Sat saheb ji.

Sat saheb ji. आत्मा को निरंतर साफ करते रहें,

दुनिया को निरंतर माफ़ करते रहें,

परमात्मा को निरंतर याद करते रहें…

06/09/2024

 #यूनान में एक कथा है। एक बहुत सुंदर युवक हुआ, नार्सीसस। वह इतना सुंदर था कि वह अपने ही प्रेम में पड़ गया। उसने अपनी छां...
04/09/2024

#यूनान में एक कथा है। एक बहुत सुंदर युवक हुआ, नार्सीसस। वह इतना सुंदर था कि वह अपने ही प्रेम में पड़ गया। उसने अपनी छांह देख ली एक सरोवर में। तब दर्पण न रहे होंगे। बहुत पुरानी कथा है। एक सरोवर में अपनी छांह देख ली; इतनी सुंदर थी! निश्चित ही युवक बहुत सुंदर था। फिर बहुत युवतियों ने उस पर अपने तीर फेंके, वे कारगर न हो सकीं। क्योंकि वह जो छांव में उसने देख लिया था वैसा सुंदर फिर उसने किसी को पाया नहीं।

वह भटकता रहा, वह खोजता रहा उस व्यक्ति को, जो उसने देख लिया था सरोवर के भीतर छिपा हुआ। वह घंटों, और दिनों, और महीनों सरोवर के किनारे बैठा रहता और देखता रहता टकटकी लगा कर। पानी में छलांग लगाता, प्रतिबिंब खो जाता; डुबकी मारता, खोजता, कुछ भी न पाता। वहां कुछ था तो नहीं, वहां तो बस प्रतिफलन था, वहां तो सिर्फ प्रतिछाया थी। उसके कूदते ही खो जाती। कहते हैं, नार्सीसस पागल हो गया। सरोवर दर्पण, प्रतिफलन, छलांग लगाना, खोजना; खाना-पीना भूल गया। जंगल-जंगल खोजता फिरा। पहाड़-पहाड़ उसकी आवाज से गूंजने लगे।

जो नार्सीसस की कथा है, वही तुम्हारी कथा है। तुम जिसे खोज रहे हो वह तुम्हारे भीतर छिपा है। हो सकता है किसी की आंख के सरोवर में तुम्हें दिखाई पड़ा हो अपना प्रतिबिंब। हो सकता है किसी के चेहरे पर तुम्हारा प्रतिबिंब दिखाई पड़ा हो। हो सकता है कभी संगीत के माधुर्य में झलक गई हो बात। किसी सुबह सूरज के उगते क्षण में, आकाश के मौन में, पक्षियों के कलरव में, खिलते हुए गुलाब के फूल में तुम्हें दर्पण मिल गया हो। लेकिन जो तुमने देखा है, जो तुमने सुना है, जो तुमने पाया है कहीं भी बाहर, सब खोजियों की खोज एक है कि वह तुम्हारे भीतर छिपा है।

ओशो

चार्वाक दर्शन भारतीय दर्शन परंपरा की नींव की ईंट है,भारत के सभी दर्शन या तो चार्वाक के आक्षेपों से प्रेरित हुए या उस की ...
03/09/2024

