Biblical Vichaar

Biblical Vichaar “अहा, परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गम्भीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!” (रोमियों 11:33)

 ी_बनते_हैं_जिसका_अनुसरण_करते_हैं“वे व्यर्थता के पीछे चले और व्यर्थ हो गए” (2 राजाओं 17:15)प्राचीन काल से लेकर आज तक यह ...
18/07/2026

ी_बनते_हैं_जिसका_अनुसरण_करते_हैं

“वे व्यर्थता के पीछे चले और व्यर्थ हो गए” (2 राजाओं 17:15)

प्राचीन काल से लेकर आज तक यह सिद्धांत अटल सत्य है। यह वाक्य केवल इस्राएल के इतिहास की घटना नहीं, बल्कि हमारे लिए भी एक गहरी चेतावनी है। इसे #प्रतिबिंब_सिद्धांत (principle of likeness) कहते हैं: हम जिसका अनुसरण करते हैं, वैसा ही बनते जाते हैं।

मूर्तिपूजा का रूप पहले शाब्दिक था — सुनहरी बछड़ों, Baal और Asherah जैसी मूर्तियों की पूजा। लेकिन इसके व्यापक अर्थ में मूर्तिपूजा वह है जिसमें हम किसी भी वस्तु, व्यक्ति या विचार को परमेश्वर के स्थान पर रख देते हैं।

आज के युग की आधुनिक मूर्तियाँ अधिक सूक्ष्म और खतरनाक हैं — #धन, #शक्ति, #प्रसिद्धि, #कामुकता, #सोशल_मीडिया, #राजनीतिक_विचारधाराएँ, और #अपनी_स्वयं_की_इच्छाएँ। ये सब “hebel” (व्यर्थ, खोखले) हैं, जो आकर्षक तो लगते हैं, पर अंत में खाली कर देते हैं।

जब हम इनके पीछे भागते हैं तो धीरे-धीरे खाली, उदास, व्यसनी और उद्देश्यहीन हो जाते हैं। इसके ठीक विपरीत, सच्ची उपासना — जीवित परमेश्वर की उपासना — हमें आत्मीयता से भर देती है और परमेश्वर की महिमा के प्रतिबिंब में रूपांतरित कर देती है।

प्रभु यीशु मसीह में विश्वास द्वारा हम रोमियों 12:1-2 और कुलुस्सियों 3:1-10 के अनुसार इस संसार के व्यर्थ रीति-रिवाजों से अलग होकर नये मन और नये स्वभाव को प्राप्त करते हैं।

िचार_कीजिए: आप किसके पीछे चल रहे हैं? आपकी दैनिक प्राथमिकताएँ आपको किसके समान बना रही हैं? याद रखें — आपकी प्राथमिकताएँ आपको या तो परमेश्वर की समानता की ओर ले जाएँगी, या खोखलेपन की ओर।

"जिस हृदय में कड़वाहट बसती है, वहाँ क्षमा नहीं टिकती; और जिस जीवन में बैर-भाव की जंजीरें पड़ी होती हैं, वहाँ मसीह का राज...
08/07/2026

"जिस हृदय में कड़वाहट बसती है, वहाँ क्षमा नहीं टिकती; और जिस जीवन में बैर-भाव की जंजीरें पड़ी होती हैं, वहाँ मसीह का राज्य नहीं स्थापित हो सकता।"

"सब प्रकार की कड़वाहट, प्रकोप, क्रोध, कलह, निन्दा और बैर-भाव समेत तुम सबसे दूर हो जाए।" – इफिसियों 4:31

प्रिय मसीही मित्रों,
जीवन में कई बार ऐसे कठिन अनुभव आते हैं जो हमारे हृदय में कड़वाहट, क्रोध और बैर-भाव का बीज बो देते हैं। किसी के कटु शब्द, विश्वासघात, अन्याय या व्यवहार के कारण हमारा हृदय धीरे-धीरे कठोर होता जाता है। परन्तु परमेश्वर अपने बच्चों के लिए यह नहीं चाहता कि वे इन भावनाओं की गुलामी में जकड़े रहें।

