ManagalaGauri mandir

ManagalaGauri mandir Mangalagauri temple where people's worship and get rid of their mangal dosh late in marriages,and mata shringaar any types of puja. Contact here.

archak-mangalagauri mandir phone number -9838044103,7007896359 Maa Mangala Gauri Temple: this is the temple where people worship and get rid of their MANGAL dosh.

28/09/2025

कार्तिक दीपदान जरूर करें

#कार्तिक में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है #दीपदान। दीपदान अर्थात दीपक प्रज्वलित करके देव अथवा देवस्वरूप को अर्पित करना। वैसे तो मैं दीपदान की विस्तृत पोस्ट लिखूंगा परंतु संक्षेप में अभी यहां बता देता हूं जिससे आप तैयारी कर सकें। दीपक आदि ला सकें।

दीपदान प्रदोषकालव्यापिनी आश्विन पूर्णिमा 06 अक्टूबर 2025 से आरम्भ होकर कार्तिक पूर्णिमा 05 नवंबर 2025 तक प्रतिदिन सांयकाल होगा।

१. एक दीपक प्रतिदिन मंदिर में शिवलिंग के समक्ष जलायें। अगर मंदिर नहीं जा सकते तो घर पर जलायें
२. एक दीपक प्रतिदिन मंदिर में नारायण के समक्ष जलायें। अगर मंदिर नहीं जा सकते तो घर पर जलायें
३. एक दीपक प्रतिदिन तुलसी के समझ जलायें। प्रतिदिन अर्थात रविवार को भी।
४. एक दीपक प्रतिदिन पीपल के समझ जलायें।
५. एक दीपक प्रतिदिन पितरों के समक्ष जलायें।
६. अगर संभव हो तो एक दीपक प्रतिदिन वटवृक्ष के समझ जलायें।
७. अगर संभव हो तो प्रतिदिन आकाशदीप जलायें। काशी पञ्चगंगा घाट पर आकाशदीप जलवाने के लिए हमसे संपर्क करें।
८. अगर आपके घर के समीप सागर है तो वहाँ अथवा नदी है तो वहाँ अथवा पर्वत है तो वहाँ एक दीपक जलायें
९. अगर आपके घर के पास गौशाला है तो वहाँ एक दीपक जलायें
१०. एक दीपक प्रतिदिन आंवला वृक्ष के समीप जलायें

प्रत्येक दिन मिट्टी के नये दीपक का उपयोग करें। उपयोग से पहले कम से कम 2 घण्टे दीपक भिगो लें। अथवा पीतल के दीपक को धोकर बार बार उपयोग कर सकते हैं।

दीपदान से संबंधित अनेक बातें आगे बतायेंगे।

#दीपदान
#कार्तिक_मास

🌹मङ्गले मङ्गलार्हे च सर्वमङ्गलमङ्गले ।सतां मङ्गलदे देवि सर्वेषां मङ्गलालये ॥ १२॥🌹🌹पूज्या मङ्गलवारे च मङ्गलाभीष्टदैवते ।प...
26/08/2025

🌹मङ्गले मङ्गलार्हे च सर्वमङ्गलमङ्गले ।
सतां मङ्गलदे देवि सर्वेषां मङ्गलालये ॥ १२॥🌹

🌹पूज्या मङ्गलवारे च मङ्गलाभीष्टदैवते ।
पूज्ये मङ्गलभूपस्य मनुवंशस्य सन्ततम् ॥ १३॥🌹

🌹मङ्गलाधिष्ठातृदेवि मङ्गलानां च मङ्गले ।
संसार मङ्गलाधारे मोक्षमङ्गलदायिनि ॥ १४॥🌹 माता मंगला गौरी का हरितालिका तीज के अवसर पर माता के श्रृंगार की सुन्दर झांकी 🌹🙏🙏🙏

एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होती है. साल में कुल 24 एकादशी तिथि आती हैं. धर्म शास्त्रों में एकादश...
25/12/2024

एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होती है. साल में कुल 24 एकादशी तिथि आती हैं. धर्म शास्त्रों में एकादशी तिथि का विशेष उल्लेख मिलता है. धार्मिक मान्यता है कि एकादशी तिथि पर सच्चे मन से श्रीहरि संग मां लक्ष्मी की पूजा और व्रत रखने से व्यक्ति को हर काम में सफलता मिलती है. साथ ही इस दिन अन्न-धन का दान करने से कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती है. हर एक एकादशी का अपना अलग नाम और महत्व होता है. पंचांग के अनुसार, हर साल पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर सफला एकादशी मनाई जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सफला एकादशी क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है? अगर नहीं, तो आइए इस लेख में आपको बताते हैं सफला एकादशी के बारे में.

