10/01/2026
|| जय गंगा मैया जय सोमेश्वर देवता ||
|| प्रेम की सामर्थ्य ||
बल की अपेक्षा प्रेम की शक्ति कई गुना अधिक प्रभावी होती है। बल के प्रयोग से आप किसी व्यक्ति को तो जीत पाते हैं, लेकिन उसके हृदय को नहीं जीत सकते हैं। अपनी बात मनवाने के लिए अपने अधिकार या बल का प्रयोग करना कदापि उचित नहीं है। प्रेम ही वो शस्त्र है, जिसके प्रयोग से सारी दुनिया को जीता जा सकता है। निसंदेह प्रेम की विजय ही सच्ची विजय है। प्रयास करें कि किसी काम को करवाने के लिए आपको क्रोध का आश्रय न लेना पड़े।
जो काम धीरे बोलकर, मुस्कुराकर और प्रेम से बोलकर कराया जा सकता है उसे क्रोधित होकर करवाना भी उचित नहीं है। आज प्रत्येक घर में परस्पर द्वेष, संघर्ष, दुःख और अशांति का एक ही कारण है और वह है प्रेम का अभाव। आग को आग नहीं बुझाती पानी बुझाता है और क्रोध को क्रोध शांत नहीं करता अपितु प्रेम ही शांत करता है। पशु -पक्षी भी प्रेम की भाषा समझते हैं। प्रेम वो इत्र है जिसकी सुगंधि आपके पूरे जीवन को प्रसन्नता की सुगंध से भर देती है।
आचार्य रावल मनु महाराज