अंतर्राष्ट्रीय कायस्थ एकता परिवार

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भगवान श्री कृष्ण जी के 108 नाम व अर्थ..... जिनकी लीला अपरम्पार जय श्री कृष्णा.....""हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा...
30/08/2021

भगवान श्री कृष्ण जी के 108 नाम व अर्थ..... जिनकी लीला अपरम्पार जय श्री कृष्णा.....
""हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे ||
हरे रामा हरे रामा, राम राम हरे हरे ||
आप सभी को सपरिवार जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं हैं 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

1. अचला : भगवान।
2. अच्युत : अचूक प्रभु या जिसने कभी भूल न की हो
3. अद्भुतह : अद्भुत प्रभु।
4. आदिदेव : देवताओं के स्वामी।
5. अदित्या : देवी अदिति के पुत्र।
6. अजन्मा : जिनकी शक्ति असीम और अनंत हो।
7. अजया : जीवन और मृत्यु के विजेता।
8. अक्षरा : अविनाशी प्रभु।
9. अमृत : अमृत जैसा स्वरूप वाले।
10. अनादिह : सर्वप्रथम हैं जो।
11. आनंद सागर : कृपा करने वाले।
12. अनंता : अंतहीन देव।
13. अनंतजीत : हमेशा विजयी होने वाले।
14. अनया : जिनका कोई स्वामी न हो।
15. अनिरुद्धा : जिनका अवरोध न किया जा सके।
16. अपराजित : जिन्हें हराया न जा सके।
17. अव्युक्ता : माणभ की तरह स्पष्ट।
18. बाल गोपाल : भगवान कृष्ण का बाल रूप।
19. बलि : सर्वशक्तिमान।
20. चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले प्रभु।
21. दानवेंद्रो : वरदान देने वाले।
22. दयालु : करुणा के भंडार।
23. दयानिधि : सब पर दया करने वाले।
24. देवाधिदेव : देवों के देव।
25. देवकीनंदन : देवकी के लाल (पुत्र)।
26. देवेश : ईश्वरों के भी ईश्वर।
27. धर्माध्यक्ष : धर्म के स्वामी।
28. द्वारकाधीश : द्वारका के अधिपति।
29. गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाले।
30. गोपालप्रिया : ग्वालों के प्रिय।
31. गोविंदा : गाय, प्रकृति, भूमि को चाहने वाले।
32. ज्ञानेश्वर : ज्ञान के भगवान।
33. हरि : प्रकृति के देवता।
34. हिरण्यगर्भा : सबसे शक्तिशाली प्रजापति।
35. ऋषिकेश : सभी इन्द्रियों के दाता।
36. जगद्गुरु : ब्रह्मांड के गुरु।
37. जगदीशा : सभी के रक्षक।
38. जगन्नाथ : ब्रह्मांड के ईश्वर।
39. जनार्धना : सभी को वरदान देने वाले।
40. जयंतह : सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले।
41. ज्योतिरादित्या : जिनमें सूर्य की चमक है।
42. कमलनाथ : देवी लक्ष्मी के प्रभु।
43. कमलनयन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
44. कामसांतक : कंस का वध करने वाले।
45. कंजलोचन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
46. केशव : लंबे, काले उलझा ताले जिसने।
47. कृष्ण : सांवले रंग वाले।
48. लक्ष्मीकांत : देवी लक्ष्मी के देवता।
49. लोकाध्यक्ष : तीनों लोक के स्वामी।
50. मदन : प्रेम के प्रतीक।
51. माधव : ज्ञान के भंडार।
52. मधुसूदन : मधु-दानवों का वध करने वाले।
53. महेन्द्र : इन्द्र के स्वामी।
54. मनमोहन : सबका मन मोह लेने वाले।
55. मनोहर : बहुत ही सुंदर रूप-रंग वाले प्रभु।
56. मयूर : मुकुट पर मोरपंख धारण करने वाले भगवान।
57. मोहन : सभी को आकर्षित करने वाले।
58. मुरली : बांसुरी बजाने वाले प्रभु।
59. मुरलीधर : मुरली धारण करने वाले।
60. मुरली मनोहर : मुरली बजाकर मोहने वाले।
61. नंदगोपाल : नंद बाबा के पुत्र।
62. नारायन : सबको शरण में लेने वाले।
63. निरंजन : सर्वोत्तम।
64. निर्गुण : जिनमें कोई अवगुण नहीं।
65. पद्महस्ता : जिनके कमल की तरह हाथ हैं।
66. पद्मनाभ : जिनकी कमल के आकार की नाभि हो।
67. परब्रह्मन : परम सत्य।
68. परमात्मा : सभी प्राणियों के प्रभु।
69. परम पुरुष : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले।
70. पार्थसारथी : अर्जुन के सारथी।
71. प्रजापति : सभी प्राणियों के नाथ।
72. पुण्य : निर्मल व्यक्तित्व।
73. पुरुषोत्तम : उत्तम पुरुष।
74. रविलोचन : सूर्य जिनका नेत्र है।
75. सहस्राकाश : हजार आंख वाले प्रभु।
76. सहस्रजीत : हजारों को जीतने वाले।
77. सहस्रपात : जिनके हजारों पैर हों।
78. साक्षी : समस्त देवों के गवाह।
79. सनातन : जिनका कभी अंत न हो।
80. सर्वजन : सब कुछ जानने वाले।
81. सर्वपालक : सभी का पालन करने वाले।
82. सर्वेश्वर : समस्त देवों से ऊंचे।
83. सत्य वचन : सत्य कहने वाले।
84. सत्यव्त : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव।
85. शंतह : शांत भाव वाले।
86. श्रेष्ठ : महान।
87. श्रीकांत : अद्भुत सौंदर्य के स्वामी।
88. श्याम : जिनका रंग सांवला हो।
89. श्यामसुंदर : सांवले रंग में भी सुंदर दिखने वाले।
90. सुदर्शन : रूपवान।
91. सुमेध : सर्वज्ञानी।
92. सुरेशम : सभी जीव-जंतुओं के देव।
93. स्वर्गपति : स्वर्ग के राजा।
94. त्रिविक्रमा : तीनों लोकों के विजेता।
95. उपेन्द्र : इन्द्र के भाई।
96. वैकुंठनाथ : स्वर्ग के रहने वाले।
97. वर्धमानह : जिनका कोई आकार न हो।
98. वासुदेव : सभी जगह विद्यमान रहने वाले।
99. विष्णु : भगवान विष्णु के स्वरूप।
100. विश्वदक्शिनह : निपुण और कुशल।
101. विश्वकर्मा : ब्रह्मांड के निर्माता।
102. विश्वमूर्ति : पूरे ब्रह्मांड का रूप।
103. विश्वरूपा : ब्रह्मांड हित के लिए रूप धारण करने वाले।
104. विश्वात्मा : ब्रह्मांड की आत्मा।
105. वृषपर्व : धर्म के भगवान।
106. यदवेंद्रा : यादव वंश के मुखिया।
107. योगि : प्रमुख गुरु।
108. योगिनाम्पति : योगियों के स्वामी।