सफला एकादशी क्यों मनाई जाती है? (importance of Saphala Ekadashi)
सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी कार्य सफल होते हैं, इसलिए इसे सफला एकादशी कहा जाता है. साल 2024 में यह एकादशी 26 दिसंबर 2024 को मनाई जाएगी. सफला एकादशी पौष माह की पहली एकादशी है लेकिन यह साल 2024 की आखिरी एकादशी होगी.

Bhairavai namah
25/12/2024

Bhairavai namah

22/12/2024
22/12/2024
16/06/2024

एकादशी व्रत

17 जून 2024, सोमवार को एकादशी प्राप्त तो है परन्तु 60 घटिका की एकादशी प्राप्त होने के कारण एकादशी तिथि को वृद्धा माना जाएगा।

18 जून 2024, मंगलवार को भारत में सर्वत्र सूर्योदय के समय एकादशी तिथि प्राप्त हो रही है। अतः एकादशी तिथि का निर्णय यह है कि निर्जला एकादशी यानी भीमसेनी एकादशी 18 जून 2024, मंगलवार को ही माननी चाहिए। अतः 18 जून 2024, मंगलवार को ही आप सभी एकादशी व्रत अवश्य करें।

माता का श्रृंगार चूड़ियों की माला से जो एक भक्त ने भेट की
24/11/2022

माता का श्रृंगार चूड़ियों की माला से जो एक भक्त ने भेट की

नवरात्रि का पहला दिन, नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है...
02/04/2022

नवरात्रि का पहला दिन, नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है. नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करते हैं. जिसे कलश स्थापना (Kalash Sthapana) भी कहा जाता है.
Updated : April 01, 2022 19:07 IST
Mata Shailputri Bhog: मां दुर्गा 9 दिनों तक उनके घरों में विराजमान रहकर उनपर अपनी कृपा बरसाती हैं.
खास बातें
नवरात्रि के नौ दिनों को बहुत ही पवित्र माना जाता है.
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है.
मां शैलपुत्री को गाय के घी और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है.
Chaitra Navratri 1st Day 2022: कल है नवरात्रि का पहला दिन, नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है. नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करते हैं. जिसे कलश स्थापना (Kalash Sthapana) भी कहा जाता है. जौ बोने के साथ-साथ कई लोग अखंड ज्योति भी जलाते हैं. इस बार चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) 02 अप्रैल 2022, शनिवार से शुरू होकर 11 अप्रैल 2022, सोमवार तक है. भक्त मां दुर्गा कि नौ दिनों तक भक्ति भाव से पूजा करते हैं. माना जाता है जो भक्त मां कि भक्ति और श्रद्धा से आराधना करते हैं, मां दुर्गा 9 दिनों तक उनके घरों में विराजमान रहकर उनपर अपनी कृपा बरसाती हैं. माना जाता है कि देवी दुर्गा ने 9 अलग-अलग अवतार लेकर राक्षसों का अंत किया था. और भक्त उन्हें इन्हीं 9 रूपों (Mata Shailputri) में पूजते हैं. नौ दिनों तक मास, शराब आदि का सेवन नहीं किया जाता. कई लोग इन नौ दिनों तक प्याज, लहसुन का भी सेवन नहीं करते हैं. नवरात्रि में नौ दिन माता के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है और उन्हें अलग-अलग भोग भी लगाएं जाते हैं.
नवरात्रि 2022::
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप को गाय के घी और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है. आप माता को गाय के दूध से बनी बर्फी का भोग लगा सकते हैं. इसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है.
अर्चक मंगला गौरी मंदिर
शिवेश कुमार शर्मा-9838044103-7007896359

पापमोचनी एकादशी व्रत की पूजा कैसे करें?भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐसा व्रत जिसे करने मात्र से आपके सारे पापों का नाश हो ...
27/03/2022

पापमोचनी एकादशी व्रत की पूजा कैसे करें?
भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐसा व्रत जिसे करने मात्र से आपके सारे पापों का नाश हो जाता है। जी हाँ ऐसा ही एक व्रत है, जो है एकादशी का व्रत। वैसे तो हर एक महीने में दो एकादशी आती है, लेकिन हम जिस एकादशी की बात कर रहे है। वह है चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे पापमोचनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन हर एक व्रत की पूजा का एक विशेष समय होती है जिसे हम शुभ मुहूर्त कहते है।

पापमोचनी एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि का प्रारम्भ - 27 मार्च को सायं 6 बजकर 4 मिनट से।
एकादशी तिथि समाप्त - 28 मार्च को सायं 4 बजकर 15 मिनट तक।
पारणा शुभ मुहूर्त - 29 मार्च को सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 43 मिनट तक।

तो यह था पापमोचनी एकादशी व्रत से जुड़ें शुभ मुहूर्त की जानकारी। आइए अब जानते है पापमोचनी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में।

