Jamiat Ulama-i-Banaras

Jamiat Ulama-i-Banaras یہ پیج ملت اسلامیہ ہند کی نمائندہ اور سرمایہ ملت کی نگہبان جماعت جمعیۃ علماء ہند کی ذیلی شاخ جمعیۃ عل

ماہ ذی قعدہ کا چاند نظر آیاमाह ज़िलक़ादा का चांद नज़र आया
18/04/2026

ماہ ذی قعدہ کا چاند نظر آیا

माह ज़िलक़ादा का चांद नज़र आया

*जमीअत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारी समिति की दो दिवसीय बैठक में यूससी के विरुद्ध संघर्ष की घोषणा**मदरसों को बंद करने या व्यव...
17/04/2026

*जमीअत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारी समिति की दो दिवसीय बैठक में यूससी के विरुद्ध संघर्ष की घोषणा*
*मदरसों को बंद करने या व्यवस्था में दखल देने की कोशिशें स्वीकार्य नहीं, उत्तराखंड सरकार से अपनी शर्तें वापस लेने की मांग*

नई दिल्ली, 17 अप्रैल: जमीअत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारी समिति की दो दिवसीय बैठक नई दिल्ली में स्थित जमीअत उलमा-ए-हिंद के मुख्यालय में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की अध्यक्षता में हुई, जिसमें देश और समाज के समक्ष मौजूद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सामाजिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। कार्यकारी समिति ने जमीअत उलमा-ए-हिंद की गतिविधियों को और विस्तार देने के लिए स्थाई समिति की सिफारिशों के अनुसार प्रशिक्षण विभाग, मॉडल विलेज (जन विकास सेवा), व्यापार एवं उद्योग विभाग, आदर्श मस्जिद विभाग, रफीक विभाग जैसे नए विभागों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की।
कार्यकारी समिति की बैठक में मदरसों की सुरक्षा, समान नागरिक संहिता, समाज सुधार और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के संबंध में भी सपष्ट और दो-टूक रुख अपनाया गया। कार्यकारी समिति ने अपने प्रस्ताव में देश के अलग-अलग हिस्सों में इस्लामी मदरसों के खिलाफ हो रही कार्रवाईयों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया गया कि मदरसों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप भारत के संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 29 और 30 का उल्लंघन है। सभा में मदरसों को बंद करने या उनकी व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की हर कोशिश की निंदा करते हुए निर्णय लिया गया कि इस मामले में हर स्तर पर कानूनी कार्रवाई और संवैधानिक संघर्ष किया जाएगा। यह भी अपील की गई कि वह अपनी दस्तावेजों, व्यवस्था और अकाउंट्स की मजबूत तैयारी करें ताकि किसी भी कानूनी चुनौती का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके। कार्यकारी समिति ने उत्तराखंड में मदरसे चलाने के लिए लगाई गई कुछ शर्तों को खारिज करते हुए उन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की। कार्यकारी समिति ने स्पष्ट किया कि मदरसों को किसी भी शैक्षिक बोर्ड से संबद्ध होने के लिए मजबूर करना और अध्यापकों की नियुक्ति पर अनावश्य पाबंदियां लगाना स्वीकार्य नहीं है।
कार्यकारी समिति ने उत्तराखंड, गुजरात इत्यादि के समान नागरिक संहिता को धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया और इसके खिलाफ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष का ऐलान किया। इस संदर्भ में, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और दूसरे सामाजिक संगठनों और अल्पसंख्यक संस्थाओं के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति अपनाने, राष्ट्रीय स्तर पर अधिवेशन का आयोजन करने, अदालतों का दरवाजा खटखटाने और देश के राष्ट्रपति और दूसरे जिम्मेदार लोगों को ज्ञापन देने का फैसला किया गया। इसके साथ ही, मुसलमानों से यह अपील की गई कि वह इस्लामी शरीयत पर मज़बूती से टिके रहें और विशेषकर इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार पूर्ण न्याय सुनिश्चित करें। विरासत के बंटवारे में महिलाओं के साथ अन्याय को खत्म करें और तलाक, गुज़ारा-भत्ता जैसे मामलों में शरीयत के सिद्धांतों का पालन करें।
सामाजिक सुधार के संदर्भ में, कार्यकारी समिति ने अपने प्रस्ताव में नई पीढ़ी में बढ़ती धार्मिक और नैतिक कमज़ोरियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कई व्यावहारिक उपायों को मंज़ूरी दी। इनमें जरूरी मकतबों (पाठशालाओं) की स्थापना, अधिक से अधिक अच्छे स्कूलों की स्थापना, लड़कियों के लिए अलग शैक्षिक संस्थान और धार्मिक वातावरण वाले छात्रावास प्रदान करना, मुसलमानों के प्रबंधन में चलने वाले स्कूलों और शैक्षिक संस्थानों के पाठ्यक्रमों में इस्लामी शिक्षाओं, सीरत-ए-नबवी, इस्लामी इतिहास, आस्था, नैतिकता और सामाजिक शिक्षा को शामिल करना, कोचिंग सेंटर बनाने के साथ-साथ सीरत क्विज़ और विभिन्न शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन शामिल है।
