Maharishi Mriitungjay

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06/12/2022

सऊदी अरब में मस्जिदों में लाउड स्पीकर लगाने पर प्रतिबंध लगाया - और कहा जिनको धर्म में विश्वास है उन्हैं मस्जिद से इमाम के पुकारने कि क्या जरूरत हैं... उन्हें नमाज के समय बिना बुलाये, पहले से ही मस्जिद में मौजूद होना चाहिये - सऊदी अरब द्वारा यह प्रतिबंध एक ऐतिहासिक फैसला है- 😡 आंख कान खोल कर वीडियो देख लो..

05/12/2022

तन्त्र पर ही यहाँ चर्चा करेगे बस।
कई बार अनजाने में कई प्रकार कि गलतिया कर बैठते है
जिसका परिणाम ठीक नहीं होता है कृपया इन
बातों का ध्यान दीजिये —
1. किसी निर्जन एकांत या जंगल आदि में मलमूत्र त्याग करने
से पूर्व उस स्थान को भलीभांति देख लेना चाहिए
कि वहां कोई ऐसा वृक्ष तो नहीं है जिस पर प्रेत
आदि निवास करते हैं अथवा उस स्थान पर कोई मजार
या कब्रिस्तान तो नहीं है।
2. किसी नदी तालाब कुआं या जलीय स्थान में
थूकना या मल-मूत्र त्याग करना किसी अपराध से कम नहीं है
क्योंकि जल ही जीवन है। जल को प्रदूषित करने स जल के
देवता वरुण रूष्ट हो सकते हैं।
3. घर के आसपास पीपल का वृक्ष नहीं होना चाहिए
क्योंकि पीपल पर प्रेतों का वास होता है।
4. सूर्य की ओर मुख करके मल-मूत्र का त्याग
नहीं करना चाहिए।
5. गूलर , शीशम, मेहंदी, बबूल , कीकर आदि के वृक्षों पर
भी प्रेतों का वास होता है। रात के अंधेरे में इन वृक्षों के
नीचे नहीं जाना चाहिए और न ही खुशबुदार पौधों के पास
जाना चाहिए।
6. महिलाये माहवारी के दिनों में चौराहे के वीच रस्ते में न
जाये उन्हें अपने से दाहिने रखे
7. कहीं भी झरना, तालाब, नदी अथवा तीर्थों में
पूर्णतया निर्वस्त्र होकर या नग्न होकर
नहीं नहाना चाहिए।
8. हाथ से छूटा हुआ या जमीन पर गिरा हुआ भोजन
या खाने की कोई भी वस्तु स्वयं ग्रहण न करें।
9. अग्नि व जल का अपमान न करें। अग्नि को लांघें नहीं व
जल को दूषित न करें।
उपाय :-
1 :- जब भी घर से बहार निकले इनके नमो का सुमिरन कर के
घर से निकले।
अश्व्त्थामा बलिर्व्यासो हनुमान्श्च
विभीषणः कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविनः l
सप्तैतान्सस्मरे नित्यं मार्कण्डेययथाष्टकं जीवेद् वर्षशतं
साग्रमं अप मृत्युविनिष्यति ll
ये सात नाम है जो अजर अमर है और आज भी पृथ्वी पर
विराजमान है
2 . अकाल मृत्यु निवारण के लिये
“नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।”
3 . राहु काल के समय यात्रा पर न जाये
4 . दिशाशूल के दिन यात्रा न करे
5 – शराब पीकर या तामसिक भोजन कर के धर्म क्षेत्र में न
जाय
श्री वशुदेवाये सर्वंम।।।

09/09/2022

पितृ पक्ष की शुरुआत दस सितंबर से हो रही है। हिन्दू धर्म में वर्ष के सोलह दिनों को अपने पितृ या पूर्वजों को समर्पित किया गया है, जिसे पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष या कनागत कहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास के कृष्ण पक्ष को पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता और पितृ पक्ष का आरम्भ भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से ही हो जाता है। इस बार पितृ पक्ष या महालय 10 सितम्बर से आरम्भ होकर 25 सितम्बर तक उपस्थित रहेगा।

