Temples of kashi

Temples of kashi काशी के मंदिरों की विवेचना विशेषतया काशी खण्डोक्त मंदिरो की 🙏🏻

 िनायक      #काशी_खंडोक्त वक्रतुण्डादुदग्दिक्स्थः स्वः सिन्धो रोधसि स्थितः।विनायकोऽस्तयभदः सर्वेषां भयनाशनं ।।चतुर्थावरण...
18/08/2026

िनायक #काशी_खंडोक्त

वक्रतुण्डादुदग्दिक्स्थः स्वः सिन्धो रोधसि स्थितः।
विनायकोऽस्तयभदः सर्वेषां भयनाशनं ।।
चतुर्थावरणे काश्यां भक्तविघ्न विनाशकाः ।
( #काशीखण्ड)

वक्रतुंड गणेश की उत्तर के ओर गंगा के तट पर ही सब किसी के भयहर्ता एवं सभी प्रकार की सुरक्षा देने वाले अभयप्रद गणेश विराजमान हैं।
काशी के चौथे आवरण के यह विनायक भक्त लोगों के सभी विघ्न विघातक हैं एवं प्रसन्नचित होकर सुव्यक्त रूप मे दर्शनीय हैं।

पता - दशाश्वमेध घाट, शूलटंकेश्वर मंदिर प्रांगण मे d17/111, गोदौलिया, वाराणसी।

 #त्वरिता_देवी      #काशी_खंडोक्त उपसर्ग सहस्त्रेभ्यस्ता वै दिग्देवताः क्रमात् ।यत्नेन संपूज्याः क्षेत्ररक्षण देवताः ।। ...
17/08/2026

#त्वरिता_देवी #काशी_खंडोक्त

उपसर्ग सहस्त्रेभ्यस्ता वै दिग्देवताः क्रमात् ।
यत्नेन संपूज्याः क्षेत्ररक्षण देवताः ।।
( #काशीखण्ड्)

काशी मे नव दुर्गा देवियों के अलावा भी उनसे भिन्न और भी दिशाओ की अधिष्ठात्रि ( देवियाँ) नव शक्तियाँ हैं। वे भी क्रम से काशी की एवं काशी वासियो की हजारों उपद्रवो से रक्षा किया करती हैं। इनके नाम हैं
1.शतनेत्रा. 2.सहस्त्रास्या. 3.अयूतभुजा
4.अश्वरुढा.5.गजास्या.6. #त्वरिता (चटपटी)
7.शववाहिनी. 8.विश्वगौरी. 9. सौभाग्यगौरी।

यह उपरोक्त देवीयां काशी की आठों दिशा(8+1)एवं एक देवी काशी की मध्य मे होकर काशी की रक्षा करतीं हैं इनका बड़े यत्न से पूजन अर्चन करना चाहिए 🙏

त्वरिता देवी काशी मे त्वरित ही अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करतीं हैं।भक्तों का काम चटपट होजाता है इसीलिए इनको लोकाचार के तहत काशी मे चटपटी देवी भी कहा जाने लगा।

महाभारत मे शिव जी ज़ब किरात भेष मे अर्जुन से युद्ध कर रहें थे तोह माता पार्वती त्वरिता देवी के रूप से ही अर्जुन जी को पाशुपत अस्त्र दिलाने मे मदद की थी ।

शीघ्र अनुग्रह: तंत्र शास्त्र और अग्नि पुराण के अनुसार, देवी त्वरिता श्रीविद्या की 15 नित्या देवियों में से 8वीं नित्या हैं। वे अपने भक्तों की पुकार बहुत जल्दी (त्वरित) सुनती हैं।

पता- रविंद्रपूरी रोड..no' A33.. lane number 3.
वाराणसी।

 #पिचण्डिल_विनायक        #काशी_खण्डोक्त वरदाद्यातुधान्यां   च  यातुधानगणावृतः ।देवः पिचिण्डलो नाम पुरीं रक्षेदहर्निशम् ।...
19/06/2026

