27/03/2022
पापमोचनी एकादशी व्रत की पूजा कैसे करें?
भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐसा व्रत जिसे करने मात्र से आपके सारे पापों का नाश हो जाता है। जी हाँ ऐसा ही एक व्रत है, जो है एकादशी का व्रत। वैसे तो हर एक महीने में दो एकादशी आती है, लेकिन हम जिस एकादशी की बात कर रहे है। वह है चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे पापमोचनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन हर एक व्रत की पूजा का एक विशेष समय होती है जिसे हम शुभ मुहूर्त कहते है।
पापमोचनी एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि का प्रारम्भ - 27 मार्च को सायं 6 बजकर 4 मिनट से।
एकादशी तिथि समाप्त - 28 मार्च को सायं 4 बजकर 15 मिनट तक।
पारणा शुभ मुहूर्त - 29 मार्च को सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 43 मिनट तक।
तो यह था पापमोचनी एकादशी व्रत से जुड़ें शुभ मुहूर्त की जानकारी। आइए अब जानते है पापमोचनी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में।
व्रत का महत्व
पापमोचनी एकादशी व्रत को करने से मनुष्य जहां विष्णु पद को प्राप्त करता है वहीं उसके समस्त कलुष समाप्त होकर निर्मल मन में श्री हरि का वास हो जाता है। साथ ही बड़े से बड़े यज्ञों के समान फल की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने से हजार गायों के दान के बराबर फल मिलता है। पुराणों के अनुसार ब्रह्म हत्या, स्वर्ण चोरी, सुरापान और गुरुपत्नी गमन जैसे महापाप भी इस व्रत को करने से दूर हो जाते हैं।
तो यह था पापमोचनी एकादशी एकादशी व्रत का महत्व। अब हम जानेंगे कि इस दिन किस तरह पूजा करें कि हमें सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाए।
व्रत की पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लीजिए। पूजन के लिए एक चौकी पर विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले जल, अक्षत, फूल अर्पित कर हल्दी का तिलक करें। भगवान को धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर आज की एकादशी व्रत की कथा का पठन या श्रवण करें। पूजन के अंत में आरती करें। उसके बाद प्रसाद ग्रहण करके दिन भर यथाशक्ति व्रत रखें और व्रत का पारणा अगले दिन शुभ मुहूर्त में करें। इसी के साथ इस एकादशी को विशेष रूप से कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो आइए जानते है कि इस दिन किन चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
तो यह थी पापमोचनी एकादशी व्रत की पूजा विधि अब हम जानेंगे कि इस दिन किन-किन बातों का ध्यान रखना चाह
व्रत में क्या करें और क्या नहीं
इस दिन किसी भी प्रकार से तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। जो लोग एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें दशमी तिथि को सूर्यास्त से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए, ताकि अगले दिन आपके पेट में अन्न का अंश न रहे। इसी के साथ जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते हैं, उन्हें भी इस दिन खासतौर पर चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी व्रत को कभी हरि वासर समाप्त होने से पहले पारणा नहीं करना चाहिए। द्वादशी समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करना पाप के समान माना जाता है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही हो तो इस स्थिति में सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। द्वादशी तिथि पर प्रातः पूजन व ब्राह्मण को भोजन कराने के पश्चात ही व्रत का पारणा करना चाहिए।
इसी के साथ आज के दिन इन चीजों का विशेष तौर से ध्यान रखें जो आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। आज के दिन पेड़ पौधो की फूल पत्तियां ना तोड़े और मांस मदिरा, लहसुन - प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहने के साथ किसी का दिया हुआ भोजन भी ग्रहण नहीं करना चाहिए।
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