Shri Shri 1008 Dera Baba Rudranand Ji Maharaj Nari

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23/05/2026

🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏
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23/05/2026

गुरुदेव..! आपका मेरी जिंदगी में आना सच कहूँ तो जीने की नई वजह बन जाना पहले सिर्फ साँसें चल रही थी मुझमें बड़ा सुकून दे रहा है अब इन साँसों में आपका यूँ आना 🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏

सामवेद मन्त्रअग्ने त्वं नो अन्तम उतो सखा शिवो भुवः । वरूथ्यश्च राधसे ॥ (सामवेद, कौथुम संहिता 1.9)अद्भुत और विस्तृत हिंदी...
22/05/2026

सामवेद मन्त्र

अग्ने त्वं नो अन्तम उतो सखा शिवो भुवः । वरूथ्यश्च राधसे ॥ (सामवेद, कौथुम संहिता 1.9)

अद्भुत और विस्तृत हिंदी व्याख्या

यह मन्त्र ईश्वर (अग्नि स्वरूप परमेश्वर) और मनुष्य के बीच के सबसे सुंदर और अंतरंग रिश्ते को प्रकट करता है। जीवन में नई ऊर्जा भरने वाली इसकी विस्तृत व्याख्या इस प्रकार है:

ईश्वर हमारा सबसे निकटतम संबंधी है ('अन्तम'): मन्त्र की शुरुआत में कहा गया है कि हे परमात्मा! आप हमारे सबसे 'अन्तम' यानी सबसे पास रहने वाले हैं। संसार के रिश्ते समय और परिस्थिति के साथ दूर हो सकते हैं, लेकिन वह परम चेतना हमारे भीतर, हमारी हर साँस में बसी है। जब मनुष्य को यह अहसास हो जाता है कि उसका रक्षक उसके सबसे करीब है, तो जीवन का सारा अकेलापन और डर हमेशा के लिए मिट जाता है।

परमात्मा ही सच्चा मित्र है ('उतो सखा शिवो भुवः'): यहाँ ईश्वर को 'सखा' (मित्र) और 'शिव' (कल्याणकारी) कहा गया है। एक सच्चा मित्र वही है जो बिना किसी स्वार्थ के हमारा भला चाहे और हर संकट में साथ निभाए। जब हम ईश्वर को अपना सबसे प्रिय मित्र मान लेते हैं, तो हम अपनी हर चिंता, हर दुःख उनसे खुलकर कह सकते हैं। उनकी यह मित्रता हमारे जीवन में केवल और केवल मंगल (कल्याण) लेकर आती है।

असीमित ऐश्वर्य और सफलता की प्राप्ति ('राधसे'): 'राधसे' का अर्थ है—समृद्धि, आत्मिक धन और सफलता के लिए। यह मन्त्र हमें सिखाता है कि जब हम उस दिव्य शक्ति से जुड़ जाते हैं, तो हमारे भीतर का 'तेज' और 'आत्मविश्वास' जाग्रत हो जाता है। इसके प्रभाव से मनुष्य को समाज में मान-सम्मान, यश और हर कार्य में सिद्धि (सफलता) प्राप्त होती है। यह मन्त्र दरिद्रता और मानसिक कमजोरी को दूर भगाने वाला है।

सुरक्षा कवच ('वरूथ्यश्च'): 'वरूथ्यः' का अर्थ है उत्तम आश्रय या सुरक्षा देने वाला। जैसे एक पिता अपने बच्चे को हर मुसीबत से बचा लेता है, वैसे ही जो व्यक्ति इस मन्त्र के भाव में डूबकर गुरु और ईश्वर की शरण में रहता है, उसके चारों ओर एक ऐसा सकारात्मक सुरक्षा कवच बन जाता है जिसे दुनिया की कोई भी नकारात्मक ऊर्जा भेद नहीं सकती।

🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏

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22/05/2026

Thanks for being a top engager and making it on to my weekly engagement list! 🎉 Santosh Sharma, Ramesh Chandra Sharma, Pankaj Raj Sehdev, Shashi Kailash, Poonam Som Lath, Renu Bhardwaj, Jagat Ram, Naresh Sharma, Pavan Bains, S S Jaswal, Harish Sharma, Gurminder Maan, Ajay Rana, Rakesh Jyoti, Jashan Preet, Rajeev Rajeev, Kusham Bala, Babita Bakshi, Dolly Chandel, Suman Lata, Sham Sunder, Mohinder Guleria, Rana Satpal Singh, Ansh Sharma, Amarjeet Singh, Ramnesh Shridhar, Dilraj Singh Raja, Anjali Sharma, Thakur Rana Ji, Vipan Kumar, Vinod Sharma, Sudesh Kaushal, Asha Dhiman, Rattan Chadha, Sanjeev Rana, Inderjeet Vij, Ricky Vasudev, Usha Sharma, Suman Khanna, Narinder Choudhary, Renu Bala, Dilbagh Singh Bhogal, Sushil Kumar, Parminder Parashar, Dinesh Kumar Dinesh Kumar, Ramesh Kumar, Saroj Rana, Pardeep Sharma, Rakesh Kumar, Raj Kumar Sharma

22/05/2026

"संसार की हर मोहब्बत में कहीं न कहीं स्वार्थ छिपा होता है, लेकिन एक गुरु की भक्ति ही वह पावन धारा है जो बिना किसी शर्त के आत्मा को परमात्मा से जोड़ देती है।"
🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏

22/05/2026

"जीवन की हर उलझन तब सुलझ जाती है, जब बुद्धि चतुरता छोड़कर गुरु के चरणों में शरणागत हो जाती है। समर्पण में ही वह शक्ति है जो शिष्य को शून्य से अनंत तक ले जाती है। "✨🙏जय गुरुदेव! 🙏✨"

सामवेद के मन्त्रों का गायन देवताओं को प्रसन्न करने और मन को शांति प्रदान करने के लिए किया जाता है। यहाँ सामवेद का एक बेह...
21/05/2026

सामवेद के मन्त्रों का गायन देवताओं को प्रसन्न करने और मन को शांति प्रदान करने के लिए किया जाता है। यहाँ सामवेद का एक बेहद प्रभावशाली और सुंदर मन्त्र, उसका अर्थ और विस्तृत व्याख्या दी गई है:

सामवेद मन्त्र

ॐ अग्न आयाहि वीतये गृणानो हव्यदातये। नि होता सत्सि बर्हिषि॥ (सामवेद — कौथुम संहिता, प्रपाठक १, अर्चिक १, मन्त्र १)

मन्त्र का सरल अर्थ

हे प्रकाशस्वरूप, सर्वव्यापक परमेश्वर (अग्नि)! आप हमारी प्रार्थनाओं और शुद्ध भावनाओं को स्वीकार करने के लिए हमारे हृदय रूपी आसन पर विराजमान होइए, ताकि हम शुभ कर्मों की आहुति आपको समर्पित कर सकें।

यह सामवेद का प्रथम मन्त्र है, जिसे बहुत ही पवित्र और ऊर्जावान माना जाता है। इस मन्त्र के गहरे आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ हैं:

अग्नि का आध्यात्मिक स्वरूप: यहाँ 'अग्नि' का तात्पर्य केवल भौतिक आग से नहीं है, बल्कि उस परम चेतना, ज्ञान और ईश्वर से है जो पूरे ब्रह्मांड में प्रकाश के रूप में व्याप्त है। जैसे अग्नि अंधकार को मिटाती है, वैसे ही ईश्वर मनुष्य के भीतर के अज्ञान को नष्ट करते हैं।

हृदय में आमंत्रण: मन्त्र में प्रार्थना की गई है कि प्रभु हमारे 'बर्हिषि' (कुशा के आसन या पवित्र हृदय) पर आकर बैठें। इसका अर्थ है कि जब तक हमारा मन और हृदय पवित्र नहीं होगा, तब तक दिव्य शक्तियाँ या सकारात्मक विचार हमारे भीतर वास नहीं कर सकते।

