श्री बड़े गणेश मंदिर, उज्जैन

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श्री बड़े गणेश मंदिर, उज्जैन Bada Ganesh Temple is a Ganpati Temple situated in Ujjain, near to one of the famous jyotirlingas "Shree Mahakaal".

The Bade Ganesh Temple is situated on the Har siddhi road, near the Mahakaleshwar Temple (one of the 12 jyotirlingas of Lord Shiva) in the holy city Ujjain. Bade Ganesh Temple enshrines a large idol of Lord Ganesh accompanied on both sides by his consorts Riddhi and Siddhi alongwith other deities such as Panchmukhi Hanuman and Bal Gopal.

23/09/2024

शरद नवरात्रि के दौरान उज्जैन में किसी भी प्रकार का पूजन करने की योजना बना रहे हैं। आप अपनी आवश्यकताओं के लिए इस पृष्ठ पर हमसे संपर्क कर सकते हैं।

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19/09/2024

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क्षिप्रा नदी उज्जैन पर काल सर्प दोष की पूजा करते हुए।  उज्जैन में कोई भी पूजन करवाने के लिए हमें  संपर्क करे ।  #
19/12/2022

क्षिप्रा नदी उज्जैन पर काल सर्प दोष की पूजा करते हुए। उज्जैन में कोई भी पूजन करवाने के लिए हमें संपर्क करे ।

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03/08/2022

नमस्ते, सावन के इस पावन मास में बाबा महांकाल और श्री गजानन महाराज आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करे। जय श्री महांकाल।।
उज्जैन में किसी भी प्रकार की पूजा या जप के लिए इस नंबर पर संपर्क करे: 9347480598

सभी भक्त जन को नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाय।  बाबा महांकाल एवं नागचंद्रेश्वर आपकी रक्षा करे एवं आपको स्वस्थ एवं समृद्ध ...
01/08/2022

सभी भक्त जन को नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाय। बाबा महांकाल एवं नागचंद्रेश्वर आपकी रक्षा करे एवं आपको स्वस्थ एवं समृद्ध रखे।।

हर घर यह कहता हे, की इसमें कोन रहता हे।  और हमारे घर का वास्तु शास्त्र ये कहता हे की इस घर में रहने वाला कैसे रहता हे।  ...
08/03/2022

हर घर यह कहता हे, की इसमें कोन रहता हे। और हमारे घर का वास्तु शास्त्र ये कहता हे की इस घर में रहने वाला कैसे रहता हे। वास्तुशास्त्र घर को बनाने और सजाने को वो विज्ञानं हे जो न केवल घर में सही ऊर्जा प्रदान करता हए, बल्कि घर में रहने वालो की ऊर्जा को बढ़ाता भी हे।

किस दिशा में क्या रखना उचित हे, ये बहुत ही महत्वपूर्ण बाते हे जो घर को बनाते समय हमे ध्यान राखी चाहिए। हालाँकि हर घर वास्तु की दृष्टि से १००% नहीं होता, पर हम काफी नियमो को अपना कर घर को बेहतर बना सकते हे।

अगर आप भी अपना नया घर बनाने वाले हे तो हमे संपर्क करे और हमारे ४० साल से भी ज़्यादा वस्तुज्ञान से अपना घर सही तरीके से बनवा सकते हे ।


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श्री  #महांकालेश्वर की नगरी  #उज्जैन में किसी भी प्रकार की  #पूजा या  #अनुष्ठान के लिए हमे संपर्क करें| हमारे द्वारा निम...
08/03/2022

श्री #महांकालेश्वर की नगरी #उज्जैन में किसी भी प्रकार की #पूजा या #अनुष्ठान के लिए हमे संपर्क करें|

हमारे द्वारा निम्नलिखित अनुष्ठान किए जाते हैं:
• #महामृत्युंजय जप
• #रुद्रभिषेक
• #कालसर्पयोग पूजा
• #पितृशांति पूजा
• #भातपूजा
• #मंगलदोष निवारण पूजा
• #सुखपिंडी
• #नोग्रहशांति पूजा

