले तीन का पैसा। मनिहारिन बेचारी तीन का पैसा ले कर चली गयी।

सेठजी ने घर पर पूछा कि चौथा कौन था जिसने चूड़ी पहनी हैं? बहुएँ बोली कि हम तीन के अलावा तो कोई भी नही था।

रात को सोने से पहले सेठजी पुत्री राधारानी को स्मरण करके सो गये। नींद में राधा जी प्रगट हुईं, सेठजी बोले "बेटी बहुत उदास हो, क्या बात है?

बृषभानु दुलारी बोलीं,
"तनया बनायो तात, नात ना निभायो है..
चूड़ी पहनि लीनी मैं, जानि पितु गेह किंतु,
आप मनिहारिन को मोल ना चुकायो है।
तीन बहू याद किन्तु बेटी नही याद रही,
नैनन श्रीराधिका के नीर भरि आयो है।
कैसी भई दूरी कहो कौन मजबूरी हाय,
आज चार चूड़ी काज मोहि बिसरायो है???

सेठजी की नींद टूट गयी पर नीर नही टूटा, रोते रहे, सबेरा हुआ, स्नान ध्यान करके मनिहारिन के घर पहुँच गये। मनिहारिन देखकर चकित हुई।

सेठ जी आंखों में आँसू लिये बोले
धन धन भाग तेरो मनिहारी..
तोसे बड़भागी नही कोई, संत महंत पुजारी,
धन धन भाग तेरो मनिहारी..
"मैने मानी सुता किन्तु निज नैनन नहीं निहारी,
चूड़ी पहन गयीं तेरे हाथन ते श्री बृषभानु दुलारी।
धन धन भाग तेरो मनिहारी..
बेटी की चूड़ी पहिराई लेहु, जाऊँ तेरी बलिहारी,
हाथ जोड़ बिनती करूँ, क्षमियो चूक हमारी।
"जुगल नयन जलते भरे मुख ते कहे न बोल,"
"मनिहारिन के पाँय पड़ि लगे चुकावन मोल।"
मनिहारीन सोचने लगी,
जब तोहि मिलो अमोल धन,
अब काहे माँगत मोल,
ऐ मन मेरे प्रेम से श्री राधे राधे बोल।

*राधेराधे ।।जयश्रीकृष्ण ।।*

श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिती आप सभी सुधिजनो को महा शिवरात्री की हार्दिक शुभ कामनाये  प्रेषित करता है, आज महा शिवरा...
13/02/2018

श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिती आप सभी सुधिजनो को महा शिवरात्री की हार्दिक शुभ कामनाये प्रेषित करता है, आज महा शिवरात्रि पर्व पर संस्था की तरफ से बाबा के व्रतधारी भक्तगणो के लिए शुद्ध फलाहार की व्यवस्था की गयी हैं।
आप सभी को आगामी बाबा अमरनाथ जी बर्फानी की होने वाली कश्मीर यात्रा के लिए आमंत्रण देता हूँ, आप सभी बडी से बडी मात्रा में यात्रा मे शामिल हों कर बाबा का आशीर्वाद ले एवं हमे आप की सेवा का मौका दे।
सहृदय धन्यवाद
आप का - दिलीप सिंह बंटी।
चलो अमरनाथ।

प्रिय सुधिजनो शुभ प्रभातम आप सभी को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत हार्दिक शुभ कामनाये......
26/01/2018

प्रिय सुधिजनो शुभ प्रभातम
आप सभी को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत हार्दिक शुभ कामनाये......

आज के दिन वर्तमान मे अपने भंडारे की जगह चन्दनवाडी, पहलगाम, कश्मीर, फिर लगेंगे दिलकाश भंडारे फिर होगा बाबा के भक्तो का जन...
25/01/2018

आज के दिन वर्तमान मे अपने भंडारे की जगह चन्दनवाडी, पहलगाम, कश्मीर, फिर लगेंगे दिलकाश भंडारे फिर होगा बाबा के भक्तो का जनून,, फिर लगेंगे नारे " भुखे को भोजन प्यासे को पानी जय बाबा बर्फानी ". चले बुलावा आया है बाबा ने बुलाया है,,,मित्रो ज़ितना शेयर कर सके कीजिये.

मित्रो एवं सुधिजनो,आप सभी को श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिती की लोहडी एवं मकर संक्रांती की बहुत बहुत हार्दिक शुभ कामन...
13/01/2018

मित्रो एवं सुधिजनो,
आप सभी को श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिती की लोहडी एवं मकर संक्रांती की बहुत बहुत हार्दिक शुभ कामनाये..... आप सभी का - दिलीप सिंह बंटी # # # # #

मित्रों सुधिजनो शुभ प्रभातम,श्री बाबा महादेव आप सभी का नववर्ष मंगलमय बनाये....नववर्ष की हार्दिक शुभ कामनाये .
02/01/2018

मित्रों सुधिजनो शुभ प्रभातम,
श्री बाबा महादेव आप सभी का नववर्ष मंगलमय बनाये....नववर्ष की हार्दिक शुभ कामनाये .

देव दीपावली पर घाट का अद्भुत दृश्य ऐसा लग रहा कि स्वयं भगवान ही धरती पर उतर आए हैं
04/11/2017

देव दीपावली पर घाट का अद्भुत दृश्य
ऐसा लग रहा कि स्वयं भगवान ही धरती पर उतर आए हैं

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