SHREE MATH

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SHREE MATH shree math it is a had of Ramananda Samprdaya it is in the Varanasi at Panchganga Ghat karmakand end aadhyatmik pravachan

https://youtu.be/7Hx3u04MnIo?si=QMAvcPzCFHR9U0kz
05/10/2026

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रामार्चा हि सर्वसिद्धि प्रदायकम्" सनातन परम्परा में वैष्णव संप्रदा...

, #शास्त्रिकोशलेन्द्र दास जी की फेसबुक वॉल से भगवदाचार्य ने महात्मा गांधी पर लिखे संस्कृत में तीन काव्य, गलता और बालानंद...
01/10/2026

, #शास्त्रिकोशलेन्द्र दास जी की फेसबुक वॉल से

भगवदाचार्य ने महात्मा गांधी पर लिखे संस्कृत में तीन काव्य, गलता और बालानंद मठ में रहा प्रवास

जीवनयात्रा : रामानंद संप्रदाय के प्रधान रहे स्वामी भगवदाचार्य पंजाब (पाकिस्तान) के सियालकोट में 1880 ईस्वी में कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में माराक्षी देवी के घर जन्मे। उनके बचपन का नाम सर्वजित था। वे अयोध्या में बड़ास्थान के महंत श्रीरामप्रसादाचार्य महाराज के विरक्त शिष्य थे।

पिछली शती में जयपुर जिन संतों-आचार्यों की प्रवास स्थली रहा, उनमें रामानंद संप्रदाय के जगद्गुरु स्वामी भगवदाचार्य प्रमुख हैं। एक शताब्दी पहले जयपुर की गलता गादी के लिए महंत के चयन के सिलसिले में उनका प्रवास जयपुर में हुआ। महाराज संस्कृत कॉलेज में उनका व्याख्यान हुआ और उन्होंने रामानंदीय विशिष्टाद्वैत दर्शन को स्थापित किया। उस समय अयोध्या के संत वासुदेवाचार्य पहले गलता और बाद में बालानंद मठ के महंत बनना चाहते थे, लेकिन रामानंदी साधुओं ने दोनों ही स्थानों पर उनके नाम को स्वीकार नहीं किया। वैष्णवाचार्य भगवदाचार्य रैवासा, त्रिवेणी और सामोद में रामानंदी साधुओं के आश्रमों में गए। उन्होंने यजुर्वेद, सामवेद, गीता सहित उपनिषदों पर भाष्य और रामानंद दर्शन पर अनेक ग्रंथ लिखे। वे एक ही समय में दोनों हाथों से दो अलग-अलग पत्र लिख देते थे।

स्वामी भगवदाचार्य भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे। सेवाग्राम में हुई पहली मुलाकात में महात्मा गांधी ने भगवदाचार्य से पूछा - 'गीता आती है?' उन्होंने कहा - गीता तो नहीं आती पर उसके श्लोकों का उच्चारण अवश्य आता है। यह सुनकर गांधी हंस पड़े क्योंकि वे जानना चाहते थे कि गीता आचरण में है या केवल शब्दों में! गांधी ने उन्हें सच्चा संत जानकर सेवाग्राम में साधकों के लिए गीता शिक्षक बनाया। गांधी के अदम्य कृतित्व पर उन्होंने संस्कृत में तीन काव्य भारत-पारिजात, पारिजातापहार और पारिजात-सौरभ लिखे। भारत-पारिजातम् में पोरबंदर में गांधी के जन्म से साबरमती आश्रम की स्थापना तक का इतिहास है। पारिजातापहारम् में गांधी द्वारा 1942 में चलाए भारत छोड़ो आंदोलन का वर्णन है और पारिजातसौरभम् में गांधी के स्वर्गारोहण की करुण कथा है। अंग्रेजी हुकूमत होने से उस समय इनमें दो काव्यों का छपना भारत में संभव नहीं था, लेकिन भगवदाचार्य ने इनका प्रकाशन दक्षिण अफ्रीका से करवा लिया। उन्होंने जगद्गुरु रामानंदाचार्य के लोकोत्तर कृतित्व पर 20 सर्गों में 'रामानन्द-दिग्विजय' रचा। भगवदाचार्य द्वारा लिखी आत्मकथा का प्रकाशन अलवर के महंत श्रीकृष्णदास ने जनवरी, 1958 में करवाया था।

।। नमोSस्तु रामाय ।।॥ श्रीजानकीवल्लभो विजयते ॥श्रीमठ पंचगंगा घाट, काशी की अक्षुण्ण एवं सनातन परम्पराश्रीमठ पंचगंगा घाट, ...
28/09/2026

