Swami Shri Ishwaranand vishwanath Aagori

Swami Shri Ishwaranand vishwanath Aagori Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Swami Shri Ishwaranand vishwanath Aagori, Religion & Spirituality, Unnao.

हर हर महादेव नमश्चण्डिकायै जय श्री काल भैरव।

कपालिक स्वामी श्री ईश्वरानन्द नाथ अधोरी ।

हमारे फेसबुक पेज पर आप सभी का स्वागत है।
सिंधी और साधना से संबंधित किसी भी प्रकार के मार्गदर्शन प्राप्त हेतु, सिद्धि प्राप्ति हेतु आप हमें संपर्क कर सकते हैं। तंज्योति गुह्य विद्या शिव शक्ति कालभैरव तंत्र साधना ज्योतिष एवं अनुसंधान केंद्र,,

संस्थापक एवं प्रबंधक निर्देशक

योगीराज परम शैव शांतिदूत तंत्राचार्य

पंडित शिव केशी विश्वनाथ,

श्री धाम काशी

8004000903 संपर्क सूत्र व्हाट्सएप

[email protected]


उत्तर प्रदेश।

चन्द्र सिद्धि साधना महात्म्यन्✦•┈๑⋅⋯ ●ૐ● ⋯⋅๑┈•✦🔮 यह साधना किन के लिए है?💐यह अनुष्ठान विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए ह...
05/07/2026

चन्द्र सिद्धि साधना महात्म्यन्
✦•┈๑⋅⋯ ●ૐ● ⋯⋅๑┈•✦
🔮 यह साधना किन के लिए है?

💐यह अनुष्ठान विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए है जिनके स्वभाव में उग्रता, कड़वाहट या तीखापन अधिक है।
💐इसका उद्देश्य मन में कोमलता और शांति का संचार करना है।

💐💐💐️ अनुष्ठान की अवधि :-
══════════════
• प्रारंभ: शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि से।
• समाप्ति: कृष्णपक्ष की षष्ठी तिथि तक।
• समय: रात्रि काल, जब चंद्रमा की रोशनी उपलब्ध हो।

🔷️ आवश्यक सामग्री :-
══════════════
• ताजा दूध (एक बर्तन में)।
• चांदी की अंगूठी या चांदी का बना चंद्रमा।
• बेलपत्र (अनुष्ठान के बाद सामग्री रखने के लिए)।

🔶️ साधना की विधि :-
══════════════
• साधना पूर्व पंचोपचार गणेश पूजन एवं अपने ईष्ट/कुलगुरु का आशीर्वाद जरूर प्राप्त करें।
• स्थान व दिशा: चंद्रमा की रोशनी में बैठें और अपना मुख चंद्रमा की ओर रखें।
• स्थापना: अपने ठीक सामने दूध का बर्तन रखें और उसमें चांदी की अंगूठी या चांदी का चंद्रमा डाल दें।
• जाप प्रक्रिया: चंद्रमा को देखते हुए निर्धारित मंत्र का (१०८) बार जाप करें।
• विशेष निर्देश: मंत्र पढ़ते समय बीच-बीच में (प्रत्येक मंत्र के साथ या अंत में) दूध के बर्तन को स्पर्श अवश्य करें।
• दूध हमेशा ताजा होना चाहिए।

📿 मंत्र :-
ॐ नमः चन्द्रदेवाय मं लं सं स्वाहा।

🔷️ अनुष्ठान के बाद की प्रक्रिया :-
═════════════════
• जाप पूर्ण होने के बाद, दूध में से चांदी की वस्तु निकाल लें।
• इसे बेलपत्र में लपेटकर अपने पूजा घर में सुरक्षित रख दें।
• अगली रात को पुनः इसी प्रक्रिया को दोहराएं।

🔶️ विशेष परामर्श :-
♦️ अगर साधक समर्थ हो तो इस साधना काल के दौरान प्रातःकाल श्मशान के जल से स्नान करना उत्तम और फलदायी माना गया है।

