28/05/2026
*बूढ़ा केदारनाथ धाम के:*
प्रधान पुजारी
*श्री अमरनाथ जी रावल*
* शिवलोक की अनंत यात्रा*
बूढ़ाकेदारनाथ धाम आज अपने एक ऐसे तपस्वी साधक को खोकर शोक में डूब गया है, जिसने अपना सम्पूर्ण जीवन बाबा बूढ़ा केदारनाथ जी की सेवा, साधना और शिवभक्ति को समर्पित कर दिया।
ब्रह्मलीन पूज्य स्व. श्री अमरनाथ जी रावल अब इस नश्वर संसार से विदा लेकर शिवलोक की अनंत यात्रा पर प्रस्थान कर चुके हैं।
उनका जाना केवल एक पुजारी का देहावसान नहीं, बल्कि बूढ़ाकेदार क्षेत्र की आध्यात्मिक चेतना का मौन हो जाना है। वर्षों तक बाबा बूढ़ा केदारनाथ जी के दिव्य शिवलिंग की अखंड सेवा करने वाले इस महान साधक ने अपनी तपस्या, त्याग और भक्ति से असंख्य श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट स्थान बनाया।
स्व. श्री अमरनाथ जी केवल मंदिर के पुजारी नहीं थे, वे शिवभक्ति की जीवंत प्रतिमा थे। उनकी साधना इतनी कठोर और अलौकिक थी कि कुछ वर्ष पूर्व नवरात्रि के दौरान उन्होंने अपनी जटाओं और कंधों में हरियाली उगाकर अद्भुत तप का परिचय दिया। नौ दिनों तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए, बिना दैनिक क्रियाओं के, वे अखंड साधना में लीन रहे। यह दृश्य लोगों के लिए केवल आश्चर्य नहीं, बल्कि साक्षात शिवशक्ति का अनुभव था।
गांव में जब भी शिवपुराण, रामलीला अथवा पांडव लीला का मंचन होता, तब उनका शिवस्वरूप सभी को मंत्रमुग्ध कर देता था। विशेषकर जब वे “शिव तांडव” करते, तो ऐसा प्रतीत होता मानो स्वयं महादेव धरती पर अवतरित हो गए हों। उनकी तेजस्विता, भाव-भंगिमाएँ और दिव्य आभा हर दर्शक को भक्ति और श्रद्धा से भर देती थीं।
बूढ़ाकेदारनाथ जैसे अद्भुत और प्राचीन धाम की सेवा में उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका शांत स्वभाव, विनम्रता, भक्तों के प्रति स्नेह और बाबा के प्रति अटूट समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
उनकी कमी इस क्षेत्र को हमेशा महसूस होगी, क्योंकि ऐसे संत और साधक युगों में जन्म लेते हैं।
नाथ संप्रदाय और दर्शनी योगी परंपरा के अनुसार “कानफाड़े नाथ” साधकों का दाह संस्कार नहीं, बल्कि समाधि संस्कार किया जाता है। इसी पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए पूज्य स्व. श्री अमरनाथ जी रावल को पूर्ण वैदिक विधि-विधान, मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मंदिर परिसर में समाधि दी गई।
भोलेनाथ से प्रार्थना है कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार, अनुयायियों और समस्त क्षेत्रवासियों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
🙏 पुण्यात्मा को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏
ॐ नमः शिवाय
ॐ शांति: शांति: शांति: