14/07/2025
जय श्री महाकाल
14 जुलाई को पहली सवारी
खुशियोँ का समंदर छा जाता हैं, जब नगर भ्रमण का समय आता हैं। अवंतिकानाथ बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने एवं साक्षात अपने भक्तों को आशीर्वाद देने निकलते है नगर भ्रमण पर।
अपने मन की बात बाबा से कीजिए, क्योकि यही एक क्षण होता हैं जब बाबा हम सभी को साक्षात देखते है। हम बाबा को देखें यह जरुरी नहीं, बल्कि बाबा हमें देखें यह ज्यादा जरुरी हैं।
आ रही है पालकी, मृत्युंजय ॐ महाकाल की
जब वे अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं,
मानों तब कालों के काल महाकाल की चरण रज से
उज्जैन की धरती स्वर्ग बन जाती है।
जब उज्जयनी की परम पवित्र धरा पर शिव और सती का मिलन होता है, तब मानों तीनों लोक उस क्षण ठहर जाते हैं।
जब पुरुष के सामने प्रकृति आ जाती है, सृष्टि हर्ष से भर जाती है।
श्रावण मास का इंतजार सभी शिवभक्तों को रहता है।
मन अतिउत्साहित हो जाता है।
श्रावण का महीना, और महाकाल की सवारी!
अहा!
इस दिन का सभी लोग पलकें बिछाकर इंतजार करते हैं।
जिस दिन गंगाधर, चंद्रमौलेश्वर अपने धाम से नगर को निकलते हैं, जब बाबा महाकाल का प्रथम दर्शन मनमहेश के रुप में होता है।
इस दिन की तैयारी महीनों पहले से ही आरम्भ हो जाती है, मंदिर प्रशासन के साथ समस्त प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।
सोमवार को सवारी वाले दिन सुबह से ही,
शहर में उल्लास छा जाता है।
हे सर्वदेव!
आपके स्वागत में जब शहर की सड़कें
कालीन से सज जाती हैं, त
सवारी मार्ग पर बनी रंगोली मन को मोहने वाली होती है,
श्रद्धालु दिन भर चित्त लगाकर स्वयं की क्षमता अनुसार आपके लिए सेवा कार्य करते हैं।
फूल से सजे मार्ग, उनकी महक मंदिर के गर्भगृह का आभास करवाती है, मानों वे पुष्प भी आप पर अर्पित होने को लालायित हो जाते हैं।
हे सरकार!
जब आपकी सेवा में सभी प्रशासनिक अधिकारियों का काफिला और समस्त पुलिस बल मुस्तैदी से तैनात रहता है,
तब राजा, मंत्री के भाव प्रकट हो जाते हैं।
राजा आखिर राजा ही होता है।
हे उमाशंकर!
लगभग तीन से चार बजे के बीच
जब नगर भ्रमण के पहले पंडे पुजारियों द्वारा आपकी स्वीकृति और पूजन वंदन भोग के बाद, जब आप परिसर से बाहर आते हैं, तब तीनों लोको के सुख आपके उस दर्शन पर न्योछावर करने को मन करता है।
ऐसा लगता है, स्वर्ग छोड़ कर,
देवता-असुर भी आपके दर्शन के लिए
मनुष्य रुप लिए वहीं आ गए हैं।
शाही ठाठ-बाट के साथ जब अवन्तिकापुरी के महाराजा, अर्थात आपको तोपों की सलामी दी जाती है, तब से शुरु होता है।
महाकाल का नगर भ्रमण।
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