14/07/2016
वाराणसी. काशी में विराजमान बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भारत के कोने-कोने और विदेशों से लाखों भक्त आते हैं। सावन के महीने में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। वैसे तो धार्मिक जानकारियों को लेकर श्रद्धालुओं में हमेशा जिज्ञासा बनी रहती है, लेकिन बाबा विश्वनाथ के दरबार में होने वाली पांच आरतियों का अलग महत्व है। dainikbhaskar.com आपको इन आरतियों के बारे में बताने जा रहा है।
मंदिर के प्रमुख अर्चक पंडित श्रीकांत मिश्रा ने बताया कि आरती शब्द का अर्थ है, व्यापक और तल्लीन हो जाना। भगवान शिव ब्रह्मांड के पालनहार हैं। इन पांच आरतियों में शामिल होने वाला भक्त सौभाग्यशाली होता है। कहा जाता है कि उसे पापों से भी मुक्ति मिल जाती है। साथ ही विश्व में वास्तविक ऊर्जा का संचार होता है।
मंगला आरतीः ये आरती भोर में दो बजे से तीन बजे तक होती है। इसे 'ब्रह्म मुहूर्त' की आरती भी कहते हैं। माना जाता है कि इस समय यक्ष, गंदर्भ, नारद, ब्रह्मा, विष्णु सभी देवी-देवता मौजूद रहते हैं। इस दौरान देवगण गायन और वादन भी प्रस्तुत करते हैं। कोई वीणा बजाता है तो कोई राग गाता है। मंगला आरती में बाबा विश्वनाथ से पूरे ब्रह्मांड के कल्याण और मंगल की प्रार्थना की जाती है। बाबा का ये स्वरुप मंगलकारी होता है। मंगला आरती के बाबा पुनः औघड़दानी बनकर महाश्मशान मणिकर्णिका चले जाते हैं।
मध्याह्न की भोग आरतीः ये आरती दोपहर 11:30 से 12:10 तक होती है। इस आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, ताकि श्रृष्टि अन्न, धन्य और परोपकार से फलती-फूलती रहे। इसके बाद भव्य श्रृंगार होता है। उन्हें फल, फूल, मेवा, दही, मिष्ठान, दूध और भांग का भोग लगाया जाता है। भगवान भोग ग्रहण करने के लिए खुद इस आरती में शामिल होते he