15/12/2025
*सोमवार - 15 दिसम्बर 2025 को पौष कृष्ण की एकादशी , जब 8वें तीर्थंकर श्री चन्द्रप्रभ और 23वें तीर्थंकर श्री पारसनाथ जी का जन्म तप कल्याणक।*
*साल में यही एक दिन होता है, जब चार कल्याणक आते हैं।*
*वैसे तो सभी तीर्थंकरों के गुण एक समान होते हैं, पर व्यवहारिक रूप में कुछ अंतर भी दिखाई देते हैं :-*
1. चन्द्रप्रभ श्वेत रंग के, तो पार्श्वनाथ श्याम रंग के।
2. जहां चन्द्रप्रभ की आयु 10 लाख वर्ष पूर्व और एक पूर्व होता है 84 लाख पूर्वांग और एक पूर्वांग 84 लाख वर्ष का यानि आयु इतनी कि आपका केलकुलेटर भी जवाब दे दे। वहीं पारस प्रभु की आयु सिर्फ 100 वर्ष।
3. तीर्थंकर चन्द्रप्रभ का कद 150 धनुष या कहें 900 फुट का था, वहीं पारस प्रभु की ऊंचाई 9 हाथ यानि साढ़े तेरह फीट की।
4. जहां चंद्रप्रभ ने साढ़े 6 लाख वर्ष पूर्व 24 पूर्वांग तक राजपाट किया वहीं पारसप्रभु ने नहीं संभाला अपने पिता विश्वसेन का राज।
5. तीर्थंकर चन्द्रप्रभ ने विवाह किया, वहीं पारस प्रभु बाल ब्रह्मचारी रहे।
6. चन्द्रप्रभ को अध्रुवादि भावनाओं का चिंतवन करने से वैराग्य हुआ, वहीं पारस प्रभु को जाति स्मरण से।
7. जहां चन्द्रप्रभ के साथ एक हजार राजाओं ने भी दीक्षा ली, वहीं पारस प्रभु के साथ 300 ने।
8. चन्द्रप्रभ के तीन माह के तप के बाद केवलज्ञान की प्राप्ति हुई, वहीं पारस प्रभु को चार माह के तप के बाद।
9. चन्द्रप्रभ का समोशरण साढ़े 8 योजन विस्तृत था, वहीं पारस प्रभु का सवा योजन का। एक योजन 12 किमी विस्तृत होता है।
10. जहां चन्द्रप्रभ के समोशरण में 93 गणधर थे, वहीं पारस प्रभु के 10 गणधर थे।
11. दोनों ही तीर्थंकर श्री सम्मेदशिखरजी से मोक्ष गये, पर चन्द्रप्रभ बिल्कुल पूर्व की ललित कूट से, वहीं पारस प्रभु पश्चिम में स्वर्ण भद्रकूट से। वैसे इन दोनों कूट के लिये अब सबसे चौढ़ी सीढ़ियां हैं। केवल पारस प्रभु की स्वर्णभद्र कूट पर दो जगह चरण है।
12. तीर्थंकर चन्द्रप्रभ का तीर्थ काल 90 करोड़ सागर चार पूर्वांग का रहा, इतना लम्बा, वहीं पारस प्रभु का तीर्थकाल सबसे कम 278 वर्ष का रहा।
*ऐसा पावन दिन है पौष कृष्ण एकादशी, 23वें तीर्थंकर का 2703वां जन्म कल्याणक है। ऐसे पावन दिवस की सभी को हार्दिक मंगल शुभ कामनाएँ