श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉  🌄सुप्रभातम🌄🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓🌻मंगलवार, ८ मार्च २०२२🌻सूर्योदय: 🌄 ०६:४१सूर्यास्त: 🌅 ०६:२०चन्द्रोदय:...
08/03/2022

श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉
🌄सुप्रभातम🌄
🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓
🌻मंगलवार, ८ मार्च २०२२🌻

सूर्योदय: 🌄 ०६:४१
सूर्यास्त: 🌅 ०६:२०
चन्द्रोदय: 🌝 ०९:५१
चन्द्रास्त: 🌜२३:५२
अयन 🌕 उत्तरायने (दक्षिणगोलीय
ऋतु: 🌿 बसंत
शक सम्वत: 👉 १९४३ (प्लव)
विक्रम सम्वत: 👉 २०७८ (आनंद)
मास 👉 फाल्गुन
पक्ष 👉 शुक्ल
तिथि 👉 षष्ठी (२४:३१ तक)
नक्षत्र 👉 कृत्तिका (पूर्ण रात्रि)
योग 👉 वैधृति (२४:२८ तक)
प्रथम करण 👉 कौलव (११:२७ तक)
द्वितीय करण 👉 तैतिल (२४:३१ तक)
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॥ गोचर ग्रहा: ॥
🌖🌗🌖🌗
सूर्य 🌟 कुम्भ
चंद्र 🌟 वृष (१२:३० से)
मंगल 🌟 मकर (उदित, पश्चिम, मार्गी)
बुध 🌟 कुम्भ (अस्त, पश्चिम, मार्गी)
गुरु 🌟 कुंम्भ (अस्त, पश्चिम , मार्गी)
शुक्र 🌟 मकर (उदित, पूर्व, वक्री)
शनि 🌟 मकर (उदित, पूर्व, मार्गी)
राहु 🌟 वृष
केतु 🌟 वृश्चिक
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शुभाशुभ मुहूर्त विचार
⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳
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अभिजित मुहूर्त 👉 १२:०४ से १२:५१
अमृत काल 👉 ०७:३८ बजे से
त्रिपुष्कर योग 👉 २४:३१ से ३०:३४
सर्वार्थसिद्धि योग 👉 पूरे दिन
रवियोग 👉 पूरे दिन
विजय मुहूर्त 👉 १४:२५ से १५:१२
गोधूलि मुहूर्त 👉 १८:०९ से १८:३३
निशिता मुहूर्त 👉 २४:०३ से २४:५२
राहुकाल 👉 १५:२४ से १६:५२
राहुवास 👉 पश्चिम
यमगण्ड 👉 ०९:३२ से ११:००
होमाहुति 👉 बुध
दिशाशूल 👉 उत्तर
अग्निवास 👉 पाताल (२४:३१ से पृथ्वी)
चन्द्रवास 👉 पूर्व (दक्षिण १२:३१ से)
शिववास 👉 नन्दी पर (२४:३१ से भोजन में)
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☄चौघड़िया विचार☄
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॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ - रोग २ - उद्वेग
३ - चर ४ - लाभ
५ - अमृत ६ - काल
७ - शुभ ८ - रोग
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ - काल २ - लाभ
३ - उद्वेग ४ - शुभ
५ - अमृत ६ - चर
७ - रोग ८ - काल
नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
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शुभ यात्रा दिशा
🚌🚈🚗⛵🛫
दक्षिण-पूर्व (धनिया अथवा दलिया का सेवन कर यात्रा करें)
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तिथि विशेष
🗓📆🗓📆
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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण
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आज ३०:४३ तक जन्मे शिशुओ का नाम
कृतिका नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमश (अ, ई, उ, ए) नामाक्षर से रखना शास्त्रसम्मत है।
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उदय-लग्न मुहूर्त
कुम्भ - २९:३१ से ०६:५७
मीन - ०६:५७ से ०८:२०
मेष - ०८:२० से ०९:५४
वृषभ - ०९:५४ से ११:४९
मिथुन - ११:४९ से १४:०४
कर्क - १४:०४ से १६:२५
सिंह - १६:२५ से १८:४४
कन्या - १८:४४ से २१:०२
तुला - २१:०२ से २३:२३
वृश्चिक - २३:२३ से २५:४२
धनु - २५:४२ से २७:४६
मकर - २७:४६ से २९:२७
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पञ्चक रहित मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - ०६:३५ से ०६:५७
चोर पञ्चक - ०६:५७ से ०८:२०
रज पञ्चक - ०८:२० से ०९:५४
शुभ मुहूर्त - ०९:५४ से ११:४९
चोर पञ्चक - ११:४९ से १४:०४
शुभ मुहूर्त - १४:०४ से १६:२५
रोग पञ्चक - १६:२५ से १८:४४
शुभ मुहूर्त - १८:४४ से २१:०२
मृत्यु पञ्चक - २१:०२ से २३:२३
अग्नि पञ्चक - २३:२३ से २४:३१
शुभ मुहूर्त - २४:३१ से २५:४२
रज पञ्चक - २५:४२ से २७:४६
शुभ मुहूर्त - २७:४६ से २९:२७
चोर पञ्चक - २९:२७ से ३०:३४

