बूढ़ाकेदार नाथ उत्तराखण्ड

बूढ़ाकेदार नाथ उत्तराखण्ड ॐ नमः शिवाय ।।।
ॐ नमः वृद्ध केदारेश्वराय ।।।
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उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। बदरी, केदार, गंगोत्री और यमुनोत्री चार धामों के यहां स्थित होने से यह देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है, लेकिन राज्य में ऐतिहासिक, पौराणिक मंदिरों की परंपरा इन्हीं चार धामों पर खत्म नहीं होती, बल्कि यहां कई ऐसे मंदिर स्थित हैं, जिनका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक है टिहरी जनपद स्थित बूढ़ाकेदार।उत्तराखण्ड में बूढ

़ाकेदार का एक ऐतिहासिक महत्व है। यहाँ पर बूढ़ा केदार बाबा का पौराणिक मंदिर है, जिसके दर्शन करने आज भी सैकड़ों पैदल तीर्थ यात्री हर साल आते हैं। जब तक उत्तराखण्ड में सड़कों का विकास नहीं हुआ था, तीर्थयात्रियों के लिये बूढ़ाकेदार का एक महत्वपूर्ण स्थान रहता था।सड़कों के विकास के साथ तीर्थयात्री भी सुविधाभोगी बने और उनका बूढ़ाकेदार आना कम हुआ। ऐसा एक स्थानीय बुजुर्ग बता रहे थे। पहले यमुनोत्री, गंगोत्री के बाद तीसरा धाम केदारनाथ माना जाता था। बूढ़ाकेदार के बारे में कहते हैं कि बाबा केदार यहाँ कुछ समय तक रुके थे। किसी बंगाली रचनाकार ने बूढ़ाकेदार को ‘सागरमाथा’ नाम देकर अलंकृत किया है।भिलंगना ब्लाक में कई ऐसे पर्यटक स्थल है जो नैसर्गिक सुंदरता से परिपूर्ण होने के साथ ही धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बूढ़ाकेदार के निकट महासरताल बुग्यालों और तालों का अनोखा संगम है, जो बरबस ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यह पर्यटक स्थल आज भी उपेक्षित है।बूढ़ाकेदार से 9 किमी पैदल उत्तर दिशा में 33 सौ मीटर की ऊंचाई पर स्थित महासरताल पर्यटक स्थल के साथ-साथ बालगंगा घाटी के 27 गांवों का पौराणिक धार्मिक स्थल भी है।'महासरताल' की लम्बाई 80 मीटर व चौड़ाई 35 मीटर से भी अधिक है। इस ताल के दक्षिण में एक और ताल है जो माहेश्वरी ताल के नाम से विख्यात है। भाद्र मास व गंगा दशहरे के दिन स्थानीय लोग अपने देवी-देवताओं की डोलियां यहां स्नान के लिए लाते है। गंगा दशहरा पर यहां मेला भी आयोजित किया जाता है।यह इस लिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां से पांडव सहस्त्रताल होते हुए स्वर्गारोहण गए थे। महासरताल के समीप ही पांडव डोखरी नामक स्थान है, यहां से धर्म गंगा निकलती है। पुराणों से ज्ञात होता है कि यह नदी धर्मराज की देन है। स्थानीय लोग पांच महीने के लिए अपने मवेशियों के साथ यहां पर छान बनाकर रहते है।सभी खूबियां समेटे यह स्थल प्रचार-प्रसार व सुविधाओं के अभाव में आज भी उपेक्षित है। यदि इस पर्यटक स्थल को विकसित किया जाए तो यहां पर पर्यटन की अपार संभावनाएं है।

28/05/2026

*बूढ़ा केदारनाथ धाम के:*
प्रधान पुजारी
*श्री अमरनाथ जी रावल*
* शिवलोक की अनंत यात्रा*
बूढ़ाकेदारनाथ धाम आज अपने एक ऐसे तपस्वी साधक को खोकर शोक में डूब गया है, जिसने अपना सम्पूर्ण जीवन बाबा बूढ़ा केदारनाथ जी की सेवा, साधना और शिवभक्ति को समर्पित कर दिया।
ब्रह्मलीन पूज्य स्व. श्री अमरनाथ जी रावल अब इस नश्वर संसार से विदा लेकर शिवलोक की अनंत यात्रा पर प्रस्थान कर चुके हैं।