#पिचण्डिल_विनायक #काशी_खण्डोक्त

वरदाद्यातुधान्यां च यातुधानगणावृतः ।
देवः पिचिण्डलो नाम पुरीं रक्षेदहर्निशम् ।।
( #काशीखंड)

वरद विनायक के नैऋत्य कोण पर राक्षसगणों से घेरे हुवे पिचण्डिल विनायक हैं, यह गणेश जी इस काशी नगरी की रात्रि हो या दिन हो हर समय रक्षा करते हैं।(यह असुरों की मायावी प्रवित्ती से काशी की रक्षा करते हैं)

#चतुर्थ आवरण के विनायक
काशी के चौथे आवरण के सभी आठों विनायक भक्त लोगों विघ्न विघातक हैं और सभी को प्रसन्न और सुव्यक्त रूप से दर्शन देते हैं।

पता - प्रहलाद घाट पर सीढ़ी पर बरगद पेड़ के निचे a10/80 वाराणसी।

 #भगीरथ_गणेश        #काशी_खंडोक्त भगीरथगणाध्यक्ष तेषांप्यर्चनात्पुंसां जायन्ते सर्व संपदः ।।                            ...
11/06/2026

#भगीरथ_गणेश #काशी_खंडोक्त

भगीरथगणाध्यक्ष तेषांप्यर्चनात्पुंसां जायन्ते सर्व संपदः ।।
( #काशीखण्ड)

काशी मे #भगीरथगणेश जी भगीरथ जी के द्वारा स्थापित है। इनके पूजन से लोगों को समस्त सम्पतियां प्राप्त हो जाती हैं।

स्कन्दपुराण (काशीखंड) के अनुसार जो कोई भी श्रद्धा पूर्वक छप्पन विनायक के अध्याय को सुनता है, तोह उसके सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और वह अपना अभिष्ट पद प्राप्त करता है।

पता - काशी मे श्री विश्वनाथ मंदिर कोरिडोर के अंदर त्रयंबक हाल के पास, वाराणसी।

 #त्रिसंध्येश्वर_महादेव         #काशी_खंडोक्त  त्रिसन्ध्यं        वै   तीर्थं    त्रिसंध्येश्वरपूर्वतः  ।तत्र तिर्थे नरः...
04/06/2026

#त्रिसंध्येश्वर_महादेव #काशी_खंडोक्त

त्रिसन्ध्यं वै तीर्थं त्रिसंध्येश्वरपूर्वतः ।
तत्र तिर्थे नरः स्नात्वा कृत्वा संध्या विद्यानतः।।
त्रिसन्धेश्वरमालोक्य कृतसंध्यास्त्रिकालतः ।
त्रिवेदावर्तजं पुण्यं प्राप्नुयाच्छ्रद्ध्या द्विजः।।
( #काशीखण्ड)

काशी मे त्रिसंध्येश्वर महादेव के पूर्व की ओर त्रिसंध्यतीर्थ है। यहां स्नान कर के विधानपूर्वक जो भी मनुष्य संध्यावन्दन करता है, वह संध्योपासन कर्म के काललोप होने के पापों से छूटा रहता है।
द्विज(ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य)त्रिकाल मे संध्योपासन करके श्रद्धापूर्वक त्रिसंध्येश्वर के दर्शन करने से तीनों वेदों के अध्यन करने का पुण्य प्राप्त करता है।
त्रिसंध्यतीर्थ कुंड का अस्तित्व अब पता नही लगता पर उपरोक्त प्रमाण के अनुसार द्विज (अर्थात तीनों वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं वैश्य) को नित्य संध्या वंदन करना आवश्यक है। (लोकमत के अनुसार त्रिसंध्येश्वर का नित्य दर्शन करने से नित्य संध्या करने का फल मिलता है)

पता- श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कोरिडोर मे त्रयम्बक हाल के पास। वाराणसी।

 #विमलेश्वर_महादेव      #काशी_खंडोक्त 68 अड़सठ शैव आयतन के शिव लिंग विश्वस्थानादिहायातं लिङ्ग वै विमलेश्वरं  ।स्वर्लीनात्...
03/06/2026

