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social religion भारत के विभिन्न मंदिरों के दर्शन।हिंदुओं की धर्म आस्था का प्रतीक।

यहां भगवान शिव ने पांडवों को ...बूढ़ा केदार की कहानी महाभारत काल से जुड़ी है, जब कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडवों ने अपन...
04/01/2026

यहां भगवान शिव ने पांडवों को ...बूढ़ा केदार की कहानी महाभारत काल से जुड़ी है, जब कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पापों से मुक्ति के लिए भगवान शिव को खोजा; शिव ने उन्हें वृद्ध रूप में दर्शन दिए और बालखिल्य ऋषि के मार्गदर्शन में पांडवों ने एक विशाल शिवलिंग का आलिंगन कर पापों से मुक्ति पाई, जिससे इस स्थान का नाम 'बूढ़ा केदार' पड़ा और यह पंच केदार यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया।
कथा का सार:
पांडवों का पश्चाताप: महाभारत युद्ध के बाद, पांडवों को गोत्र-हत्या के पाप से मुक्ति चाहिए थी, इसलिए वे भगवान शिव का आशीर्वाद लेने हिमालय गए।
शिव का वृद्ध रूप: भगवान शिव उनसे मिलना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक बूढ़े व्यक्ति (वृद्ध) का रूप धारण कर लिया और उन्हें भृगु पर्वत पर बालखिल्य ऋषि से मिलने का निर्देश दिया।
बालखिल्य ऋषि का मार्गदर्शन: ऋषि ने पांडवों को दो नदियों (बालगंगा और धर्मगंगा) के संगम पर ध्यानमग्न एक वृद्ध व्यक्ति से मिलने को कहा।
शिवलिंग का प्राकट्य: पांडव जब संगम पर पहुँचे, तो वह वृद्ध व्यक्ति अदृश्य हो गया और उसकी जगह एक विशाल शिवलिंग प्रकट हुआ, जिस पर पांडवों के हाथ के निशान अंकित थे।
पापों से मुक्ति: ऋषि के कहने पर पांडवों ने इस शिवलिंग का आलिंगन किया और अपने पापों से मुक्ति पाई। इसी कारण इस स्थान का नाम 'बूढ़ा केदार' पड़ा और यह उत्तर भारत के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है।
महत्व:
पंच केदार यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और केदारनाथ यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव है।
मंदिर की नींव आदि गुरु शंकराचार्य ने रखी थी और इस पर पांडवों व गणेश की आकृतियाँ उत्कीर्ण हैं।
स्थानीय लोग इसे पांचवां धाम मानते हैं और यहाँ का दर्शन केदारनाथ के बराबर फलदायी माना जाता है।
बूढ़ा केदार मंदिर - विकिपीडिया
पौराणिक कथा एवं इतिहास स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बूढ़ा केदार का संबंध महाभारत काल के पांडवों से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद गोत्र हत्या...

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