इसके अलावा, माता-पिता को अपनी ज़िम्मेदारियां पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए शादी से पहले और बाद में काउंसलिंग और ट्रेनिंग वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ आयोजित करने पर ज़ोर दिया गया। समाज के हितैषी लोगों से ज़ोरदार अपील की गई कि जो बच्चियां पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख करती हैं, उनके धर्म और आस्था की रक्षा के लिए हर संभव और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति पर चर्चा करते हुए, कार्यकारी समिति ने पश्चिम एशिया, विशेषकर फिलिस्तीन, गाज़ा, लेबनान, ईरान, सीरिया, यमन और खाड़ी क्षेत्र में गंभीर मानवीय हालात पर गहरा दुख और निराशा व्यक्त की। प्रस्ताव में कहा गया कि जारी युद्ध की वजह से बेगुनाह नागरिकों, मासूम बच्चों और औरतों की मौत हुई है, बड़े पैमाने पर तबाही, पलायन और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी होने ने पूरे क्षेत्र को एक गंभीर मानवीय संकट से दो-चार कर दिया है। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि तत्काल और स्थाई युद्धविराम के साथ फिलिस्तीनी मुद्दे का एक न्यायोचित और अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के अनुसार समाधान अत्यंत आवश्यक है। प्रस्ताव में मांग की गई कि युद्धविराम का पूरी तरह से क्रियान्वयन सुनिश्चत किया जाए, प्रभावित इलाकों को बिना किसी रुकावट के मानवीय मदद प्रदान की जाए, गाज़ा में पुनर्निर्माण के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं और क्षेत्र में स्थाई शांति के लिए तर्कसंगत बातचीत को आगे बढ़ाया जाए। कार्यकारी समिति ने पश्चिम एशिया में स्थाई शांति स्थापित करने के लिए सार्थक बातची का ज़ोरदार समर्थन किया।
सभा में देश-विदेश की कई महत्वपूर्ण हस्तियों के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करते हुए उनके लिए मगफिरत और दरजात बुलंद रखने की दुआ की गई और उनकी राष्ट्रीय एवं सामाजिक सेवाओं को श्रद्धांजलि दी गई। सभा दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी की दुआ पर जुमे की नमाज से पूर्व समाप्त हुई।
बैठक में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी और महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के साथ-साथ दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, जमीअत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी, जमीअत उलमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष मौलाना कारी शौकत अली, जमीअत उलमा-ए-हिंद की स्थाई समिति के अध्यक्ष मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, नायब अमीर-उल-हिंद मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी, मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी अध्यक्ष जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश, मुफ्ती अब्दुर्रहमान नौगावां सादात, मौलाना अब्दुल कवी हैदराबाद अध्यक्ष दीनी तालीमी बोर्ड, जमीअत उलमा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, मौलाना अब्दुल्ला मारूफी दारुल उलूम देवबंद, मौलाना नियाज अहमद फारूकी सचिव, जमीअत उलमा-ए-हिंद, हाजी मोहम्मद हारून अध्यक्ष, जमीअत उलेमा मध्य प्रदेश, मौलाना मोहम्मद इब्रीहीम अध्यक्ष, जमीअत उलमा केरल, मौलाना अब्दुल कादिर उपाध्यक्ष जमीअत उलमा असम, मुफ्ती मोहम्मद जावेद इकबाल अध्यक्ष, जमीअत उलमा बिहार और महासचिव मौलाना मोहम्मद नाज़िम, मौलाना याह्या करीमी महासचिव, जमीअत उलमा संयुक्थ पंजाब, मौलाना रफीक अहमद मजाहिरी, मौलाना मोहम्मद आकिल जमीअत उलमा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मुफ्ती मोहम्मद राशिद आज़मी नायब मोहतमिम, दारुल उलूम देवबंद, मुफ्ती अब्दुल रज़्ज़ाक अमरोहवी शिक्षक, दारुल उलूम देवबंद, मौलाना अब्दुल कुद्दूस पालनपुरी उपाध्यक्ष, जमीअत उलमा गुजरात, मौलाना कलीमुल्लाह कासमी उपाध्यक्ष, जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश, हाफिज उबैदुल्लाह बनारस, हाफिज नदीम सिद्दीकी अध्यक्ष, जमीअत उलमा महाराष्ट्र, मौलाना सिराजुद्दीन चिश्ती अजमेर, मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी अध्यक्ष, जमीअत उलेमा कर्नाटक और महासचिव मौलाना शम्सुद्दीन बिजली, मौलाना सैयद सईद हबीब अहमद पुंछ, डॉ. वलीउल्लाह सिद्दीकी इलाहाबाद और मौलाना अशफाक अहमद काज़ी सहित कई अन्य लोग शामिल हुए।

भवदीय

नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी
सचिव, जमीअत उलमा-ए-हिंद

جمعیۃ علماء ہند کے اجلاس مجلس عاملہ میں یوسی سی کے خلاف جد وجہد کا اعلانمدرسوں کو بند کرنے یا نظام میں مداخلت کی کوشش قا...
17/04/2026

جمعیۃ علماء ہند کے اجلاس مجلس عاملہ میں یوسی سی کے خلاف جد وجہد کا اعلان
مدرسوں کو بند کرنے یا نظام میں مداخلت کی کوشش قابل قبول نہیں ، اتراکھنڈ حکومت سے اپنی شرائط واپس لینے کا مطالبہ