।। नमोSस्तु रामाय ।।
॥ श्रीजानकीवल्लभो विजयते ॥

श्रीमठ पंचगंगा घाट, काशी की अक्षुण्ण एवं सनातन परम्परा
श्रीमठ पंचगंगा घाट, काशी की गौरवशाली एवं अक्षुण्ण परम्परा में पूज्य जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी महाराज द्वारा चातुर्मास्य व्रत की पूर्णता के उपरान्त एक विशिष्ट धार्मिक परम्परा का निर्वहन किया जाता रहा है। जिस नगर अथवा ग्राम में दिव्य चातुर्मास्य महायज्ञ सम्पन्न होता, वहाँ के अधिष्ठाता एवं प्रमुख पंचदेवों का पूर्ण वैदिक विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर उस क्षेत्र की मंगलकामना की जाती थी।
इसी पुण्य एवं लोकमंगलकारी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए पूज्य गुरुदेव भगवान के उत्तराधिकारी श्री राघवदास जी महाराज ने काशी की पावन धरा पर उसी सनातन परम्परा का श्रद्धापूर्वक निर्वहन किया।
इस क्रम में काशी के प्रमुख आराध्य देवों का विधिवत् पूजन-अर्चन सम्पन्न हुआ—
श्री बिन्दुमाधव भगवान, माँ ब्रह्मचारिणी देवी
काशी के कोतवाल श्री कालभैरव जी,
श्री दण्डपाणि जी,
माँ संकठा देवी,
नित्य मंगल एवं सुख-सौभाग्य की अधिष्ठात्री माँ मंगलागौरी,
तथा श्री गभस्तीश्वर महादेव, और परम मोक्षदायिनी भगवती माँ गंगा पूजन किया ।
यह केवल देवपूजन का अनुष्ठान मात्र नहीं, अपितु श्रीमठ पंचगंगा की गुरु-परम्परा, वैदिक संस्कृति और लोकमंगल की अखण्ड चेतना का जीवंत संवहन है। लोक कल्याण , भक्तों के कल्याण हेतु पूजन किया जाता है साथ ही वहाँ के देवाधिदेवों के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण अर्पित करना इस परम्परा की आत्मा है। इसी परम्परा को अपने आचरण से आगे बढ़ाते हुए श्री राघवदास जी महाराज ने यह संदेश पुनः प्रतिष्ठित किया कि सनातन परम्पराएँ केवल स्मरण करने के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना और आचरण के द्वारा निरन्तर जीवित रखने के लिए होती हैं।
श्रीमठ पंचगंगा की यह परम्परा युगों से प्रवाहित उस आध्यात्मिक धारा का प्रतीक है, जिसमें गुरु-परम्परा, वैदिक विधान, देवोपासना और समस्त लोक के मंगल की भावना निहित होती है।

जयश्रीराम

जय जय सियाराम 🙏श्रीरामार्चन महायज्ञ श्रीमठ पंचगंगा घाट काशी ।
27/09/2026

जय जय सियाराम 🙏
श्रीरामार्चन महायज्ञ
श्रीमठ पंचगंगा घाट काशी ।

     श्रीमठ पंचगंगा घाट पर 'श्री रामार्चा महाअनुष्ठान' संपन्न, जुटे देश के शीर्ष संत और गणमान्य जनवाराणसी, २५ सितम्बर २०...
26/09/2026

श्रीमठ पंचगंगा घाट पर 'श्री रामार्चा महाअनुष्ठान' संपन्न, जुटे देश के शीर्ष संत और गणमान्य जन
वाराणसी, २५ सितम्बर २०२६। श्री रामानंद संप्रदाय की मूल आचार्य पीठ, श्रीमठ (पंचगंगा घाट, काशी) में आज अध्यात्म, श्रद्धा और दिव्य संकल्प का एक अनूठा समागम देखने को मिला। वर्तमान पीठाधीश्वर, अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी श्री रामनरेशाचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य 'श्री रामार्चा महाअनुष्ठान' अत्यंत गरिमामयी ढंग से संपन्न हुआ।
यह कलिपावन अनुष्ठान विश्वविश्रुत संत शिरोमणि आचार्य रामानंददास जी महाराज के मुख्य आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आयोजित हुआ, जिसका संपादन श्रीमठ के सुयोग्य उत्तराधिकारी श्री राघवदास जी महाराज द्वारा पूर्ण निष्ठा व शास्त्रीय पद्धति से किया गया।
# # देशभर से जुटे प्रख्यात महामंडलेश्वर एवं श्रीमहंत
भगवान राघवेंद्र सरकार की आराधना के लिए आद्य जगद्गुरु रामानन्दाचार्य महाराज द्वारा प्रणीत 'श्री रामार्चन पद्धति' को रामानंद संप्रदाय की सर्वोत्कृष्ट साधना माना जाता है। इस महाअर्चना को आत्मसात करने हेतु देशभर से संप्रदाय के शीर्ष संत एवं महापुरुष अपने शिष्यों सहित श्रीमठ पधारे। अनुष्ठान में मुख्य रूप से निम्नलिखित संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही:

