ManagalaGauri mandir

ManagalaGauri mandir Mangalagauri temple where people's worship and get rid of their mangal dosh late in marriages,and mata shringaar any types of puja. Contact here.

archak-mangalagauri mandir phone number -9838044103,7007896359 Maa Mangala Gauri Temple: this is the temple where people worship and get rid of their MANGAL dosh.

धर्मMangla Gauri Vrat: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 15 julyMangla Gauri Vrat: मंगला गौरी का व्रत सावन माह के मंगलवार के ...
28/07/2026

धर्म
Mangla Gauri Vrat: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 15 july
Mangla Gauri Vrat: मंगला गौरी का व्रत सावन माह के मंगलवार के दिन रखा जाता है। इस दिन विधिपूर्वक माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जान लेते हैं मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि।

मंगला गौरी व्रत
Mangla Gauri Vrat: मंगला गौरी व्रत भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत सावन माह में प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है। इस व्रत में माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां गौरी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि लाता है और मंगल दोष से मुक्ति दिलाता है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और संतान प्राप्ति के लिए भी मंगला गौरी व्रत रखती हैं।

मंगला गौरी व्रत क्यों रखा जाता है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका प्रेम व आशीर्वाद पाने के लिए यह व्रत रखा था। मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से करने पर विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और घर में सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। इसके अलावा, यह भी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से महिलाओं को माँ बनने का सौभाग्य भी प्राप्त होता है।

मंगला गौरी व्रत का महत्व
मंगला गौरी व्रत सावन के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है। इस व्रत का विशेष महत्व यह है कि यह व्रत सावन माह में आता है और भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। यह व्रत वैवाहिक जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी और फलदायी है। इसी प्रकार, अविवाहित कन्याएँ भी अपने उज्ज्वल भविष्य और अच्छे पति की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं। इस व्रत को रखने से सभी कष्ट दूर होते हैं और संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। इस दिन यह व्रत रखने से माता गौरी भी सौभाग्यवती स्त्री होने का आशीर्वाद देती हैं।
आचार्य - शिवेश शर्मा मंगलागौरी मंदिर काशी (अर्चक)
098380 44103

🌿 पावन श्रावण मास विशेष 🌿सम्पूर्ण श्रावण मास रुद्राभिषेक एवं बिल्वार्चनहर-हर महादेव!श्रावण मास के पावन अवसर पर भगवान शिव...
26/07/2026

🌿 पावन श्रावण मास विशेष 🌿

सम्पूर्ण श्रावण मास रुद्राभिषेक एवं बिल्वार्चन

हर-हर महादेव!

श्रावण मास के पावन अवसर पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने हेतु सम्पूर्ण मास नित्य रुद्राभिषेक एवं बिल्वार्चन का विशेष आयोजन किया जा रहा है।

इस अनुष्ठान में शामिल हैं:

- 🔱 वैदिक विधि से रुद्राभिषेक
- 🌿 108 बिल्वपत्रों से बिल्वार्चन
- 📿 शिव मंत्र एवं रुद्रपाठ
- 🪔 आरती एवं प्रसाद

अनुष्ठान के संभावित लाभ:

- भगवान शिव की विशेष कृपा
- परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि
- ग्रह दोष एवं बाधाओं की शांति हेतु प्रार्थना
- मनोकामना पूर्ति एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना

हर हर महादेव काशी में स्थित माता मंगला गौरी मंदिर के परिसर में बाबा गभस्तीश्वर महादेव का पूरे श्रावण माह नित्य रुद्राभिषेक 108 बिल्वपत्र अर्चना एवं पूजन का कार्यक्रम आयोजित है जो भी भक्त इस पुण्य कार्य में सम्मिलित होना चाहते हैं वो संपर्क कर सकते हैं
काशी में गभस्तीश्वर महादेव का रुद्राभिषेक करना पापों को नष्ट करने, मन को शांत करने, और सूर्य ग्रह के दोषों से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण व पुण्यकारी माना जाता है।