نئی دہلی، 17 اپریل:جمعیۃ علماء ہند کی مجلسِ عاملہ کا دوروزہ اجلاس، مولانا محمود اسعد مدنی صدر جمعیۃ علماء ہند کے زیر صدارت نئی دہلی میں منعقدہواجس میں ملک و ملت کے اہم مسائل پر تفصیل سے تبادلہ ٔ خیال ہوا۔ مجلس عاملہ نے جمعیۃ علماء ہند کی سرگرمیوں کو مزید وسعت دینے کے لیےمجلس قائمہ کی سفارشات کے مطابق نئےشعبوں:شعبۂ تربیت، ماڈل ولیج (جن وکاس سیوا) ، شعبۂ تجارت و صنعت کاری ،شعبۂ مثالی مسجد،شعبۂ رفیق وغیرہ کے قیام کی منظوری دی ۔
اجلاس میں مدارس کے تحفظ، یکساں سول کوڈ، اصلاحِ معاشرہ اور مشرقِ وسطیٰ کی موجودہ صورتحال سے متعلق واضح اور دوٹوک موقف بھی اختیار کیا گیا۔ ملک کے مختلف حصوں میں مدارسِ اسلامیہ کے خلاف کارروائیوں پر شدید تشویش کا اظہار کرتے ہوئے مجلس عاملہ نے اپنی تجویز میں واضح کیا کہ مدارس کی آزادی میں مداخلت دستورِ ہند کی دفعات 25، 26، 29 اور 30 کی خلاف ورزی ہے۔ اجلاس نے مدرسوں کو بند کرنے یا ان کے نظام میں مداخلت کی ہرکوشش کی مذمت کرتے ہوئے فیصلہ کیا کہ اس سلسلے میںہر سطح پر قانونی چارہ جوئی اور آئینی جدوجہد کی جائے گی۔ نیز ارباب مدارس سے گزارش کی گئی کہ وہ اپنی دستاویزات اور حساب و کتاب کی مضبوط تیاری کریں تاکہ کسی بھی قانونی چیلنج کا مؤثر مقابلہ کیا جا سکے۔مجلس عاملہ نے اتراکھنڈ میں مدرسہ چلانے کے لیے عائدہ کردہ بعض شرائط کو مسترد کرتے ہوئے ان کی فوری واپسی کا مطالبہ کیا۔ مجلسِ عاملہ نے واضح کیا کہ مدارس کو کسی تعلیمی بورڈ سے لازمی الحاق پر مجبور کرنااور اساتذہ کی تقرری کے حوالے سے غیر ضروری پابندیاں عائد کرنا ناقابلِ قبول ہے۔
مجلسِ عاملہ نے اتراکھنڈ ، گجرات وغیرہ کے یکساں سول کوڈ کو مذہبی آزادی کے خلاف قرار دیتے ہوئےپرامن اور جمہوری جدوجہد کا اعلان کیا۔ اس ضمن میں آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ اور دیگر ملی تنظیموں اور اقلیتی اداروں کے ساتھ مشترکہ حکمتِ عملی اختیار کرنے، قومی سطح پر کنونشن منعقد کرنے، عدالتوں سے رجوع کرنے اور صدرِ جمہوریہ و دیگر ذمہ داران کو میمورنڈ م دینے کا فیصلہ کیا گیا۔ ساتھ ہی مسلمانوں سے بھی یہ اپیل کی گئی وہ شریعتِ اسلامیہ پر مضبوطی سے قائم رہیں خصوصاً خواتین کے حقوق کے معاملے میں اسلامی تعلیمات کے مطابق مکمل انصاف کو یقینی بنائیں۔وراثت کی تقسیم میں عورتوں کے ساتھ ناانصافی کا خاتمہ کریں اور طلاق ، نان و نفقہ جیسے معاملات میں شرعی اُصولوں پر عمل پیرا ہوں ۔
اصلاحِ معاشرہ کے حوالے سے مجلسِ عاملہ نے اپنی تجویز میں نئی نسل میں بڑھتی ہوئی دینی و اخلاقی کمزوریوں پر گہری تشویش ظاہر کرتے ہوئے متعدد عملی اقدامات کی تجویز پیش کی۔ ان میں لازمی مکاتب کے قیام، زیادہ سے زیادہ معیاری اسکولوں کا قیام، لڑکیوں کے لیے علیحدہ تعلیمی اداروں اور دینی ماحول سے آراستہ ہاسٹلز کی فراہمی، مسلمانوں کے زیرِ انتظام اسکولوں اور تعلیمی اداروں کے نصاب میں اسلامیات، سیرتِ نبوی ﷺ، اسلامی تاریخ، عقائد، اخلاقیات اور معاشرتی تعلیم کی شمولیت، کوچنگ سینٹروں کا قیام، نیز سیرت کوئز اور مختلف تعلیمی و تربیتی پروگراموں کا انعقاد شامل ہے۔
مزید برآں والدین کو اپنے فرائض کی ادائیگی کے قابل بنانے کے لیے شادی سے قبل اور بعد میں کونسلنگ اور تربیتی ورکشاپ کے انعقاد پر زور دیا گیا۔ ہمدردانِ ملت سے پُرزور اپیل کی گئی کہ جو بچیاں تعلیم کی غرض سے دوسرے شہروں کا رخ کرتی ہیں، ان کے ایمان و عقائد کے تحفظ کے لیے ہر ممکن اور مؤثر تدبیر اختیار کی جائے۔