🔮इस साधना की उपयोगिता यह है कि :-

यह मानसिक शांति और व्यवहार में मधुरता लाने के लिए अत्यंत प्रभावी मानी गई है, यह उन लोगों के लिए अत्यंत प्रभावी मानी गई है जो लोग तंत्र साधना में स्वयं को स्थापित करना चाहते हैं या जो नए इस क्षेत्र में नए अग्रसित हुए हैं।

••||••

💐


#तंत्र_साधना #साधक_ #आध्यात्मिक_अनुष्ठान
#मंत्र_जाप #तांत्रिक_परंपरा #देव_अनुग्रह #शिवशक्ती #चन्द्र_सिद्धि

24/06/2026

उम्र निकली जा रही है और शादी में आ रही है रुकावट? आज़माएं माता लोना चमारी का यह अचूक विवाह मंत्र! 🔔

क्या आपके घर में भी कोई लड़का या लड़की विवाह के योग्य हो चुका है, लेकिन बात बनते-बनते बिगड़ जाती है? कभी कुंडली का दोष, कभी नज़र दोष, तो कभी कोई अज्ञात तंत्र-बाधा शादी के आड़े आ जाती है। उम्र ढलती जा रही है और माता-पिता की चिंता बढ़ती जा रही है।

अगर आप भी शादी की रुकावटों से परेशान हैं, तो अब चिंता छोड़िए! आज आपके लिए लेकर आए हैं माता लोना चमारी और कामरू कामाख्या की शक्ति से लैस एक ऐसा महा-शक्तिशाली शाबर मंत्र, जो शादी में आने वाली हर बाधा को ऐसे उड़ा देगा जैसे आंधी में सूखा पत्ता!

💍 शीघ्र विवाह और बाधा निवारण महा-मंत्र 💍

"ॐ नमो आदेश गुरु को, लोना चमारी जगत की क्यारी। चले मन्तर, फुरे वाचा। देखूं माई लोना चमारी, तेरे मन्तर का तमाशा। अमुक (यहाँ लड़के या लड़की का नाम लें) का ब्याह तुरन्त रचाए,जो न रचाए तो कामरु कामाख्या की आन। दुहाई गौरा पार्वती की, शब्द सांचा, पिण्ड कांचा, फुरो मन्तर ईश्वरो वाचा।"

कोई भी माता-पिता अपने बच्चों के लिए, या खुद लड़का/लड़की साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ इसका प्रयोग कर सकते हैं। तांत्रिक के द्वारा इस प्रयोग को संपन्न करवाया जासकता है।

पूजा की सामग्री (क्या-क्या चाहिए?)

मिट्टी का एक साफ दीपक।

चमेली का तेल (दीपक जलाने के लिए)।

सुंगधित अगरबत्ती और लाल रंग का आसन।

माता का विशेष भोग (नीचे देखें)।

🥥 माता लोना चमारी को क्या भोग चढ़ाएं?

माता को खुश करने के लिए एक पानी वाला जटादार नारियल, गुड़-चने का प्रसाद और दो हरी इलायची का जोड़ा चढ़ाएं।

⚠️ भोग का कड़ा नियम: ध्यान रहे भाई, पूजा पूरी होने के बाद इस भोग (नारियल और गुड़-चने) को घर का कोई भी सदस्य स्वयं ग्रहण बिल्कुल न करे। इसे अगले दिन किसी पेड़ के नीचे या किसी चौराहे पर चुपचाप सम्मान के साथ रख आएं।

⚙️ पूजा अनुष्ठान और प्रयोग की विधि:

शुरुआत का दिन: यह साधना शनिवार के दिन से शुरू करनी है।

जाप का नियम: रात के समय (9 बजे के बाद) उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके लाल आसन पर बैठें। सामने चमेली के तेल का मिट्टी का दीपक जलाएं।

जाप संख्या: मंत्र में जहाँ 'अमुक' लिखा है, वहाँ उस लड़के या लड़की का नाम लें जिसकी शादी करानी है। इसके बाद इस मंत्र का लगातार 21/41 दिनों तक रोज़ 10 माला) जाप करें।

ध्यान रहे: इन 21 /41दिनों के दौरान मन में पूरा विश्वास रखें कि माता लोना चमारी आपकी पुकार सुन रही हैं।

इस मंत्र के लाजवाब फायदे (Benefits):

शादी में आने वाली हर तरह की अज्ञात बाधा, नजर दोष या किया-कराया तुरंत खत्म होता है।

योग्य जीवनसाथी की तलाश जल्दी पूरी होती है।

जो रिश्ते होकर टूट जाते थे, वहां बात पक्की हो जाती है।

रिजल्ट कब तक मिल जाता है?