* श्रीमहन्त राम विनय दास जी महाराज
* श्रीमहन्त श्यामदास जी महाराज
* मानसकेशरी आचार्य श्री रामलखन दास जी महाराज
* पूज्य महंत जन्मेजय शरण जी महाराज (बड़ा जानकी घाट, अयोध्या धाम)
* पूज्य महंत श्री नंदराम दास जी महाराज (राष्ट्रीय सचिव, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, उज्जैनिया पट्टी हनुमानगढ़ी)
* पूज्य महंत श्री भानु दास जी महाराज (हनुमान गुफा, अयोध्या धाम)
* पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी गणेशानंद जी महाराज (श्रीराम कृष्ण मंदिर, अयोध्या धाम)
* पूज्य महंत रामदास जी महाराज (करतालिया आश्रम, सरयू तट, अयोध्या धाम)
* पूज्य महंत ऋषि आनंद जी (हरिद्वार गंगा तट)
* पूज्य महंत अंजनी शरण जी महाराज (मिथिला मणि मंडप, गोलाघाट, अयोध्या धाम)
* पूज्य महंत श्री सियावर शरण जी महाराज (सद्गुरू निवास, अयोध्या धाम)
* पूज्य महंत श्री राम मिलन शरण जी महाराज (सरयू कुंज, वशिष्ठ कुंड, अयोध्या धाम)
* पूज्य सुनील दास जी महाराज (प्रतिनिधि, श्री महंत, हनुमानगढ़ी अखाड़ा)
श्रीमहंत जयराम दास जी महाराज श्रीराम आश्रम अयोध्या

# # शताधिक गणमान्य विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस पावन अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सैकड़ों प्रतिष्ठित जनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मुख्य रूप से श्री धीरेन्द्र राय जी (पूर्व डीजीपी, उत्तर प्रदेश), रमेश अग्रवाल, श्रीमठ के सचिव अम्बरीश राय जी, संजय त्रिपाठी, सुधीर शुक्ला, आदित्य शुक्ला, अंजलि, अजय तिवारी, मधु, सत्येन्द्र दीक्षित, श्रीमती नीता रघुवंशी, अखिलेश राय, अनुज मिश्र, टीकम जी (सूरत), डॉ. नौनिहाल, गौतम सागर, वैंकटेश तिवारी, श्रीमती वसंती जी, उपेन्द्र चौधरी एवं विनोद राय सहित शताधिक गणमान्य महानुभावों ने भगवान राघवेंद्र सरकार का दर्शन-पूजन कर जगद्गुरु श्री जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
# # विद्यार्थियों का अद्वितीय सहयोग एवं भव्य भंडारा
श्रीमठ परिसर में उमड़े इस विशाल संत समागम और देश भर से आए श्रद्धालुओं की व्यवस्था में प्रबंधक आचार्य उपेंद्र जी मिश्र के कुशल नेतृत्व में मठ के समस्त वर्तमान विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों एवं अनन्य भक्तों ने सेवा भाव से दिन-रात एक कर अद्वितीय व अनुकरणीय सहयोग प्रदान किया। अनुष्ठान की पूर्णता के पश्चात पधारे हुए समस्त संतों, महात्माओं एवं उपस्थित भक्तों के लिए एक भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
उत्कृष्ट प्रबंधन, अनुशासन और सेवा भाव के कारण संपूर्ण आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित और दिव्य ढंग से संपन्न हुआ। पूरा पंचगंगा घाट क्षेत्र 'जय सियाराम' और 'रामानंदाय नमः' के महामंत्र से गुंजायमान रहा।

25/09/2026

श्री रामार्चन महायज्ञ की दिव्य कथा आचार्य से रामानन्द दास जी महाराज के मुखारबिंद से अवश्य सुने।
सादर जय सियाराम

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