مجلسِ عاملہ نے ایک اہم تجویز میں مشرقِ وسطیٰ، بالخصوص فلسطین ، غزہ، لبنان ، ایران ، شام ، یمن اور خلیجی خطے کی سنگین انسانی صورتحال پر گہرے رنج و افسوس کا اظہار کیا۔ تجویز میں کہا گیا کہ جاری جنگ کے نتیجے میں بے گناہ شہریوں، معصوم بچوں اور خواتین کی ہلاکت، وسیع پیمانے پر تباہی اور نقل مکانی نے پورے خطے کو ایک سنگین انسانی بحران سے دوچار کر دیا ہے۔ اس امر پر زور دیا گیا کہ فوری اور پائیدار جنگ بندی کے ساتھ مسئلۂ فلسطین کا ایک منصفانہ اور بین الاقوامی اصولوں کے مطابق حل ناگزیر ہے۔تجویز میں مطالبہ کیا گیا کہ غزہ میں تعمیرِ نو کے لیے مؤثر اقدامات کیے جائیں اور خطے میں پائیدار امن کے لیے بامعنی مذاکرات کو آگے بڑھایا جائے۔
اجلاس میں ملک و بیرونِ ملک کی متعدد اہم شخصیات کے انتقال پر گہرے رنج و غم کا اظہار کرتے ہوئے ان کے لیے مغفرت اور بلندیٔ درجات کی دعا کی گئی، اور ان کی ملی و دینی خدمات کو خراجِ عقیدت پیش کیا گیا۔نماز جمعہ سے قبل اجلاس مولانا مفتی ابو القاسم نعمانی مہتمم دارالعلوم دیوبند کی دعا ء پر مکمل ہوا۔
اجلاس میں صدر جمعیۃ علماء ہند مولانا محمود اسعد مدنی اور ناظم عمومی مولانا حکیم الدین قاسمی کے علاوہ مولانا مفتی ابوالقاسم نعمانی مہتمم دارالعلوم دیوبند ، مولانا محمد سلمان بجنوری نائب صدر جمعیۃ علماء ہند، مولانا قاری شوکت علی خازن جمعیۃ علماء ہند ، مولانا رحمت اللہ کشمیری صدر مجلس قائمہ جمعیۃ علماء ہند، نائب امیر الہندمولانا مفتی سید محمد سلمان منصورپوری ، مولانا مفتی سید محمد عفان منصورپوری صدر جمعیۃ علماءیوپی، مفتی عبدالرحمن نوگاواں سادات ،مولانا عبدالقوی حیدر آباد صدر دینی تعلیمی بورڈ جمعیۃ علماء اے پی و تلنگانہ،مولانا عبداللہ معروفی دارالعلوم دیوبند، مولانا نیاز احمد فاروقی سکریٹری جمعیۃعلماء ہند، حاجی محمد ہارون صدر جمعیۃعلماء ایم پی، مولانا محمد ابراہیم صدر جمعیۃعلماء کیرالہ، مولانا عبدالقادر نائب صدر جمعیۃ علماء آسام، مفتی محمد جاوید اقبال صدر جمعیۃ علماءبہار اور ناظم اعلی مولانا محمد ناظم ، مولانا یحییٰ کریمی ناظم اعلی جمعیۃ علماء متحدہ پنجاب، مولانا رفیق احمدمظاہری،مولانامحمد عاقل جمعیۃ علماء مغربی زون یوپی، مفتی محمد راشد اعظمی نائب مہتمم دارالعلوم دیوبند، مفتی عبدالرزاق امروہوی استاذ دارالعلوم دیوبند،مولانا عبدالقدوس پالن پوری نائب صدر جمعیۃعلماءگجرات، مولانا کلیم اللہ قاسمی نائب صدر جمعیۃ علماء یوپی، حافظ عبید اللہ بنارس، حافظ ندیم صدیقی صدر جمعیۃ علماءمہاراشٹرا، مولانا سراج الدین چشتی اجمیر، مفتی افتخار احمد قاسمی صدر جمعیۃ علماء کرناٹک و ناظم اعلی مولانا شمس الدین بجلی ، مولانا سید سعید حبیب احمد پونچھ، ڈاکٹر ولی اللہ صدیقی الہ آباد، مولانا اشفاق احمد قاضی ممبئی شریک ہوئے ۔
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Jamiat Ulama-i-Hind Working Committee Announces Opposition to , Demands Withdrawal of Uttarakhand Conditions; Says in
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https://jamiat.org.in/share/jamiat-ulamaihind-working-committee-announces-opposition-ucc-demands-withdrawal-uttarakhand-conditions-says-interference-madrasas-unacceptable/7500



*जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शुरू**मदारिस की सुरक्षा, समान नागरिक संहिता, सामाजिक सुधार एवं अन्य...
16/04/2026

*जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शुरू*
*मदारिस की सुरक्षा, समान नागरिक संहिता, सामाजिक सुधार एवं अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर होंगे अहम फैसले*
नई दिल्ली, 16 अप्रैल: जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कार्यकारिणी की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आज दोपहर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के केंद्रीय कार्यालय, नई दिल्ली में अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की अध्यक्षता में शुरू हुई। बैठक में देश और समुदाय के समक्ष उपस्थित महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सामुदायिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श जारी है।
बैठक के प्रारंभ में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने पिछली कार्यवाही का वाचन किया। उसकी पुष्टि के बाद विभिन्न महत्वपूर्ण एजेंडों पर चरणबद्ध चर्चा का सिलसिला शुरू हुआ।
बैठक में मदारिस की सुरक्षा के लिए प्रभावी उपायों, समान नागरिक संहिता के नाम पर संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिशों, सामाजिक सुधार के लिए आवश्यक कदमों तथा मध्य पूर्व की वर्तमान स्थिति पर गंभीर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त देश में सांप्रदायिक राजनीतिक दलों के समर्थन और उनके साथ सहभागिता के मुद्दे पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद की पुरानी और सिद्धांत आधारित नीति की रोशनी में संगठन का स्पष्ट और प्रभावी रुख सामने लाया जाएगा, ताकि जमीयत से जुड़े कार्यकर्ताओं को उचित मार्गदर्शन मिल सके।
बैठक के प्रथम सत्र में अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी और महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के अलावा दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, उपाध्यक्ष मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी, कोषाध्यक्ष मौलाना कारी शौकत अली, स्थायी समिति के अध्यक्ष मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, नायब अमीर-ए-हिंद मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी, मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी, मौलाना अब्दुल क़वी हैदराबाद, मौलाना अब्दुल्लाह मारूफी, मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी, हाजी मोहम्मद हारून, मौलाना मोहम्मद इब्राहीम (केरल), मौलाना अब्दुल कादिर (असम), मुफ्ती मोहम्मद जावेद इक़बाल, मौलाना मोहम्मद नाज़िम, मौलाना यह्या करीमी, मौलाना रफीक अहमद मजाहिरी, मौलाना मोहम्मद आकिल, मुफ्ती मोहम्मद राशिद आज़मी, मुफ्ती अब्दुर्रज़ाक अमरोहवी, मौलाना अब्दुल कुद्दूस पालनपुरी, मौलाना कलीमुल्लाह कासमी, हाफिज उबैदुल्लाह, हाफिज नदीम सिद्दीकी, मौलाना सिराजुद्दीन चिश्ती, मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी, मौलाना शम्सुद्दीन बजली, मौलाना सैयद सईद हबीब अहमद, डॉ. वलीउल्लाह सिद्दीकी तथा मौलाना अशफाक अहमद काज़ी सहित अनेक वरिष्ठ सदस्य उपस्थित हैं।

جب تک ہندوستان ہے، علماء کی قربانیاں یاد رکھی جائیں گی : مولانا محمود اسعد مدنیانڈمان میں مجاہدِ آزادی حضرت علامہ فضلِ ح...
14/04/2026

جب تک ہندوستان ہے، علماء کی قربانیاں یاد رکھی جائیں گی : مولانا محمود اسعد مدنی
انڈمان میں مجاہدِ آزادی حضرت علامہ فضلِ حق خیرآبادیؒ کے مزار پر جمعیۃ علماء ہند کے وفد کی حاضری، ایصالِ ثواب اور خراجِ عقیدت
نئی دہلی / انڈمان، 14 اپریل:
جمعیۃ علماء ہند کے صدر مولانا محمود اسعد مدنی کی ہدایت پر ایک وفد نے انڈمان میں عظیم مجاہدِ آزادی حضرت علامہ فضلِ حق خیرآبادیؒ کے مزار پر حاضری دی۔ وفد میں جمعیۃ علماء ہند کے صوبائی صدر اور دیگر ذمہ داران شامل تھے۔
اس موقع پر مرحوم کے لیے ایصالِ ثواب کیا گیا اور ان کی دینی، علمی اور ملی خدمات پر زبردست خراجِ عقیدت پیش کیا گیا۔
مولانا محمود اسعد مدنی نے اپنے پیغام میں فرمایا کہ حضرت علامہ فضلِ حق خیرآبادیؒ 1857 کی جنگِ آزادی کے نمایاں رہنما تھے۔ انہوں نے انگریز سامراج کے خلاف فتویٰ دے کر قوم میں آزادی کی روح بیدار کی اور وطن کی آزادی کے لیے عظیم قربانیاں پیش کیں۔
انہوں نے کہا کہ ہمارے اکابرین کی قربانیاں ہماری تاریخ کا قیمتی سرمایہ ہیں، جنہیں کبھی فراموش نہیں کیا جا سکتا۔ آج کی نسل کو چاہیے کہ وہ ان کے نقشِ قدم پر چلتے ہوئے دین و ملت کی خدمت کو اپنا شعار بنائے۔
آخر میں وفد نے حضرت علامہ فضلِ حق خیرآبادیؒ کے درجات کی بلندی کے لیے دعا کی اور ان کی بے مثال خدمات کو خراجِ تحسین پیش کیا۔

نیاز احمد فاروقی
سیکرٹری، Jamiat Ulama-i-Hind

*جزائر انڈمان میں جمعیۃ علماء ہند کا مرکزی مشورہ شروع؛ نوجوانوں کی تربیت، مثالی مسجد اور سالانہ کیلنڈر پر زور* *ملک بھر ...
13/04/2026

*جزائر انڈمان میں جمعیۃ علماء ہند کا مرکزی مشورہ شروع؛ نوجوانوں کی تربیت، مثالی مسجد اور سالانہ کیلنڈر پر زور*
*ملک بھر کے صوبائی صدور و نظمائے اعلیٰ کی شرکت، صدر جمعیۃ علما ء ہند مولانا محمود اسعد مدنی کی قیادت میں متعدد نئے پروجیکٹس کا روڈ میپ پیش ہوگا*

