बूढ़ा केदार नाथ धाम

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🚩श्री बूढा केदार नाथ🚩

🚩॥ जयति जयति देव:
🚩बालखिल्य समस्तम्🚩
🚩 ॥ जयति जयति देव:
🚩 बृद्धकेदार मीश।🚩

सनातन धर्म में पंचतत्व
03/02/2026

सनातन धर्म में पंचतत्व

 #दुखद  #समाचार 🥲 नहीं रहे  #पूर्व  #विधायक  #बलबीर  #सिंह  #नेगी । #टिहरी/ #घनसाली  #विधानसभा क्षेत्र के  #भगवान  #बाबा...
26/01/2026

#दुखद #समाचार 🥲
नहीं रहे #पूर्व #विधायक #बलबीर #सिंह #नेगी ।
#टिहरी/ #घनसाली #विधानसभा क्षेत्र के #भगवान #बाबा #बूढ़ाकेदारनाथ की #धरती में जन्मे #सामाजिक और #राजनैतिक क्षेत्र की महान #हस्ती #बलवीर सिंह नेगी जी लंबी #बीमारी के बाद आज उनका #कैलाश #अस्पताल में निधन हो गया।
#परमपिता #परमात्मा #दिवंगत आत्मा को अपने श्री #चरणों में जगह दे शोकाकुल #परिवार एवं इष्ट मित्रों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
#ॐ #शांति🥲🥲

बाबा बूढ़ाकेदार नाथ धाम में वर्ष की पहली बर्फ़बारीउत्तराखंड की पावन भूमि पर स्थित बाबा बूढ़ाकेदार नाथ धाम में जब वर्ष की...
24/01/2026

बाबा बूढ़ाकेदार नाथ धाम में वर्ष की पहली बर्फ़बारी
उत्तराखंड की पावन भूमि पर स्थित बाबा बूढ़ाकेदार नाथ धाम में जब वर्ष की पहली बर्फ़बारी होती है, तो पूरा क्षेत्र अलौकिक और दिव्य आभा से भर उठता है। हिमालय की गोद में बसे इस प्राचीन धाम पर सफ़ेद बर्फ़ की चादर ऐसे बिछ जाती है मानो स्वयं प्रकृति बाबा के चरणों में श्रद्धा अर्पित कर रही हो। चारों ओर शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
पहली बर्फ़बारी श्रद्धालुओं के लिए केवल प्राकृतिक दृश्य नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक होती है। मान्यता है कि इस समय बाबा बूढ़ाकेदार की विशेष कृपा भक्तों पर बरसती है। बर्फ़ से ढके पहाड़, मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि और “बोल बाबा बूढ़ाकेदार नाथ की जय” के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यह दृश्य मन को शांति देता है और आत्मा को ईश्वर के और निकट ले जाता है।
बाबा बूढ़ाकेदार नाथ से यही प्रार्थना है कि वे सभी श्रद्धालुओं पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें, देश-प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। वर्ष की पहली बर्फ़बारी के इस पावन अवसर पर बाबा सभी के जीवन को शुद्ध, शांत और मंगलमय करें।
जय बाबा बूढ़ाकेदार नाथ 🙏

🕉️ नंदा राजजात यात्रा का इतिहासनंदा राजजात उत्तराखंड की सबसे प्राचीन, कठिन और पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है। यह य...
10/01/2026

🕉️ नंदा राजजात यात्रा का इतिहास
नंदा राजजात उत्तराखंड की सबसे प्राचीन, कठिन और पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है। यह यात्रा देवी नंदा (पार्वती) को समर्पित है, जिन्हें कुमाऊँ–गढ़वाल क्षेत्र में हिमालय की लोकदेवी और कुलदेवी माना जाता है। यह यात्रा लगभग 12 वर्षों में एक बार आयोजित होती है और इसे हिमालय का कुम्भ भी कहा जाता है।
📜 पौराणिक पृष्ठभूमि
पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी नंदा को उनके मायके गढ़वाल से ससुराल (कैलाश पर्वत) विदा करने की परंपरा से नंदा राजजात जुड़ी है।
देवी नंदा को राजा दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी माना जाता है।
लोकमान्यता है कि हर 12 वर्ष में देवी नंदा अपने मायके आती हैं और फिर भव्य यात्रा के साथ उन्हें कैलाश की ओर विदा किया जाता है।
इसी विदाई की स्मृति में यह कठिन पदयात्रा आयोजित होती है।
🏔️ ऐतिहासिक परंपरा और राजजात
“राजजात” शब्द का अर्थ है राजकीय यात्रा।
मान्यता है कि इस यात्रा की शुरुआत गढ़वाल के कत्यूरी राजाओं के काल में हुई।
बाद में चंद वंश और गढ़वाल नरेशों ने इस यात्रा को संरक्षण दिया।
यात्रा की परंपरा लगभग 1000 वर्षों से अधिक पुरानी मानी जाती है।
🐏 चार सींग वाला मेढ़ा (चौंसिंगा)
नंदा राजजात की सबसे अनोखी विशेषता है—
यात्रा के साथ चलने वाला चार सींग वाला मेढ़ा (चौंसिंगा)।
यह मेढ़ा देवी नंदा का प्रतीक माना जाता है।
यात्रा के अंत में यह मेढ़ा रूपकुंड के निकट अदृश्य हो जाता है, जिसे देवी की कैलाश-विदाई का संकेत माना जाता है।
🚶‍♂️ यात्रा मार्ग
नंदा राजजात यात्रा का प्रमुख मार्ग इस प्रकार है—
नौटी गाँव (चमोली) → कांसुवा → सेम → पातर नचौनी → रूपकुंड → होमकुंड
यह यात्रा लगभग 280–300 किलोमीटर लंबी होती है।
दुर्गम हिमालयी दर्रे, ग्लेशियर और ऊँचे पहाड़ी रास्ते इस यात्रा को अत्यंत कठिन बनाते हैं।
🧿 धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
यह यात्रा गढ़वाल और कुमाऊँ की साझा सांस्कृतिक विरासत है।
इसमें लोकनृत्य, लोकगीत, जागर, ढोल-दमाऊ और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।
हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में सम्मिलित होते हैं।
🕰️ प्रमुख नंदा राजजात यात्राएँ
ऐतिहासिक रूप से प्रमुख यात्राएँ: 1905, 1929, 1953, 1976, 1987, 2000, 2014
अगली पूर्ण नंदा राजजात यात्रा अपेक्षानुसार 2026–2027 के आसपास मानी जाती है (पंचांग गणना पर निर्भर)।
🌸 निष्कर्ष
नंदा राजजात केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि हिमालयी समाज की आस्था, परंपरा और प्रकृति-पूजन का जीवंत प्रतीक है। यह यात्रा उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, इतिहास और देवी-भक्ति की अद्भुत मिसाल है।

