Satguru Swami Ishar das ji de vachan

Satguru Swami Ishar das ji de vachan बाणी प्रचार श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रं?

जै गुरू देव जी सारी संगत नूसंता दे सबरूप नू पहचानो हर संत दी विचारतारा इक हूंदी है गुरु रविदास जी पूरे गुरु संत होए है ज...
03/07/2021

जै गुरू देव जी सारी संगत नू
संता दे सबरूप नू पहचानो हर संत दी विचारतारा इक हूंदी है
गुरु रविदास जी पूरे गुरु संत होए है जिना ने परमार्थी रस्ता सानु दस्या है लेकिन कुश लोग गुरु रविदास जी नू कुश होर ही समझ लैंदे है जैसे गुरु रविदास जी पर फिल्म बनी है जो बिल्कुल गलत है यूट्यूब पर डाली हुई है जिसमे काफी कुश गलत दिखाया हुआ है हमे सिर्फ बाणी में ही गुरु रविदास जी के बारे में सही जानकारी मिल सकती है
गुरु रविदास जी दी बाणी नाल जूडो असल ज्ञान दे बारे पता लगेगा
🙏🙏🙏🙏🙏⭐

Jai guru dev ji
25/06/2021

Jai guru dev ji

गाथा छंद _ 6                                                                                                            ...
17/05/2021

गाथा छंद _ 6
आत्मा अनंद अनंद लियो | परमानंद से मिल रिहो |9| तास ब्रह्म की हम रीणां | भने रविदास भए ऐते लखीणा |10| ब्रह्म देश की सूझत पाई | साध संगत पुनः कथा सुनाई |11| छिन में जाए छिन में आए | सो पंडित उपदेश सुनाए |12|
भावार्थ
गुरू रूप गुरू प्यारी साध संगत जी सतगुरू रविदास महाराज जी फरमान करते हैं कि दसवें द्वार का अमृत पी कर रूह आत्मा आदि पुरूख परमेश्वर के नाम का आनंद लेती है और सदा के लिए आदि पुरूख परमेश्वर के परमानंद में मिल जाती है | ऐसे ब्रह्म को प्राप्त करने वाले के चरणों की हम धूड़ हैं | सतगुरू रविदास महाराज जी कहते हैं कि सभी ग्रंथ शास्त्रों में ऐसा लिखा गया है | ब्रह्म देश की समझ आ जाती है और आदि पुरूख परमेश्वर के नाम की वहाँ की कथा वापिस आ कर समूह साध संगत को वो रूह आत्मा पुनः सुनाती है | वो रूह आत्मा एक छिन में ईश्वर द्वार जाती और एक छिन में वापिस आती है | ऐसे ब्रह्म को प्राप्त करने वाला विद्वान है और वो ही विद्वान उपदेश कर आदि पुरूख परमेश्वर की कथा करता है | तो साथ संगत जी शब्द बीज मंत्र के अभ्यास के बिना हम आदि पुरूख परमेश्वर का ब्रह्म देश प्राप्त नहीं कर सकते | पूर्ण गुरू धारण कर शब्द की कमाई करो जी समूह साध संगत जी को जय गुरू देव जी |
दास _ राममूर्ती

🌻🚩 वाणी _ श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रंथ साहिब जी _ अंग _ 146 🚩🌻                 श्लोक _ 10 इंद मत मध दृढ़ भया शूद्र नर और ब...
16/05/2021