गभस्तीश्वर महादेव और रुद्राभिषेक का महत्व

सूर्य द्वारा स्थापना: इस पावन शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान सूर्य ने की थी, जिससे यह स्थान सूर्योपासना और शिव कृपा का अद्भुत संगम बन जाता है।

सूर्य दोष निवारण: कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होने या उससे जुड़े कष्टों व रोगों से पीड़ित जातकों के लिए यहाँ अभिषेक करना विशेष फलदायी है।

काशी की दिव्यता: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में किया गया रुद्राभिषेक सामान्य भूमि की तुलना में हजार गुना अधिक पुण्य और तुरंत फल देता है।

मनोकामना पूर्ति: इस लिंग की पूजा करने से भक्तों को सभी प्रकार की भौतिक सफलता, ऐश्वर्य और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इस पुण्य कार्य में सम्मिलित की सहयोग राशि 1500 रुपए है।

आचार्य -शिवेश शर्मा मंगलागौरी मंदिर काशी ( अर्चक)
सम्पर्क सुत्र -
098380 44103
7007896359

📞 बुकिंग एवं जानकारी के लिए आज ही संपर्क करें।

ॐ नमः शिवाय
हर हर महादेव!

देवशयनी एकादशी शनिवार, जुलाई 25, 2026 2026 देवशयनी एकादशी व्रतआषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवश...
25/07/2026

देवशयनी एकादशी शनिवार, जुलाई 25, 2026

2026 देवशयनी एकादशी व्रत
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारम्भ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी एकादशी के चार माह के बाद भगवान् विष्णु प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागतें हैं।

देवशयनी एकादशी प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा के तुरन्त बाद आती है और अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार देवशयनी एकादशी का व्रत जून अथवा जुलाई के महीने में आता है। चतुर्मास जो कि हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार चार महीने का आत्मसंयम काल है, देवशयनी एकादशी से प्रारम्भ हो जाता है।

देवशयनी एकादशी को पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

एकादशी व्रत का पारण
एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के पश्चात् पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात् ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है।

एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिये। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिये। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिये सर्वाधिक उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिये। कुछ कारणों से यदि कोई प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के उपरान्त पारण करना चाहिये।

कभी-कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिये हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिये। दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। संन्यासियों, विधवाओं तथा मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिये। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी एवं वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।
आचार्य शिवेश शर्मा मंगलागौरी मंदिर काशी (अर्चक)
098380 44103

30 जुलाई 2026 से महादेव का परमप्रिय मास –  #श्रावण आरम्भ होने जा रहा है। त्रैलोक्य में ऐसा कोई सुख नहीं, जो श्रावण मास म...
24/07/2026

30 जुलाई 2026 से महादेव का परमप्रिय मास – #श्रावण आरम्भ होने जा रहा है। त्रैलोक्य में ऐसा कोई सुख नहीं, जो श्रावण मास में सम्पन्न शिव-आराधना से प्राप्त न हो सके। ऐसा कोई दुःख, क्लेश अथवा विपत्ति नहीं, जो इस पावन मास में महादेव की उपासना से नष्ट न हो जाए। आवश्यकता मात्र है शुद्ध श्रद्धा और शास्त्रसम्मत विधि की। प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मैं विविध शास्त्रोक्त जानकारी, पूजाविधि, प्रयोग, साधना-विधान एवं उपाय आप सब तक लेखों एवं ब्लॉग के माध्यम से पहुँचाता रहूँगा। किन्तु अभी से ही आपको आरम्भिक तैयारी में मन, वचन और कर्म से जुट जाना चाहिए।
उदाहरणार्थ : प्रतिदिन शिवालय में जाकर शिवदर्शन एवं पूजन करें। यदि सम्भव न हो तो अपने गृह में स्फटिक-शिवलिंग अथवा बाणलिंग स्थापित कर पूजन करें। पूजन-सामग्री जैसे रुद्राक्ष, गंगाजल, चन्दन, धूप, दीप, पुष्पमाला, श्रृंगी पात्र, अभिषेक हेतु कलश आदि अभी से एकत्र करने लगें। माली से पूर्व में ही कह दें कि प्रतिदिन 108 बिल्वपत्र, एक कमल पुष्प, और पुष्पमालाएँ निरंतर मास पर्यन्त प्रदान करता रहे। रात्रिभर प्रज्वलित रह सकें ऐसे 30 दीपक एवं अभिषेक हेतु पवित्र पात्र अभी से संग्रहित कर लें।