जातिवाद में बांटने वाले भाजपाई हिंदू राष्ट्र बनायेंगे जातिवाद का जहर घोलकर हिंदूओं को बांट रही है भाजपा अंकिता भंडारी हत...
29/12/2025

जातिवाद में बांटने वाले भाजपाई हिंदू राष्ट्र बनायेंगे जातिवाद का जहर घोलकर हिंदूओं को बांट रही है भाजपा अंकिता भंडारी हत्याकांड में जातिवाद कहां से आ गया हम तो न्याय की बात कर रहे हैं जिन भाजपा नेताओं पर आरोप लग रहे हैं हम तो उनकी सीबीआई की जांच की मांग कर रहे हैं मिडिया में जबाब तो दे नहीं पा रहे हैं भागते नजर आ रहे हैं भाजपा अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले को जातिवाद रूप देकर मुद्दे से भटकाकर वीवीआईपी को बचाने की साज़िश कर रही है जिस तरह अंकिता भंडारी हत्याकांड में शुरूआत से ही जो आशंका थी वहीं आज तक भी देखने को मिल रही है जिस तरह बुलडोजर चलवाकर साक्ष्य मिटाये गये केस कमजोर किया गया यह किसके इशारे पर हुआ वहां वीवीआईपी कौन था मुख्य आरोपी भाजपा नेता विनोद आर्या का पुत्र निकलना उस गरीब परिवार और उसके बुढ़े मां बाप को न्याय के लिए दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया किस तरह उस भाई आशुतोष जो इस केस में अंकिता के लिए न्याय की लड़ाई के लिए पहाड़ बनकर इनके सामने खड़ा रहा भाजपा का शोषण सहन किया फर्जी मुकदमे झेले आज भाजपा पर एक उस गरीब बेटी और परिवार का श्राफ लग गया है जो अपने परिवार की रोजी रोटी के लिए मेहनत कर रही थी अंकिता भंडारी हत्याकांड में जितने भी लोग शामिल होंगे चाहे भाजपा के हों कोई भी हो उत्तराखंड कभी तुम्हे माफ नहीं करेगा और ना ही छोड़ेगा और कितने गटू भटु फटु हैं भाजपा में सबके चेहरे उजागर होने चाहिए और इनकी सीबीआई जांच होनी चाहिए!
राजपुर विधायक खजान दास शर्म करो शर्म नही तो डूब मरो!



23/12/2025

#अपने ही अपने बन गये #खून के प्यासे #मानवता मर गयी है
#लस्याल #गांव की घटना #घनसाली #टिहरी #गढ़वाल #उतराखंड

04/12/2025

#दुखदघटना
#पौडी शहर के निकट #सत्याख़ाल बाजार के पास #गजल्ड गावं में आज सुबह एक व्यक्ति को गुलदार ने बनाया निवाला
#वनविभागउतराखंड

28/11/2025

#उत्तरकाशी के #सेम #नागराजा देवता मेले में रवांई घाटी की #लोक- #सांस्कृतिक विरासत—रातभर चलता #सामूहिक #नृत्य और भक्ति का अनूठा मिलन #मंदिर #

21/11/2025
21/11/2025

#मूर्ति और #मंदिर से
नफरत करने वाले अवश्य सुने

बूढ़ा केदार में धूमधाम से मनाई गई गुरु कैलापीर दीपावली बग्वाल, जानें चंपावत से कनेक्शन- बूढ़ा केदार धाम में इस वर्ष भी ग...
21/11/2025

बूढ़ा केदार में धूमधाम से मनाई गई गुरु कैलापीर दीपावली बग्वाल, जानें चंपावत से कनेक्शन- बूढ़ा केदार धाम में इस वर्ष भी गुरु कैलापीर दीपावली बग्वाल का भव्य आयोजन बड़ी आस्था और उत्साह के साथ हुआ. कार्तिक दीपावली के ठीक एक माह बाद मनाई जाने वाली गुरु कैलापीर बग्वाल क्षेत्र की अनोखी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा है, जो हर वर्ष स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है.
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वीडियो के साथ पूरी खबर का लिंक- https://www.etvbharat.com/hi/state/guru-kailapir-diwali-bagwal-was-celebrated-with-great-pomp-in-budha-kedar-tehri-garhwal-uttarakhand-news-uts25112002831

21/11/2025

टिहरी जिले के भिलंगना विकासखंड के बूढ़ा केदार धाम में इस साल भी गुरु कैलापीर दीपावली बग्वाल का भव्य आयोजन हुआ। भिंलगना ब्लॉक के बूढ़ाकेदार में मंगशीर पर्व गुरु कैलापीर बग्वाल धूमधाम से मनाया जाता है।

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