यह शाबर मंत्र सीधे कामरू कामाख्या और गौरा पार्वती की आन पर चलता है, इसलिए इसका असर बहुत अचूक होता है। जैसे ही आपके 11 दिन का अनुष्ठान पूरा होगा, उसके 21 से 41 दिनों के भीतर आपको शादी के अच्छे और पक्के रिश्ते आने शुरू हो जाएंगे और रिश्ता तय होने के योग बन जाएंगे!

सबसे उत्तम बात यह है इस प्रयोग को करने से पूर्व किसी योग्य ,, विद्वानब्राह्मण, उच्च कोटि के तंत्र के मर्मज्ञ, अघोरी, अथवा इस मार्ग के मर्मज्ञ से परामर्श प्राप्त करके ही इस कार्य को संपादित करें,,
यह प्रयोग पूर्ण रूप से परीक्षित एवं दृष्टिगत प्रमाणित है,,

फिर भी हर व्यक्ति के गुणधर्म भिन्न-भिन्न होते हैं,, फिर भु जिसे एक बार में सफलता न प्राप्त हो वह इसे एक से तीन बार तक प्रयोग करें,

यह जानकारीकेवल सूचनार्थ,

8887261788

18/06/2026

शिवे रुष्टे गुरुस्त्राता गुरौ रुष्टे न कश्चन ।
लब्ध्वा कुलगुरुं सम्यग्गुरुमेव समाश्रयेत् ।।

- श्री गुरु गीता (अध्याय प्रथम, श्लोक ४४)

अर्थात्,
अगर शिव महाप्रभु एक बार रूष्ट हो जाए तो गुरु आपको उनके कोप से बचा सकते है लेकिन अगर गुरु रूष्ट हो जाए तो स्वयं शिव भी आपकी सहाय नहीं करेंगे । अतः गुरुदेव की प्राप्ति होने के पश्चात उनके सानिध्य संग में रहना चाहिए ।

गुरुमंत्रो मुखे यस्य तस्य सिध्यन्ति नान्यथा।
गुरुलाभात् सर्व लाभो गुरुहीनस्तु बालिशः॥

- श्री गुरु गीता (अध्याय द्वितीय, श्लोक १३१)

अर्थात्,
जिसके मुख या हृदय में गुरुमंत्र स्थापित है, उसके सारे कार्य सिद्ध (सफल) हो जाते हैं, अन्यथा नही । गुरु की प्राप्ति ही सबसे बड़ा लाभ है । गुरु के बिना मनुष्य अज्ञानी या नादान (बालिश) ही रहता है ।

संसार के सभी शास्त्रों, पुराणों उपनिषद एवं तंत्र ग्रंथों में गुरु को प्रधानता दी गई है । जिसे गुरु मिला है वह भाग्यशाली है और ऐसे व्यक्ति को निश्चय ही अपने गुरु के शब्दों का अक्षरशः पालन करना चाहिए ।

तुलजापुर में मेरे एक गुरुभाई है, जिन्हें कुछ समय पहले गुरुदेव से दीक्षा प्राप्त हुई । मुश्किल से संध्या सीखना संभव हुआ और प्रथम अनुष्ठान लेने ही वाले थे कि कार्यक्षेत्र में नुकसान हुआ । यही महीने पीठ पर आनेवाले थे, जिससे गुरुदेव से संकल्प लेकर अनुष्ठान ले सके लेकिन स्वास्थ्य में गिरावट आई और अचानक से ऑपरेशन करना पड़ा । अब हालत ऐसी है कि एक महीने तक घर से बाहर नहीं निकल सकते । आज उनसे बात हुई तो उनका दर्द जानकर दुःख हुआ लेकिन उनकी समझदारी देखकर आनंद भी हुआ । उन्होंने यह स्वीकार कर लिया था कि जो हुआ है वो अच्छा हुआ है, भगवती और गुरुमंडल की इच्छा से ही हुआ है । वे पिछले सात महीने से पीठ पर आने की योजना बनाते लेकिन संभव ही नहीं हो पाता लेकिन आज तक उन्हें निराश नहीं देखा । वे हमेशा कहते है कि गुरुदेव ने कहा है कि ये होगा तो होगा ही और नहीं होगा तो नहीं ही होगा । वर्तमान समय में वह अपने कार्मिक बंधनों की वजह से आर्थिक एवं शारीरिक समस्याओं से झुझ रहे है लेकिन गुरु के प्रति इनकी आस्था वैसे की वैसी ही है । यही आस्था में विश्व के हर शिष्य में अपने गुरु के लिए देखना चाहता हूं ।