इसके अतिरिक्त यही वह उपयुक्त समय है जब आप शिवमंत्र, स्तोत्र, कवच आदि का शुद्ध उच्चारण एवं पठन-पाठन का अभ्यास आरम्भ करें। किसी योग्य गुरुजन, शिवभक्त अथवा आचार्य से इनका दीक्षा-स्वरूप ग्रहण करें। अपने मनोरथ की सिद्धि हेतु विशिष्ट स्तोत्र, कवच या मंत्र का संकल्प लें। प्रतिदिन शिवमानसपूजा, द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्र, रुद्राष्टक, शिवकवच, अष्टोत्तरशतनामावली आदि का पाठ अवश्य करें, चाहे कोई भी विघ्न उपस्थित हो। तन-मन-धन से महादेव की आराधना में संलग्न हो जाएँ।

यदि समय अथवा साधन का अभाव हो तो भी संकल्पपूर्वक प्रतिदिन न्यूनतम निम्नलिखित कृत्य करें :
1. शिवलिंग पर जल, दुग्ध, चन्दन, पुष्प एवं बिल्वपत्र अर्पित करें।
2. शिवलिंग पर श्रावण में प्रतिदिन 108 बिल्वपत्र अर्पण का संकल्प लें, जिससे समस्त पापों का क्षय होता है और महेश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
3. शिवालय में दीपज्योति प्रज्वलित कर उजाला फैलाएँ। यथाशक्ति रात्रिभर दीपक की ज्योति शिवलिंग पर पड़ती रहे इसका प्रयास करें।
4. श्रावण मास माहात्म्य का श्रवण अथवा पाठ अवश्य करें। यदि सुनना सम्भव न हो तो स्वयं पढ़ें और अन्यों को भी सुनाएँ।

आओ, हम सब तन, मन और आत्मा से इस श्रावण मास में देवाधिदेव महादेव की कृपा-सुधा का पान करें और जीवन को सफल बनाए l

23/07/2026

Mangala Gauri
हिन्दु कैलेण्डर में, श्रावण मास भगवान शिव एवं उनकी अर्धाङ्गिनी माता गौरी को समर्पित है। भगवान शिव और माता गौरी के व्रत कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु श्रावण मास को पवित्र माह माना गया है। श्रावण सोमवार और मंगला गौरी जैसे व्रत श्रावण मास में किये जाते हैं। भक्त या तो श्रावण मास के दौरान व्रत करने का सङ्कल्प लेते हैं अन्यथा श्रावण मास के आरम्भ से, अगले सोलह सप्ताह व्रत करने का सङ्कल्प लेते हैं।

मंगला गौरी का व्रत श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को विवाहित स्त्रियों द्वारा किया जाता है। स्त्रियाँ, मुख्यतः नवविवाहित स्त्रियाँ, सुखी वैवाहिक जीवन के लिये माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु इस व्रत को करती हैं। श्रावण मास को उत्तर भारतीय राज्यों में सावन माह के रूप में भी जाना जाता है।

आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में मंगला गौरी व्रत को श्री मंगला गौरी व्रतम के रूप में भी जाना जाता है।