प्रिय साथियों,बड़े ही उल्लास के साथ आप सभी को सूचित करना चाहता हूं कि हमने अपनी संस्था का एक कुटुंब (Kutumb) एप बनाया है...
26/05/2021

प्रिय साथियों,

बड़े ही उल्लास के साथ आप सभी को सूचित करना चाहता हूं कि हमने अपनी संस्था का एक कुटुंब (Kutumb) एप बनाया है! यह भारत निर्मित एक एप है वैसे जो संस्था के चलन को ओर मजबूत बनाएगा, यह पूर्ण रूप से सुरक्षित है! कायस्थ परिवार की संस्था के लिए यह बहुत ही हर्ष की बात है! अखंड अंतर्राष्ट्रीय कायस्थ एकता परिवार में एप में जुड़कर कायस्थ परिवार की एकता को ज्यादा से ज्यादा मजबूत कीजिए और साथ ही साथ आप सभी को सोशल मीडिया जैसा उत्साह इसी एप पर मिल सकेगा जो भी सदस्य बन रहे उन सभी को हमारी संस्था की ओर कार्ड उपलब्ध होगा, आपको "प्रशस्ति प्रमाणपत्र" से सम्मान किया जायेगा, आप सभी इस एप पर फेसबुक की तरह बात कर सकते हैं, व्हाट्सप की तरह बात कर सकते हैं, कॉल कर सकते हैं, ग्रूप कॉलिंग कर सकते हैं, ऑडियो - विडियो, फोटो अपलोड कर सकते हैं जो सुविधा अलग अलग एप में है वह सारी सुविधाएं आपको सिर्फ़ एक ही एप में मिलेगी!

आप सभी का तहेदिल से स्वागत है 🙏💐💐💐🙏

https://kutumb.app/akhand-antarastriya-kastha-yekta-parivaar?slug=92d2f80bdf7d&ref=W5DMW

अखंड अंतर्राष्ट्रीय कायस्थ एकता परिवार एप्प आप सभी के लिए उपलब्ध हैं यहां आपको पुरूष परिवार, महिला परिवार, वैवाहिक परिचय...
24/05/2021

अखंड अंतर्राष्ट्रीय कायस्थ एकता परिवार एप्प आप सभी के लिए उपलब्ध हैं यहां आपको पुरूष परिवार, महिला परिवार, वैवाहिक परिचय परिवार से जुड़ सकते हैं जिस तरह से सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाइटसप, सिग्नल प्राईवेट अलग अलग एप्प युज करते हैं यह तीनों सुविधा आपको एक ही जगह मिलेगी सिर्फ व सिर्फ़ "अखंड अंतर्राष्ट्रीय कायस्थ एकता परिवार एप्प" पर, तो देर ना कीजिए और डाऊनलोड कीजिए कुटुंब एप्प

मेरा उद्देश्य है विश्व के कायस्थ परिवार को एकजुट कर हर हिन्दु परिवार का विकास करना

07/02/2021

ारत_की_संस्कृति_पर_कविता_____ #

भारतीय संस्कृति जीवन की विधि है,
संस्कारों से पोषित बहुमूल्य निधि है।

विश्व की पहली और महान संस्कृति,
विविधता में एकता की अनुरक्त समीकृति।

अमृत स्रोतस्विनी विकास चिरप्रवाहिता,
संस्कारित और परिष्कृत विचारवाहिता।

धन्य सुवासित भारतीय संस्कृति सुपुष्पी,
ज्ञान, भक्ति, सद्कर्मों के प्रांगण में पनपी।

समेटे सांस्कृतिक, धार्मिक, भाषा की विविधता,
शिष्टाचार, संवाद, धार्मिक संस्कारों की परिशुद्धता।

परिवारों, जातियों और धार्मिक समुदायों का सभ्याचार,
विवाह, परंपराएं, रीति-रिवाज, उत्सवों का मंगलाचार।

इंसानियत, उदारता, एकता, धर्मनिरपेक्षता, अपनाएंगे,
समता, समन्वय, सदाचार से इसे अक्षुण्ण बनाएंगे।

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02/02/2021

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अखंड अंतर्राष्ट्रीय कायस्थ एकता परिवार"अखंड भारत अभियान"सावन में महादेव आएं,भादो में गणेश,आज माँ दुर्गा आ गयी,हरेंगी कष्...
17/10/2020

अखंड अंतर्राष्ट्रीय कायस्थ एकता परिवार
"अखंड भारत अभियान"

सावन में महादेव आएं,
भादो में गणेश,
आज माँ दुर्गा आ गयी,
हरेंगी कष्ट और क्लेश.....