پورٹ بلیئر، 13 اپریل:جمعیۃ علماء ہند کے زیر اہتمام ریاستی و علاقائی یونٹوں کے صدور و نظمائے اعلیٰ کا آٹھواں مرکزی ششماہی مشورہ آج جزائر انڈمان و نکوبار کے شہر سر وجے پورم، پورٹ بلیئر میں واقع ہوٹل اے آر پرائیڈ ریزیڈینسی میں باضابطہ طور پر شروع ہوگیا ہے۔ یہ سہ روزہ مرکزی اجلاس صدر جمعیۃ علماء ہند حضرت مولانا محمود اسعد مدنی صاحب دامت برکاتہم کی قیادت میں منعقد ہو رہا ہےجب کہ نظامت کے فرائض مولانا محمد حکیم الدین قاسمی ناظم عمومی جمعیۃ علماء ہند انجام دے رہے ہیں۔ اس اہم موقع پر جمعیۃ علماء ہند کے نائب صدر مولانا محمد سلمان بجنوری استاذ دارالعلوم دیوبند، مولانا قاری محمد امین نائب صدر جمعیۃ علماء ہند سمیت کئی اہم مرکزی شحصیات بھی موجود ہیں ۔یہ مشورہ آئندہ مہینوں میں جمعیۃ علماء ہند کی تنظیمی سمت، سماجی کردار، نوجوانوں کی تربیت اور ملی خدمات کے عملی خاکے کو حتمی شکل دینے کے لیے نہایت اہم تصور کیا جا رہا ہے۔
چنانچہ آج شام 6 بجے پہلی نشست کا آغاز ہوا جس کی صدارت مفتی شرف الدین قاسمی صدر جمعیۃ علماء انڈمان و نکوبار نے کی، جب کہ دوسری نشست کی صدارت مولانا سعید احمد صدر جمعیۃ علماء منی پور نے کی۔
اپنے استقبالیہ خطاب میں صدر جمعیۃ علماء جزائر انڈمان و نکوبار مفتی شرف الدین قاسمی نے کہا کہ جزائر انڈمان ہندستان کی آزادی، قربانی اور استقامت کی زندہ تاریخ ہے۔ انہوں نے کہا کہ یہی وہ سرزمین ہے جہاں کالا پانی کی صعوبتوں نے مجاہدینِ آزادی کی قربانیوں کو ہمیشہ کے لیے تاریخ کا روشن باب بنا دیا۔ انہوں نے اس تاریخی مقام پر مرکزی ششماہی مشورہ کے انعقاد کو نہایت بابرکت اور بامعنی قرار دیا اور آنے والوں مہمانوں کا استقبال کیا۔ انہوں نے مزید کہا کہ جمعیۃ علماء ہند نے ہمیشہ ملک کی دینی، ملی، تعلیمی، رفاہی اور آئینی خدمات میں قائدانہ کردار ادا کیا ہے اور آج بھی تنظیم ملک بھر میں عوامی رہنمائی، سماجی اصلاح اور حقوق کے تحفظ کے لیے سرگرم عمل ہے۔
اس کے بعد مولانا محمد حکیم الدین قاسمی صاحب نے سابقہ کارروائی کی خواندگی کی جس کے بعد مختلف ریاستی یونٹوں کی کارگزاریوں کی تفصیلی پریزنٹیشن پیش کی گئی۔ صدور و نظمائے اعلیٰ حضرات نے اپنے اپنے صوبوں کی تنظیمی پیش رفت، تعلیمی سرگرمیوں، رفاہی منصوبوں اور ملی خدمات کی عددی رپورٹ پیش کی۔
دیر شام دوسری نشست میںصدر جمعیۃ علماء ہند نے جمعیۃ یوتھ کلب کی موجودہ صورت حال اور آئندہ کے اقدامات پر خصوصی گفتگو کی۔ اس موقع پر نوجوانوں کی فکری تربیت، قیادت سازی، سماجی خدمت اور جمعیۃ کے مشن سے مؤثر وابستگی پر زور دیا گیا۔
اسی نشست میں ’’مثالی مسجد‘‘ کے عنوان سے مولانا محمد عمر قاسمی ناظم تنظیم جمعیۃ علماء ہند برائے جنوبی ہند نے رہنما پریزنٹیشن پیش کی جس میں مسجد کو صرف عبادت گاہ نہیں بلکہ اصلاحِ معاشرہ، تعلیمی بیداری، اخلاقی تربیت اور سماجی ہم آہنگی کا مرکز بنانے کے حوالے سے جامع نکات پیش کیے گئے۔
آئندہ کی نشستوں میں جمعیۃ علماء ہند کی مقامی و ضلعی یونٹوں سے لے کر صوبائی یونٹوں کے لیے میٹنگوں کا سالانہ کیلنڈر، نوجوانوں کے لیے تربیتی ورکشاپس، اصلاحِ معاشرہ پروگرام، بالخصوص ائمہ کی ٹریننگ، میرج کاؤنسلنگ، رفیق پروجیکٹ، خیر پروجیکٹ، سیرت کوئز پر تفصیلی گفتگو اور ممکنہ فیصلے متوقع ہیں، جس سے جمعیۃ علماء ہند کی آئندہ سرگرمیوں کی سمت واضح ہوگی۔
آج شام نشست کا آغاز تلاوتِ کلامِ پاک اور نعتِ رسولِ مقبول ﷺ سے ہوا جس کی سعادت مولانا مفتی سید محمد عفان منصور پوری صدر جمعیۃ علماء یوپی اور ناظم اعلیٰ مولانا امین الحق عبداللہ قاسمی کو حاصل ہوئی۔ ازیں قبل آج دوپہر کے وقت شرکاء کی آمد کے بعد نمازِ ظہر اور ظہرانہ کا اہتمام کیا گیا، جس کے بعد معزز مندوبین کے لیے تاریخی راس جزیرہ (Ross Island) کی زیارت کا خصوصی پروگرام رکھا گیا۔ شرکاء نے اس موقع پر جزائر انڈمان کی تاریخی اہمیت، آزادی کی جدوجہد سے وابستہ یادگاروں اور قدرتی حسن کا مشاہدہ کیا۔
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نیاز احمد فارو قی
سکریٹری جمعیۃ علماء ہند

