29/01/2026
शास्त्रों की दृष्टि में गो-माता
गो-माता केवल पशु नहीं, धर्म की जीवित मूर्ति हैं।
वेदों में गाय को अघ्न्या कहा गया है —
अर्थात जिसे कभी कष्ट नहीं देना चाहिए।
पुराण कहते हैं—
गाय के शरीर में समस्त देवताओं का वास है।
जहाँ गो-सेवा होती है, वहाँ लक्ष्मी, सरस्वती और शांति स्वयं निवास करती हैं।
गो-माता का संरक्षण करना
केवल परंपरा नहीं,
यह सनातन धर्म की रक्षा है।
🙏 गो-सेवा करें, धर्म बचाएँ 🙏