30/12/2021

[30/12, 10:24] पंडित भय्यू महाराज। 🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉
🌄सुप्रभातम🌄
🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓
🌻गुरुवार, ३० दिसम्बर २०२१🌻

सूर्योदय: 🌄 ०७:१२
सूर्यास्त: 🌅 ०५:२८
चन्द्रोदय: 🌝 २८:१८
चन्द्रास्त: 🌜१४:१६
अयन 🌕 उत्तरायने (दक्षिणगोलीय
ऋतु: 🌫️ शिशिर
शक सम्वत: 👉 १९४३ (प्लव)
विक्रम सम्वत: 👉 २०७८ (आनन्द)
मास 👉 पौष
पक्ष 👉 कृष्ण
तिथि 👉 एकादशी (१३:४० तक)
नक्षत्र 👉 विशाखा (२४:३४ तक)
योग 👉 धृति (२१:५० तक)
प्रथम करण 👉 बालव (१३:४० तक)
द्वितीय करण 👉 कौलव (२४:१३ तक)
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॥ गोचर ग्रहा: ॥
🌖🌗🌖🌗
सूर्य 🌟 धनु
चंद्र 🌟 वृश्चिक (१९:०७ से)
मंगल 🌟 वृश्चिक (उदित, पश्चिम, मार्गी)
बुध 🌟 मकर (उदय, पश्चिम, मार्गी)
गुरु 🌟 कुंम्भ (उदय, पूर्व, मार्गी)
शुक्र 🌟 धनु (उदय, पश्चिम, वक्री)
शनि 🌟 मकर (उदय, पूर्व, मार्गी)
राहु 🌟 वृष
केतु 🌟 वृश्चिक
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शुभाशुभ मुहूर्त विचार
⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳
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अभिजित मुहूर्त 👉 ११:५९ से १२:४०
अमृत काल 👉 १६:३२ से १८:००
सर्वार्थसिद्धि योग 👉 २४:३४ से ३१:१३
विजय मुहूर्त 👉 १४:०२ से १४:४३
गोधूलि मुहूर्त 👉 १७:१६ से १७:४०
निशिता मुहूर्त 👉 २३:५२ से २४:४७
राहुकाल 👉 १३:३६ से १४:५३
राहुवास 👉 दक्षिण
यमगण्ड 👉 ०७:१२ से ०८:२९
होमाहुति 👉 राहु (२४:३४ तक)
दिशाशूल 👉 दक्षिण
अग्निवास 👉 पृथ्वी - १३:४० तक
चन्द्रवास 👉 पश्चिम (उत्तर १९:०८ से)
शिववास 👉 कैलाश पर (१३:४० नन्दी पर)
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☄चौघड़िया विचार☄
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॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ - शुभ २ - रोग
३ - उद्वेग ४ - चर
५ - लाभ ६ - अमृत
७ - काल ८ - शुभ
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ - अमृत २ - चर
३ - रोग ४ - काल
५ - लाभ ६ - उद्वेग
७ - शुभ ८ - अमृत
नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
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शुभ यात्रा दिशा
🚌🚈🚗⛵🛫
पूर्व-उत्तर (दही का सेवन कर यात्रा करें)
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तिथि विशेष
🗓📆🗓📆
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सफला एकादशी व्रत (सभी के लिये), शुक्र धनु में (०७:५५ से), आदि।
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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण
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आज २४:३४ तक जन्मे शिशुओ का नाम
विशाखा नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (ती, तू, ते, तो) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम अनुराधा नक्षत्र के प्रथम चरण अनुसार क्रमश (ना) नामाक्षर से रखना शास्त्रसम्मत है।
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उदय-लग्न मुहूर्त
धनु - ३०:१४ से ०८:१७
मकर - ०८:१७ से ०९:५८
कुम्भ - ०९:५८ से ११:२४
मीन - ११:२४ से १२:४८
मेष - १२:४८ से १४:२२
वृषभ - १४:२२ से १६:१६
मिथुन - १६:१६ से १८:३१
कर्क - १८:३१ से २०:५३
सिंह - २०:५३ से २३:१२
कन्या - २३:१२ से २५:३०
तुला - २५:३० से २७:५०
वृश्चिक - २७:५० से ३०:१०
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पञ्चक रहित मुहूर्त
अग्नि पञ्चक - ०७:१२ से ०८:१७
शुभ मुहूर्त - ०८:१७ से ०९:५८
रज पञ्चक - ०९:५८ से ११:२४
शुभ मुहूर्त - ११:२४ से १२:४८
शुभ मुहूर्त - १२:४८ से १३:४०
रज पञ्चक - १३:४० से १४:२२
शुभ मुहूर्त - १४:२२ से १६:१६
चोर पञ्चक - १६:१६ से १८:३१
शुभ मुहूर्त - १८:३१ से २०:५३
रोग पञ्चक - २०:५३ से २३:१२
शुभ मुहूर्त - २३:१२ से २४:३४
मृत्यु पञ्चक - २४:३४ से २५:३०
अग्नि पञ्चक - २५:३० से २७:५०
शुभ मुहूर्त - २७:५० से ३०:१०
रज पञ्चक - ३०:१० से ३१:
-------------------------------------------------🙏राधे राधे🙏
[30/12, 10:24] पंडित भय्यू महाराज *ज्योतिष अनुसार साधना चयन*
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जन्म कुंडली द्वारा लग्न पंचम, नवम स्थान में जिन ग्रहों का प्रभाव हो उन ग्रहों के बल अनुसार साधक को उन देवताओं की साधना करना चाहिए-