🌻🚩 वाणी _ श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रंथ साहिब जी _ अंग _ 146 🚩🌻
श्लोक _ 10
इंद मत मध दृढ़ भया शूद्र नर और बाम | रविदास संत मत में मुक्त हेत भज आम |5| ब्राह्मण धर्म भ्रष्ट भये शूद्र छोह जे जाए | द्रम उरधे ब्राह्मण भ्रष्ट शूद्र ढक लगाए |6| शामल नारी शूद्रां ब्राह्मण व्याह लियाए | स्पर्श विंजन कर खावतो धर्म क्या रह जाए |7| द्विज जंजू सूत्र, क्षत्री रण गाडर उन वैशे | जागयो पनि बाझ है सोई शूद्र कहेसे |8|
भावार्थ
गुरू रूप गुरू प्यारी साध संगत जी सतगुरू रविदास महाराज पिता परमेश्वर फरमान करते हैं कि इतने जुल्म होने के बावजूद भी जबरदस्ती सौंपे गये शूद्र वर्ण में चन्द्रमा की चांदनी के ठंडे स्वभाव की तरह इतना पक्का हो गया कि नर और नारी जुल्म सहन करते लेकिन बोलते नहीं | सतगुरू रविदास महाराज जी कहते हैं कि संत मत में सभी मुक्त होते हैं अगर कोई आद पुरूख परमेश्वर ईश्वर से प्यार करता है | जात पात वर्ण अवर्ण का इतना प्रभाव था कि अगर शूद्र किसी बाह्मण से स्पर्ष भाव साथ लग जाता था तो ये कहते थे कि ब्राह्मण धर्म भ्रष्ट हो गया | अगर कोई शूद्र बृक्ष के उपर चढ़ जाता तो भी ये कहते थे कि ब्राह्मण भ्रष्ट हो गया | नरां से छुआछूत करते लेकिन शूद्र नारी से छुआछूत नहीं करते | तो सतगुरू महाराज कहते हैं कि साँवले रंग की शूद्र नारी से शादी कर ये ब्राह्मण अपने घर ले कर आते हैं और उस के हाथों का बना खाना खा लेते हैं तो उस वक्त इन का धर्म कहां जाता था | सतगुरू रविदास महाराज जी समझा रहे हैं कि ये लोग कहते थे कि ब्राह्मण सुत्र का जंजू पहन कर बनता, क्षत्री रण में बनता और वैश भेड़ बकरियों का व्यापार कर बनता | जूते बनाने वाला जागृति के बिना जो होता उसे शूद्र कहते | तो साध संगत जी ऐसी दीवारें इंसान के बीच खड़ी कर दी कि आद पुरूख परमेश्वर के नियमों को चौपट कर दिया | आगे श्लोक में सतगुरू महाराज हमें इन की परिभाषा समझाएंगे | साध संगत जी आद पुरूख परमेश्वर की वाणी से मिल कर भक्ति कर हम ऊंची पदवी हासिल कर सकते हैं | सतगुरू रविदास महाराज जी के चरणों में आ कर शब्द बीज मंत्र प्राप्त करो जी | शब्द बीज मंत्र का अभ्यास कर अपना जीवन सफल करो जी | समूह साध संगत जी को जय गुरू देव जी |
दास _ राममूर्ती

🌻🚩 वाणी _ श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रंथ साहिब जी _ अंग _ 105 🚩🌻आद प्रसंग     __ तित्थ बार का              शब्द जिला _ 1जग ब...
28/01/2021

🌻🚩 वाणी _ श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रंथ साहिब जी _ अंग _ 105 🚩🌻
आद प्रसंग __ तित्थ बार का
शब्द जिला _ 1
जग बिच सुन मन तूं हर नाम समान ना कोई | रिद्धियां सिद्धियां गन करामात यंत्र मंत्र जोई |1| गंदे राग जो कूड़ तमाशे देख देख खुश होई |2| पाधे रमलिया प्रश्न लुआवे भ्रम के कांटे लगोई |3| रविदास सच चित नंद सच है तिस नाम दाग ना धोई |4|
भावार्थ
गुरू रूप गुरू प्यारी साध संगत जी सतगुरू रविदास महाराज जी फ़रमान करते हैं कि हे मन ध्यान से सुन इस संसार में ईश्वर के नाम के बराबर कोई नहीं है | जितनी भी रिद्धि सिद्धि हैं जितनी भी और शक्तियां या यंत्र मंत्र तंत्र हैं ईश्वर के बराबर नहीं हो सकते | ईश्वर का नाम ही सब से बड़ा है | गंदे राग गाने और जो भी कूड़ तमाशे देख कर तूं खुश होता है लेकिन ईश्वर नाम याद नहीं करता | पंडितों के पास जा कर प्रश्न लगवाते हैं और प्रश्न लगवाने में मग्न रहता है ये सब भ्रम के कांटे लगाते हैं | ईश्वर के नाम बिना भ्रम कभी भी दूर नहीं हो सकता | सतगुरू रविदास महाराज जी कहते हैं कि जिस सचे दिल में सच्चा वो ईश्वर का नाम है वो ईश्वर के नाम शब्द से ये सब भ्रम के दाग भाव धब्बे धो देता है | तो साध संगत जी एक ईश्वर का नाम ही हमारे जीवन के सब कांटे खत्म कर सकता है | नहीं तो मन भटकाता ही रहेगा | अपना समय बर्बाद ना करते हुए गुरू धारणा करके शब्द बीज मंत्र ले कर जीवन सफल करो जी | समूह साध संगत जी को जय गुरू देव जी |