दीक्षा के पश्चात इन तीन वर्षों में महत्तम ऐसी ही घटना घटी है मेरे जीवन में जिससे कि मेरा ईश्वर पर से विश्वास टूट जाए लेकिन मेरे गुरुमंडल पर के अटूट विश्वास ने मुझे मेरे ईश्वर से जोड़े रखा । इन तीन वर्षों में अच्छी नौकरी से निकलना, विवाह का तय होकर टूट जाना, जो घर पसंद था वो छोड़ना और आर्थिक संकट जैसी स्थितियों के बाद भी जब भी गुरुबा से मिलता तो यही कहता कि गुरुदेव आपकी कृपा से सब सही है और यकीनन इसके बाद मुझे और अच्छी नौकरी मिली, और अच्छा घर मिला और अगर विवाह भाग्य में होगा तो वो भी अच्छी जगह पर अच्छी व्यक्ति के साथ होगा । जब विवाह टूटा था तो मै भी टूटा था लेकिन गुरुदेव की एक ही आज्ञा थी, "अनुष्ठान करते जाओ बस" और वह करता गया । जैसे जैसे अनुष्ठान आगे बढ़ते है, वैसे वैसे अपेक्षा से अधिक प्राप्त होता है । विलंब होता है पर अपेक्षा से कई गुना अधिक प्राप्त हुआ है । संभावना है कि हमारे कार्मिक बंधनों की वजह से वर्तमान में हम जो चाहते है कि समस्या आंशिक स्तर पर भी समाप्त हो, वो ना हो पाए लेकिन फिर इस वजह से गुरु आज्ञा को छोड़कर या गुरु प्रदत्त मार्ग को छोड़कर कही और भटकना या चले जाना, परंपरा और गुरु का द्रोह ही है । अगर गुरु आज्ञा का पालन करते हुए भी अगर किसी और मार्ग पर चलोगे तो भी वह दो नाव में पैर रखकर यात्रा करने समान होगा, जिसमें अंततः आपको डूबना ही है।

कई बार ऐसा होता है कि जब हम किसी और की सहायता या मार्गदर्शन करते है, तब उनका कार्य होने लगता है, और हमें लगता है कि भगवती या ईश्वर हमे उस कार्य का माध्यम बना रहे है, किंतु वास्तव में वो हमारी ऊर्जा का ही अंश है, जो इस्तेमाल हो रहा है और हम उस व्यक्ति के कार्मिक बंधनों में बंधे जाते है । जब मैं किसी को सहाय करने या मार्गदर्शन करने हेतु गुरुदेव से अनुमति मांगता हूं तो बा हमेशा कहती है कि सामाजिक सद्भावना अच्छी बात है, लेकिन उसमें इतना भी नहीं उतरना चाहिए कि स्वयं या तो मार्ग से भटक जाए या फिर स्वयं का ही पतन हो जाए । तंत्र मार्ग में आनेवाले साधक कई लाखों करोड़ों मंत्र का जप करते है तब जा कुछ इतनी ऊर्जा मिलती है कि वो किसी की सहायता का माध्यम बन सके और तुम अभी से इस कार्य में लगोगे तो स्वयं की ऊर्जा को कैसे संभालोगे । पहले आत्मकल्याण कर लो, फिर लोक कल्याण करना । इसी वजह से दो बार पूछने पर भी गुरुदेव ने मुझे ना ही ज्योतिष का अभ्यास करने की अनुमति दी, और न ही उस कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने की । उनका अभी भी मेरे लिए एक ही आदेश है : "अनुष्ठान करते जाओ", और उसी का पालन हो रहा है ।

