Shahid Khadim

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Shahid Khadim ✍️ RTI: Writing for Justice & Public Interest Issues. Indian Waqf: Researching alleged property scams, irregular transfers & misuse of Waqf assets in West U.P.

Raising awareness against drug abuse and its impact on society. Founder, Free Khidmat Group

25/09/2026

एक मीटिंग में सहारनपुर से इमरान मसूद साहब और रामपुर से मोहिबुल्लाह नदवी साहब ने अपनी बातें रखीं। वहीं Harendra Malik सांसद हरेंद्र मलिक साहब ने खुल कर वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन और उनके इस्तेमाल को लेकर जो हाल हो रहा है उस पर अपनी राय अदब के साथ सामने रखी। सवाल यह है कि अगर एक गैर-मुस्लिम सांसद साहब इस गबन/घोटाले पर खुलकर बोल सकते है, तो क्या हमारी अपनी क़ौम के रहनुमा हज़रत साहब और ज़िम्मेदार अफ़राद इस अमानत की हिफ़ाज़त के लिए एक आवाज़ नहीं बन सकते?

Shahid Khadim✍️

जब उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री और मुज़फ्फरनगर सदर के विधायक Kapil Dev Aggarwalap श्री कपिल देव अग्रवाल जी का नाम ...
24/09/2026

जब उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री और मुज़फ्फरनगर सदर के विधायक Kapil Dev Aggarwalap श्री कपिल देव अग्रवाल जी का नाम लेकर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करने वाले व्यक्ति के खिलाफ की गई शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी पाने के लिए भी RTI और फिर First Appeal लगानी पड़े, तो यह सोचने वाली बात है कि आम नागरिकों की शिकायतों पर क्या स्थिति होती होगी।

दिनांक 17 अगस्त 2026 को मैंने उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों (कॉल रिकॉर्डिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट आदि) सहित संबंधित अधिकारियों को एक शिकायत भेजी थी। शिकायत का विषय अत्यंत गंभीर था माननीय विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री श्री कपिल देव अग्रवाल जी के नाम एवं पद का कथित दुरुपयोग कर लोगों का विश्वास प्राप्त करने तथा संभावित साइबर धोखाधड़ी का प्रयास।

यह ऐसा मामला था जिसमें एक जनप्रतिनिधि के नाम और पद का उपयोग कर आम नागरिकों एवं व्यापारियों का विश्वास हासिल करने का प्रयास किया गया। इसलिए मुझे स्वाभाविक रूप से उम्मीद थी कि मामले की जांच होगी और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराया जाएगा।
कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करने के लिए मैंने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत आवेदन किया, लेकिन 30 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो कोई सूचना उपलब्ध कराई गई और न ही कोई उत्तर दिया गया।
इसी कारण मुझे प्रथम अपील (First Appeal) दायर करनी पड़ी।

मेरा उद्देश्य किसी संस्था या अधिकारी की आलोचना करना नहीं है। मेरा केवल इतना विनम्र प्रश्न है कि जब एक ऐसे मामले में, जिसमें एक राज्य मंत्री के नाम एवं पद के कथित दुरुपयोग का विषय शामिल हो, कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करने के लिए भी RTI और First Appeal का सहारा लेना पड़े, तो पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को और अधिक गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।

उम्मीद है संबंधित अधिकारीगण Muzaffarnagar Police UP Police इस प्रकरण की समीक्षा करेंगे तथा शिकायत पर हुई जांच एवं कार्रवाई की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने का कष्ट करेंगे।
न्याय, पारदर्शिता और जनहित के लिए सूचना का अधिकार केवल एक कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि नागरिकों और प्रशासन के बीच विश्वास बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

Shahid Khadim ✍️

पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर मुज़फ्फरनगर सालों से नशे और अपराध की समस्या से जूझ रहा है। लेकिन सोचिए, अगर कोई व्यक्ति नशे ...
19/09/2026

पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर मुज़फ्फरनगर सालों से नशे और अपराध की समस्या से जूझ रहा है। लेकिन सोचिए, अगर कोई व्यक्ति नशे और अपराध के खिलाफ आवाज़ उठाए, शिकायत करे, सबूत दे और फिर उसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो जाए, तो वह कहाँ जाएगा?

मैं पिछले लगभग दो वर्षों से FIR संख्या 260/2024 से जुड़े मामले में न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा हूँ। RTI अभिलेखों के अनुसार एक ही परिवार के 8 सगे भाइयों पर हत्या, लूट, नशा तस्करी (NDPS) तथा अन्य गंभीर आपराधिक मामलों के कुल 43 मुकदमे दर्ज हैं, जो अपने आप में अत्यंत गंभीर विषय है। ऐसे गंभीर मामलों के बावजूद मेरी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई के बजाय मेरे विरुद्ध ही FIR संख्या 260/2024 दर्ज कर दी गई।