उनका जाना केवल एक पुजारी का देहावसान नहीं, बल्कि बूढ़ाकेदार क्षेत्र की आध्यात्मिक चेतना का मौन हो जाना है। वर्षों तक बाबा बूढ़ा केदारनाथ जी के दिव्य शिवलिंग की अखंड सेवा करने वाले इस महान साधक ने अपनी तपस्या, त्याग और भक्ति से असंख्य श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट स्थान बनाया।

स्व. श्री अमरनाथ जी केवल मंदिर के पुजारी नहीं थे, वे शिवभक्ति की जीवंत प्रतिमा थे। उनकी साधना इतनी कठोर और अलौकिक थी कि कुछ वर्ष पूर्व नवरात्रि के दौरान उन्होंने अपनी जटाओं और कंधों में हरियाली उगाकर अद्भुत तप का परिचय दिया। नौ दिनों तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए, बिना दैनिक क्रियाओं के, वे अखंड साधना में लीन रहे। यह दृश्य लोगों के लिए केवल आश्चर्य नहीं, बल्कि साक्षात शिवशक्ति का अनुभव था।

गांव में जब भी शिवपुराण, रामलीला अथवा पांडव लीला का मंचन होता, तब उनका शिवस्वरूप सभी को मंत्रमुग्ध कर देता था। विशेषकर जब वे “शिव तांडव” करते, तो ऐसा प्रतीत होता मानो स्वयं महादेव धरती पर अवतरित हो गए हों। उनकी तेजस्विता, भाव-भंगिमाएँ और दिव्य आभा हर दर्शक को भक्ति और श्रद्धा से भर देती थीं।

बूढ़ाकेदारनाथ जैसे अद्भुत और प्राचीन धाम की सेवा में उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका शांत स्वभाव, विनम्रता, भक्तों के प्रति स्नेह और बाबा के प्रति अटूट समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
उनकी कमी इस क्षेत्र को हमेशा महसूस होगी, क्योंकि ऐसे संत और साधक युगों में जन्म लेते हैं।

नाथ संप्रदाय और दर्शनी योगी परंपरा के अनुसार “कानफाड़े नाथ” साधकों का दाह संस्कार नहीं, बल्कि समाधि संस्कार किया जाता है। इसी पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए पूज्य स्व. श्री अमरनाथ जी रावल को पूर्ण वैदिक विधि-विधान, मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मंदिर परिसर में समाधि दी गई।

भोलेनाथ से प्रार्थना है कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार, अनुयायियों और समस्त क्षेत्रवासियों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

🙏 पुण्यात्मा को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏
ॐ नमः शिवाय
ॐ शांति: शांति: शांति:

दुखद समाचार बूढ़ाकेदार नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी योगी श्री अमरनाथ जी रावल जी का कल रात दि 26 मई को आकस्मिक निधन गया है। ...
27/05/2026

दुखद समाचार बूढ़ाकेदार नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी योगी श्री अमरनाथ जी रावल जी का कल रात दि 26 मई को आकस्मिक निधन गया है। प्रभु की यही इच्छा थी ।जिनको कल दिन 28 मई को उनके पुत्रों के स्वदेश लोटने पर श्री रावल जी को मंदिर प्रांगण पर समाधि दी जाएगी। ईश्वर दिवंगत पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें.. ओम शांति ओम 🙏😔💔🌹🙏

25/05/2026

आप सभी को गंगा दशहरा की शुभकामनाये ।🙏

18/05/2026

स्वर्ग सम्मान छा थाती बूढ़ाकेदार

Jya Baba Budhakedar
17/05/2026

Jya Baba Budhakedar

27/04/2026

जय बाबा बूढ़ाकेदारनाथ जय श्री गुरु कैलापीर जय माँ काली 🙏🙏🙏

23/04/2026

🙏🙏🙏

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Tehri-Garhwal
249125

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