Jamiat Ulama-i-Hind M***i Abul Qasim Nomani Maulana Mahmood Madani
02/04/2026

Jamiat Ulama-i-Hind M***i Abul Qasim Nomani Maulana Mahmood Madani

31/03/2026
اوقات نماز عید الفطر عیدگاہ و مساجد شہر جنوبی بنارس
19/03/2026

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نوجوان محمد اریب کے قتل کا دردناک واقعہ۔ ناظمِ عمومی جمعیۃ علماء ہند کی سربراہی میں  ایک وفد کی اہل خانہ سے ملاقات و تعز...
13/03/2026

نوجوان محمد اریب کے قتل کا دردناک واقعہ۔ ناظمِ عمومی جمعیۃ علماء ہند کی سربراہی میں ایک وفد کی اہل خانہ سے ملاقات و تعزیت*

نئی دہلی، 13 مارچ: کوچہ چیلان پرانی دہلی کے نوجوان محمد اریب کے افسوسناک قتل پر جمعیۃ علماء ہندکے ناظم عمومی مولانا محمد حکیم الدین قاسمی نے گہرے رنج و غم اور تشویش کا اظہار کیا ہے۔ اطلاع کے مطابق محمد اریب اسکریپ کے کاروبار سے وابستہ تھے، چند روز قبل لاپتہ ہوگئے تھے۔ بعد ازاں مختلف ٹکڑوں میں ان کی لاش فرید آباد کے جنگلات سے برآمد ہوئی۔ اس دلخراش واقعہ کے بعد اہلِ خانہ اور علاقے کے لوگوں میں شدید صدمہ اور غم ہے۔ پولیس نے بعض ملزمان کو گرفتار کر کے مزید تفتیش شروع کر دی ہے۔
کل بعد نمازِ مغرب ناظمِ عمومی جمعیۃ علماء ہند مرحوم محمد اریب کی تدفین میں شریک ہوئے اور مرحوم کے لیے دعائے مغفرت کی۔ بعد نماز تراویح ان کی قیادت میں ایک وفد گھر پہنچ کر مرحوم کے والد محترم شکیل احمد اور دیگر اہلِ خانہ سے تعزیتِ مسنونہ پیش کی۔ اس موقع پر وفد نے جمعیۃ علماء ہند کے صدر مولانا سید محمود اسعد مدنی کی جانب سے بھی تعزیت کا پیغام پہنچایا اور اہلِ خانہ کو صبر و استقامت کی تلقین کی اور کہا کہ یہ بہت بڑا سانحہ ہے، لیکن ایسے مواقع پر صبر اور حوصلہ دونوں کی ضرورت ہوتی ہے۔ جمعیۃ علماء ہند پوری طرح متاثرہ خاندان کے ساتھ کھڑی ہے اور ہر ممکن تعاون کے لیے تیار ہے۔
اس موقع پر جمعیۃ علماء صوبہ دہلی کے ذمہ داران مولانا محمد قاسم نوری مولانا قاری محمد عارف قاسمی مولانا محمد یوسف اعظمی حاجی محمد اسعد میاں سمیت مرکزی دفتر سے مفتی ذاکر حسین قاسمی اور حافظ ابوبکر وفد میں شامل تھے۔ جمعیۃ علماء ہند نے متعلقہ حکام سے مطالبہ کیا ہے کہ اس قتل کی غیر جانبدارانہ اور تیز رفتار تحقیقات کر کے تمام قصورواروں کو سخت سزا دی جائے تاکہ متاثرہ خاندان کو انصاف مل سکے اور معاشرے میں امن و امان برقرار رہے۔

*उत्तम नगर घटना पर जमीयत उलमा-ए-हिंद का कड़ा संज्ञान, जॉइंट पुलिस कमिश्नर जतीन नरवाल से मुलाकात; गृह मंत्री को भी पत्र, ...
10/03/2026