29/12/2020

🌻 वाणी _ श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रंथ साहिब जी _ अंग _ 76
चौपई _ 4
जिऊं कर भांजन कांसे टकेरे | अनक आवाज़ निकसह चुफेरे |1| अनक आवाज़ ते पुनः इक होईए | आसते आसते जाए समोईए |2| जहां ते निकसी तहां जा समाई | तिऊं कर शब्द की धुन पुनः आई |3| बालमीक लिव शब्द में लावो | जोती जोत मैं जाए समावो |4|
भावार्थ
गुरू रूप गुरू प्यारी साध संगत जी सतगुरू बालमीक महाराज जी फ़रमान करते हैं कि जिस तरह कांसे के बर्तन आपस में टक्करा जाते हैं तो उन में से अनेक तरह की आवाज़ निकलती है वो आवाज़ चारों तरफ फैल जाती है | वो अनेक आवाजें फिर एक आवाज़ में आ जाती हैं और धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं | यहां से वो आवाज़ निकलती है बहीं मिल जाती है | इसी तरह शब्द की धुन भाव आवाज़ है | एक शब्द से निकलती हैं और फिर उसी में मिल कर एक हो जाती हैं | सतगुरू बालमीक महाराज जी कहते हैं कि नाम शब्द में लग्न लगाओ और ईश्वर की ज्योति में मिल जाओ | शब्द एक ही है उस की आवाज़ अनेक हैं | अनेक आवाज़ से ना मिलते हुए एक शब्द में ध्यान लगाओ जी फिर मोक्ष प्राप्त होगा | साध संगत जी जो भी हम अपनी आंखों से देखते हैं ये सब शब्द से ही बना है | कुल सृष्टि ही शब्द से बनी है | उसी शब्द का जहाज श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रंथ साहिब जी ले कर स्वामी ईशर दास महाराज जी मातलोक में आए हैं | सतगुरू रविदास महाराज जी ने अपरंपार कृपा की है | हम सब को शब्द से जोड़ा है | जिस के जाप करने से हम यहां से आए हैं वहीं पहुंच जाएंगे | सत्संग सुनो जी और शब्द बीज मंत्र की कमाई करो जी | समूह साध संगत जी को जय गुरू देव जी |

