06/09/2017
श्राद्ध के नियम :-
1. श्राद्ध पिता तथा माता की तरफ की तीन-तीन पीढ़ियों का किया जा सकता है, जैसे माता-पिता, दादा- दादी, परदादा-परदादा इसी प्रकार से नाना-नानी, परनाना-परनानी का भी श्राद्ध किया जा सकता है ।
2. श्राद्ध करने के अधिकारी क्रमशः यदि कई पुत्र हो तो बडा बेटा, या सबसे छोटा बेटा, विशेष परिस्थितियों मे बड़े भाई की आज्ञा से छोटा भाई, यदि संयुक्त परिवार हो तो तो ज्येष्ठ पुत्र के द्वारा एक ही जगह सम्पन्न हो सकता है । यदि पुत्र अलग-अलग रहते हो तो उन्हें वार्षिक श्राद्ध अलग-अलग ही करना चाहिए।
यदि पुत्र न हो तो शास्त्रों मे श्राद्ध करने का क्रम इस प्रकार से निर्धारित है:- पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र, दौहित्र, पत्नी, भाई, भतीजा, पिता, माता, पुत्रवधु, बहन, भांजा, सपिण्ड़ ( अपने से लेकर सात पीढी तक का परिवार ), सोदक ( आठवी से लेकर चौदह पीढी के परिवार) ।
3.श्राद्ध दिवंगत पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार सुयोग्य ब्राह्मण को घर बुलाकर कालेतिल, गंगाजल, सफेद फूलो से पूजा करवाकर नाम, गोत्र उच्चारण, संकल्प आदि करवाकर ही करे ।
इसके उपरांत ब्राह्मण को वस्त्र, जनेऊ, फल, मिठाई दक्षिणा सहित संतुष्ट करवाकर ही विदा करे, ब्राह्मण की संतुष्टि तथा प्रसन्नता से ही पितर संतुष्ट होते है, तथा वंशजो को आशीर्वाद देकर अपने लोक को विदा होते है ।
4. श्राद्ध सदा मध्याह्न काल यानि (10:48 बजे से 1:12 बजे दोपहर ) को ही किया जाना चाहिये ।
5. प्रातःकाल, सायंकाल तथा रात्रि मे श्राद्ध न करे ।
6. श्राद्ध मे तुलसी, जौ, काले तिल, पुष्प, चावल, भृंगराज, तथा गंगाजल का प्रयोग अवश्य करे तथा पिण्डदान व तर्पण अवश्य करे ।
7. भोजन मे उडद की दाल के भल्ले, चटपटा भोजन,
गाय के दूध एवं उससे बनी हुई वस्तुएँ, लौंग डाली हुई खीर अवश्य रखे ये पदार्थ आत्माओं को प्रसन्न, प्रेरित तथा आकर्षित करते है ।
जौ, धान, तिल, गेहूं, मूंग, इन्द्रजौ,परवल, आंवला, खीर, नारियल,बेल, अनार, आम,अमड़ा, बिजौरा, फालसा, नारंगी, खजूर, अंगूर, चिरौंजी, बेर, इन्द्रजौ, मटर, कचनार, सरसों, सरसों का तेल, तिल्ली का तेल आदि का प्रयोग करना चाहिए ।
8. श्राद्ध कर्म मे गुड से बना अन्न, काले तिल तथा शहद का दान अवश्य करे ।
9. श्राद्ध केवल मृत्यु तिथि वाले दिन ही करे, यदि भूलवश तिथि निकल जाये तो अंतिम दिन यानि अमावस्या के दिन श्राद्ध करे ।
पं. योगेश व्यास उज्जैन (9617380490)