18/08/2026
िनायक #काशी_खंडोक्त
वक्रतुण्डादुदग्दिक्स्थः स्वः सिन्धो रोधसि स्थितः।
विनायकोऽस्तयभदः सर्वेषां भयनाशनं ।।
चतुर्थावरणे काश्यां भक्तविघ्न विनाशकाः ।
( #काशीखण्ड)
वक्रतुंड गणेश की उत्तर के ओर गंगा के तट पर ही सब किसी के भयहर्ता एवं सभी प्रकार की सुरक्षा देने वाले अभयप्रद गणेश विराजमान हैं।
काशी के चौथे आवरण के यह विनायक भक्त लोगों के सभी विघ्न विघातक हैं एवं प्रसन्नचित होकर सुव्यक्त रूप मे दर्शनीय हैं।
पता - दशाश्वमेध घाट, शूलटंकेश्वर मंदिर प्रांगण मे d17/111, गोदौलिया, वाराणसी।