चार्वाक दर्शन भारतीय दर्शन परंपरा की नींव की ईंट है,भारत के सभी दर्शन या तो चार्वाक के आक्षेपों से प्रेरित हुए या उस की उन कमियों से जो उन्हें लगा कि उस में हैं या फिर उस के सिद्धांतों को नकारने में लगे रहे,इन दर्शनों में एक भी चीज ऐसी नहीं जो चार्वाक के प्रभाव से मुक्त हो,
चार्वाक ने जड़ से चेतन की उत्पत्ति की बात की और अजरअमर आत्मा के अस्तित्व का खंडन किया,हमारे न्याय दर्शन आदि ग्यारहवीं शताब्दी तक उसे ही जवाब देने के लिए 'आत्मा' को सिद्ध करते रहे,जब अजरअमर आत्मा नहीं,तब न परलोक है,न अच्छे बुरे कर्मों का फल है और न पुनर्जन्म व मोक्ष है तथा न इस सब का अधीक्षक परमात्मा,हमारे सारे दर्शन,जिन में छह दर्शन ही शामिल नहीं हैं, बल्कि बौद्ध और जैन दर्शन भी शामिल हैं,इन्हीं को ले कर उधेड़बुन में पड़े रहे और उठापटक करते रहे,यदि इस सब को इन दर्शनों से निकाल दिया जाए तो इन के पास कुछ भी नहीं बचेगा.
डा.राधाकृष्णन कहते हैं कि मनुष्य जब अपने पूर्वाग्रहों और धार्मिक अंधविश्वासों से मुक्त हो कर स्वतंत्र मस्तिष्क से चिंतन करने लगता है,तब उस की प्रवृत्ति अनायास भौतिकवाद अर्थात् नास्तिकता की ओर मुड़ जाती है... दार्शनिक समस्याओं को एकमात्र तर्क बुद्धि से कहां तक सुलझाया जा सकता है,इस का सर्वप्रथम समाधान भौतिकवाद में ही मिलता है. (भारतीय दर्शन, भाग-1, पृ. 285) डा. राधाकृष्णन 'बुद्धि से समस्याएं' सुलझाने की बात करते हैं. इस बुद्धि को
संस्कृत में' चार्वी' कहते थे और इस बुद्धि के द्वारा समस्याएं सुलझाने वाले,चिंतन
करने वाले, व्यक्ति को भी 'चार्वी' ही कहा जाता था,इस बद्धि (चार्वी) को चार्वाक और
समस्याएं सुलइराने वाले शास्त्र को 'लोकायत' कहते थे-
....." जनता " #96

03/09/2024

જો તમને ભારતમાં મૂર્તિકલા નાં ઈતિહાસ ને જાણી લેશો તો તમે ભારત નાં તમામ પ્રાચીન મંદિરો ની મૂર્તિ ની ઓળખ કરી શકશો..!!

भारत और नेपाल की तथाकथित हिन्दू धार्मिक पहचान की आयु यद्यपि बहुत नहीं है लेकिन इस धर्म के आधार में मौजूद ब्राह्मणवाद बहु...
03/09/2024