वरिष्ठ साधक हमेशा कहते है कि नूतन साधक, खासकर ऐसे जो प्रारंभिक और प्रथम स्तर के मध्य में होते है, उनके साधना काल में ऐसी घटनाएं स्वाभाविक रूप से होती है, जिसमें वो किसी की सहायता का माध्यम बनते है, उन्हें कुछ स्तर पर आर्थिक सहाय, यश एवं कीर्ति प्राप्त होती है, चाहे वो उनके लिए इच्छनीय हो या नहीं, लेकिन ये साधना से भटकनेवाला मार्ग है, इस लिए नूतन साधकों को चाहिए कि वो गुरु आज्ञा के अनुसार ही आगे बढ़े । भगवती जिसे सहाय करना चाहती है, उसे स्वयं कर ही लेती है । अगर कोई व्यक्ति किसी पीड़ा में या अवस्था में है तो वो अपने कार्मिक बंधनों की और भगवती की इच्छा की वजह से ही है, तो भगवती के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप न करना ही उचित रहता है, अन्यथा एक समय बाद वो स्थिति आ सकती है कि गुरु चाहते हुए भी सहाय न करे ।

हर हर महादेव नमश्चण्डिकायै श्रीमन्नारायण।

07/06/2026

अगर किसी स्त्री पुरुष को किसी प्रकार का कोई संकट हो तमाम प्रयास करने की समाधान ना हुआ एक बार अवश्य संवाद करें,, जो भी उपस्थित होगा आपको उत्तर अवश्य मिलेगा।

🛡️ || श्री महा-विपरीत-प्रत्यङ्गिरा स्तोत्र: तंत्र बाधा और शत्रुभय नाशक महाकवच || 🛡️सनातन संस्कृति और शाक्त परंपरा में श्...
07/06/2026

🛡️ || श्री महा-विपरीत-प्रत्यङ्गिरा स्तोत्र: तंत्र बाधा और शत्रुभय नाशक महाकवच || 🛡️

सनातन संस्कृति और शाक्त परंपरा में श्री महा-विपरीत-प्रत्यङ्गिरा स्तोत्र को शत्रुओं के दमन, तंत्र-मंत्र, अभिचार (किए-कराए) और घोर संकटों से मुक्ति पाने का सबसे अचूक और तीव्र अस्त्र माना गया है。 भगवान महेश्वर (शिव जी) द्वारा वर्णित यह दिव्य स्तोत्र महाकाली और विपरीत-प्रत्यङ्गिरा देवी की साक्षात् कृपा का पुंज है。

इस जाग्रत स्तोत्र की मूल बातें, विशेष प्रयोग विधि और इसकी अमोघ फलश्रुति इस प्रकार है:

🪔 || मूल स्तोत्र परिचय एवं मुख्य अंश || 🪔
🔱 आदि उद्घोष (पूर्व-पीठिका): भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि हे देवी! इस महाविद्या के विज्ञान मात्र से समस्त शत्रु वर्ग का लय हो जाता है। यह सर्वसिद्धि प्रदायिनी है।

🛡️ दसों दिशाओं की सुरक्षा: स्तोत्र के अनुसार, दसों द्वारों (दिशाओं) में दस महाशक्तियाँ रक्षा करती हैं—पूर्व में भुवनेशी, दक्षिण में कालिका, पश्चिम में नाक्षत्री (तारा), उत्तर में भैरवी, ईशान में प्रचण्ड-चण्डिका, आग्नेय में बगलामुखी, नैऋत्य में मतङ्गिनी, वायव्य में धूमावती, अधः-ऊर्ध्व में सुन्दरी और सम्मुख षोडशी देवी सदा जाग्रत रहती हैं।