🌹 प्रार्थना 🌹

जय माता दी
हे जगदम्बे आप सबकी झोलियाँ खुशियों से भरिए!
हे सच्चिनन्दस्वरूपा जगदम्बे माँ!हे ज्योता वाली,सबका कल्याण एवं मंगल करने वाली अम्बे माँ!
हे नित्य- पवित्र सबकी झोलियाँ भरने वाली माँ आप संसार के कण-कण में विराजती हो।
इस संसार में सर्वत्र,सब स्थानों में,आप सभी प्रकार की व्यवस्थाओं को संभाले हुए है,संसार में समस्त प्रकार के नियमो को प्राणिमात्र के लिए रचते हुए आप सर्वत्र है!अनेक नाम है।
हे वैष्णों माँ आपके!आपके भक्त अलग-अलग नामों से आपको पुकारते है,पर आप ऐसी महान शक्ति है जो इसे सारे संसार के घट- घट में समाये हुई है!
हे जगदम्बे माँ!आप सबकी झोलियां भरिये,सबके घर-परिवार में सुख-शांति व समृद्धि हो!सबकी मनचाही मुरादें पूरी हो।
सब सुखी हो,निरोग हो, आनन्दित हो,यही हमारी आपसे विनती है,इसे स्वीकार करे।

ॐ शांति: शांति: शांति:🌹
जय माँ शेरोवाली दा.....
साचे दरबार की जय.....
जय माता दी.......
🙏🏻🙏🏻🚩🚩

अखंड भारत अभियान

05/10/2020

अपने मिशन में सफल होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त भाव से समर्पित होना पड़ेगा

हिन्दी दिवससन् 1947 में देश आजाद होने के बाद सबसे बड़ा प्रश्न था कि किस भाषा को राष्ट्रीय भाषा बनाया जाए। काफी विचार-विम...
14/09/2020

हिन्दी दिवस

सन् 1947 में देश आजाद होने के बाद सबसे बड़ा प्रश्न था कि किस भाषा को राष्ट्रीय भाषा बनाया जाए। काफी विचार-विमर्श करने के बाद 14 सितंबर सन् 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। इसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 343 (1) में किया गया है, जिसके अनुसार भारत की राजभाषा ‘हिंदी’ और लिपि ‘देवनागरी’ है। सन् 1953 से 14 सितंबर के दिन हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत हुई।
हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिए जाने के बाद गैर हिंदी भाषी लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके कारण अंग्रेजी को भी आधिकारिक भाषा बनाया गया। हिंदी की सबसे अच्छी बात ये है कि यह समझने में बहुत आसान है, इसे जैसा लिखा जाता है इसका उच्चारण भी उसी प्रकार किया जाता है। हमारे देश में 77 प्रतिशत लोग हिंदी बोलते, समझते और पढ़ते हैं। आधिकारिक काम-काज की भाषा के तौर पर भी हिंदी का उपयोग होता है।
गांधी जी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था। सन् 1918 में हिंदी साहित्य सम्मेलन में गांधी जी ने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने को कहा था। जब हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया, तब देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने हिंदी के प्रति गांधी जी के प्रयासों को याद किया। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन के महत्व को देखते हुए इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाने को कहा था। भारत देश के नागरिक होने के नाते हम सबका कर्तव्य बनता है कि हम हिंदी को आगे बढ़ाने का प्रयास करें। अपने काम-काज की भाषा के रूप में हिंदी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।

"हिन्दी दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं हैं.. हिन्दी हमारी मातृभाषा है इसका उच्चारण सदैव करना चाहिए"
🙏🙏🙏💐💐💐💐💐💐💐🙏🙏🙏