*उत्तम नगर घटना पर जमीयत उलमा-ए-हिंद का कड़ा संज्ञान, जॉइंट पुलिस कमिश्नर जतीन नरवाल से मुलाकात; गृह मंत्री को भी पत्र, मुस्लिम अल्पसंख्यकों की सुरक्षा समेत पांच मांगें*
नई दिल्ली, 10 मार्च: उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में 26 वर्षीय तरुण कुमार की मृत्यु के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर पश्चिमी रेंज के जॉइंट पुलिस कमिश्नर जतीन नरवाल से जनकपुरी स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने घटना के बाद क्षेत्र में बढ़ रही सांप्रदायिक तनावपूर्ण स्थिति और कुछ तत्वों द्वारा की जा रही उत्तेजक गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा गया। साथ ही इस पूरे मामले के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी पत्र भेजा गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि घटना के बाद क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। कुछ सांप्रदायिक तत्व लगातार माहौल को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं तथा मुसलमानों और उनकी संपत्तियों को निशाना बनाने की धमकियां दी जा रही हैं। सोशल मीडिया पर भी भड़काऊ वीडियो और नारे प्रसारित कर एक पूरे समुदाय को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जा रही है। ज्ञापन में कहा गया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की राजधानी में ऐसे तत्व खुलेआम नरसंहार जैसी धमकियां दे रहे हैं और उन्हें कानून का कोई भय नहीं दिखाई देता।
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अपने ज्ञापन में कहा कि तरुण कुमार की मृत्यु अत्यंत दुखद है और संगठन शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है। साथ ही यह भी कहा गया कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सभी तथ्य सामने आ सकें। स्थानीय लोगों के अनुसार यह घटना दो पक्षों के बीच हुए विवाद का परिणाम प्रतीत होती है, लेकिन कुछ तत्व इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि घटना के बाद आरोपियों और उनके पड़ोसियों के घरों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाओं की जानकारी मिली है। इसके साथ ही नगर निगम द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी नागरिक के खिलाफ कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया (Due Process of Law) के तहत ही की जानी चाहिए।
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने सरकार और पुलिस प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं—
• सांप्रदायिक नफरत फैलाने और हिंसा के लिए उकसाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
• सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भड़काऊ और नफरत भरे संदेशों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
• जेजे कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की जाए।
• घटना के बाद हुई तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
• रमज़ान और ईद-उल-फितर को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों को दुकानें खोलने, मस्जिदों में नमाज़ अदा करने और ईदगाह में नमाज़ पढ़ने के लिए पूर्ण सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
इस पर जॉइंट पुलिस कमिश्नर जतीन नरवाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और नफरत तथा अफवाह फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि बाहरी लोगों के इलाके में प्रवेश पर पहले ही रोक लगा दी गई है और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए शांति समिति की बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं।
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि मुसलमानों को धार्मिक गतिविधियों और रोजमर्रा के कामकाज के लिए पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाएगी। उन्होंने तुरंत स्थानीय थाने से संपर्क कर बाजार की स्थिति की जानकारी ली और निर्देश दिया कि दुकानें सामान्य रूप से खोली जाएं तथा मुस्लिम दुकानदारों को पूरी सुरक्षा दी जाए।
प्रतिनिधिमंडल में मौलाना अज़ीमुल्लाह सिद्दीकी कासमी (सचिव, जमीयत उलमा-ए-हिंद), एडवोकेट मोहम्मद नूरुल्लाह (सुप्रीम कोर्ट), मौलाना मोहम्मद कासिम नूरी (अध्यक्ष, जमीयत उलमा दिल्ली), मौलाना कारी आरिफ कासमी (उपाध्यक्ष), हाफिज मोहम्मद यूसुफ आज़मी (सचिव, जमीयत उलमा दिल्ली), मुफ़्ती मोहम्मद ज़ाकिर कासमी (केंद्रीय कार्यालय) तथा कारी फुरकान चौधरी (अध्यक्ष, जमीयत उलमा उत्तर-पश्चिम दिल्ली) शामिल थे।
स्थानीय लोगों में जमील अहमद (सामाजिक कार्यकर्ता) और मोहम्मद सरताज भी प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद रहे और उन्होंने पुलिस अधिकारियों को क्षेत्र की स्थिति तथा लोगों की चिंताओं से अवगत कराया।इस अवसर पर महासचिव ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर जमीयत उलमा-ए-हिंद हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
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नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी
सचिव, जमीअत उलमा-ए-हिंद

*मध्य पूर्व की विस्फोटक स्थिति वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा**संयुक्त राष्ट्र और विश्व शक्तियाँ युद्धविराम के लिए सक्र...
02/03/2026

*मध्य पूर्व की विस्फोटक स्थिति वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा*

*संयुक्त राष्ट्र और विश्व शक्तियाँ युद्धविराम के लिए सक्रिय भूमिका निभाएँ: जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी*

नई दिल्ली, 2 मार्च 2026: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने मध्य पूर्व की अत्यंत विस्फोटक और चिंताजनक स्थिति पर गहरी चिंता और व्यथा व्यक्त करते हुए कहा है कि अमेरिका और इज़राइल की आक्रामक तथा उकसाने वाली कार्रवाइयों ने न केवल क्षेत्रीय शांति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक स्थिरता को भी बड़े खतरे में डाल दिया है।

मौलाना मदनी ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई तथा उनके परिजनों और सहयोगियों के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करते हुए कहा कि किसी देश की नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों और समझौतों के विरुद्ध है और दुनिया को बर्बरता की ओर धकेलने के समान है। उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ईरान की जनता के दुख में बराबर की सहभागी है। साथ ही मौलाना मदनी ने ईरान की ओर से क्षेत्र के अन्य देशों में की जा रही कार्रवाइयों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थिति शांति, एकता और आपसी समन्वय की तत्काल मांग करती है।

मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान हत्या और रक्तपात से नहीं हो सकता। शक्ति के बल पर अपनी बात मनवाने की कोशिशें केवल घृणा, प्रतिशोध और मानवीय त्रासदियों को जन्म देती हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे तत्काल युद्धविराम, तनाव में कमी और सार्थक कूटनीतिक वार्ता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाएँ, ताकि क्षेत्र को और अधिक विनाश से बचाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्व शक्तियों ने समय रहते बुद्धिमत्ता, न्याय और कूटनीतिक संतुलन का परिचय नहीं दिया, तो इसके दुष्परिणाम किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे।

मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद हर उस कदम का विरोध करती है जो दुनिया को अमानवीय युद्ध और अस्थिरता की ओर धकेलता हो। उन्होंने कहा कि तत्काल युद्धविराम और बातचीत के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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