भारत और नेपाल की तथाकथित हिन्दू धार्मिक पहचान की आयु यद्यपि बहुत नहीं है लेकिन इस धर्म के आधार में मौजूद ब्राह्मणवाद बहुत पुरानी चीज है आर्य ब्राह्मणों के रूढ़िवादी आध्यात्मिक तंत्र को हिन्दू पहचान देने का श्रेय मुस्लिम विद्वानों ,और उनमें भी खास कर अल - बेरूनी को जाता है,उसने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ' अल - हिन्द ' लिखी जिसमें इस शब्द को गढ़ा और जिसे हिन्दू राजाओं और आध्यात्मिक ताकतों ने न सिर्फ स्वीकार किया बल्कि अपना बना लिया, ‘ हिन्दू ' पद की उत्पत्ति भी धर्म के किसी पैगम्बर या उसकी किसी धार्मिक रचना से नहीं हुई जैसा कि हम ईसाई धर्म , बौद्ध या इस्लाम धर्म में देखते हैं ईसाई और बौद्ध धर्मों के नाम उनके महान पैगम्बरों ,ईसा मसीह और बुद्ध के नाम पर पड़े,इस्लाम का शाब्दिक अर्थ होता है ‘ ईश्वर की दुनिया 'मुस्लिमों को ' मोहमडन ' शब्द के माध्यम से भी जाना जाता है जो पुनः उनके पैगम्बर के नाम से सम्बद्ध है लेकिन ‘ हिन्दू धर्म ' नाम इस धर्म के अनुयायियों ने बाहर से ग्रहण किया,और इसका कारण रहा ब्राह्मण चिंतको की गैर - रचनात्मकता, यह मध्यकालीन मुस्लिम विद्वानों द्वारा दिया गया नाम है जो सिंध ( हिन्द ) के निवासियों को आदिकालीन बर्बरों के रूप में देखते थे और मानते थे कि उनमें सामाजिक -धार्मिक वयस्कता और सांगठनिकता का भारी अभाव है, मुस्लिम चिंतकों की यह सोच गलत नहीं थी क्योंकि ब्राह्मणों - विषयों की धार्मिक तथा बाजार ताकतों ने इस धर्म का निर्माण ही एक जाति - बोझिल ,रूढ़िवादी , अन्धविश्वासी और बर्बर धर्म के रूप में किया था, इसी कारण उन्होंने इसे नाम भी नकारात्मक भाव के साथ दिया,बावजूद इसके कि आर्य ब्राह्मण - चिंतकों ने इस नाम को सकारात्मक मान कर ग्रहण किया ,तो भी उन्होंने वर्ण
धार्मिक व्यवस्था के विज्ञानविरोधी तथा समानता - विरोधी तत्वों को बदलने की कभी कोशिस नहीं की ,जिसकी रचना खुद उनके अपने हाथों हुई थी,यहाँ तक कि आधुनिक समय में भी उनकी इच्छा इसी राह पर चलते रहने की है.
यह सच्चाई है कि अगर हिन्दू धर्म ने अपनी पहचान को भारतीय -उपमहाद्वीप की दलित बहुजन जनसंख्या के साथ नहीं जोड़े रखा होता तो अफगानिस्तान ,पाकिस्तान और बांग्लादेश की तरह यहाँ भी लोग सामूहिक रूप में इस्लाम की शरण में जा चुके होते, ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में जमने से बहुत पहले आये होते तो भारत में इवेंजेलिकल ईसाई ( जो धार्मिक कर्मकांडों से ज्यादा ईसा या बाइबिल पर विश्वास करते हैं ) मिशनरियों के आगमन के भी पहले यह हो गया होता ,इस्लाम की शरण में जाकर दलित - बहुजन समाज को तो सुकून ही मिलता ,क्योंकि न तो वहां मस्जिद में उनके साथ भेदभाव होता , न ही धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने से उन्हें रोका जाता लेकिन सन 1792 में विलियम केरे के भारत आगमन ने देश के इस्लामीकरण की प्रक्रिया को रोक दिया.
भारत के धार्मिक इतिहास में दूसरी बड़ी घटना इसके 150 वर्ष बाद घटित हुई जब डा. बी .आर . अम्बेडकर ने सन 1956 में नवयान बौद्ध धर्म की स्थापना की अफगानिस्तान ,पाकिस्तान और बांग्लादेश के इस्लामीकरण के बाद ,और केरे के ईसाईकरण और अम्बेडकर के बौद्ध हो जाने के बाद भी ,जो बड़ी जनसंख्या अभी भी हिन्दू धर्म के चंगुल में फंसी थी , वह शूद्रों और अन्य पिछड़े तबकों की थी, वे पिछड़े इसलिए थे क्योंकि वे किसी और लोकतांत्रिक धर्म के साथ नहीं गए थे,इसके चलते हुआ यह कि दूसरी सहस्राब्दी की सांध्य वेला में जब नयी सदी दुनिया के भूमंडलीकरण के साथ शुरू हो रही थी ,अपनी संख्या के आधार पर भारत का बहुमत - प्राप्त दलित - बहुजन समाज धार्मिक प्रतियोगिता के एक चौराहे पर खड़ा था ,यह वह युग है जो आध्यात्मिक संस्कृतियों के वैश्वीकरण के माध्यम से अध्यात्म के दरवाजों को भी खोलता है जिसमें भारत के दलित -बहुजन की मुक्ति की वास्तविक संभावनाएं भी निहित है,वह समुदाय जो अभी तक हिन्दू धर्म के जाति - संकुल कुँए में कैद पड़ा था,वे जाति के छोटे कुँए के मेढकों की तरह थे ,और यह कुआं हिन्दू धर्म के एक बड़े कुँए का हिस्सा था,अपनी आध्यात्मिक संस्कृति के अनुसार हिन्दु धर्म न तो अपने इस कुँए का पानी किसी के साथ बांटता था और न ही दूसरी जातियों को अपने साथ बैठने की अनुमति देता था ,लोगों को उनकी जातियों के कुओं में कैद जरूर रखता था.
भूमंडलीकरण की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया दलित - बहुजनों को अब इस कुँए से बाहर निकालने जा रही है,इससे या तो समाज के रूपांतरण की एक अहिंसक प्रक्रिया आरम्भ होगी या फिर कुछ समय बाद बाकायदा गृहयुद्ध होगा,भारतीय गृह युद्ध में जाति और धर्मों की भूमिका उससे बिलकुल अलग होगी जैसी अब तक के मानव - इतिहास में हमने देखी है-
हिंदुत्व मुक्त भारत-
कांचा इलैय्या
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સમાજ ની એકતા ..?? જે સમાજ અનેક જાતિઓ અને પેટાજ્ઞાતિઓ માં વિભાજીત હોય એવા સમાજ માં એકતા અને અખંડતા હોય એવું સમજનાર મોહન ભ...
03/09/2024

સમાજ ની એકતા ..?? જે સમાજ અનેક જાતિઓ અને પેટાજ્ઞાતિઓ માં વિભાજીત હોય એવા સમાજ માં એકતા અને અખંડતા હોય એવું સમજનાર મોહન ભાગવત મૂર્ખતા પૂર્ણ વાત કરી રહ્યા છે...!

