11/09/2026
एक अरसे के बाद फिर से सोशल मीडिया, ख़ास तौर पर फ़ेसबुक पर आने का इरादा किया है।
हक़ीक़त यह है कि मैं ज़ाती तौर पर सोशल मीडिया का क़ायल नहीं हूँ, और हमारे अकाबिर उलेमा-ए-हक़ भी बिला-ज़रूरत इसमें मशग़ूल रहने को पसंद नहीं फ़रमाते। अलबत्ता मौजूदा दौर के कुछ तक़ाज़ों और कुछ ज़रूरतों को सामने रखते हुए यह पेज बनाया गया है।
इंशाअल्लाह, जब भी वक़्त मिलेगा और किसी मुफ़ीद बात को पहुंचाने, किसी ज़रूरी मसअले की तरफ़ तवज्जोह दिलाने की ज़रूरत महसूस होगी, तो इस ज़रिए से भी आप हज़रात से मुख़ातिब होने की कोशिश करूँगा।
साथ ही मेरी आप सबसे गुज़ारिश है कि फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अपना क़ीमती वक़्त ज़ाया न करें। सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी एक अमानत और ज़िम्मेदारी है, और इसे चलाने के दीन के उसूल क्या हैं, इसकी रहनुमाई हमारे उलेमा-ए-किराम ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
अगर आप सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, तो इस बारे में अपने क़रीब के किसी संजीदा, मुत्तकी और दीनदार आलिम से ज़रूर मशवरा करें कि इसका सही और शरीअत के मुताबिक़ इस्तेमाल कैसे होना चाहिए।
हम सबको अपने वक़्त, निगाह और ज़िंदगी को सही जगह खर्च करने के लिए सोचना चाहिए।
Shahid Khadim ✍️