1. सूर्य- विष्णु, शिव, दुर्गा, ज्वालादेवी, ज्वालामालिनी, गायत्री, आदित्य, स्वर्णाकर्षण, भैरव की उपासना करें।

2. सूर्य शनि, सूर्य राहु- महाकाली, तारा, शरभराज, नीलकंठ, यम, उग्रभैरव, कालभैरव, श्मशान भैरव की पूजा करें।

3. सूर्य बुध, सूर्य मंगल- गायत्री, सरस्वती, दुर्गा उपासना।

4. सूर्य शुक्र- वासुदेव, मातडंगी, तारा, कुबेर,
भैरवी, श्रीविद्या की उपासना करें।

5. सूर्य केतु- छिन्नमस्ता, आशुतोष शिव, अघोर शिव।

6. सूर्य शनि राहु- पशुपतास्त्र तंत्र, मंत्र मरणादि षट्कर्म से व्यक्ति अधिकतर पीड़ित होगा। रक्षा के लिए काली, तारा, प्रत्यंगिरा, जातवेद दुर्गा की उपासना करें।

7. सूर्य, गुरु, राहु- बगलामुखी, बगलाचामुंडा, उचिष्ट गणपति, वीरभद्र। केवल बगलामुखी उपासना से सिद्धि मिले, परंतु या तो सिद्धि दूसरों के लिए नष्ट होगी या देवी नाराज होकर वापस ले लेंगी।

8. चन्द्रमा- लक्ष्मी, श्रीविद्या षोडशी, यक्षिणी, वशीकरणादि प्रयोग शिव, कामेश्वर उपासना शुभ रहे।

9. चन्द्र, मंगल- हनुमान उच्छिष्ट चांडालिनी, मातंगी, शबरी, नरसिंह, वनदुर्गा, भैरवी उपासना शुभ रहे।