#विमलेश्वर_महादेव #काशी_खंडोक्त

68 अड़सठ शैव आयतन के शिव लिंग

विश्वस्थानादिहायातं लिङ्ग वै विमलेश्वरं ।
स्वर्लीनात्पश्चिमे भागे दृष्ट विमलसिद्धिदम् ।।
विमलेशश्च कुण्डं च ब विमलोदकम् ।
तत्र स्नात्वा कुण्डे नरः स्नातो भुवनेशोभवेन्नरः।।
तत्र स्नात्वा विलोक्येशं विमलो जायते नरः।
तत्र पशुपतः सिद्धः त्रयम्बको नाम नामतः ।।
( #काशीखण्ड)

विश्वस्थान से विमलेश्वर नामक शिव लिंग नंदी जी के आग्रह पर काशी मे आये हुवे है, इनका स्थान स्वरलीनेश्वर शिव लिंग के पश्चिम भाग मे है और यह विमल सिद्धि को देने वाले हैं।
विमलेश्वर शिव लिंग के पास विमलोदक कुंड भी है उसमे स्नान करके विमलेश्वर का दर्शन करने से भी मनुष्य विमल हो जाता है। इसी स्थान पर त्रयम्बक नामक एक शैव(शिव भक्त) सिद्ध हो गए थे (अर्थात इसी शरीर से उन्होंने रूद्र लोक को प्राप्त किया था )
सभी लोगों को मानसिक मल के शांति के लिए एवं विमलता के लिए यहां दर्शन पूजन अवश्य करना चाहिए।
विमलोदक कुंड सम्भवतः लुप्त है और यह थोड़ा दूर ओम्कारेश्वर महादेव के पास था और नौगुटूरी गढ़ही नाम से लोग इसको जानते थे पर अब तत्काल मे इसका भी पता नही चलता।

पता -(प्रचलित नाम नीलकंठ महादेव )नया महादेव मोहल्ला a10/47 प्रह्लाद घाट के पास वाराणसी।

 #किरातेश्वर_महादेव        #काशी_खंडोक्त  #शिव_गण किरात द्वारा स्थापित लिंग किरातेन किरातेशं लिङ्गं काश्यां प्रतिष्ठितम्...
01/06/2026

#किरातेश्वर_महादेव #काशी_खंडोक्त

#शिव_गण किरात द्वारा स्थापित लिंग

किरातेन किरातेशं लिङ्गं काश्यां प्रतिष्ठितम्।
केदारादक्षिणे भागे भक्तानामभयप्रदम्॥
( #काशीखंड)

किरात नामक गण ने काशी में #गौरीकेदारेश्वर महादेव के दक्षिण भाग में भक्तों को अभय देने वाले किरातेश्वर नामक लिंग को प्रतिष्ठित किया है।
इस लिंग की पूजा से व्यक्ति भय रहित, निडर एवं निर्भीक होजाता है।

#शिव जी के आज्ञावस काशी मे दिवोदास के राज्य में खोट निकालने हेतु जब शिव गण किरात जी काशी आए तो वह भी शिवकार्य में असफल होकर काशी की महिमा को देख वह शिव आराधना में लीन होकर काशी के केदार घाट (श्री विद्यामठ के नीचे) पर एक शिवलिंग स्थापित कर शिव तपस्या में लीन हो गए और अभी तक काशी मे ही रह कर यहां शिव पूजा मे संलग्न हैं।

काशी मे किरात नाम से दो लिंग है काशी खंडोक्त तोह हैं पर दोनों लिंगों का इतिहास अलग अलग है।

पता - केदार घाट के बगल मे श्री विद्यामठ के निचे घाट पर गंगा तट पर मढी मे यह विशाल लिंग स्थापित है।

 #कालंजरेश्वर_महादेव       #काशी_खंडोक्त #शिवउवाचनरो    दृष्ट्वा   लिङ्गं        कालंजरेश्वरम् ।जरां कालं विनिर्जित्य मम...
30/05/2026

#कालंजरेश्वर_महादेव #काशी_खंडोक्त

#शिवउवाच
नरो दृष्ट्वा लिङ्गं कालंजरेश्वरम् ।
जरां कालं विनिर्जित्य मम लोके वसेच्चिरम्।।
( #काशीखण्ड्)