क्षेत्रों के आधार पर, श्रावण मास के प्रारम्भिक समय में पन्द्रह दिनों का अन्तर हो सकता है। पूर्णिमान्त कैलेण्डर में, जो कि सामान्यतः उत्तर भारतीय राज्यों में प्रचलित है, श्रावण माह अमान्त कैलेण्डर से पन्द्रह दिन पूर्व प्रारम्भ होता है।

आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्णाटक और तमिल नाडु में, अमान्त चन्द्र कैलेण्डर का पालन किया जाता है, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों जैसे, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखण्ड में पूर्णिमान्त चन्द्र कैलेण्डर का पालन किया जाता है। इसीलिये सावन सोमवार की आधी तिथियाँ दोनों कैलेण्डर में भिन्न-भिन्न होती हैं।

मंगलागौरी मंदिर में पूजन अर्चन एवं रुद्राभिषेक, मंगल ग्रह शान्ति, मंगलागौरी व्रत उद्यापन के लिए आप संपर्क करें सकते हैं

आचार्य -शिवेश शर्मा मंगलागौरी मंदिर काशी(अर्चक)
098380 44103

Mangalagauri temple where people's worship and get rid of their mangal dosh late in marriages,and mata shringaar any types of puja. Contact here.
archak-mangalagauri mandir phone number -9838044103,7007896359

सावन (श्रावण) के महीने में पड़ने वाले मंगलवार को माता पार्वती (मंगला गौरी) की पूजा का विशेष महत्व है。 इसे मंगला गौरी व्र...
22/07/2026

सावन (श्रावण) के महीने में पड़ने वाले मंगलवार को माता पार्वती (मंगला गौरी) की पूजा का विशेष महत्व है。 इसे मंगला गौरी व्रत कहा जाता है。 यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है。
कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं。मंगला गौरी पूजन के महत्व और इससे जुड़े मुख्य तथ्यों की जानकारी नीचे दी गई है:वैवाहिक जीवन में सुख-शांति: इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और माता पार्वती की कृपा से घर में सुख-समृद्धि आती है。कुंडली के दोष दूर होना: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगलवार का दिन मंगल ग्रह से संबंधित होता है。
मंगला गौरी की पूजा करने से कुंडली में स्थित 'मांगलिक दोष' का प्रभाव कम होता है。सोलह का नियम: इस पूजा में सोलह (16) अंक का विशेष महत्व होता है。 पूजा की सभी सामग्री, जैसे सोलह प्रकार के श्रृंगार का सामान (चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर आदि), फल और फूल 16 की संख्या में अर्पित किए जाते हैं。व्रत और कथा: सुबह स्नान करके लाल वस्त्र पहने जाते हैं और दिनभर उपवास रखा जाता है。 शाम को विधि-विधान से पूजा करके 'मंगला गौरी व्रत कथा' सुनी या पढ़ी जाती है。
शक्तिपीठ का आशीर्वाद: यदि आप वाराणसी में हैं, तो सावन के मंगलवार को माँ के प्रसिद्ध मंगला गौरी मंदिर (गया, बिहार) या किसी भी प्रमुख शिव-पार्वती मंदिर में दर्शन और अनुष्ठान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती हैं
काशी में माता मंगला गौरी के पूजन के लिए आप संपर्क कर सकते हैं
आचार्य शिवेश शर्मा ( मंगलागौरी मंदिर अर्चक)
098380 44103

आषाढ़ अमावस्या 2026: 13 या 14 जुलाई को कब है आषाढ़ अमावस्या? सही तिथि, पितर तर्पण, स्नान और दान के उपाय जानिए। हलधारिणी ...
12/07/2026

आषाढ़ अमावस्या 2026:
13 या 14 जुलाई को कब है आषाढ़ अमावस्या? सही तिथि, पितर तर्पण, स्नान और दान के उपाय जानिए। हलधारिणी अमावस्या पर पितर पूजा से कैसे मिलती है पितरों की कृपा और घर में सुख-समृद्धि।

