05/10/2026
#परमेश्वर_का_उद्देश्यः #विविधता_में_एकता_और_सहभागिता
📖 "और यरूशलेम में यहूदा और बिन्यामीन के वंशों में से, और एप्रैम और मनश्शे के वंशों में से कितने लोग रहते थे।" — 1 इतिहास 9:3
परमेश्वर की योजना में उनके लोगों की सहभागिता और एकता का विशेष महत्व है। 1 इतिहास 9:3 में हम देखते हैं कि यहूदा और बिन्यामीन के साथ-साथ एप्रैम और मनश्शे के वंशों के लोग भी यरूशलेम में रहते थे। अलग-अलग गोत्रों से होने के बावजूद, वे एक ही स्थान पर निवास कर रहे थे।
यह हमें एक महत्वपूर्ण आत्मिक सच्चाई सिखाता है कि परमेश्वर के उद्देश्य में हमारी पृष्ठभूमि, पारिवारिक पहचान या व्यक्तिगत भिन्नताएँ एकता में बाधा नहीं बननी चाहिए। परमेश्वर अपने लोगों को एक साथ जोड़कर अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए उपयोग करते हैं।
आज भी कलीसिया केवल अलग-अलग विश्वासियों का समूह नहीं, बल्कि मसीह में एक देह है। इसलिए हमें अपनी व्यक्तिगत पसंद, स्वार्थ और मतभेदों से ऊपर उठकर एक-दूसरे के साथ प्रेम, आदर और आत्मिक सहभागिता में बने रहना चाहिए।
#आत्मिक_शिक्षा: परमेश्वर के उद्देश्य में केवल अपना स्थान बनाए रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूसरों के साथ एकता और सहभागिता में रहकर उनकी योजना में विश्वासयोग्य बने रहना भी आवश्यक है।
📌 #विचारणीय_प्रश्न: क्या हम अपनी कलीसिया में केवल अपनी आत्मिक उन्नति के लिए जी रहे हैं, या दूसरों के साथ एकता और सहभागिता में रहकर परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने में भी योगदान दे रहे हैं?
परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर कलीसिया की उन्नति और प्रभु की महिमा के लिए विश्वासयोग्यता से कार्य करें।
आमीन। 🙏