""इतिहास की वीरता की सत्य घटना""पाटण की रानी रुदाबाई जिसने सुल्तान बेघारा के सीने को फाड़ कर दिल निकाल लिया था, और कर्णा...
02/09/2020

""इतिहास की वीरता की सत्य घटना""

पाटण की रानी रुदाबाई जिसने सुल्तान बेघारा के सीने को फाड़ कर दिल निकाल लिया था, और कर्णावती शहर के बिच में टांग दिया था, ओर धड से सर अलग करके पाटन राज्य के बीचोबीच टांग दिया था।

गुजरात से कर्णावती के राजा थे,
राणा वीर सिंह सोलंकी ईस राज्य ने कई तुर्क हमले झेले थे, पर कामयाबी किसी को नहीं मिली, सुल्तान बेघारा ने सन् 1497 पाटण राज्य पर हमला किया राणा वीर सिंह सोलंकी के पराक्रम के सामने सुल्तान बेघारा की 40000 से अधिक संख्या की फ़ौज
२ घंटे से ज्यादा टिक नहीं पाई, सुल्तान बेघारा जान बचाकर भागा।

असल मे कहते है सुलतान बेघारा की नजर रानी रुदाबाई पे थी, रानी बहुत सुंदर थी, वो रानी को युद्ध मे जीतकर अपने हरम में रखना चाहता था। सुलतान ने कुछ वक्त बाद फिर हमला किया।

राज्य का एक साहूकार इस बार सुलतान बेघारा से जा मिला, और राज्य की सारी गुप्त सूचनाएं सुलतान को दे दी, इस बार युद्ध मे राणा वीर सिंह सोलंकी को सुलतान ने छल से हरा दिया जिससे राणा वीर सिंह उस युद्ध मे वीरगति को प्राप्त हुए।

सुलतान बेघारा रानी रुदाबाई को अपनी वासना का शिकार बनाने हेतु राणा जी के महल की ओर 10000 से अधिक लश्कर लेकर पंहुचा, रानी रूदा बाई के पास शाह ने अपने दूत के जरिये निकाह प्रस्ताव रखा,

रानी रुदाबाई ने महल के ऊपर छावणी बनाई थी जिसमे 2500 धर्धारी वीरांगनाये थी, जो रानी रूदा बाई का इशारा पाते ही लश्कर पर हमला करने को तैयार थी, सुलतान बेघारा को महल द्वार के अन्दर आने का न्यौता दिया गया।

सुल्तान बेघारा वासना मे अंधा होकर वैसा ही किया जैसे ही वो दुर्ग के अंदर आया राणी ने समय न गंवाते हुए सुल्तान बेघारा के सीने में खंजर उतार दिया और उधर छावनी से तीरों की वर्षा होने लगी जिससे शाह का लश्कर बचकर वापस नहीं जा पाया।

सुलतान बेघारा का सीना फाड़ कर रानी रुदाबाई ने कलेजा निकाल कर कर्णावती शहर के बीचोबीच लटकवा दिया।

और..उसके सर को धड से अलग करके पाटण राज्य के बिच टंगवा दिया साथ ही यह चेतावनी भी दी की कोई भी आक्रांता भारतवर्ष पर या हिन्दू नारी पर बुरी नज़र डालेगा तो उसका यही हाल होगा।

इस युद्ध के बाद रानी रुदाबाई ने राजपाठ सुरक्षित हाथों में सौंपकर कर जल समाधि ले ली, ताकि कोई भी तुर्क आक्रांता उन्हें अपवित्र न कर पाए।

ये देश नमन करता है रानी रुदाबाई को, गुजरात के लोग तो जानते होंगे इनके बारे में। ऐसे ही कोई क्षत्रिय और क्षत्राणी नहीं होता, हमारे पुर्वज और विरांगानाये ऐसा कर्म कर क्षत्रिय वंश का मान रखा है और धर्म बचाया है।

🚩

27/08/2020

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