ज्योतिषविद विभोर इंदु सुत कहते हैं कि श्राद्धों की कुल संख्या 16 होती है, जिसमें भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि को पहला श्राद्ध होता है और इसी दिन से श्राद्ध पक्ष शुरू माना जाता है। इस बार 10 सितम्बर को पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ ही महालय आरम्भ हो जाएगा और इसी क्रम में 11 तारीख को प्रतिपदा का श्राद्ध होगा, 12 को द्वितीया और 13 को तृतीया और चतुर्थी के श्राद्ध होंगे 14 को पंचमी पर 15 और 16 सितम्बर दोनों ही दिन षष्टी तिथि (छट) का श्राद्ध होगा। इसके बाद 17 सितम्बर को सप्तमी तिथि के श्राद्ध से 25 सितम्बर अमावस्या तक सभी श्राद्ध एक सीधे क्रम में होंगे। वे कहते हैं कि तृतीया व चतुर्थी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन 13 सितम्बर को होगा।

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पितृ पक्ष का वास्तविक तात्पर्य अपने पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धा को प्रकट करना है, इसलिए इसे श्राद्ध पक्ष या श्राद्ध का नाम दिया गया है। दस सितंबर को पूर्णिमा के साथ श्राद्ध पक्ष शुरू होंगे और 25 तक चलेंगे। अगले दिन यानि 26 से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। ज्योतिषविद अमित गुप्ता कहते हैं कि सोलह दिन का पूर्ण पितृपक्ष इस बार रहेगा। भाद्रपक्ष की पूर्णिमा तिथि से यह शुरू हो रहा है, जिसका समापन 25 को होगा। सभी तिथियां पूर्ण रूप से शुद्ध हैं, कोई तिथि घट या बढ़ नहीं रही हैं।

Nirjala Ekadashi 2022: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इसकी कथा द्वापर युग में महाभारत काल स...
03/06/2022

Nirjala Ekadashi 2022: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इसकी कथा द्वापर युग में महाभारत काल से जुड़ी हुई है। पांडु पुत्र भीम ने महर्षि वेदव्यास के कहने पर निर्जला व्रत रखा..
Nirjala Ekadashi क्यों रखा जाता है निर्जला एकादशी का व्रत, महाभारत काल से जुड़ी है इसकी कथा

हिंदू मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन बिना कुछ खाए पिए व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल निर्जला एकादशी 10 जून को है। निर्जला एकादशी व्रत का संबंध द्वापर युग से है। महाभारत काल में पांडवों से जुड़ी एक कथा है जिसमें निर्जला एकादशी का महत्व बताया गया है।

कहते हैं कि एक बार महर्षि वेदव्यास ने पांडवों समेत कुंती और द्रौपदी को हर एकादशी पर व्रत रखने के लिए कहा था। यह बात सुनकर पांडु पुत्र भीम चौंक गए। भीम ने महर्षि से कहा कि हर मास में दो बार एकादशी आती है, इस तरह एक वर्ष में 24 एकादशी आती हैं। भीम के लिए हर एकादशी पर व्रत रखना संभव नहीं था। क्योंकि उसके पेट में वृक नाम की अग्नि है, जो अत्यधिक भोजन ग्रहण करने के बाद भी शांत नहीं होती है।

भीमसेन ने कहा कि वह कुछ घंटे भी भूखे नहीं रह सकते तो हर एकादशी पर बिना कुछ खाए पिए व्रत कैसे रखेंगे। तब महर्षि वेदव्यास ने इसका समाधान बताया। उन्होंने कहा कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुम निर्जला व्रत रखना, इससे तुम्हें 24 एकादशी व्रत का पुण्य मिलेगा। भीम ने गुरु के कहे अनुसार बड़े साहस के साथ निर्जला एकादशी का व्रत रखा। मगर आखिर में वह मूर्छित हो गया। तब पांडवों ने गंगाजल छिड़ककर उसकी मूर्छा दूर की। इस तरह निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी भी कहा जाने लगा।
Shri Vashudevaye Sarvammm.....

15/07/2021
18/06/2021

21 जून, 2021, सोमवार को निर्जला एकादशी व्रत है। निर्जला एकादशी को सभी एकादशी में सबसे अधिक श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन व्रत करने से 24 एकादशी व्रत करने के बराबर फल की प्राप्ति होती है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन विधि- विधान से भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में दो बार एकादशी पड़ती है। साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत अधिक महत्व होता है। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी पूजा- विधि, महत्व, शुभ मुहूर्त और सामग्री की पूरी लिस्ट...