व्रत का महत्व
पापमोचनी एकादशी व्रत को करने से मनुष्य जहां विष्णु पद को प्राप्त करता है वहीं उसके समस्त कलुष समाप्त होकर निर्मल मन में श्री हरि का वास हो जाता है। साथ ही बड़े से बड़े यज्ञों के समान फल की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने से हजार गायों के दान के बराबर फल मिलता है। पुराणों के अनुसार ब्रह्म हत्या, स्वर्ण चोरी, सुरापान और गुरुपत्नी गमन जैसे महापाप भी इस व्रत को करने से दूर हो जाते हैं।

तो यह था पापमोचनी एकादशी एकादशी व्रत का महत्व। अब हम जानेंगे कि इस दिन किस तरह पूजा करें कि हमें सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाए।

व्रत की पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लीजिए। पूजन के लिए एक चौकी पर विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले जल, अक्षत, फूल अर्पित कर हल्दी का तिलक करें। भगवान को धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर आज की एकादशी व्रत की कथा का पठन या श्रवण करें। पूजन के अंत में आरती करें। उसके बाद प्रसाद ग्रहण करके दिन भर यथाशक्ति व्रत रखें और व्रत का पारणा अगले दिन शुभ मुहूर्त में करें। इसी के साथ इस एकादशी को विशेष रूप से कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो आइए जानते है कि इस दिन किन चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

तो यह थी पापमोचनी एकादशी व्रत की पूजा विधि अब हम जानेंगे कि इस दिन किन-किन बातों का ध्यान रखना चाह

व्रत में क्या करें और क्या नहीं
इस दिन किसी भी प्रकार से तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। जो लोग एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें दशमी तिथि को सूर्यास्त से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए, ताकि अगले दिन आपके पेट में अन्न का अंश न रहे। इसी के साथ जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते हैं, उन्हें भी इस दिन खासतौर पर चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी व्रत को कभी हरि वासर समाप्त होने से पहले पारणा नहीं करना चाहिए। द्वादशी समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करना पाप के समान माना जाता है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही हो तो इस स्थिति में सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। द्वादशी तिथि पर प्रातः पूजन व ब्राह्मण को भोजन कराने के पश्चात ही व्रत का पारणा करना चाहिए।

इसी के साथ आज के दिन इन चीजों का विशेष तौर से ध्यान रखें जो आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। आज के दिन पेड़ पौधो की फूल पत्तियां ना तोड़े और मांस मदिरा, लहसुन - प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहने के साथ किसी का दिया हुआ भोजन भी ग्रहण नहीं करना चाहिए।
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माता मंगला गौरी एवं बाबा गभस्तीश्वर महादेव के वार्षिक अन्नकूट श्रृंगार की अनुपम झाकी॥ श्रीः ॥लीलालब्धस्थापितलुप्ताखिललोक...
16/01/2022

माता मंगला गौरी एवं बाबा गभस्तीश्वर महादेव के वार्षिक अन्नकूट श्रृंगार की अनुपम झाकी॥ श्रीः ॥

लीलालब्धस्थापितलुप्ताखिललोकां
लोकातीतैर्योगिभिरन्तश्चिरमृग्याम् ।
बालादित्यश्रेणिसमानद्युतिपुञ्जां
गौरीममम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ १॥

प्रत्याहारध्यानसमाधिस्थितिभाजां
नित्यं चित्ते निर्वृतिकाष्ठां कलयन्तीम् ।
सत्यज्ञानानन्दमयीं तां तनुरूपां
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ २॥

चन्द्रापीडानन्दितमन्दस्मितवक्त्रां
चन्द्रापीडालंकृतनीलालकभाराम् ।
इन्द्रोपेन्द्राद्यर्चितपादाम्बुजयुग्मां
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ३॥

आदिक्षान्तामक्षरमूर्त्या विलसन्तीं
भूते भूते भूतकदम्बप्रसवित्रीम् ।
शब्दब्रह्मानन्दमयीं तां तटिदाभां
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ४॥

मूलाधारादुत्थितवीथ्या विधिरन्ध्रं
सौरं चान्द्रं व्याप्य विहारज्वलिताङ्गीम् ।
येयं सूक्ष्मात्सूक्ष्मतनुस्तां सुखरूपां
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ५॥

नित्यः शुद्धो निष्कल एको जगदीशः
साक्षी यस्याः सर्गविधौ संहरणे च ।
विश्वत्राणक्रीडनलोलां शिवपत्नीं
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ६॥

यस्याः कुक्षौ लीनमखण्डं जगदण्डं
भूयो भूयः प्रादुरभूदुत्थितमेव ।
पत्या सार्धं तां रजताद्रौ विहरन्तीं
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ७॥

