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🌞 मकर संक्रांति 2026 – शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, दान महत्वVaranasi Divine Services | Kashi – The Eternal Spiritual Capital...
12/01/2026

🌞 मकर संक्रांति 2026 – शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, दान महत्व

Varanasi Divine Services | Kashi – The Eternal Spiritual Capital

मकर संक्रांति हिंदू पंचांग का एक अत्यंत पावन पर्व है, जो सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। इस दिन से सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन माना जाता है।

मकर संक्रांति आध्यात्मिक उन्नति, पितृ कृपा, पुण्य प्राप्ति और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का द्वार खोलने वाला पर्व है।



📅 मकर संक्रांति 2026 – शुभ तिथि एवं मुहूर्त

ऋषिकेश पंचांग के अनुसार:
सूर्य देव 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को रात्रि 9:11 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
इस कारण पुण्यकाल व स्नान-दान 15 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।

📜 शास्त्रीय नियम (धर्मसिन्धु):
यदि संक्रांति सूर्यास्त या रात्रि में पड़े, तो स्नान-दान अगले दिन श्रेष्ठ फल देता है।



🕉️ मकर संक्रांति पूजा विधि

Varanasi Divine Services द्वारा अनुशंसित वैदिक विधि:

✔ प्रातःकाल गंगा स्नान या गंगाजल मिश्रित जल से स्नान
✔ सूर्य देव को अर्घ्य (जल + रोली + अक्षत + लाल पुष्प)
✔ मंत्र जाप:
“ॐ घृणि सूर्याय नमः”
✔ तिल-गुड़, खिचड़ी, फल व नैवेद्य अर्पण
✔ भगवद्गीता व सूर्य स्तुति पाठ
✔ ब्राह्मणों एवं ज़रूरतमंदों को दान



🎁 मकर संक्रांति पर दान का आध्यात्मिक महत्व

इस दिन किया गया दान 1000 गुना पुण्य फल देता है।

दान करें:
• काले तिल
• गुड़
• चावल व उड़द दाल
• कंबल, वस्त्र
• अन्न और सब्ज़ियां

🔱 इससे:
✔ पितृ दोष शांति
✔ कुंडली दोष निवारण
✔ धन-धान्य व आरोग्य
✔ आध्यात्मिक उन्नति
✔ मोक्ष की प्राप्ति



🌞 मकर संक्रांति का आध्यात्मिक, धार्मिक व सामाजिक महत्व

🔹 उत्तरायण काल साधना और आत्मिक जागरण का समय है
🔹 भीष्म पितामह ने इसी काल में देह त्याग किया था
🔹 गंगा स्नान व तर्पण से पितरों की कृपा
🔹 कृषि व फसल उत्सव – समृद्धि का प्रतीक
🔹 तिल-गुड़, खिचड़ी व मौसमी भोजन स्वास्थ्यवर्धक



🌍 Why Celebrate with Varanasi Divine Services

VDS आपको काशी से सीधे जोड़ता है —
✔ प्रमाणित पंडितों द्वारा पूजा
✔ लाइव संकल्प
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Nothing is better than the holy chants and pious atmosphere of the puja pervading through the walls of your home. Purity lies ahead!

06/01/2026

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05/01/2026

काशी खंड, अध्याय 55, श्लोक 13

भारभूतेश्वरं लिङ्गं भारभूतगणैः वृतम्।
अन्तर्गृहस्य उत्तरद्वारे ध्यायन्ति ये नराः॥

जो मनुष्य अंतरगृह के उत्तर द्वार पर स्थित भरभूतेश्वर शिवलिंग का श्रद्धापूर्वक ध्यान या पूजन करते हैं, उन्हें शिवलोक में निवास प्राप्त होता है।

Those who meditate upon or worship the Bharabhooteswar Shiva Ling, situated at the north entrance of the Antar Griha, attain residence in Shiva Lok, the divine abode of Lord

24/12/2025

पशुपतिनाथ मंदिर – काशी में शिव का पशुपति स्वरूप

यह मंदिर भगवान शिव को पशुपति (समस्त जीवों के रक्षक) के रूप में समर्पित है।
यहाँ पूजा से बंधन, रोग और भय से मुक्ति तथा करुणा व चेतना का जागरण माना जाता है।

✨ काशी में शिव का वह स्वरूप जो मानव ही नहीं, सभी जीवों का कल्याण करता है।

23/12/2025

पंचगंगा घाट – काशी की आध्यात्मिक आत्मा

जहाँ गंगा, यमुना, सरस्वती सहित 5 पवित्र नदियों का अदृश्य संगम माना जाता है।
पितृ तर्पण, श्राद्ध, साधना और मोक्ष कामना के लिए अत्यंत पुण्यदायी स्थल।

✨ काशी का वह घाट जहाँ शांति, शक्ति और मोक्ष एक साथ अनुभव होते हैं।

Mahamritunjay Mantra - Meaning, Power and why It is still Relevant Today
13/12/2025

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