एकादशी मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारम्भ - जून 20, 2021 को 04:21 pm

एकादशी तिथि समाप्त - जून 21, 2021 को 01:31 pm

पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 22 जून को, 05:24 am से 08:12 am

निर्जला एकादशी पूजा- विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।

घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।

भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।

भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।

अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।

भगवान की आरती करें।

भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं।

इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें।

इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।

निर्जला एकादशी महत्व

इस पावन दिन व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है।

इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत रखने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इन शुभ योगों में होगा एकादशी व्रत

27/03/2021

12 बातें जो हर सनातन धर्म अनुयायी को ध्यान रखनी चाहिए।*
*कालम-6 पर विशेष ध्यान दे।*
1. क्या भगवान राम या भगवान कृष्ण कभी इंग्लैंड के *house of lord* के सदस्य रहे थे ? नहीं ना...
तो फिर ये क्या ~Lord Rama, Lord Krishna~ लगा रखा है ? सीधे सीधे *भगवान राम, भगवान कृष्ण* कहिये - अंग्रेजी में भी.
2. किसी की मृत्यु होने पर ~RIP~ बिलकुल मत कहिये। यानी Rest In Peace जो दफ़नाने वालों के लिए कहा जाता है।
आप कहिये - *"ओम शांति"*, अथवा *"मोक्ष प्राप्ति हो"* ! आत्मा कभी एक स्थान पर _आराम या विश्राम नहीं करती ! आत्मा का पुनर्जन्म होता है अथवा उसे मोक्ष मिलता है !_
3. अपने रामायण एवं महाभारत जैसे ग्रंथों को कभी भी ~mythological~ मत कहियेगा. *"mythological" शब्द बना है "myth" से और "myth" शब्द बना है हिंदी के "मिथ्या" शब्द से।*
*"मिथ्या" अर्थात 'झूठा' या 'जिसका कोई अस्तित्व ना हो'*
और हमारे सभी देवी देवता, राम और कृष्ण *वास्तविक रूप में प्रकट हुए हैं*
ये हमारा *गौरवशाली वैदिक ग्रंथों में लिखा* है और *राम एवं कृष्ण* हमारे अवतारी देवपुरुष हैं , _कोई ~mythological कलाकार~ नहीं !_
4. _अपने इष्ट देवों का नाम आदर सहित लें। उनका मज़ाक न बनने दें !_
5. हमारें मंदिरों को ~प्रार्थनागृह~ न कहें ! मंदिर *देवालय* होते हैं। _भगवान के निवासगृह_ ! वह ~प्रार्थनागृह~ नहीं होते !
_मंदिर में केवल प्रार्थना नहीं होती ! अन्य पूजा पद्धति में सिर्फ साप्ताहिक प्रार्थना होती है, जबकि हिंदू धर्म में ये नित्य कर्म है।
6. अपने बच्चों के जन्मदिन पर दीप ~बुझा~ के अपशकुन न करें ! अग्निदेव को न बुझाएँ ! *दीप प्रज्ज्वलित करना अर्थात प्रकाश का संचार करना*
अपितु बच्चों को दीप की प्रार्थना सिखायें *"तमसो मा ज्योतिर्गमय"* ( _हे अग्नि देवता, मुझे अंधेरे से उजाले की ओर जाने का रास्ता बताएँ_ ) ये सारे प्रतीक बच्चों के मस्तिष्क में गहरा असर करते हैं !
7. क्या आप भगवान से डरते हैं ? नहीं ना, डरना भी नहीं चाहिए, *क्योंकि भगवान तो चराचर में विद्यमान हैं*। अजन्मा, परोपकारी, न्यायकारी और सर्वशक्तिमान हैं ! इतना ही नहीं हम मे स्वयं भगवान का अंश मौजुद है!
तो फिर अपने आपको "God Fearing" अर्थात भगवान से डरने वाला मत कहिये. *God Believer या भगवान में विश्वास रखने वाला कहिए*
श्री वाशुदेवाये सर्वंम।।।

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