10. चन्द्र, बुध- बगला, कर्णपिशाची, उच्छिष्ट चांडालिनी नरसिंह, सरस्वती, वैष्णवी, वाराही, हयग्रीव, दुर्गा उपासना शुभ रहे।

11. चन्द्र, गुरु- बगलामुखी, भुवनेश्वरी, लक्ष्मी पितृ, कुबेर, ब्राह्म, शिव, कृष्ण, राम, दत्तात्रेय, अजपाजप, सोह साधना करें।

12. चन्द्र, शुक्र- कृष्ण, लक्ष्मी, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, शाकंभरी, यक्षिणी, वामन, दत्तात्रेतांत्रिक उपासनाएं।

13. चन्द्र शनि, दुर्गा तंत्र- मंत्र सिद्धि, यक्षिणी, पिशाची, भैरव, काली, तारा, उपासना करें।

14. चन्द्र राहु- भैरवी, काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, वाराही, उग्रचंडा, गणेश, विघ्नेश, हयग्रीव, शिव मृत्युञ्जय उपासना करें

15. चन्द्र, केतु- हनुमान, स्वामी कार्तिकेय, छिन्नमस्ता, भैरव, उच्छिष्ट गणेश, वासुदेव, विष्णु, गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ करें।

16. मंगल- हनुमान, भैरव, वीरभद्र, स्वामी कार्तिकेय, दुर्गा उपासना करें।

17. मंगल, बुध- बगलामुखी, भैरवी, नारसिंही, ब्राह्मी आदि अष्टमातृका, दुर्गा, सरस्वती, कृष्ण, गणपति, उपासना श्रेष्ठ रहे।

18. मंगल, गुरु- हनुमान, गायत्री, विष्णु, शिव, पितृ, यक्ष, कुबेर भिन्नपाद नेत्रों की उपासना शुभ रहे। संतान चिंता हेतु षष्ठी देवी का पाठ करें।

19. मंगल, शुक्र- वामन, लक्ष्मी, कामेश्वरी, ललिता, भुवनेश्वरी, कामाख्या, दुर्गा, अष्टभैरव, कृष्ण उपासना शुभ रहे।

20. मंगल, शनि- काली, तारा, श्मशान साधना, शरभ, भैरव, मंगल चंडिका, उग्रदेवता की उपासना करें।

21. मंगल, राहु- निम्न श्रेणी की उपासना, भैरव, छिन्नमस्ता, धूमावती, नीलतारा की उपासना करें।

22. मंगल, केतु- वाराही, दुर्गा, शिव, विष्णु, गणेश, हनुमान व भैरव की उपासना शुभ रहे।

23. बुध- गणेश, दुर्गा, विष्णु, सरस्वती, गंधर्व उपासना शुभ रहे।

24. बुध, गुरु- बगलामुखी, सरस्वती, गायत्री, विष्णु उपासना शुभ रहे।

25. बुध, शुक्र- कामाख्या, कामेश्वरी, लक्ष्मी, भैरवी, मातंगी, भुवनेश्वरी, कृष्ण उपासना शुभ रहे।

26. बुध, शनि- राम, शिव, हनुमान, उच्छिष्ट गणपति, यक्षिणी सिद्धि उपासना करें।

27. बुध, राहु- पिशाची विद्या, गारूड़ी विद्या, धूमावती विघ्नेश गणपति व आशुतोष शिव की उपासना करें।

28. बुध, केतु- मृत्युञ्जय शिव, गणेश, कार्तिकेय, हनुमान, भैरव, दुर्गा उपासना करें।

29. गुरु- विष्णु, शिव याज्ञिक कर्म बगलामुखी उपासना करें। यदि कुंडली में 6, 8,12वें स्थान में हो तो बगलामुखी उपासना में विलंब से लाभ होए, गुरु राहु, गुरु शनि योग से भी विलंब से लाभ होए, सिद्धि प्राप्त होए किंतु पुनः क्षय हो जाए। गायत्री उपासना अवश्य करें।

