गोपी भाव - Sri Radha Govind Dham Varanasi

गोपी भाव - Sri Radha Govind Dham Varanasi ।। राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे ।।

09/11/2025
*प्रश्न १११*साधना करते-करते ही मन दिव्य होने लगता है या थोड़ा शुद्ध होने के बाद गुरु से जब प्रेम मिलता है उसके बाद जा के...
25/08/2025

*प्रश्न १११*
साधना करते-करते ही मन दिव्य होने लगता है या थोड़ा शुद्ध होने के बाद गुरु से जब प्रेम मिलता है उसके बाद जा के दिव्य होता है।
*उत्तर*
नहीं, शुद्ध होने लगता है उसी को दिव्य कहते हैं। शुद्ध होने लगता है कि गंदगी साफ होती गई, तो हमारे विचार अच्छे होने लगे नैचुरल,
हमारा अटैचमेन्ट संसार से कम होने लगा नैचुरल। ये सब उसकी पहचान है। जैसे हमारा किसी ने अपमान किया तो कितना चिंतन
हुआ था, आज अपमान किया तो थोड़ी देर में खतम कर दिया। हाँ, अब आगे बढ़ गये। कल हमारा सौ रुपया खो गया तो हम आधा
घंटा परेशान रहे, आज सौ रुपया खो गया तो पाँच मिनट परेशान रहे, उसके बाद हमने कहा- ये हमारे लिए नहीं रहा होगा। हटाओ। ज्यों-ज्यों हम आगे बढ़ेंगे ईश्वर की ओर त्यों-त्यों ये कष्ट की फीलिंग कम होती जाएगी। ये माइल स्टोन असली है। तो साधना में मन धीरे-धीरे, धीरे-धीरे शुद्ध होता है। लेकिन जब पूर्ण
शुद्ध होगा तो अलौकिक शक्ति गुरु देगा, वह असली दिव्य है जिससे माया निवृत्ति होगी, भगवद्दर्शन होगा, सब समस्यायें हल होंगी। वह
दिव्यता एक पॉवर है। और इधर की जो शुद्धता है इसको दिव्य बोलते हैं कि ये माया से रहित होने लगा। मायिक अटैचमेन्ट कम होने लगा,
ईश्वरीय अटैचमेन्ट बढ़ने लगा।

.     _खाली मुंह से बोलो, मां में कम शरणं व्रज, मां में कम! एक पागलपन का प्रलाप है ये तो। ये पुस्तकों के पढ़ने से कुछ नह...
25/08/2025

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_खाली मुंह से बोलो, मां में कम शरणं व्रज, मां में कम! एक पागलपन का प्रलाप है ये तो। ये पुस्तकों के पढ़ने से कुछ नहीं होगा, और ये जप कर रहे हैं बैठ के, नमो भगवते वासुदेवाय, नमो भगवते वासुदेवाय। अरे, ये सब फिजिकल ड्रिल है। यही तो हमने अनंत जन्म किया। चारों धाम की मार्चिंग कर आ रहे हैं। ओ, परिक्रमा हो रही है गोवर्धन की और यहां की, वहां की, तमाम! ये सब काम नहीं देगा। आंसू बहाना होगा। रोकर भगवान को पुकारना होगा, और केवल उनका दर्शन और उनका प्रेम मांगना होगा। संसार नहीं मांगना, मोक्ष नहीं मांगना।_
*जगदगुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज*

*प्रश्न ११२*हम तुम्हारे हैं और तुम हमारे हो, इन दोनों में क्या अन्तर है ?*उत्तर*'हम तुम्हारे हैं' यह घृत-स्नेह है। इस स्...
25/08/2025

*प्रश्न ११२*
हम तुम्हारे हैं और तुम हमारे हो, इन दोनों में क्या अन्तर है ?
*उत्तर*
'हम तुम्हारे हैं' यह घृत-स्नेह है। इस स्नेह में साधक प्रियतम में कमी देखने लगता है। अतः इसमें पतन होने की संभावना रहती है। 'तुम हमारे हो' यह मधु-स्नेह है। इसमें सम्पूर्णतः निष्काम प्रेम होता है। वह केवल देना-देना ही जानता है। तुम अपना बनाओ या न बनाओ, हमने तुम्हें अपना बना लिया। यह भाव उच्च है।
तो उसका फल मिलता है।

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