28/07/2026
धर्म
Mangla Gauri Vrat: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 15 july
Mangla Gauri Vrat: मंगला गौरी का व्रत सावन माह के मंगलवार के दिन रखा जाता है। इस दिन विधिपूर्वक माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जान लेते हैं मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि।
मंगला गौरी व्रत
Mangla Gauri Vrat: मंगला गौरी व्रत भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत सावन माह में प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है। इस व्रत में माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां गौरी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि लाता है और मंगल दोष से मुक्ति दिलाता है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और संतान प्राप्ति के लिए भी मंगला गौरी व्रत रखती हैं।
मंगला गौरी व्रत क्यों रखा जाता है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका प्रेम व आशीर्वाद पाने के लिए यह व्रत रखा था। मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से करने पर विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और घर में सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। इसके अलावा, यह भी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से महिलाओं को माँ बनने का सौभाग्य भी प्राप्त होता है।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
मंगला गौरी व्रत सावन के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है। इस व्रत का विशेष महत्व यह है कि यह व्रत सावन माह में आता है और भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। यह व्रत वैवाहिक जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी और फलदायी है। इसी प्रकार, अविवाहित कन्याएँ भी अपने उज्ज्वल भविष्य और अच्छे पति की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं। इस व्रत को रखने से सभी कष्ट दूर होते हैं और संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। इस दिन यह व्रत रखने से माता गौरी भी सौभाग्यवती स्त्री होने का आशीर्वाद देती हैं।
आचार्य - शिवेश शर्मा मंगलागौरी मंदिर काशी (अर्चक)
098380 44103