05/01/2021
कशी कहो या बनारस, या कहो वाराणसी। ये तीनो नाम एक ही शहर के हैं, जिसे बाबा भोलेनाथ कि नगरी कहा जाता है। यह एक ऐसा शहर है जो गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है। काशी में बाबा विश्वनाथ ज्योर्तिलिंग है जो कि बारह ज्योर्तिलिंगो में से एक है। बनारस अपने आप में ही एक अनोखा शहर है, क्यूंकि यहाँ पर हर धर्म के लोग रहते हैं और लोगो कि भाषा में एक अलग सी मिठास होती है।
कशी में और क्या-क्या खास है, इन सबके बारे में आज गहराई सी जानने कि कोशिश करेंगे:
१. कहा जाता है कि ये पूरा काशी शहर भगवान शिव के त्रिशूल कि नोक पे बसा हुआ है।
२. हिन्दुओं के धर्मग्रंथो और पुराणों के अनुसार, यहाँ भगवान विष्णु का वास था। लेकिन यह काशी नगरी भगवान शिव को बहुत प्रिय लगी थी, इसलिए उन्होंने इसको अपने निवास के लिए भगवान विष्णु से मांग लिया था और तभी से काशी में हिन्दुओं का पवित्र स्थान "कशी विश्वनाथ" बन गया।
३. काशी में ही भैरव का भी वास है। भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। एक मान्यता के अनुसार बाबा भोलेनाथ (काशी विश्वनाथ) के दर्शन अधूरे माने जाते हैं अगर भैरव के दर्शन नहीं करते हैं तो। कहा जाता है कि भगवान शिव के रुधिर से ही भैरव नाथ कि उत्पत्ति हुयी है। बाद में उक्त रूधिर के दो भाग हो गए - पहला बटुक भैरव और दूसरा काल भैरव।
४. काशी को हिन्दुओं का मोक्ष-स्थल भी मन जाता है क्यूंकि शाश्त्रो के अनुसार जब मनुष्य कि मृत्यु हो जाती है तो मोक्ष हेतु मृतक की अस्थियां यहीं पर गंगा में विसर्जित की जाती हैं।
५. विश्व के सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में काशी का उल्लेख मिलता है, जिससे पता चलता है कि काशी विश्व के प्राचीन शहरों में से एक है। कुछ प्रसिद्ध विद्वानों के अनुसार ये शहर ५००० साल से भी ज्यादा पुराना है।
६. भगवान बुद्ध और शंकराचार्य के अलावा रामानुज, वल्लभाचार्य, संत कबीर, गुरु नानक, तुलसीदास, चैतन्य महाप्रभु, रैदास आदि अनेक संत इस नगरी में आए।
भगवान बुद्ध ने बोध गया में ज्ञान प्राप्त कर यहीं पर अपना पहला प्रवचन दिया और जैनियों के तीन तीर्थंकरो का जन्म यहीं हुआ इसीलिए यह तीनों धर्मों के लिए पवित्र स्थल है। कबीर ने यहीं पर बैठकर अपने संदेश को दुनिया में फैलाया। तुलसीदास जी ने यहीं बैठकर रामचरित मानस की रचना की। इस तरह काशी कई महात्मा और संतों की पुण्य स्थली है।
७. जैसा कि सब जानते हैं काशी को बनारस भी कहते हैं। यहां का बनारसी पान, बनारसी सिल्क साड़ी और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय संपूर्ण भारत में ही नहीं, विदेश में भी प्रसिद्ध है। यहां के लोग भी अद्भुत होते हैं, जिन्हें बनारसी बाबू कहते हैं। इनका व्यवहार बहुत मीठा और ज्ञानपूर्ण होता है। दिमाग से तेज होते हैं बनारसी बाबू। देखा जाए तो काशी बहुत बड़े नेता, अभिनेता, गायक, संगीतकार, नृत्यकार और कलाकारों की नगरी है।
८. कशी में माता दुर्गा के दो बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। जिसमे से एक का नाम "दुर्गा कुंड" है। इस मंदिर में माता दुर्गा के कई रूप देखने को मिलते हैं। कहा जाता है कि यहाँ माता स्वतः ही प्रकट हुईं थी इसलिए इसका नाम दुर्गा कुंड पड़ा है। कहते हैं कि यहाँ के मंदिर परिसर में एक अलग सी शांति और गज़ब कि सकारात्मक ऊर्जा का आभास होता है।
९. काशी में ही तुलसी मानस मंदिर भी है, जिसकी स्थापना १९६४ में सफ़ेद संगमरमर से करवाया गया था। यह मंदिर गोस्वामी तुलसीदास जी को समर्पित है। इस मंदिर में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करके, एक झांकी के रूप में मानस के अनेक प्रसंगो को दर्शाने कि कोशिश कि गयी है।
१०. महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपने उस शिक्षा और ज्ञान को दुसरो तक पहुंचाने के लिए काशी को चुना था। सारनाथ, जो कि काशी में स्थित है और महात्मा बुद्ध ने यहीं आकर अपने ज्ञान को दुसरो तक पहुँचाया था। सारनाथ में ही राजा अशोक द्वारा बनवाया हुआ स्तूप भी प्रसिद्ध है। सारंगनाथ मंदिर भी यहीं स्थित है।
इनके अलावा और भी बहुत सारी रोचक जानकारियाँ हैं काशी के बारे में जो समय-समय पर हम आपसे शेयर करते रहेंगे।