23/01/2026
आज 3 शबान की वो मुकद्दस तारीख है, जब मौला अली (अ.स) और सैयदा फातिमा (स.अ) के घर वो शहज़ादा आया जिसे देख कर खुद सरवरे-कायनात (صلى الله عليه وآله وسلم) की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
नबी-ए-करीम (स.अ.व.व) ने इमाम हुसैन (अ.स) की विलादत पर जो इरशाद फरमाया और अपने खुतबों में जो ज़िक्र किया, वो हर मोमिन के लिए मशाले-राह है:
"हुसैन मुझ से है और मैं हुसैन से हूँ, अल्लाह उसे महबूब रखता है जो हुसैन को महबूब रखे।"
(Hussain-o-Minni Wa Ana Minal Hussain)
इस हदीस और रसूल-अल्लाह के खुतबों से साफ जाहिर है कि हुसैन (अ.स) सिर्फ एक नवासा नहीं, बल्कि दीन-ए-इस्लाम की बका (survival) का नाम हैं। नबी (स) ने बचपन में ही हुसैन (अ.स) को चूम कर यह बता दिया था कि यह बच्चा खुदा की राह में अपना सब कुछ लुटा कर 'हक' को जिंदा रखेगा।
एक और मकाम पर हुज़ूर (स) ने फरमाया:
"हसन और हुसैन जन्नत के जवानों के सरदार हैं।"
आज का दिन सिर्फ खुशी मनाने का नहीं, बल्कि उस 'हुसैनियत' को अपने किरदार में उतारने का दिन है जिसका ऐलान खुद रसूल-अल्लाह ने किया था।
तमाम आलम-ए-इस्लाम को ज़ीनत-ए-आगोश-ए-रिसालत, इमाम हुसैन (अ.स) की विलादत बहुत-बहुत मुबारक हो! 🎉💚