જાતિ જનગણના થી તકલીફ હોય તો જાતિઓ મુક્ત સમાજ બનાવવો પડશે, અને જો એવી સમાજ રચના ઊભી થશે તો પછી આરએસએસ અને તેની વિંગ્સ ભાજપા રાજ કોના પર કરશે..!!??

Happy Birthday Legend ❤️
03/09/2024

Happy Birthday Legend ❤️

गरीब ब्राह्मण सुदामा और अहीर कृष्ण की कथा यह महाभस्सारोह जातक (302) जातक की चोरी करके बनाई गई है। आज से ब्राह्मणों को एक...
03/09/2024

गरीब ब्राह्मण सुदामा और अहीर कृष्ण की कथा यह महाभस्सारोह जातक (302) जातक की चोरी करके बनाई गई है। आज से ब्राह्मणों को एक्सपोज करने की सीरीज शुरू करते है।कृष्ण यह पात्र भी जातक कथाओ से ब्राह्मणों ने चुराया है। कान्हा या कन्ह जातकों में जिक्र है। महाभारत का कथानक घत जातक पर आधारित है। कृष्ण का ब्राह्मणीकरण करने के लिए या कृष्ण बौद्धों का प्रतीक ना हो इसके लिए कृष्ण के साथ सुदामा नामक ब्राह्मण का पात्र महाभारत रचीयताओने जोड़ दिया।

मूलत: महाभस्सारोह जातक (302) में बोधिसत्व राजा धम्म के अनुसार न्याय पूर्वक राज्य करता था और धम्म का पालनकर्ता दिखाया गया है। प्रत्यंत देश में विद्रोह को शांत करने के लिए बोधिसत्व राजा जाता है ,वह संकट में फस जाता है।और वहां पर एक व्यक्ति राजा को अपने घर में बुलाकर उसका आथित्य करता है,उसे सुरक्षा देता है। तीन-चार दिन साथ रहने के बाद उन दोनों में मित्रता हो जाती है वह व्यक्ति महाश्वारोह नामक व्यक्ति है ।.................. राजा उसके अच्छे व्यवहार से प्रभावित होता है राजधानी लौटने पर राजा को उसकी याद आती है और राजा उसको बुलावा भेजता है। उसके आते ही राजा उसका हाथ पकड़कर और गले लगाकर उसका स्वागत करता है उसे श्वेत छत्र के नीचे उसे बिठता है और अपनी पटरानी को बुलाकर राजा उसके पैर धुलवाता है। और रानी उसकी सुगंधित तेल से मालिश भी करती है । राजा को उसके घर में खाए अन्न कि हमेशा याद आती रहती है। इसलिए राजा उसे पूछता है कि खाने के लिए क्या लाए हो? उसने थैली में से पुहे यानी पोहे निकालकर राजा को दिया। उसका आदर करते हुए "मेरे मित्र का लाया हुआ खाओ!" यह कहकर उसने रानी और अमात्य को वह पोहे दिए और स्वयं भी बड़े चाव से खाएं।

इस कथा में राजा ने काशी के बने हुए उच्च वस्त्र उतारकर उस गरीब मित्र को कपड़े पहनाए और उसे उच्च अलंकरण से युक्त काशी के वस्त्र पहनाए और मित्रता की याद में उसे पराजित होने के बाद उस व्यक्ति के घर में राजा सुरक्षित रहा था इसकी याद में राजा ने जो कार्य किया था।

इस जातक कथा का मेल बिठाकर बुद्ध कहते हैं कि उस समय पर अत्यंतवासी गरीब व्यक्ति आनंद था और वाराणसी का राजा मैं खुद था। अब इस सुप्रसिद्ध कथा का ब्राह्मणीकरण महाभारत में सुनियोजित तरीके से किया गया है ।महाभारत में कथा का आशय वहीं था केवल पात्रों के नाम बदले ।