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि पितरों की उपासना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। आषाढ़ अमावस्या भी इनमें से एक है, जिसे हलहारिणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन पितरों को तर्पण देने, स्नान और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस बार आषाढ़ अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस है।

आषाढ़ अमावस्या 2026 की सही तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026 को शाम 6:49 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3:12 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन ही स्नान, तर्पण, दान और श्राद्ध करना शास्त्र सम्मत है।

हलहारिणी अमावस्या क्यों कहते हैं?
आषाढ़ अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन किसान अपने हल, बैलों और खेती के सभी उपकरणों की पूजा करते हैं। वे धरती माता का आभार व्यक्त करते हैं और अच्छी बारिश तथा समृद्ध फसल की कामना करते हैं। मान्यता है कि इसी दिन से मानसून पूरी तरह सक्रिय होता है और खेतों में जुताई-बुवाई शुरू होती है। इसलिए यह तिथि किसानों के लिए खास महत्व रखती है।

पितरों को प्रसन्न करने के उपाय
आषाढ़ अमावस्या पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर पितरों का स्मरण कर तर्पण दें। तर्पण में काले तिल, कुश और सफेद फूल का उपयोग करें। इससे पितृ दोष शांत होता है। इस दिन पितृ चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। गंगा, यमुना या नजदीकी पवित्र नदी में स्नान करने से विशेष फल मिलता है।
आचार्य शिवेश शर्मा
098380 44103

ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी (हिन्दू पंचांग के अनुसार तीसरे चंद्र मास की 14वीं तिथि) का हिंदू धर्म में अत्यधिक आध्यात्मिक और प...
25/06/2026

ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी (हिन्दू पंचांग के अनुसार तीसरे चंद्र मास की 14वीं तिथि) का हिंदू धर्म में अत्यधिक आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है।
यह तिथि मुख्य रूप से भगवान शिव, कुबेर और गणेश जी की उपासना के लिए अत्यंत ऊर्जावान मानी जाती है।मुख्य महत्व और अनुष्ठान:ज्येष्ठेश्वर महादेव प्राकट्य: स्कंद पुराण के अनुसार, इसी तिथि पर महादेव ने काशी (वाराणसी) में 'ज्येष्ठेश्वर' के रूप में प्रथम प्राकट्य लिया था। इस दिन भगवान शिव (या श्री काशी विश्वनाथ) का विशेष जलाभिषेक करने से जन्मों के पाप कट जाते हैं।

कुबेरेश्वर महादेव: इस तिथि को कुबेर देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भी बहुत उत्तम माना जाता है। वाराणसी के नलकुबेरेश्वर महादेव मंदिर में इस तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है, जहाँ पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है और कुबेर समान धन-संपदा की प्राप्ति होती है।स्नान यात्रा और अभिषेक: इस पावन तिथि के आसपास वैष्णव संप्रदाय (जैसे श्रीजी मंदिर) में ठाकुर जी की स्नानोत्सव (ज्येष्ठाभिषेक) यात्रा भी निकाली जाती है।विनायक चतुर्थी (चतुर्थी तिथि के रूप में): यदि आप ज्येष्ठ शुक्ल 'चतुर्थी' के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह तिथि विनायक चतुर्थी कहलाती है, जो विघ्नहर्ता भगवान गणेश के आशीर्वाद और मनोकामना पूर्ति हेतु समर्पित है।अगर आप आगामी ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी के शुभ मुहूर्तों, पूजा विधि या वाराणसी के स्थानीय मंदिरों में होने वाले विशेष
आयोजनों के बारे में और जानकारी चाहते हैं, तो मुझे बताएं।
आचार्य शिवेश शर्मा मंगलागौरी मंदिर (काशी )
098380 44103

Address

Dodh Vinyak
Varanasi
221001

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Tuesday 5am - 9pm
Wednesday 5am - 9pm
Thursday 5am - 9pm
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