30. गुरु- शुक्र, गुरु शनि, गुरु मंगल, गुरु राहु, गुरु केतु योग से साधना में विलंब आते हैं या सिद्धि विलंब से होती है जिससे साधना में श्रद्धा-अश्रद्धा पैदा हो जाती है अतः गुरु का उपयोग करें।

31. शुक्र- लक्ष्मी, तंत्र-मंत्र मार्ग का ज्ञाता होए। शिव, मृत्युञ्जय श्री विद्या, त्रिपुर सुंदरी, दुर्गा उपासना, हेरंब, गणपति, मातंगी, शाकंभरी, शबरी उपासना शुभ रहे। शुक्र-शनि, शुक्र-राहु, शुक्र-केतु, योग से क्षुद्र सिद्धि की ओर साधक का मन दौड़ता है।

32. शनि- शनि उपासना से पूर्व पापों का क्षय होता है। दुर्गा, काली, तारा, आसुरी दुर्गा व भैरवादि की उपासना करता है।

33. शनि- राहु, शनि, केतु आदि के कारण भी मानसिक यातनाएं प्राप्त होती हैं अतः शत्रुओं को दंड देने हेतु उग्र साधनाएं करता है।

34. कभी-कभी धूमावती की उपासना से भी ऐसे पापों व विघ्नों का निवारण होता है, परंतु धूमावती उपासना आसान नहीं है। सोच-समझकर ही करें, क्योंकि धूमावती विघ्नों की अधिष्ठात्री हैं, अमंगलयुक्ता हैं, अतः आह्वान घर में न करें।🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩महर्षि सांदीपनि वंशज ---पंडित रुपम व्यास मुख्य पुजारी महर्षि सांदीपनि आश्रम उज्जैन,,,,9977847327🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
[30/12, 10:24] पंडित भय्यू महाराज: सफला एकादशी आज
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एकादशी तिथि को हिंदू धर्म में विशेष माना गया है। महाभारत की कथा में भी एकादशी के व्रत का उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर और अर्जुन को एकादशी व्रत के महामात्य के बारे में बताया था। एकादशी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। वर्ष 2021 की आखिरी एकादशी कब है और इसका क्या धार्मिक महत्व है।

पंचांग के अनुसार 30 दिसंबर 2021 को साल की आखिरी एकादशी तिथि है। मान्यता के अनुसार पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से सफला एकादशी का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, और सभी कार्यों में सफलता मिलती है। इस व्रत में रात्रि जागरण को आवश्यक बताया गया है। मान्यता है कि रात्रि जागरण के बाद ही इस व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।

पापों से मुक्ति मिलती है
===============
एकादशी व्रत रखने से पापों से भी मुक्ति मिलती है। माना जाता है कि परिवार में किसी एक सदस्य के भी एकादशी का व्रत करने से कई पीढ़ियों के सुमेरू सरीखे पाप भी नष्ट हो जाते हैं। सफला एकादशी का व्रत दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है। इस लिए सफला एकादशी का व्रत करने वाले को दशमी तिथि की रात में एक ही बार भोजन करना चाहिए।

सफला एकादशी का शुभ मुहूर्त
====================
एकादशी तिथि प्रारम्भ - 29 दिसंबर 2021 को दोपहर 04 बजकर 12 मिनट से।
एकादशी तिथि समाप्त - 30 दिसंबर 2021 को दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक।

सफला एकादशी व्रत का पारण मुहूर्त-
=======================
31 दिसंबर 2021 को प्रात: प्रात: 07 बजकर 14 मिनट से प्रात: 09 बजकर 18 मिनट तक। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय प्रात: 10 बजकर 39 मिनट।

सफला एकादशी व्रत कथा
=================
पौराणिक कथा के अनुसार,चम्पावती नगरी में महिष्मान राजा के पांच पुत्र थे। सबसे बड़ा पुत्र लुम्भक चरित्रहीन था। वह हमेशा देवताओं की निन्दा करना, मांस भक्षण करना समेत अन्य पाप कर्मों में लिप्त रहता था। उसके इस बुरे कर्मों के कारण राजा ने उसे राज्य से बाहर निकाल दिया। घर से बाहर जाने के बाद लुम्भक जंगल में रहने लगा।

