07/09/2024
भरोसा कीजिये तो भरत जी जैसा कीजिये...
किसी पर विश्वास कीजिये, आस्था रखिये तो ऐसी रखिये जैसी भरत जी ने राम जी पर रखी।
रामचरित मानस में एक प्रकरण आता है, जब हनुमान जी कहते हैं-
"सुमिरि पवनसुत पावन नामू।
अपने बस करि राखे रामू।।"
अर्थात, मानस की इस चौपाई में हनुमान जी भगवान श्रीराम जी से कह रहे हैं, "सब कहते हैं कि हनुमानजी ने राम नाम का जाप करके श्री रामजी को अपने वश में कर रखा है। परन्तु, हे प्रभु आज मेरा यह भ्रम टूट गया कि मैं ही सबसे बड़ा भक्त अर्थात राम नाम का जाप करने वाला हूँ।"
हनुमान जी की बात सुनकर प्रभु श्रीराम मुस्कुराकर पूछते हैं, "हे हनुमंत, तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है?!"
हनुमान जी उन्हें बताते हैं, "हे प्रभु, जब मैं संजीवनी बूटी लाने गया था, और संजीवनी बूटी को न पहचानने के कारण पूरा पहाड़ ही उठा कर उड़ा चला आ रहा था, तब भरत जी ने मुझे कोई राक्षस समझकर बाण मारकर गिरा दिया था। पर जब मैंने उन्हें सच्चाई बताई तो वे जरा भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने मुझे ठीक करने के लिए कोई वैध नहीं बुलवाया और न ही कोई बूटी मंगवाई। वे तो अपने स्थान से हिले भी नहीं। उन्होंने वहीं बैठे-बैठे पूर्ण विश्वस के साथ आपको स्मरण किया।"
भरत जी श्रीराम जी को स्मरण करते हुए सम्बोधित करते हैं-
"जौ मोरे मन बच अरू काया।
प्रीति राम पद कमल अमाया।।
तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला।
जौ मो पर रघुपति अनुकूला।।"
अर्थात, भरत जी कहते हैं, "यदि मन वचन और शरीर से श्री राम जी के चरण कमलों में मेरा निष्कपट प्रेम हो और यदि रघुनाथ जी मुझ पर प्रसन्न हों तो यह वानर थकावट और पीड़ा से रहित हो जाए।"
"सुनत बचन उठि बैठ कपीसा।
कहि जय जयति कोसलाधीसा।।"
हनुमान जी श्रीराम जी को बताते हैं, "हे प्रभु, भरत जी के यह वचन सुनते ही मैं राम नाम जपता हुआ ऐसे उठ बैठा, जैसे मुझे कुछ हुआ ही न हो।"
इस घटना से हनुमान जी बहुत प्रभावित हुए। वे बोले, "प्रभु, मुझे संजीवनी बूटी लेने भेजना तो एक बहाना मात्र था। आप मुझे वहां भेजकर मेरी अहंकार रूपी मूर्छा तोड़ना चाहते थे। भरत जी से मिलकर मैंने जाना कि मैं राम नाम तो लेता हूँ, पर भरोसा भरत जी जैसा नहीं करता। भरत जी से मिलकर मेरा यह भ्रम टूट गया कि मुझसे बड़ा रामभक्त और दूसरा कोई नहीं। भरत जी सच्चे रामभक्त हैं। उन्होंने पूरे विश्वास से राम नाम जपा है। मेरे गिरने पर वे जरा भी विचलित नहीं हुए, केवल आपको स्मरण किया, और अपने स्थान पर बैठे-बैठे ही उनका काम बन गया।"
अतः, भरोसा कीजिये तो भरत जी जैसा। भरोसा ईश्वर पर, भरोसा गुरु पर, भरोसा माता-पिता पर, भरोसा मित्रों पर, भरोसा मनुष्यों पर। जब आप निश्छल मन से भरोसा करते हैं, तब ऐसा कभी नहीं होता कि आपके किसी भी कार्य में बाधा आये। और अगर बाधा आ रही है तो आपको अपना आकलन करने की आवश्यकता है, नाकि जिसपर विश्वास किया है उसका...
जय जय राम🙏
#आर्यवर्त