🌌 महाप्रलयकारिणी शक्ति: यत्र-यत्र जहाँ भी विपरीत-प्रत्यङ्गिरा का वास होता है, वहाँ कालिका स्वयं प्रतिष्ठित हो जाती हैं। इनका केवल स्मरण करने मात्र से शत्रुओं की आयु और उनके कुटिल प्रयासों का तत्क्षण नाश हो जाता है。

🌾 || विशेष ज्ञातव्य: साधना व प्रयोग विधि || 🌾
यदि जीवन में घोर शत्रु बाधा, राज-भय, असाध्य रोग, या कोई ढोंगी तांत्रिक कृत्य (कृत्‍या-बाधा) से परेशान कर रहा हो, तो शास्त्रों के अनुसार यह स्तोत्र उसका अंतिम उत्तर है:
सफेद सरसों का प्रयोग: स्तोत्र के 'पूर्व-पीठिका' के २३ श्लोकों का पाठ करने के बाद, दस दाने सफेद या पीली सरसों (सिद्धार्थ/राई) के लेकर, उसे अपने गुरु-मंत्र से १०० बार अभिमंत्रित कर लें। इसके बाद उन दानों को दसों दिशाओं में (एक-एक दाना) फेंक दें।

पर-ब्रह्म-विद्या का जप: फल-श्रुति के अंत में दिए गए 'पर-ब्रह्म-विद्या' (बीज मंत्रों की श्रृंखला) का १० बार जप करना चाहिए। यह जप केवल प्रथम और अन्तिम पाठ के समय ही किया जाता है।

पाठ संख्या: प्रयोग की पूर्ण सिद्धि के लिए वैसे तो एक सहस्त्र (१०००) पाठ सर्वोत्तम हैं, परंतु सामान्य संकटों के निवारण हेतु १०० पाठ पर्याप्त माने गए हैं。

शिवा-बलि: इस साधना काल में नित्य 'शिवा-बलि' (कौल या पाशव-कल्प के अनुसार अनुकल्पों से) अवश्य देनी चाहिए।

💎 || महात्म्य एवं फलश्रुति || 💎
जो भी मनुष्य इस महाविद्या को सुनता या नित्य पढ़ता है, उसके शत्रुओं का तत्काल नाश होता है और अपनी रक्षा होती है।
इसके प्रभाव से साधक को उत्तम आयु, यश, बुद्धि, तेज और कुबेर के समान धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

यह स्तोत्र सभी प्रकार के भूत-ज्वर, मानसिक संताप और पर-विद्या (दूसरों के अभिचार कर्मों) को पूरी तरह निष्प्रभावी कर देता है。

⚠️ चेतावनी: स्तोत्र में स्पष्ट वर्णित है कि यह परम गुप्त महाविद्या किसी शठ (दुष्ट) या पर-शिष्य को कभी नहीं बतानी चाहिए, यह केवल भक्ति-युक्त कुलीन साधक को ही प्रदान की जाती है।
आप इस समय माँ विपरीत-प्रत्यङ्गिरा की इस परम जाग्रत और रहस्यात्मक पोस्ट को किस शहर से पढ़ रहे हैं? कमेंट्स में अपने शहर का नाम जरूर साझा करें।

समस्त तंत्र बाधाओं से मुक्ति और भगवती की असीम कृपा पाने के लिए कमेंट्स में श्रद्धापूर्वक 'जय माँ प्रत्यङ्गिरा' या 'हर हर महादेव' लिखना न भूलें! 👇🚩🪔✨