#कड़वाहट_हृदय_को_विषैला_बना_देती_है : कड़वाहट सबसे पहले हमें ही नुकसान पहुँचाती है। यह हमारी आत्मिक शांति, प्रार्थना के जीवन, आराधना और परमेश्वर के साथ घनिष्ठ संबंध को नष्ट कर देती है। कड़वाहट एक जहर की तरह फैलती है और न केवल हमारे हृदय को, बल्कि हमारे आस-पास के लोगों को भी प्रभावित करती है।

#इब्रानियों 12:15 चेतावनी देता है: “देखो, कहीं ऐसा न हो कि कोई कड़वाहट की जड़ फूट निकले और उससे बहुत लोग अशुद्ध हो जाएँ।”

#क्रोध_और_प्रकोप_विनाश_का_मार्ग_खोलते_हैं : अनियंत्रित क्रोध हमें ऐसे शब्द और कार्य करने को विवश कर देता है जिनका बाद में गहरा पछतावा होता है। शैतान इसी क्रोध का उपयोग करके हमें पाप में फँसाना चाहता है। जब हम क्रोध को पकड़कर रखते हैं, तो हम परमेश्वर की शांति और आशीष को स्वयं खो देते हैं।

#इफिसियों 4:26-27 कहता है: “क्रोध करो, परन्तु पाप मत करो; सूर्यास्त होने तक अपना क्रोध बने न रहने दो, और न शैतान को स्थान दो।”

#निन्दा_और_कलह_कलीसिया_तथा_परिवार_को_तोड़_देते_हैं : परमेश्वर चाहता है कि हमारे शब्द दूसरों को उठाएँ, न कि गिराएँ। निन्दा, चुगली, कटु आलोचना और कलह प्रेम को नष्ट कर देते हैं तथा मसीही समुदाय को कमजोर बनाते हैं। हमारा जीवन मेल-मिलाप, दया, नम्रता और शांति का जीवन होना चाहिए, न कि विभाजन और कलह का।

#इफिसियों 4:29 हमें निर्देश देता है: “कोई गन्दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, परन्तु जैसी बात सुनने वालों के लिए अनुग्रह का कारण हो, वैसी ही अच्छी बात तुम्हारे मुंह से निकले...”

#बैर_भाव_को_छोड़ना_ही_सच्ची_स्वतंत्रता_है : क्षमा करना केवल दूसरे व्यक्ति को मुक्त करना नहीं है, बल्कि स्वयं को भी जंजीरों से छुड़ाना है। जब हम बैर-भाव को पकड़े रहते हैं, तो हम खुद ही कैद में रहते हैं। यीशु मसीह ने क्रूस पर अपने शत्रुओं के लिए भी प्रार्थना की — “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।”

#मत्ती 6:14-15 में यीशु मसीह स्वयं कहते हैं: “यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा; परन्तु यदि तुम क्षमा न करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा नहीं करेगा।”

ीह_जैसा_जीवन_अपनाइए : परमेश्वर हमें केवल बुराई त्यागने के लिए नहीं बुलाता, बल्कि उसकी जगह अच्छाई से भरने के लिए बुलाता है। जब मसीह हमारे हृदय का राजा बनता है, तब कड़वाहट की जगह प्रेम, क्रोध की जगह शांति, और बैर-भाव की जगह क्षमा का राज्य स्थापित होता है।

#इफिसियों 4:32 कहता है: “एक दूसरे पर कृपालु और करुणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए हैं, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।”

प्रिय मित्रों, परमेश्वर चाहता है कि हम मसीह यीशु में सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त करें और उसके प्रेम से भरे हुए जीवन जिएँ।
जब हम अपने सारे क्रोध, कड़वाहट, निन्दा, कलह और बैर-भाव को को छोड़ते हैं, तब पवित्र आत्मा हमारे हृदय को प्रेम, आनंद, शांति और सच्ची स्वतंत्रता से भर देता है।

प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह और शांति आप सभी पर बनी रहे। आमीन! 🙏

03/07/2026

Celebrating my 2nd year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

एक मशहूर कहावत है —  #जैसा_देश_वैसा_भेषप्रिय मसीही मित्रो, नमस्कार। 🙏हम जिस देश के नागरिक होते हैं, हमारी भाषा और वेश-भू...
23/06/2026

एक मशहूर कहावत है — #जैसा_देश_वैसा_भेष

प्रिय मसीही मित्रो, नमस्कार। 🙏
हम जिस देश के नागरिक होते हैं, हमारी भाषा और वेश-भूषा सांस्कृतिक रूप से वैसी ही होती है। लेकिन एक मसीही होने के नाते हमारी असली पहचान और नागरिकता क्या है? पवित्रशास्त्र इस बारे में स्पष्ट कहती है :