#बुद्ध की जगह #कृष्ण को रखा और आनंद की जगह ब्राह्मण सुदामा को दिखाया। इस प्रकार ब्राह्मणीकरण के माध्यम से ब्राह्मणों ने जातक कथा की मूल भावना का विकृतिकरण किया और ब्राह्मणों का वर्चस्व राजा और समाज पर थोप दिया। और इस तरह से समाज का भी ब्राम्हणीकरण हुआ!
ब्राम्हणो के षड्यंत्र को जानने के लिए पढ़े -"रामायण,महाभारत,मनुस्मृति, भगवदगीता ब्राम्हणो के सामूहिक हिंसा के प्रतीक।"

 #मृत्य_भोज अर्थात -इंसान मरने के बाद दिया जाने वाला     खान,पान,पकवान, ( मृत्यु भोज खाने का दावत ) ~> जिंदा था तब लात घ...
03/09/2024

#मृत्य_भोज अर्थात -इंसान मरने के बाद दिया जाने वाला
खान,पान,पकवान, ( मृत्यु भोज खाने का दावत )
~> जिंदा था तब लात घुसो से पिटाई की ओर मरने के बाद
जश्न मनाना.?
साला मर गया तो डेंग शेटी..! ( नालायक व्यभिचारी चोर उचक्के को अच्छा प्रामाणिक साधू संत ""आसाराम बापू "" बनाने का तरीका )
इस बात का फायदा - विदेशी युरेशियण यामनिया शरणार्थी ब्राह्मणों ने उठाया और बन गये समाज के ठेकेदार पंडित पुरोहित... फोकट मे जो खाने को मिल रहा और उपर से दान दक्षिणा..!

 #मुकेश_शर्मा_Arunrao_Diwekar को पोस्ट किया...इसमे स्पष्ट लिखा है विचार आया उन्होंने सोचा ना कि किया उनके जो पुत्र थे जो...
03/09/2024

#मुकेश_शर्मा_Arunrao_Diwekar को पोस्ट किया...
इसमे स्पष्ट लिखा है विचार आया उन्होंने सोचा ना कि किया उनके जो पुत्र थे जो संकल्प सृष्टि से उतपन्न थे उन्होंने समझाया फिर सर्मिदा होकर अपना शरीर छोड़ दिया , इसी लिए उनकी पूजा नही होती है । और आप लोग कैसे संभोग बाले फ़ोटो एडिट करके लोगों में भ्रम फैलाते हो इससे आपको ही सीखना चाहिए , व्रह्मा जी के मन मे गलत विचार आया मात्र से उसकी सजा उन्हें मिली उनकी पूजा नही होती है , में तो कहता हूं आप इन ग्रंथों को पूरा पड़ोगे आपके दिमाग से सारी भ्रांतियां मिट जाएगी

मुकेश शर्मा जी बिल्कुल सही कहा आपने 💯 वास्तविकता

यह प्राचीन बौद्ध स्तूप अफगानिस्तान के हैं,, जो 84000 बौद्ध स्तूप सम्राट अशोक ने बनवाए थे उनमें यह भी शामिल हैं,, हमारे द...
03/09/2024

यह प्राचीन बौद्ध स्तूप अफगानिस्तान के हैं,, जो 84000 बौद्ध स्तूप सम्राट अशोक ने बनवाए थे उनमें यह भी शामिल हैं,, हमारे देश की बौद्ध संस्कृति सम्राट अशोक ने पूरी एशिया में चारों दिशाओं में हर जगह पहुंचाई थी,, ऐसे महान सम्राट को कोटि कोटि नमन। ।।
नमो बुद्धाय।।

रामपाल जी महाराज के चेले लड़कियों की फेक आईडी बनाकर लोगों की फेसबुक आईडी में घुसते हैं और रामपाल जी महाराज का प्रचार करत...
03/09/2024

रामपाल जी महाराज के चेले लड़कियों की फेक आईडी बनाकर लोगों की फेसबुक आईडी में घुसते हैं और रामपाल जी महाराज का प्रचार करते हैं रामपाल जी महाराज के चेलों को लड़कियां बनने का बहुत शौक है पटेल वर्मा शर्मा यह सब नाम से आईडी बनाते हैं और लोगों के अकाउंट में घुसते हैं और गलत तरीके से प्रचार करते हैं

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