08/09/2024
ईश्वरीय मातृत्व
यह माता मरियम का सबसे बडा सौभाग्य था कि ईश्वर ने उन्हें अपनी माँ बनने के लिए चुना। सन 431 में एफेसुस की महासभा में माता मरियम को ’ईश्वर की माता’ नाम से पुकारा गया। लूकस 1:43 में पवित्र आत्मा से प्रेरणा पाकर एलिज़बेथ माता मरियम को “मेरे प्रभु की माँ” कहती हैं। ईश्वर ने इस संसार की सृष्टि की और सब मनुष्यों की भी। परन्तु जब ईश्वर के मनुष्य बनने के लिए एक माँ से जन्म लेना अनिवार्य था, तब इस के लिए उन्होंने अपनी ही एक सृष्टि, नाज़रेथ की मरियम नामक बालिका को चुन लिया। उन्हें ईश्वर ने येसु की माता बनाया। माता मरियम ने येसु को अपने गर्भ में स्वीकार किया, उन्हें जन्म दिया, उन्हें दूध पिलाया, पालन-पोषण किया तथा आवश्यक शिक्षा प्रदान की। लूकस 2:51 हमें बताता है कि बालक येसु माता मरियम और संत यूसुफ के “साथ नाज़रेत गये और उनके अधीन रहे।” येसु ईश्वर हैं। परन्तु उन्होंने माता मरियम से जन्म लिया। फिलिप्पियों 2:7-8 में हम पढ़ते हैं, “उन्होंने दास का रूप धारण कर तथा मनुष्यों के समान बन कर अपने को दीन-हीन बना लिया और उन्होंने मनुष्य का रूप धारण करने के बाद मरण तक, हाँ क्रूस पर मरण तक, आज्ञाकारी बन कर अपने को और भी दीन बना लिया।“ इब्रानियों 2:17 में बताया गया है कि “यह आवश्यक था कि वह सभी बातों में अपने भाइयों के सदृश बन जायें”। इब्रानियों 4:15 के अनुसार “पाप के अतिरिक्त अन्य सभी बातों में उनकी परीक्षा हमारी ही तरह ली गयी है”। इस का अर्थ यह भी निकलता है कि अन्य बच्चों की तरह माता-पिता का आदर करना और उनकी आज्ञाओं का पालन करना उन के लिए भी लागू था। माता मरियम को ईश्वर की माँ कह कर हम माता मरियम को ईश्वर से ज़्यादा महत्व नहीं देते हैं। ईश्वर ने ही उन्हें अपनी माँ बनने की कृपा प्रदान की थी। परन्तु ईश्वर ने जिन को अपनी माता कहना चाहा, उन से ईशमाता का गौरव कौन छीन सकता है? संत पापा पीयुस ग्यारहवें ने अक्वीनो के संत थॉमस की शिक्षा को सही ठहराते हुए कहा कि ईश्वर की माता होने के नाते माता मरियम को ईश्वर की असीम भलाई से एक प्रकार की असीम गरिमा प्राप्त है।