यस्यामोतं प्रोतमशेषं मणिमाला-
सूत्रे यद्वत्क्कापि चरं चाप्यचरं च ।
तामध्यात्मज्ञानपदव्या गमनीयां
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ८॥

नानाकारैः शक्तिकदम्बैर्भुवनानि
व्याप्य स्वैरं क्रीडति येयं स्वयमेका ।
कल्याणीं तां कल्पलतामानतिभाजां
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ९॥

आशापाशक्लेशविनाशं विदधानां
पादाम्भोजध्यानपराणां पुरुषाणाम् ।
ईशामीशार्धाङ्गहरां तामभिरामां
गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ १०॥

प्रातःकाले भावविशुद्धः प्रणिधाना-
द्भक्त्या नित्यं जल्पति गौरिदशकं यः ।
वाचां सिद्धिं सम्पदमग्रयां शिवभक्तिं
तस्यावश्यं पर्वतपुत्री विदधाति ॥ ११॥

इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य
श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य
श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ
गौरीदशकम् सम्पूर्णम् ॥

14 जनवरी, 2021 (शुक्रवार)मकर संक्रांति का त्योहार नए वर्ष का पहला त्यौहार है जिसका हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है।...
14/01/2022

14 जनवरी, 2021 (शुक्रवार)
मकर संक्रांति का त्योहार नए वर्ष का पहला त्यौहार है जिसका हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है। मकर संक्रांति मुख्य रूप में भारत और नेपाल में मनाई जाती है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते है तब इस पर्व को मनाया जाता है।

वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार अधिकतर जनवरी माह के चौदहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते है।यह पर्व भगवान सूर्य के पूजन का सबसे बड़ा पर्व है। देशभर में इसे बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। आइए अब जानते है मकर संक्रांति में पूजा और दान का शुभ मुहूर्त कब है।

इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा।
14 जनवरी पुण्य काल का मुहूर्त 2 बजकर 12 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं महापुण्य काल मुहूर्त की बात करें तो यह 2 बजकर 12 मिनट से 2 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।

तो मित्रों ये था मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त, हमारे ज्योतिषाचार्य के अनुसार मकर संक्रांति शांतिदायक कार्यों को प्रारंभ करने के लिए ब्रह्म योग और अन्य सभी कार्यों के लिए आनंदादि योग शुभ होता है। वहीं, आनंदादि योग सभी प्रकार की असुविधाओं को दूर करता है। इस योग में किया गया प्रत्येक कार्य बाधाओं और चिंताओं से मुक्त रहता है।

आइए अब जानते है कि मकर संक्रांति मनाने के पीछे का का कारण। वैसे देखा जाए तो हर त्योहार को मनाने के पीछे एक कहानी एक परंपरा होती है, लेकिन मकर संक्रांति के पीछे कोई एक विशेष कारण नहीं है। इसका एक कारण ये है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और दूसरा है किसानों से जुड़ा। मकर संक्रांति किसानों के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है, क्योंकि इस दिन किसान अपनी फसल की कटाई करते है और इसी खुशी में इस त्योहार को मनाया जाता है।

तो मित्रों ये था मकर संक्रांति मनाने के पीछे का कारण, आइए अब जानते है मकर संक्रांति के दिन की जाने वाली पूजा विधि के बारे में। मकर संक्रांति की पूजा के लिए सबसे पहले पूण्य काल मुहूर्त और महापुण्य काल मुहूर्त निकाल ले, और अपने पूजा करने के स्थान को साफ़ और शुद्ध कर ले। वैसे संक्रांति की पूजा भगवान सूर्य को समर्पित होती है। इसके बाद एक थाली में 4 काली और 4 सफेद तीली के लड्डू रखे जाते हैं। इसके बाद थाली में चावल का आटा और हल्दी का मिश्रण, सुपारी, पान के पत्ते, शुद्ध जाल, फूल और अगरबत्ती रख दिजिए।

अब भगवान सूर्यदेव को प्रसाद का भोग लगाएं और उसके बाद आरती उतारें और सूर्य मंत्र ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सह सूर्याय नमः’ का कम से कम 21 या 108 बार जाप करें। तो मित्रों ये थी मकर संक्रांति पर भगवान सूर्यदेव की पूजा करने की विधि। आशा करते है कि आपको यह विडियो पसंद आया होगा। अगले वीडियो में हम जानेंगे कि किन-किन चीजों का दान करने से आपको मकर संक्रांति का शुभ फल प्राप्त होगा।

मकर संक्रांति को दान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है

Address

Dodh Vinyak
Varanasi
221001

Opening Hours

Monday 5am - 9pm
Tuesday 5am - 9pm
Wednesday 5am - 9pm
Thursday 5am - 9pm
Friday 5am - 9pm
Saturday 5am - 9pm
Sunday 5am - 9pm

Telephone

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