04/06/2025
ॐ शिवगोरक्ष योगी आदेश
।। पगलु वाणी ।।
२८-५-२०२५
आज कल ज्ञान देने की एक नई अलग सी परम्परा शुरू हो गयी है,
बिना जरूरत के भी लोग ज्ञान दे जाते है ।
महाकाली और महाकाल को जाने बिना उनके बारे में ज्ञान दे रहे है,
महाकाल, भैरवनाथ और महाकाली भय और मृत्यु का देवता बता रहे है,
शिव क्या है विष्णु कौन है इनके बारे में भी लोगो के पास अनेक ज्ञान है ।
जो भी शिव, ब्रह्मा और विष्णु में भेद करेगा या किसी भी दैवीय शक्ति के प्रति मन मे हीन भावना रखेगा,
वो साधक तो क्या साधारण भक्त भी कहलाने के योग्य नही है ।
जो भी ईश्वरीय शक्तियां है सभी एक ज्योति से प्रकट है,
संसार के पालन, रक्षण और संचालन हेतु समय समय पर विभिन्न रूप लिए ।
अपने इष्ट में सभी रूपो को आप देख पाएंगे जब आप भेद करना छोड़ देंगे,
हास्य प्रद तो तब लगता है जिसे खुद कोई अनुभव नहीं वो भी ज्ञान दे जाता है ।
जिसकी 7 पुस्तो ने साईकिल ना चलायी हो वो ट्रक ड्राइवर को ड्राइविंग का ज्ञान दे रहा है,
जो ac में रहता हो वो किसान को खेती का ज्ञान दे रहा है ।
और जिसने कभी 15 मिनिट आसन लगा कर जप ना किया हो,
गुरु महिमा क्या, गुरुमंत्र क्या वो जन्मजात सिद्ध तंत्र का ज्ञान दे रहे है ।
ज्ञान देने से पहले खुद अनुभव करे,
कॉपी पेस्ट, गूगल बाबा, fb, व्हाट्सएप्प से अगर ज्ञान मिलता तो हर घर में सिद्ध होते ।
सोना भी कुंदन तब बनता है जब वो अग्नि में तपता है,
पाषाड भी मूर्ति तब बनता है जब वो छैनी की चोट सहता है ।
पहले खुद को साधना की अग्नि मे तपाओ,
अनुभव रूपी छैनी की चोट को सहन करो ।
पहले खुद अनुभव प्राप्त करके ज्ञानी बनो फिर किसी अन्य को ज्ञान दो ।
जो ना चले कभी खुद चार कदम वो भी लोगो को राह बताने लगे ।
तैरना सीखने-सिखाने के लिए नदी में उतरना पड़ता है ।।
सब सुख दिए तूने पगलु को फिर भी कुछ तो कमी बाकी है ।
जीने के सारे साधन है जीवन मे बस एक तेरा आना बाकी है ।।
शिवगोरक्ष कल्याण करे ।
शिवशक्ति भक्ति, शक्ति, मुक्ति, सद्बुद्धि दे ।
भैरव उस्ताद सदा सहाय ।।
आदेश😌