ारा_स्वदेश_स्वर्ग_में_है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहाँ से आने की प्रतीक्षा करते हैं। – फिलिप्पियों 3:20

पवित्रशास्त्र के वचन के अनुसार हमारी असली पहचान और नागरिकता स्वर्गीय है, इसलिए हमारी वेश-भूषा, व्यवहार और भाषा स्वर्गीय मूल्यों — अर्थात् शालीनता, श्रद्धा, पवित्रता और आदर — को प्रतिबिंबित करनी चाहिए।

1 तीमुथियुस 2:9-10 में प्रेरित पौलुस कहते हैं : “इसी प्रकार स्त्रियाँ भी शालीन/सुहावने वस्त्रों से अपने आप को संवारे, और... संकोच और संयम के साथ अपने आप को सजाएँ...।”

हमारा वस्त्र हमारे हृदय की अवस्था को बाहर प्रकट करता है। कलीसिया में हम केवल मनोरंजन या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर की उपस्थिति में उसकी महिमा करने के लिए आते हैं।

#वस्त्र_चुनते_या_सजते_संवरते_समय हमें सदा यह स्मरण रखना चाहिए कि — #हमारी_पहचान_स्वर्गीय_है।

अपनी संस्कृति का सम्मान अवश्य करें, किन्तु स्वर्गीय नागरिकता को सर्वोच्च स्थान दें। बाहरी शालीनता तभी सार्थक है, जब वह भीतरी पवित्रता और प्रेम से निकले।

#जैसा_देश_वैसा_भेष – #स्वर्गीय_देश_स्वर्गीय_भेष।

 ी_दरारों_को_सुधारो – (परमेश्वर के दिए संसाधनों का सही उद्देश्य से उपयोग करो)“भवन में जो कुछ टूटा-फूटा है, उसे तुम क्यों...
22/06/2026

ी_दरारों_को_सुधारो – (परमेश्वर के दिए संसाधनों का सही उद्देश्य से उपयोग करो)

“भवन में जो कुछ टूटा-फूटा है, उसे तुम क्यों नहीं सुधारते?” – 2 राजा 12:7

याजक परमेश्वर के मंदिर की मरम्मत के लिए चढ़ावा इकट्ठा तो कर रहे थे, पर उसे उपयोग नहीं कर रहे थे। आलस्य, लापरवाही या व्यक्तिगत लाभ के कारण धन जमा होता रहा, लेकिन मुख्य उद्देश्य अधूरा पड़ा रहा।

राजा योआश ने जवाबदेही मांगी और व्यवस्था बदल दी — धन को पारदर्शी तरीके से (बक्से में डालकर) सीधे कारीगरों को दिया जाने लगा।

#मुख्य_शिक्षा : परमेश्वर के काम के लिए दिए गए संसाधनों (धन, समय, क्षमता) को सिर्फ इकट्ठा करना पर्याप्त नहीं है। हमें उन्हें सही उद्देश्य के लिए जिम्मेदारीपूर्वक, पारदर्शिता और ईमानदारी से उपयोग करना चाहिए।

क्या हम आज अपने जीवन में उन संसाधनों का सही उपयोग कर रहे हैं जो परमेश्वर ने उसके काम के लिए हमें सौंपे हैं?

 #परमेश्वर_हम_पर_भलाई_क्यों_करता_है?“हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!...
19/06/2026

#परमेश्वर_हम_पर_भलाई_क्यों_करता_है?

“हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।” (भजन संहिता 103:1-2)

परमेश्वर की भलाई कोई संयोग नहीं है। यह उसके गहरे प्रेम, अनुग्रह और उद्देश्यपूर्ण योजना का हिस्सा है। 💛

आइए जानें कि वह हम पर बार-बार भलाई क्यों करता है:

#ताकि_हम_उसे_याद_रखें 🕊️
परमेश्वर जानता है कि हम भूलने वाले प्राणी हैं। जब सब कुछ अच्छा चलता है, तब हम अक्सर उसे भूल जाते हैं। इसलिए वह अपनी भलाई के द्वारा हमें बार-बार अपनी ओर खींचता है।