पौष की कृष्ण पक्ष की दशमी की रात्रि में ठंड से वह सो न सका और सुबह होते-होते वह ठंड से प्राणहीन सा हो गया। दिन में जब धूप के बाद कुछ ठंड कम हुई तो उसे होश आई और वह जंगल में फल इकट्ठा करने लगा। इसके बाद शाम में सूर्यास्त के बाद यह अपनी किस्मत को कोसते हुए उसने पीपल के पेड़ की जड़ में सभी फलों को रख दिया, और उसने कहा ‘इन फलों से लक्ष्मीपति भगवान विष्णु प्रसन्न हों।

इसके बाद एकादशी की पूरी रात भी अपने दुखों पर विचार करते हुए सो ना सका। इस तरह अनजाने में ही लुम्भक का एकादशी का व्रत पूरा होगया। इस व्रत के प्रभाव से वह अच्छे कर्मों की ओर प्रवृत हुआ। उसके बाद उसके पिता ने अपना सारा राज्य लुम्भक देकर ताप करने चला गया। कुछ दिन के बाद लुम्भक को मनोज्ञ नामक पुत्र हुआ, जिसे बाद में राज्यसत्ता सौंप कर लुम्भक खुद विष्णु भजन में लग कर मोक्ष प्राप्त करने में सफल रहा।

14/12/2021

14 दिसम्बर 2021 से शुरू होगा खरमास

★ आज 14 दिसम्बर 2021 से खरमास आरंभ होगा ।
★ हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
★ खरमास को अशुभ माना जाता है।

★ जब सूर्य गोचरवश धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो इसे क्रमश धनु संक्रांति व मीन संक्रांति कहा जाता है।
★ सूर्य किसी भी राशि में लगभग एक माह तक रहते हैं। सूर्य के धनु राशि व मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही खरमास कहा जाता है।


🌏खरमास शुरू और समाप्त होने की तिथि :-

• 14 दिसंबर 2021 मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से शुरू हो रहा खरमास।
• मकर संक्रांति 14 जनवरी 2022 पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन खरमास का समाप्त हो जाएगा।

07/12/2021

आज बात करते है,मानसिक रोग और स्वास्थ्य ज्योतिष का सम्बन्ध व कारण के बारे मे

मानसिक बीमारी होने के बहुत से कारण होते हैं, इन कारणों का ज्योतिषीय आधार क्या है, इसकी जानकारी के लिये कुंडली के उन योगों का अध्ययन करेंगे जिनके आधार पर मानसिक बिमारियों का पता चलता है। अनुसार किसी भी जातक की जन्मकुंडली विश्लेषण करते हुए शरीर के सभी अंगों का विचार तथा उनमें होने वाले रोगों या विकारों का विचार भिन्न-भिन्न भावों से किया जाता है। रोग तथा शरीर के अंगों के लिये लग्न कुण्डली में मस्तिष्क का विचार प्रथम स्थान से, बुद्धि का विचार पंचम भाव से तथा मनःस्थिति का विचार चन्द्रमा से किया जाता है। इस के अतिरिक्त शनि, बुध, शुक्र तथा सूर्य का मानसिक स्थिति को सामान्य बनाये रखने में विशेष योगदान है।
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पित्र दोष शांति अनुष्ठान,, कालसर्प दोष शांति अनुष्ठान ,,एवं 125000 ( सवा लाख) महामृत्युंजय जाप अनुष्ठान कल मेरे आचार्यत्...
30/11/2021

पित्र दोष शांति अनुष्ठान,, कालसर्प दोष शांति अनुष्ठान ,,एवं 125000 ( सवा लाख) महामृत्युंजय जाप अनुष्ठान कल मेरे आचार्यत्व में मुंबई से पधारे शर्मा जी का सिद्धवट, मंगलनाथ मंदिर और प्राचीन कुटुम्बेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन में विधिविधान के साथ संपन्न कराया गया| 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
पूजन, अनुष्ठान, ज्योतिष आदि कार्यो के लिए संपर्क करे:
महर्षि सांदीपनि वंशज ---- पंडित नितिन व्यास, पुजारी बड़े गणेश मंदिर उज्जैन, 9347480598

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