शिव जी माता पार्वती से कहते हैं कि
काशी मे कालंजरेश्वर नामक लिंग का दर्शन करने से मनुष्य #जरा (बीमारी अथवा बुढ़ापा)और #काल (मृत्यु अथवा समय) को जीत कर मेरे लोक (शिवलोक) मे बहुत दिनों तक वास करता है।
काशी खण्ड के अनुसार यह लिंग शिवलोक मे वास देने वाला बताया गया है और काशी के केदारखण्ड के अंतर्गृह के अंतर्गत मे यह लिंग आता है।

पता-13/98 इंद्रद्युमेश्वर महादेव के बगल मे , नमक विक्रेता गुप्ता जी के घर मे, कूच बिहार,काली बाड़ी के पीछे, मदनपुरा, वाराणसी।

 #काशी_महिमा एकां गां यत्र दत्वा वै विधिवद् ब्राह्मणाय वै।लभेदयुतगोपुण्यं कस्तां काशीं त्यजेत्सुधीः।।                   ...
28/05/2026

#काशी_महिमा

एकां गां यत्र दत्वा वै विधिवद् ब्राह्मणाय वै।
लभेदयुतगोपुण्यं कस्तां काशीं त्यजेत्सुधीः।।
( #काशीखण्ड्)

जिस स्थान (काशी) मे विधि पूर्वक ब्राह्मण को एक भी गोदान करने से दश सहस्त्र(10000) गोदान का पुण्यलाभ होता है, उस काशी का कौन बुद्धिमान त्याग करेगा? अर्थात ऐसी पुण्य एवं मुक्ति मयी काशी का कभी भी त्याग नही करना चाहिए।

 #शंकुकर्णेश्वर_महादेव    #काशीखण्डोक्त शिवगण द्वारा स्थापित लिङ्ग शङ्कुकर्णेश्वरम्  लिङ्गं शङ्कुकर्णगणर्चितं ।दृष्ट्वा ...
28/05/2026

#शंकुकर्णेश्वर_महादेव #काशीखण्डोक्त

शिवगण द्वारा स्थापित लिङ्ग

शङ्कुकर्णेश्वरम् लिङ्गं शङ्कुकर्णगणर्चितं ।
दृष्ट्वा न जायते जन्तुर्जातु मातुमर्होदरे ।।
संपूज्य न विशेदत्र घोरे संसार सागरे ।
संसेव्यं परमं ज्ञानं लभेदद्याऽपि साधकः ।।
( #काशीखण्ड)

शंकुकर्ण गण के द्वारा स्थापित एवं पुजित शंकुकर्णेश्वर शिवलिंग के दर्शन करने से कोई भी जन्तु कभी माता के जठर (पेट अथवा गर्भ) मे नही जाता। कोई भी व्यक्ति यदि शंकुकर्णेश्वर महादेव का पूजन करता है तोह वह मनुष्य इस घोर संसार सागर मे नही पड़ता।
शंकुकर्णेश्वर लिङ्ग की आराधना करने से आज भी साधक परम ज्ञान को प्राप्त करता है।
(परम ज्ञान प्राप्त करना ही मुक्ति का साधन बताया गया है)काशी खण्ड के अनुसार आज भी शंकुकर्ण गण काशी को बिना छोड़े अपने द्वारा स्थापित लिंग की पूजा करते हैं।

काशीखण्ड के अध्याय 53 के प्रमाण से शंकुकर्ण गण को महादेव गणेश एवं कार्तिक जैसा पुत्रवत मानते हैं। और योगिनीगण, सूर्य और ब्रह्मा के बाद सबसे पहले शंकुकर्ण गण एवं अन्य गणों को भी काशी भेजते हैं। जिसमे की सभी गण काशी की महिमा को देख कर अपने नाम से शिवलिंग स्थापित करने के बाद काशी मे ही रुक जाते हैं।

पता - b22/120 शंखुधारा पोखरा,, खोजवा, (कमच्छा से विनायका) के पास वाराणसी।

Mahadev

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Chowk
Varanasi
221001

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+917880462569

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