शुभ कर्मों का समर्पण (हव्यदातये): यज्ञ में दी जाने वाली आहुति को 'हव्य' कहते हैं। जीवन के संदर्भ में, हमारे अच्छे कर्म, परोपकार, मधुर वाणी और निस्वार्थ सेवा ही हमारी आहुतियाँ हैं। इस मन्त्र के माध्यम से हम ईश्वर से शक्ति मांगते हैं कि हम अपने जीवन को एक पवित्र यज्ञ बना सकें और अपने हर अच्छे कार्य को भगवान को समर्पित कर सकें।

मानसिक शांति और ऊर्जा: सामवेद के मन्त्रों का मुख्य उद्देश्य आंतरिक संगीत और शांति को जगाना है। जब इस मन्त्र का उच्चारण या ध्यान किया जाता है, तो यह हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और मानसिक तनाव को दूर कर एकाग्रता बढ़ाता है।

🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏

21/05/2026

तुम हो ना प्रेम लुटाने के लिए फिर दुनिया नफरत भी करे तो फर्क नहीं पड़ता गुरुदेव के चरणों में आकर थम जाती है दुनिया मेरी फिर कोई मुझसे रूठे या जुदा हो, फर्क नहीं पड़ता
🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏

20/05/2026

🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏
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20/05/2026

गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान, गुरु बिन सब निस्फल गया,, पुछौ वेद पुरान,
🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏

सामवेद मन्त्रउदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः । दृशे विश्वाय सूर्यम् ॥ (सामवेद, कौथुम संहिता 1.31)व्यावहारिक व्याख्या...
19/05/2026

सामवेद मन्त्र

उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः । दृशे विश्वाय सूर्यम् ॥ (सामवेद, कौथुम संहिता 1.31)

व्यावहारिक व्याख्या

यह मन्त्र केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का एक अचूक ब्रह्मांडीय नियम है।

भीतर के 'सूर्य' का उदय : इस मन्त्र में सूर्य देव की स्तुति की गई है। दार्शनिक दृष्टि से सूर्य केवल आकाश में चमकने वाला पिंड नहीं, बल्कि हमारी 'बुद्धि', 'तेज' और 'सकारात्मकता' का प्रतीक है। मन्त्र कहता है कि जैसे सुबह सूर्य की किरणें (केतवः) पूरी दुनिया को यह बताती हैं कि प्रकाश आ गया है, ठीक वैसे ही जब मनुष्य के भीतर ज्ञान और सही सोच का उदय होता है, तो उसका पूरा जीवन चमक उठता है।

नकारात्मकता और डिप्रेशन का समूल नाश: सूर्य की किरणें आते ही जैसे संसार का अंधकार, कीड़े-मकोड़े और संक्रामक बीमारियाँ नष्ट हो जाती हैं, वैसे ही इस मन्त्र का मानसिक प्रभाव हमारे भीतर के डर, आलस्य, नकारात्मक विचारों और मानसिक तनाव को जड़ से मिटा देता है। यह मन्त्र निराश मन में एक नई उम्मीद और ऊर्जा का संचार करता है।

सफलता और प्रगति का मार्ग ('दृशे विश्वाय'): 'दृशे विश्वाय सूर्यम्' का अर्थ है कि सूर्य को पूरी दुनिया देखती है। इसका गहरा व्यावहारिक अर्थ यह है कि जब आप सही दिशा में पुरुषार्थ करते हैं और ईश्वर की कृपा आपके साथ होती है, तो आपकी योग्यता और आपका काम पूरी दुनिया के सामने चमकता है। यह मन्त्र मनुष्य को गुमनामी के अंधेरे से निकालकर समाज में मान-सम्मान और एक नई पहचान दिलाता है।

कर्म और चेतना का संतुलन: 'जातवेदसं' का अर्थ है जो सब कुछ जानता है। वह दिव्य शक्ति हमारे हर कर्म को देख रही है। यह मन्त्र हमें यह सीख देता है कि हम अपने कर्मों को इतना पवित्र और पारदर्शी रखें कि हमारा जीवन भी सूर्य की तरह निष्कलंक और परोपकारी बन जाए।

🙏🙏जय जय गुरुदेव🙏🙏

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