सच्चाई जानने और अभिलेखीय तथ्यों की पुष्टि के लिए मैंने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत तत्कालीन SHO श्री ओ.पी. सिंह एवं श्री रेशम पाल सिंह के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों, Preliminary Inquiry (PE) और विभागीय जांचों से संबंधित जानकारी मांगी थी। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि दोनों RTI आवेदनों में मांगी गई सूचना देने से इंकार कर दिया गया। इसके विरुद्ध मैंने अब दोनों मामलों में First Appeal (प्रथम अपील) दाखिल कर दी है।

यह भी बताना चाहता हूँ कि मेरी शिकायतों की जांच वर्तमान में ASP श्री सिद्धार्थ के. मिश्रा जी द्वारा की जा रही है। करीब दो साल बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि मेरी बात सुनी जा रही है। मुझे भी बुलाकर मेरा पक्ष सुना गया है और अब तक की कार्यवाही को देखकर उम्मीद है कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है तथा सच्चाई सामने आएगी।

माननीय MYogiAdityanath UP Police Muzaffarnagar Police एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से विनम्र निवेदन है कि प्रकरण का संज्ञान लें तथा यह सुनिश्चित करें कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का विधिसम्मत पालन हो और निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक अभिलेखीय तथ्यों को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक होने से न रोका जाए।

आज मैं अपनी दोनों RTI First Appeals सार्वजनिक कर रहा हूँ ताकि आप स्वयं पढ़ सकें कि मैंने कौन-सी जानकारी मांगी थी और उसे किस आधार पर रोका गया।
सच्चाई छिपाने से नहीं, सामने लाने से न्याय मजबूत होता है।












क्या कोई अस्पताल ऐसा भी हो सकता है जहाँ पहले ऑपरेशन हो और पेमेंट बाद में? (मरीज़ की छुट्टी के समय)क्या आज भी ऐसे डॉक्टर ...
12/09/2026

क्या कोई अस्पताल ऐसा भी हो सकता है जहाँ पहले ऑपरेशन हो और पेमेंट बाद में? (मरीज़ की छुट्टी के समय)

क्या आज भी ऐसे डॉक्टर मौजूद हैं जो अपने पेशे को सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और अमानत समझते हैं?

क्या कोई डॉक्टर ऐसा भी हो सकता है जिसकी बातों से मरीज और उसके परिवार को हिम्मत मिले?

आजकल सोशल मीडिया पर शिकायतें और कमियाँ बहुत लिखी जाती हैं, लेकिन कभी-कभी अच्छाइयों को भी रिकॉर्ड पर लाना चाहिए।

🏥 #मुज़फ्फरनगर की एक ऐसी डॉक्टर डॉ. रेखा सिंह साहिबा (सेवा मेडिकेयर, महावीर चौक) जिनके बारे में अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर कुछ बातें लिखना मुझे ज़रूरी लगा।

अल्हम्दुलिल्लाह! 08-Sep-2026 को हमारे तीसरे बेटे इस्माईल बिन शाहिद की पैदाइश हुई। मेरी तीनों औलादों की पैदाइश डॉ. रेखा सिंह साहिबा की निगरानी में हुई है।

वक़्त मिले तो यह अनुभव ज़रूर पढ़िए। अच्छी ख़बरें और अच्छे लोग भी रिकॉर्ड पर आने चाहिएं।👇 Royal Bulletin Dainik BhaskarDainik JagranAmar Ujala

✍️ Shahid Khadim

11/09/2026

एक अरसे के बाद फिर से सोशल मीडिया, ख़ास तौर पर फ़ेसबुक पर आने का इरादा किया है।

हक़ीक़त यह है कि मैं ज़ाती तौर पर सोशल मीडिया का क़ायल नहीं हूँ, और हमारे अकाबिर उलेमा-ए-हक़ भी बिला-ज़रूरत इसमें मशग़ूल रहने को पसंद नहीं फ़रमाते। अलबत्ता मौजूदा दौर के कुछ तक़ाज़ों और कुछ ज़रूरतों को सामने रखते हुए यह पेज बनाया गया है।

इंशाअल्लाह, जब भी वक़्त मिलेगा और किसी मुफ़ीद बात को पहुंचाने, किसी ज़रूरी मसअले की तरफ़ तवज्जोह दिलाने की ज़रूरत महसूस होगी, तो इस ज़रिए से भी आप हज़रात से मुख़ातिब होने की कोशिश करूँगा।

साथ ही मेरी आप सबसे गुज़ारिश है कि फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अपना क़ीमती वक़्त ज़ाया न करें। सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी एक अमानत और ज़िम्मेदारी है, और इसे चलाने के दीन के उसूल क्या हैं, इसकी रहनुमाई हमारे उलेमा-ए-किराम ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
अगर आप सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, तो इस बारे में अपने क़रीब के किसी संजीदा, मुत्तकी और दीनदार आलिम से ज़रूर मशवरा करें कि इसका सही और शरीअत के मुताबिक़ इस्तेमाल कैसे होना चाहिए।

हम सबको अपने वक़्त, निगाह और ज़िंदगी को सही जगह खर्च करने के लिए सोचना चाहिए।

Shahid Khadim ✍️

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