02/04/2012
तुलसी पूजा क्यों? और इसकी वैज्ञानिकता क्या?
आधुनिक मत एवं वैज्ञानिक प्रयोगों के निष्कर्ष:-
इण्डियन ड्रग्स पत्रिका (अगस्त 1977) के अनुसार तुलसी में विद्यमान रसायन वस्तुतः उतने ही गुणकारी हैं, जितना वर्णन शास्रों में किया गया है। यह कीटनाशक है, कीटप्रतिकारक तथा प्रचण्ड जीवाणुनाशक है। विशेषकर एनांफिलिस जाति के मच्छरों के विरुद्ध इसका कीटनाशी प्रभाव उल्लेखनीय है। डॉ. पुष्पगंधनएवं सोबती ने अपने खोजपूर्ण लेख मेंबड़े विस्तार से विश्व में चल रहे प्रयासों की जानकारी दी है।
'एण्टीवायटिक्स एण्ड कीमोथेरेपी' पत्रिका के अनुसार तुलसी का ईथर निष्कर्ष टी.वी. के जीवाणु माइक्रोवैक्टीरियम ट्यूवर-कुलोसिस का बढ़ना रोक देता है। सभी आधुनिकतमऔषधियों की तुलना में यह निष्कर्ष अधिक सान्द्रता में श्रेष्ठ ही बैठता है। श्री रामास्वामी एवं सिरसी द्वारा दिए गए शोध परिणामों (द इण्डियन जनरल ऑफ फार्मेसी मई-1967) के अनुसार तुलसी की टी.वी. नाशक क्षमता विलक्षण है इस जीवाणु के 'ह्यूमन स्ट्रेन की वृद्धि' को भीयह औषधि रोकती है।
'वेल्थ ऑफ इण्डिया' के अनुसार तुलसी का स्वरस तथा निष्कर्ष कई अन्य जीवाणुओं के विरुद्ध भी सक्रिय पायागया है। इनमें प्रमुख हैं - स्टेफिलोकोकस आंरियस, साल्मोनेला टाइफोसा और एक्केरेशिया कोलाई। इसकी जीवाणु नाशी क्षमता कार्बोलिक अम्ल से 6 गुना अधिक है। नवीनतम शोधों में तुलसी की जीवाणुनाशी सक्रियता अन्यान्य जीवाणुओं के विरुद्ध भी सिद्ध की गई है। डॉ. कौल एवं डॉ. निगम (जनरल ऑफ रिसर्च इन इण्डियन मेडीसिन योगा एण्ड होम्योपैथी-12/1977) के अनुसार तुलसी का उत्पत तेल कल्वेसिला न्यूमोंनी, प्रोंटिस बलेगरिस केन्डीडां एल्बीकेन्स जैसे घातक रोगाणुओं के विरुद्ध भी सक्रिय पायागया है।
डॉ. भाट एवं बोरकर के शोध निष्कर्षोंके अनुसार (जे०एस०आई०आर०) तुलसी के बीजों में एण्टोकोएगुलेस संघटक होता है, जो स्टेफिलोकोएगुलेस के रक्त में प्रभाव को निरस्त करता है।इनके अतिरिक्त तुलसी के मधुमेह प्रतिरोधी, गर्भ निरोध तथा ज्वरनाशीप्रभावों पर भी विस्तार से वैज्ञानिक अध्ययन चल रहा है। संभावना है कि शास्रोक्त सभी प्रभावों को अगले दिनों प्रयोगशाला में सिद्ध किया जा सकेगा।
औषधीय महत्व -
भारतीय संस्कृति और धर्म में तुलसी को उसके महान गुणों के कारण ही सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। भारतीय संस्कृति में यह पूज्य है। तुलसी का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन विज्ञान के दृष्टिकोण से तुलसी एक औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बूटी के समान मानाजाता है। तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों कोदूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है। हृदय रोग हो या सर्दी जुकाम, भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है। औषधियेगुणों से परिपूर्ण पौराणिक काल से प्रसिद्ध पतीत पावन तुलसी के पत्तो का विधीपूर्वक नियमित औषधितुल्य सेवन करने से अनेकानेक बिमारिया ठीक हो जाती है। इसके प्रभाव से मानसिक शांति घर में सुख समृद्धि और जीवन में अपार सफलताओं का द्वार खुलता है। यह ऐसी रामबाण औषधी है जो हर प्रकार की बीमारियों में काम आती है जैसे - स्मरण शक्ति, हृदय रोग, कफ, श्वास के रोग, प्रतिश्याय, ख़ून की कमी, खॉसी, जुकाम, दमा, दंत रोग, धवल रोग आदि में चमत्कारी लाभ मिलता है। तुलसी एक प्रकार से सारे शरीर का शोधन करने वाली जीवन शक्ति संवर्धक औषधि है। वातावरण का भी शोधन करती है तथा पर्यावरण संतुलन बनाती है। इस औषधि के विषय में जितना लिखा जाए कम है।
तुलसी एक राम बाण औषधि है। यह प्रकृति की अनूठी देन है। इसकी जड़, तना, पत्तियां तथा बीज उपयोगी होते हैं। रासायनिक द्रव्यों एवं गुणों से भरपूर, मानव हितकारी तुलसी रूखी गर्म उत्तेजक, रक्त शोधक, कफ व शोधहर चर्म रोग निवारक एवं बलदायक होती है। यह कुष्ठ रोग का शमन करती है। इसमें कीटाणुनाशक अपार शक्ति हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि तपेदिक, मलेरिया व प्लेग के कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता तुलसी में विद्यमान है। शरीर की रक्त शुध्दि, विभिन्न प्रकार के विषों की शामक, अग्निदीपक आदि गुणों से परिपूर्ण हैतुलसी। इसको छू कर आने वाली वायु स्वच्छता दायक एवं स्वास्थ्य कारक होती है। घरों में हरे और काले पत्तों वाली तुलसी पाई जाती है। दोनों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। एक वर्ष तक निरंतरइसका सेवन करने से सभी प्रकार के रोग दूर हो सकते हैं। तुलसी का पौधा जिस घर में हो वहा बैक्टिरिया को पनपने नहीं देता, जो की स्वास्थ्य केलिए बहुत हानिकारक होते है।
प्रस्तुत सभी वैज्ञानिक शोधों व तुलसी के औषधिय गुणों से हमारे पूर्वज भलिभाँति परिचित थे। इन कारणों से इस पौधे को वो घर में लगाना जरुरी समझते थे। सभी घरों में अनिवार्य उपस्थिति के लिए सबसे सुगम उपाय उसका पूजन ही था।
फिर क्या था?
कालान्तर में ये तुलसी पूजा के रुप में प्रचलित हो गयी॥
तो यहीं है अपनी भारतीय संस्कृति.....
वन्दे मातरम!