🕉️🚩🪔✨

22/05/2026

हर हर महादेव नमश्चण्डिकायै जय जय श्री काल भैरवाय नमः।

28/04/2026

Har har Mahadev...... ❣️❣️❣️❣️

17/04/2026

जादू टोना वशीकरण तंत्र मंत्र कैसा भी काम है, अवश्य संपर्क करें
Highlights

16/04/2026

हर हर महादेव नमश्चण्डिकायै श्रीमन्नारायण

06/04/2026

।। श्री मंगलचंडिकास्तोत्रम् ।।

मंगल चण्डिका स्तोत्र (ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित) का पाठ विशेषकर मंगलवार को करने से मांगलिक दोष, विवाह में बाधा, आर्थिक तंगी और गृह क्लेश से मुक्ति मिलती है। यह स्तोत्र नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर शत्रुओं पर विजय, संतान सुख, आरोग्य और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करने में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
मंगल चंडिका स्तोत्र के मुख्य लाभ:
विवाह बाधा निवारण: मांगलिक दोष के कारण विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए यह स्तोत्र बहुत फलदायी है।
आर्थिक समृद्धि और कर्ज मुक्ति: नियमित पाठ से धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
मंगल दोष की शांति: कुंडली में मंगल ग्रह के हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए इस स्तोत्र का पाठ उत्तम है।
गृह कलह का अंत: घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए इसे पढ़ा जाता है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा: यह स्तोत्र बीमारियों, दुर्घटनाओं और अमंगल से रक्षा करता है।
संतान सुख: ऐसी मान्यता है कि इसके पाठ से संतान प्राप्ति और सुख में वृद्धि होती है।

ध्यानम्-

“ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवी मङ्गलचण्डिके I
ऐं क्रूं फट् स्वाहेत्येवं चाप्येकविन्शाक्षरो मनुः II

पूज्यः कल्पतरुश्चैव भक्तानां सर्वकामदः I
दशलक्षजपेनैव मन्त्रसिद्धिर्भवेन्नृणाम् II

मन्त्रसिद्धिर्भवेद् यस्य स विष्णुः सर्वकामदः I
ध्यानं च श्रूयतां ब्रह्मन् वेदोक्तं सर्व सम्मतम् II

देवीं षोडशवर्षीयां शश्वत्सुस्थिरयौवनाम् I
सर्वरूपगुणाढ्यां च कोमलाङ्गीं मनोहराम् II

श्वेतचम्पकवर्णाभां चन्द्रकोटिसमप्रभाम् I
वन्हिशुद्धांशुकाधानां रत्नभूषणभूषिताम् II

बिभ्रतीं कबरीभारं मल्लिकामाल्यभूषितम् I
बिम्बोष्टिं सुदतीं शुद्धां शरत्पद्मनिभाननाम् II

ईषद्धास्यप्रसन्नास्यां सुनीलोल्पललोचनाम् I
जगद्धात्रीं च दात्रीं च सर्वेभ्यः सर्वसंपदाम् II
संसारसागरे घोरे पोतरुपां वरां भजे II

देव्याश्च ध्यानमित्येवं स्तवनं श्रूयतां मुने I
प्रयतः संकटग्रस्तो येन तुष्टाव शंकरः II

स्तोत्रम्-

शंकर उवाच -

रक्ष रक्ष जगन्मातशंकर र्देवि मङ्गलचण्डिके I
हारिके विपदां राशेर्हर्षमङ्गलकारिके II

हर्षमङ्गलदक्षे च हर्षमङ्गलचण्डिके I
शुभे मङ्गलदक्षे च शुभमङ्गलचण्डिके II

मङ्गले मङ्गलार्हे च सर्व मङ्गलमङ्गले I
सतां मन्गलदे देवि सर्वेषां मन्गलालये II

पूज्या मङ्गलवारे च मङ्गलाभीष्टदैवते I
पूज्ये मङ्गलभूपस्य मनुवंशस्य संततम् II

मङ्गलाधिष्टातृदेवि मङ्गलानां च मङ्गले I
संसार मङ्गलाधारे मोक्षमङ्गलदायिनि II

सारे च मङ्गलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम् I
प्रतिमङ्गलवारे च पूज्ये च मङ्गलप्रदे II

स्तोत्रेणानेन शम्भुश्च स्तुत्वा मङ्गलचण्डिकाम् I
प्रतिमङ्गलवारे च पूजां कृत्वा गतः शिवः II

देव्याश्च मङ्गलस्तोत्रं यः श्रुणोति समाहितः I
तन्मङ्गलं भवेच्छश्वन्न भवेत् तदमङ्गलम् II

इति श्री ब्रह्मवैवर्ते श्री मंगल चंडिका स्तोत्रम् संपूर्णम् ।।

Highlights fans कापालिक प्रेमलता अघोरी Swami Shri Ishwaranand Nath

Address

Unnao
209821

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Swami Shri Ishwaranand vishwanath Aagori posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share