• इस्राएलियों के लिए फसह पर्व एक स्थायी स्मृति चिन्ह था ✝️
• यीशु ने कहा — “यह मेरी याद में किया करो” (लूका 22:19)

पुराने नियम से नया नियम तक परमेश्वर यही चाहता है कि हम उसके उपकारों को ना भूलें। ❤️

#ताकि_हम_कृतज्ञ_होकर_उसकी_महिमा_करें ✨
परमेश्वर की भलाई का सबसे बड़ा उद्देश्य उसकी महिमा है।
काना नगर के विवाह में यीशु मसीह के आश्चर्यकर्म के बाद लिखा है: “उसने अपनी महिमा प्रगट की” (यूहन्ना 2:11)

परमेश्वर की भलाई हमें कृतज्ञ करती है इससे :
- हमारा जीवन उसकी महिमा का दर्पण बन जाता है।
- दूसरे लोग भी परमेश्वर की भलाई देखकर उसकी महिमा करते हैं। 🙌

#ताकि_हमारा_विश्वास_बढ़े_और_हम_नई_सामर्थ्य_पाएँ 🦅
“वही तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिससे तेरी जवानी उकाब के समान नई हो जाती है।” (भजन संहिता 103:5)

जैसे उकाब अपने पुराने पंखों को गिराकर नया पंख (बल) पाता है, ठीक वैसे ही परमेश्वर की भलाई हमारे थके हुए विश्वास को नई ताजगी और सामर्थ्य देती है। 🔥

जब परमेश्वर हम पर भलाई करता है तो वह चाहता है कि :
े_याद_रखें
ी_महिमा_करें
#हमारा_विश्वास_और_बढ़े

“आइए, हम परमेश्वर को धन्य करें और उसके सभी उपकारों को याद रखते हुए उसकी महिमा करें।” 🙏✨

 #प्रिय_मसीही_मित्रों,इस संसार में बहुत से लोग हैं, लेकिन क्या हम सबके साथ एक जैसी घनिष्ठ संगति रख सकते हैं? 🤔परमेश्वर क...
13/06/2026

#प्रिय_मसीही_मित्रों,

इस संसार में बहुत से लोग हैं, लेकिन क्या हम सबके साथ एक जैसी घनिष्ठ संगति रख सकते हैं? 🤔

परमेश्वर का वचन हमारे जीवन के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन देता है। उसमें एक महत्वपूर्ण चेतावनी है: “अविश्वासियों के साथ असमान जूए में न जुतो” – 2 कुरिन्थियों 6:14

#असमान_जुआ (Unequal Yoke) #क्या_है?
जब दो बैल अलग-अलग आकार या ताकत के होते हैं, तो वे एक साथ जुआ में नहीं चल पाते। एक-दूसरे को खींचते हैं, संघर्ष होता है और काम रुक जाता है। ठीक उसी तरह, जब हम अपने जीवन के निकटतम संबंध — विवाह, गहरी दोस्ती, व्यापारिक साझेदारी आदि — उन लोगों के साथ जोड़ते हैं जो परमेश्वर में विश्वास नहीं करते या उसके वचन के अनुसार नहीं चलते, तो आध्यात्मिक संघर्ष शुरू हो जाता है। *असमान जुआ में जुड़ना खतरनाक हो सकता है।* यह हमारे आस्था को कमजोर कर सकता है। यह हमारे जीवन में संघर्ष और दुख पैदा कर सकता है। यह हमें पाप की ओर खींच सकता है।

इस संसार में बहुत से क्रिश्चियन्स भी हैं, जिनमें से कुछ तो हमारे करीबी मित्र या रिस्तेदार भी हो सकते हैं, तो क्या हम उन सभी के साथ घनिष्ठ संगति रख सकते हैं? 🤔

बाइबल इनके बारे में भी स्पष्ट चेतावनी देता है कि – _“यदि कोई व्यक्ति जो खुद को भाई (क्रिश्चियन) कहता हो, लेकिन व्यभिचारी, लोभी, मूर्तिपूजक, गाली देने वाला, पियक्कड़ या ठग हो, तो उसकी संगति मत करो। यहां तक कि उसके साथ खाना भी न खाओ।” (1 कुरिन्थियों 5:11)_

इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए — झूठे शिक्षकों, नैतिक रूप से पतित, लालची, मूर्तिपूजक या जान-बूझकर पाप में जीने वाले विश्वासियों के साथ, चाहे वे हमारे कितने भी करीबी मित्र या रिस्तेदार क्यों ना हो, संगति नहीं करनी चाहिए। #हमें_उन्ही_विश्वासियों_के_साथ_संगति_करनी_चाहिए_जो : प्रेम और पवित्रता में चलते हैं। जो यीशु मसीह की आज्ञाओं का आज्ञाकारी होकर पालन करते हैं। जो पाप से समझौता नहीं करते बल्कि उनसे लड़ते और दूर रहते हैं। जो एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते, मजबूत करते और आध्यात्मिक रूप से ऊपर उठाते हैं।

#जैसा_वचन_में_लिखा_है : _“प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें। और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों-ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों-त्यों और भी अधिक यह किया करो।” (इब्रानियों 10:24-25)_

सच्ची संगति हमें यीशु मसीह के स्वभाव के अधिक निकट लाती हैं। हमारी आस्था को मजबूत करती है। हमें आशीष और शांति का अनुभव करती हैं। जो रास्ता हम चुनेंगे, वही हमारा भविष्य तय करेगा। हम संगति जरूर करें, लेकिन जागरूकता और विवेक के साथ। आइए, हम बुद्धिमानी से चुनें और यीशु मसीह के साथ निकटता से चलें।

 #परमेश्वर_का_वचन_ही_सर्वोच्च_है“तेरा वचन मेरे पाँव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।” (भजन संहिता 119:105...
03/06/2026

#परमेश्वर_का_वचन_ही_सर्वोच्च_है

“तेरा वचन मेरे पाँव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।” (भजन संहिता 119:105)

प्रिय मित्रों,
परमेश्वर ने हमें बहुत सी आशीषें दी हैं — अच्छे पादरी, गहराई भरे उपदेश, ज्ञानवर्धक पुस्तकें, आध्यात्मिक मित्र और ऑनलाइन शिक्षाएँ। ये सब बहुत मूल्यवान हैं। ये हमें प्रोत्साहित करते हैं, और कभी-कभी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ भी लाते हैं। लेकिन इनमें से कोई भी परमेश्वर के पवित्र वचन (बाइबल) से ऊपर नहीं हो सकता।
वचन ही मूल स्रोत है। बाकी सब उसके *व्याख्याकार* मात्र हैं।

#क्यों_हमें_किसी_को_भी_वचन_से_ऊपर_नहीं_रखना_चाहिए?

1. #मनुष्य_गलती_कर_सकता_है :
हर पादरी, लेखक, शिक्षक या मित्र सीमित ज्ञान वाला मनुष्य ही है। चाहे वह कितना ही विद्वान, अनुभवी या प्रभावशाली क्यों न हो, वह गलती कर सकता है।

बाइबल स्वयं उदाहरण देती है — बिरीया के विश्वासी प्रेरित पौलुस जैसे महान उपदेशक के उपदेश को भी रोज़ बाइबल से जाँचते थे। लिखा है– “ये लोग बड़े सन्तोष के साथ वचन ग्रहण करते थे और प्रतिदिन यह देखा करते थे कि कहीं ये बातें सच हैं या नहीं।” (प्रेरितों के काम 17:11)

अगर पौलुस जैसे प्रेरित के उपदेश को भी जाँचा गया, तो हमें भी हरेक उपदेशक के उपदेश को जाँच-परखकर ही स्वीकार करना चाहिए।

2. #भावनाएँ, #लोकप्रियता_और_प्रभाव_भ्रमित_कर_सकते_हैं :
कई बार कोई उपदेश इतना दिल को छू लेता है, संगीत इतना प्रभावशाली होता है, या शिक्षक इतने प्रसिद्ध होते हैं कि हम भावुक हो जाते हैं। लेकिन याद रखिए भावना सत्य की कसौटी नहीं है।

यदि कोई बात, चाहे कितनी ही आकर्षक और “आशीषदायक” क्यों न लगे, यदि वह बाइबल के स्पष्ट शिक्षण से मेल नहीं खाती, तो हमें वचन को चुनना चाहिए — भावनाओं को नहीं। सच्चाई लोकप्रियता पर निर्भर नहीं करती।