27/12/2020

वाणी _ श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रंथ साहिब जी _ अंग _ 57
शब्द पीलो _ 13
जी सुन मन मुख में चोग रही | भूम जाल तिस चोगी पसरिया , खग के उर पई |1| गन बिहंगम चोग को आनी , बधक जाल आई |2| इक खिन माहें गल को कटिया, आह ले सखणे रही |3| रविदास भने तिऊं तूं नर जानी , मीच फास सही |4|
भावार्थ
गुरू रूप गुरू प्यारी साध संगत सतगुरू रविदास महाराज जी फ़रमान करते हैं कि हे मन ध्यान से सुन शिकारी धरती पर जाल लगा कर दाना डाल देता है | दाने की चोग को खाते ही शिकारी पंछियो को मार देता है | और चोग मुँह में ही रह जाती है | हे प्राणी तूं मन के पीछे लग कर संसारिक काल के बनाए स्वाद में फंसा है जब काल रूपी शिकारी मौत रूपी बाण मारेगा तो मुँह का ग्रास मुंह में ही रह जाएगा | समूह पंछी चोग के लालच में शिकारी के जाल में आ जाते हैं | और शिकारी एक छिन में गर्दन काट देता है तो वो हर तरफ से खाली रह जाते हैं | उन का सब कुछ खत्म हो जाता है | सतगुरू रविदास महाराज जी कहते हैं कि हे प्राणी इसी तरह तूं भी जान ले मौत की फांसी सत्य है | काल के संसारिक स्वाद को छोड़ दे | पांच विकार में फंस कर तूं सब कुछ भूल गया | ये सब काल का पसारा है |जब काल रूपी शिकारी मौत देगा तो तेरा सब कुछ खत्म हो जाएगा | काल रूपी शिकारी से बचने के लिए संत महापुरुषों की शरण के अलावा और कोई जगह नहीं है | तो साध संगत जी समय निकलता जा रहा है | देर किए बिना गुरू धारणा कर ईश्वर नाम से जुड़ो जी | फिर काल शैतान शिकारी से बच जाएंगे और यम का डर नहीं रहेगा | गुरू ईश्वर सिमरन करो जी | समूह साध संगत जी को जय गुरू देव जी |
दास राम मूर्ति

20/12/2020

वाणी _ श्री गुरू आदि प्रगाश ग्रंथ साहिब जी _ अंग _ 71
शब्द आसा _ 10
उठ जाग मना तूं जागदा ना तेरा मौत सिरहाना मलियाई | तूं घूक सुत्ता ना जागदा जो | तैनूं पता ना लगदा बैराग दा जो | मोह ममता दे विच भुलियाई |1| हत्थ तुला ना लैंदा नाम दा तूं | कंचन वरगी देही गुआंमदा तूं | फिर सखणा जग तों चलियाई |2| तन पालिया नाल एह चूरीयांए | तेरी होईयां आसा ना पूरीयांए | तन खाक अंत नूं रुलियाई |3| बालमीक उघाड़ तूं अख बंदे | गुर मूर्ती रख प्रतख बंदे | तैनूं इसेई कम नूं घलियाई |4|
भावार्थ
गुरू रूप गुरू प्यारी साध संगत जी सतगुरू बालमीक महाराज जी फरमान करते हैं कि हे मन तूं जागता क्यों नहीं है | मौत ने तेरे सिरहाने पर कब्जा कर लिया है | तूं गहरी नींद में सोया है जागता क्यों नहीं | हे मन तेरे को गुरू के बैराग का पता नहीं चलता | मोह ममता की नींद में तूं सब कुछ भूल चुका है | गुरू के बिना कोई मार्ग नहीं दर्शाएगा | हे मन ईश्वर के नाम का तरायू तूं हाथ में क्यों नहीं पकड़ता | सोने जैसे शरीर को तूं बेअर्थ ही गवा रहा है | फिर इस संसार से खाली ही चला जाएगा | ईश्वर के द्वार आश्रय नहीं मिलेगा | इस शरीर को घी शक्कर मिली रोटी से पालता है पर हे मन तेरी इच्छाएं पूरी नहीं हुई | अंत में जा कर ये तन मिट्टी में मिल जाएगा | सतगुरू बालमीक महाराज जी कहते हैं कि हे प्राणी अपनी आंख को खोल और गुरू की शक्ल अपनी आंखों में अच्छी तरह धारण कर | इसी काम के लिए तेरे को ईश्वर ने मातलोक में भेजा है | साध संगत जी अपने जीवन के बारे में जरूर सोच विचार करना चाहिए | मोह जाल की नींद से जाग कर संत महापुरूषों की संगत करो जी | दुनियावी काम कभी खत्म नहीं होंगे | अपने समय से समय निकाल कर सत्संग ग्रहण करके इस मानष शरीर को सफल करो जी | फिर ये अवसर नहीं मिलेगा | मिलेगा तो ईश्वर की कृपा से | फिर भी गुरू के बिना छुटकारा नहीं होगा | गुरू धारणा करो जी | शब्द बीज मंत्र की कमाई करो जी | समुह साध संगत जी को जय गुरू देव जी |

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