04/06/2026
#त्रिसंध्येश्वर_महादेव #काशी_खंडोक्त
त्रिसन्ध्यं वै तीर्थं त्रिसंध्येश्वरपूर्वतः ।
तत्र तिर्थे नरः स्नात्वा कृत्वा संध्या विद्यानतः।।
त्रिसन्धेश्वरमालोक्य कृतसंध्यास्त्रिकालतः ।
त्रिवेदावर्तजं पुण्यं प्राप्नुयाच्छ्रद्ध्या द्विजः।।
( #काशीखण्ड)
काशी मे त्रिसंध्येश्वर महादेव के पूर्व की ओर त्रिसंध्यतीर्थ है। यहां स्नान कर के विधानपूर्वक जो भी मनुष्य संध्यावन्दन करता है, वह संध्योपासन कर्म के काललोप होने के पापों से छूटा रहता है।
द्विज(ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य)त्रिकाल मे संध्योपासन करके श्रद्धापूर्वक त्रिसंध्येश्वर के दर्शन करने से तीनों वेदों के अध्यन करने का पुण्य प्राप्त करता है।
त्रिसंध्यतीर्थ कुंड का अस्तित्व अब पता नही लगता पर उपरोक्त प्रमाण के अनुसार द्विज (अर्थात तीनों वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं वैश्य) को नित्य संध्या वंदन करना आवश्यक है। (लोकमत के अनुसार त्रिसंध्येश्वर का नित्य दर्शन करने से नित्य संध्या करने का फल मिलता है)
पता- श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कोरिडोर मे त्रयम्बक हाल के पास। वाराणसी।