3. #सच्चा, #विश्वसनीय_और_शाश्वत_मार्गदर्शन_केवल_वचन_से_ही_आता_है :
जब जीवन में संकट आए, निर्णय लेना हो, आध्यात्मिक उलझन हो, या प्रलोभन खड़ा हो — सबसे पहले और सबसे अधिक हमें परमेश्वर के वचन की ओर मुड़ना चाहिए।

“सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपयोगी भी है उपदेश के लिये, डाँटने के लिये, सुधारने के लिये, और धार्मिकता के लिये अनुशासन सिखाने के लिये।” (2 तीमुथियुस 3:16)

वचन कभी नहीं बदलता, कभी झूठ नहीं बोलता और कभी हमें गुमराह नहीं करता। जो बात परमेश्वर के वचन के विरुद्ध है, वह चाहे कितना भी मनमोहक क्यों न लगे, उसे अस्वीकार कर देना चाहिए। परमेश्वर का वचन ही हमारा एकमात्र अटल और अंतिम मानक है।

आइए हम दृढ़ संकल्प करें कि हम कभी भी किसी मनुष्य, संस्था, प्रवृत्ति या लोकप्रियता को परमेश्वर के वचन से ऊपर स्थान नहीं देंगे। वचन ही हमारा दीपक और मार्गदर्शक बना रहे।

आमीन! 🙏

🔥  #परमेश्वर_का_न्याय_सिंहासन 🔥“क्योंकि हम सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के सामने खड़े होंगे।” (रोमियों 14:10)एक दिन अवश्...
20/05/2026

🔥 #परमेश्वर_का_न्याय_सिंहासन 🔥

“क्योंकि हम सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के सामने खड़े होंगे।” (रोमियों 14:10)

एक दिन अवश्य आएगा जब यह जगत मिट जाएगा और प्रत्येक मनुष्य परमेश्वर के सामने खड़ा होगा। वहाँ कोई छिपने की जगह नहीं होगी — हर विचार, शब्द और कर्म खुलकर सामने आएँगे।

📖 प्रेरित पौलुस कहते हैं : “क्योंकि हम सब को मसीह के न्याय सिंहासन के सामने प्रकट होना अवश्य है, ताकि हर एक अपने शरीर में किए हुए कामों का, चाहे अच्छे हों या बुरे, भुक्तान पाए।” (2 कुरिन्थियों 5:10)

#दो_अत्यंत_महत्त्वपूर्ण_प्रश्न — जो आपके अनंत भविष्य का निर्धारण करेगा :

#पहला_प्रश्न (सभी के लिए) — “तुमने मेरे बेटे यीशु मसीह के साथ क्या किया?”
▪︎ यदि आपने यीशु पर विश्वास किया और उसे अपना उद्धारकर्ता माना — तो आप उद्धार पाएँगे और स्वर्गीय जीवन के भागी बनेंगे।
▪︎ यदि आपने उसे ठुकराया — तो महान श्वेत सिंहासन के न्याय का सामना करना पड़ेगा। (यूहन्ना 14:6; इफिसियों 2:8-9)

#दूसरा_प्रश्न (केवल विश्वासियों के लिए) — “मैंने तुम्हें जो दिया, तुमने उसके साथ क्या किया?”
▪︎ परमेश्वर ने आपको जीवन, समय, प्रतिभा, धन व सुसमाचार दिया। आपने इन्हें किस लिए उपयोग किया?
▪︎ आपके कर्मों का मूल्य आग के दिन परखा जाएगा — सोना/चाँदी/मणियाँ या लकड़ी/घास/भूसा। (1 कुरिन्थियों 3:11-13)

⏰ ा_दिन_उद्धार_का_दिन_है :
परमेश्वर चाहते हैं कि सब उद्धार पायें: “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।” (यूहन्ना 3:16)

🙏 ी_स्वयं_से_यह_प्रश्न_पूछें:
▪︎ क्या मैंने यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता और प्रभु स्वीकार कर लिया है?
▪︎ क्या मैं अब अपना जीवन उसके लिए जी रहा हूँ?

आज जिसके पास सही उत्तर होगा — वह उस दिन आनंद और पुरस्कार के साथ खड़ा होगा। जिसके पास सही उत्तर नहीं होगा — उसके लिए वह दिन, भय और अनंत अलगाव का दिन होगा.

#आपना_निर्णय_आज_लिजिए_कल_पर_मत_टालिए।

🙏

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816129

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