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Here you will find dharma katha experience the path of self happiness the way to reach god as well as yourself To experience happiness in sorrow to sanctify the mind and words to destroy our inner malice karma You are welcome to

03/08/2022
15/02/2021

भक्तामर काव्य 48

स्तोत्र-स्त्रजं तव जिनेन्द्र गुणैर्-निबद्धां
भक्त्या मया विविध-वर्ण-विचित्र-पुष्पाम् ।
धत्ते जनो य इह कण्ठ-गतामजसं
तं मानतुंगमवश समुपैति लक्ष्मीः ॥

भक्तामर के 48वें काव्य की आराधना करने से लक्ष्मी, संपत्ति व सुख प्राप्त होती है।

इस काव्य को सिद्ध करने के लिए इस काव्य का यंत्र सामने रख कर पीले वस्त्र, पीले आसान, पीली जाप माला से दीपक लगाकर पूर्व दिशा की ओर मुखकर जाप करना चाहिए।

जाप - ॐ नमो भगवते महति महावीर वड्ढमाण बुद्धिरिसीणं ॐ ह्राँ ह्रीं ह्रूँ ह्रौं ह्रः असिआउसा झ्रौं झ्रौं स्वाहा ।

#भक्तामर

15/02/2021

ॐ ह्रीं माघशुक्लाचतुथ्र्यां जन्मकल्याणकप्राप्ताय श्री विमलनाथ जिनेन्द्राय नम:।
ॐ ह्रीं माघशुक्लाचतुथ्र्यां दीक्षाकल्याणकप्राप्ताय श्री विमलनाथ जिनेन्द्राय नम:।

विमलनाथ भगवान के जन्म एवं ्याणक महोत्सव की सभी सधर्मी बंधुओं को बधाई एवं शुभकामनाएं

#जन्म_कल्याणक

28/01/2021

जब तक प्रकृति का संतुलन व्यवस्थित है तब तक धरती पर प्राणी सुरक्षित है।

#अंतर्मुखी
#मुनिपूज्यसागर




28/01/2021

भक्तामर काव्य- 30

कुन्दावदात चल-चामर -चारु-शोभं।
विभ्राजते तव वपुः कलधौत-कान्तम्॥
उद्यच्छशांक शुचि-निर्झर वारि-धार।
मुच्चैस्तटं सुर -गिरेरिव शात- कौम्भम्॥

भक्तामर के 30वें काव्य की आराधना करने से सिंह, शत्रु का भय नही होता है।

इस काव्य को सिद्ध करने के लिए इस काव्य का यंत्र सामने रखकर सफेद कपड़े, सफेदआसान, सफेद जाप माला से दीप लगाकर उत्तर दिशा की ओर मुखकर जाप करना चाहिए।

जाप- ऊँ (हृीं श्रीं श्री पाश्र्वनाथाय हृीं धरणेन्द्र पद्मावती सहिताय) नमो अट्ठे मट्ठे क्षुद्रान् स्तम्भय स्तम्भय रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।

#भक्तामर

26/01/2021

भक्तामर काव्य- 28

उच्चैर -शोक तरु-संश्रित-मुन्मयूख।
माभाति रूप-ममलं भवतो नितान्तम्॥
स्पष्टोल्लसत्किरणमस्त तमोवितानं।
बिम्बं रवेरिव पयोधर पार्श्ववर्ति॥

भक्तामर के 28वें काव्य की आराधना करने से मन चाहे कार्य सिद्धि होती है।

इस काव्य को सिद्ध करने के लिए इस काव्य का यंत्र सामने रखकर सफेद कपड़े, सफेद आसान, सफेद जाप माला से, दीप लगाकर उत्तर दिशा की ओर मुख कर जाप करना चाहिए।

जाप- ऊँ नमो भगवते जये विजये, जृम्भय, जृम्भय, मोहय मोहय, सर्वसिद्धि सम्पत्ति-सौख्यं कुरू कुरू स्वाह।

#भक्तामर

26/01/2021

मनुष्य संस्कारों से श्रावक बनता है

#अंतर्मुखी
#मुनिपूज्यसागर




22/01/2021

भक्तामर काव्य- 24

त्वा-मव्ययं विभु-मचिंत्य-मसंखय-माद्यं,
ब्रह्माण-मीश्वर-मनंत-मनंग केतुम् ।
योगीश्वरं विदित-योग-मनेक-मेकं,
ज्ञान-स्वरूप-ममलं प्रवदंति संतः ॥

भक्तामर के 24वें काव्य की आराधना करने से सिर की पीड़ा और सफेद दाग दूर होते है।

इस काव्य को सिद्ध करने के लिए इस काव्य का यंत्र सामने रखकर गेरुवा कपड़े, गेरुवाआसान, गेरुवा जाप माला से, दीप लगाकर उत्तर दिशा की ओर मुखकर जाप करना चाहिए।

जाप- ऊँ नमः भगवती वड्ढमाण सामिस्ससर्व समीहिंत कुरू कुरू स्वाहा।
ऊँ हृां हृीं हृूं हृौं हृः अ सि आ उ सा झ्रौं झ्रौं स्वाहा।

#मुनिपूज्यसागर
#भक्तामर

03/12/2020

श्रावक:- ‘ऋद्धिधारी मुनियों की आराधना कर कोरोना से स्वयं को बचाएं’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
#कोरोना #मुनिपूज्यसागर

11/10/2020

your guide to life

26/02/2020

#टेंशन से दूर रहना चाहते हैं ?

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